विचारों के भंवर में उलझे मेरे जीवन ने निरंतर यात्रा की
कभी दिल की पीड़ाओं के साथ,
कभी मस्तिष्क के तर्कों के साथ तो कभी अश्रुओं की अविरल धाराओं में परंतु इतनी प्रतिक्षाओं भरी यात्राओं के बाद भी उसे ए बिछड़े राहगीर
पुनः तेरा साथ नसीब न हुआ....🩷
विचारों के भंवर में उलझे मेरे जीवन ने निरंतर यात्रा की
कभी दिल की पीड़ाओं के साथ,
कभी मस्तिष्क के तर्कों के साथ तो कभी अश्रुओं की अविरल धाराओं में परंतु इतनी प्रतिक्षाओं भरी यात्राओं के बाद भी उसे ए बिछड़े राहगीर
पुनः तेरा साथ नसीब न हुआ....🩷