असम में लोग भर भर के मदद के लिए पहुंच रहे थे बाढ़ पीड़ित लोगों के, बिहार से क्या दुश्मनी है लोगों को बिहार का बाढ़ किसी को दिखाई नहीं दे रहा या देखना नहीं चाहते है?...
#बिहार#बाढ़
बड़ी ख़बर-
योगी आदित्यनाथ के दौर के विकास की कहानी।
दैनिक जागरण की जुबानी।
गोरखपुर में जहां रविकिशन ने कहा था, 'सीधे स्वर्ग जइबा'
वहीं गिरा गुंबद, दो की मौत।
घाट की गुणवत्ता पर पहले से ही उठ रहे थे सवाल।
मैं बार बार लिख रहा हूं, योगी आदित्यनाथ के राज में हिंदू-मुसलमान केवल और केवल डाइवर्जन है।
असली कहानी घनघोर, घटाघोप करप्शन है!!
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के निकट सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना अत्यंत दुखद और चिंताजनक है। मलबे में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों सहित अन्य लोगों के फंसे होने की खबरों ने चिंता और बढ़ा दी है।
बाबा विश्वनाथ से मेरी प्रार्थना है कि मलबे में फंसे सभी लोगों की रक्षा करें और हमारे @nsui के राहत एवं बचाव दल को उन्हें सकुशल बाहर निकालने की शक्ति और सफलता प्रदान करें।
पीड़ित परिवारों को इस कठिन समय में धैर्य और संबल दें।
अंडा 9 ₹ पीस, हरी सब्जी 50-60 ₹ प्रति किलोग्राम, सरसों तेल 210 ₹ प्रति लीटर, केला 6₹ पीस, गैस 1040 प्रति सिलेंडर घरेलू वो भी नगद.
विभाग से मिलता है प्रति छात्र- 6.78 ₹ (1- 5)
प्रधान शिक्षकों प्रधानाध्यापक के लिए भी चुनौती है।
बातें होती हैं समाज में ईमानदारी की।
हिसुआ में प्रणय भारती की हत्या के मामले को जिन लोगों ने जातीय रंग देने की कोशिश की उन सब पे @bihar_police@nawadapolice कार्यवाही करे और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के हत्या के कारणों का स्पष्टीकरण दे क्योंकि मारने वाला और मरने वाला दोनों अपराधी है ,दोनों पे साइबर ठग होने का भी शक है
BJP के आलीशान ऑफिस… आखिर इतना पैसा आया कहां से?
जेपी नड्डा के मुताबिक, 2014 में नरेंद्र मोदी ने देश के हर जिले में BJP का अपना कार्यालय बनाने का संकल्प लिया था। पार्टी के अनुसार अब तक 290 कार्यालय बन चुके हैं, 115 निर्माणाधीन हैं और 123 के लिए जमीन अधिग्रहित की जा चुकी है।
अब ‘माहौल क्या है’ वाले राजीव भैया का दावा है कि एक BJP कार्यालय की कीमत कम से कम ₹5 करोड़ है।
यानी सिर्फ बने हुए 290 कार्यालयों की ही न्यूनतम कीमत करीब ₹1,450 करोड़ बैठती है। और अगर निर्माणाधीन व प्रस्तावित कार्यालयों को भी जोड़ दें, तो आंकड़ा और बड़ा हो जाता है।
अब सवाल किसी पार्टी के कार्यालय बनाने पर नहीं है।
सवाल यह है कि इतनी बड़ी संपत्ति और इतने बड़े निर्माण के लिए पैसा आया कहां से?
कांग्रेस ने दशकों तक देश पर शासन किया, लेकिन ऐसे अपने दफ्तर नहीं बना पाई। BJP ने सिर्फ 12 वर्षों मे ही तेजी से देशभर में अपने आलिशान दफ्तर खोल दिए है।
और जब BJP खुद कांग्रेस पर भ्रष्टाचार और काले धन को लेकर सवाल उठाती है, तो BJP से भी सवाल बनता है कि BJP के पास इतना पैसा आया कहां से?
किस-किस स्रोत से आया? और राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे की पूरी पारदर्शिता आखिर कब होगी?
दूसरों से हिसाब मांगने वाली पार्टी को अपना हिसाब भी देना चाहिए।
उत्तर प्रदेश –
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