हमारे देश में रहने वाले सभी भारतवासियों के अपने धार्मिक विश्वास के अनुसार अपनी अलग पवित्र पुस्तकें है। लेकिन सभी नागरिकों की एक पवित्र पुस्तक है वो है संविधान 🇮🇳
#RepublicDay2025#गणतंत्र_दिवस_2025
दो ही ऑप्शन हो सकते हैं 👇
1. गृह मंत्री ने छात्रों को मारने का ऑर्डर दिया
2. गृह मंत्री को मालूम नहीं था कि छात्रों पर फायरिंग होगी
पहले केस में गृह मंत्री 'दोषी' हैं, दूसरे केस में वो 'अयोग्य' हैं।
अगर गृह मंत्री ने कुछ नहीं किया, तो वे संसद में क्यों नहीं आ रहे हैं?
: नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि नए शिक्षा मंत्री प्रहलाद जोशी ने बिलकिस बानो के बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन किया था।
भाजपा सांसद चिल्लाने लगे, कि authenticate कीजिये।
ये रहा प्रहलाद जोशी का बयान
उन्होंने सवालों का सामना कभी नहीं किया
स्कूल में सवाल होने लगे ,स्कूल छोड़ दिया
घर वालों ने सवाल किया ,घर छोड़ दिया
बीवी ने सवाल किया ,बीवी छोड़ दिया
दोस्त (प्रवीण) ने सवाल किया ,दोस्त छोड़ दिया
PC में सवाल किया ,PC छोड़ दिया
संसद में सवाल किया संसद छोड़ दिया
उनको सिर्फ मन की बात करने आती है
सवाल का जवाब देने नहीं आता 🥱🥱
फ्रेंड्स, BJP सरकार का भ्रष्टाचार देख लीजिए 👇🏼
उत्तराखंड के देहरादून में 16 करोड़ रुपए की लागत से बना पुल 16 दिन भी नहीं टिक सका।
शायद इसे ‘ब्लैकहोल टेक्नोलॉजी’ से बनाया गया होगा।
लेकिन इससे ये तो साफ है कि नरेंद्र मोदी और उनके नेताओं का पूरा फोकस सिर्फ घपलेबाजी पर है।
जनता मरे या जिए- इन लोगों को फर्क नहीं पड़ता।
सत्य और सत्याग्रह - दोनों से डरती है मोदी सरकार।
मध्य प्रदेश के आदिवासी भाई-बहन जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल पर इसलिए बैठे थे क्योंकि केन-बेतवा परियोजना में उनकी ज़मीन छीन ली गई, लेकिन उन्हें न न्यायपूर्ण मुआवज़ा मिला और न सम्मानजनक पुनर्वास।
"सत्य" यह है कि आदिवासी देश के पहले मालिक हैं - जल, जंगल और ज़मीन पर सबसे पहला हक़ उन्हीं का है।
और उनका "सत्याग्रह" इसलिए है क्योंकि वही हक़ आज उनसे छीना जा रहा है।
अपने अनोखे तरीके से उनकी मांग बस इतनी है कि गुज़र-बसर करने के लिए उचित सहारा तो दो - वरना जिंदगी तो चिता के ही समान है।
मगर यह भी भाजपा सरकार को मंज़ूर नहीं। उनकी बात सुनने के बजाय पुलिस बल से उनका शांतिपूर्ण विरोध भी कुचला जा रहा है।
हम अपने आदिवासी भाई-बहनों के साथ हैं। उन्हें न्याय दिला कर रहेंगे - मुआवज़ा और पुनर्वास तो देना ही पड़ेगा।
Credits for video: Shiksha Pareek and Lok Singh
@faeloreeah @lok_singh_
Missile guidance secrets for sale on the dark web for $8,000 and years later, the Modi govt still doesn't know when DRDO got hacked.
All the "Aatmanirbhar Bharat" chest-thumping, and our defence secrets are being hawked like a garage sale.
Vigilance? More like negligence.
@RahulGandhi@srinivasiyc
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को बलात्कार पसंद है और अगर ऐसा होता तो वो शिकायत भी नहीं करतीं.
- ये बात RSS नेता और BJP के बौद्धिक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रमुख टीजी मोहनदास ने कही है
मोहनदास ने ये भी बताया कि अगर उनके पास कंट्रोल होता तो वो प्रदर्शन को कैसे संभालते.
मोहनदास ने कहा- मैं उस इलाके में कर्फ्यू लगा दूंगा. मैं भीड़ को तीन बार तितर-बितर होने का आदेश देता. फिर मैं गोली चलवाता, लोग इधर-उधर भागने लगते. कुछ लोगों की मौत हो सकती है और कुछ घायल हो सकते हैं. चार घंटे के भीतर स्थिति शांत हो जाती.
'अगर मेरे पास अधिकार होता तो मैं जंतर-मंतर के आसपास कर्फ्यू लगाकर प्रदर्शनकारियों को गोली मार देता।'
- ये बात RSS नेता और BJP के Intellectual Cell के पूर्व प्रमुख टीजी मोहनदास ने कही है
मोहनदास ने यह भी कहा- 'प्रोटेस्ट में ऐसी लड़कियां थीं, जिन्हें रेप पसंद है और अगर उनके साथ ऐसा होता तो वे कहीं शिकायत नहीं करतीं।'
मोहनदास का ये घटिया बयान RSS की घिनौनी, हिंसक व महिला विरोधी मानसिकता का सबूत है और RSS हमेशा ऐसे लोगों को संरक्षण देती आई है।
देश को नफरत और हिंसा की आग में झोंकना RSS का इतिहास रहा है, जिसे ये देश कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
ऐसे कुंठित और नफरती लोगों के खिलाफ तुरंत एक्शन होना चाहिए।
सरकार को इसी बात का डर है। डर कि कहीं हर यूनिवर्सिटी, हर स्कूल स्तर पर प्रदर्शन न शुरू हो जाए!
ये नज़ारा उत्तर प्रदेश के फतेहपुर का है जहाँ इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने बिजली-पानी सुविधा की बदहाली और प्रिंसिपल के अभद्र व्यवहार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया।
@Sujata1978@GitanjaliAngmo धर्म निरपेक्षता या कहें पंथनिरपेक्षता हमारे संविधान की आत्मा है और इस देश की जरूरत भी है और आप उसी आत्मा को खत्म करना चाहतीं हैं !!?
@GitanjaliAngmo सोनम वांगचुक जी के जेल में जाने और फिर उससे छूटने के बाद से 6 शेड्यूल की मांग को स्थगित किया है या अब वह आपका मुद्दा नहीं रहा ? हम तो उस मांग का समर्थन करते हैं
An upstart youth movement, founded only 37 days earlier, forced Modi's government into a humiliating climbdown this weekend and prompted the resignation of the education minister. https://t.co/Ib6VlyUYxZ
कोरोना काल में देश ऑक्सीजन, दवाइयों और अस्पतालों के लिए तड़प रहा था। अगर सार्वजनिक धन से बनाई गई स्वास्थ्य सुविधाओं के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, तो देश जवाब मांगता है। जनता के हर रुपये का हिसाब देना सरकार की जिम्मेदारी है। #PMCARES
आर्काइव | आरएसएस से आने वाले और मीडिया में जबरदस्त पैठ रखने वाले, लंबे और सुंदर ब्राह्मण हरेन पांड्या गुजरात बीजेपी के भीतर मोदी के जबरदस्त राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी थे. दोनों सार्वजनिक रूप से 2001 में भिड़े. वह वक्त था जब मुख्यमंत्री नियुक्त हो जाने के बाद मोदी विधानसभा में अपनी जीत के लिए सुरक्षित सीट ढूंढ रहे थे. वह पांड्या के क्षेत्र अहमदाबाद के एलिसब्रिज से उपचुनाव लड़ना चाहते थे. यह बीजेपी के लिए बेहद सुरक्षित सीट थी. लेकिन पांड्या, मोदी के लिए सीट छोड़ने के लिए राजी नहीं हुए.
मार्च 2003 में पांड्या को पार्टी अध्यक्ष का फैक्स मिला कि उन्हें दिल्ली आना है. इसके अगले दिन अहमदाबाद में उनकी हत्या कर दी गई. गुजरात पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दावा किया कि पाकिस्तान की इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई), लश्कर-ए-तैयबा और दुबई स्थित अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहीम ने मिल कर पांड्या की हत्या कराई है. 12 लोगों को गिरफ्तार करके उन पर पांड्या की हत्या का आरोप लगाया गया. लेकिन आठ साल बाद, 2011 सितंबर में, गुजरात हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करके पूरे मामले को खारिज कर दिया. जज ने कहा, “जांच में पूरी तरह से ढिलाई बरती गई. यह जांच आंखों पर पट्टी बांधकर की गई. संबंधित जांच अधिकारियों को उनके अक्षमता के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. इसकी वजह से अन्याय हुआ. कई लोगों का भारी उत्पीड़न हुआ और सार्वजनिक संसाधनों के गलत इस्तेमाल के अलावा अदालतों का समय भी बर्बाद हुआ.”
पांड्या मामले की जांच का हिस्सा वो दोनों भ्रष्ट अधिकारी थे, जो मोदी के उप गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कथित रूप से चलाए जाने वाले उगाही रैकेट का भी हिस्सा थे. पांड्या के पिता विट्ठलभाई ने सरेआम मोदी पर अपने बेटे की हत्या का आरोप लगाते हुए इससे संबंधित एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी. याचिका में मुख्यमंत्री की भूमिका की जांच किए जाने की मांग थी. हालांकि अदालत ने साक्ष्यों की कमी का हवाला देकर याचिका को खारिज कर दिया था.
आरबी श्रीकुमार जिन्होंने दंगों के ठीक बाद एक साल तक, राज्य के खुफिया तंत्र का प्रतिनिधित्व किया, उन्होंने मुझे बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय ने हरेन पांड्या की हरकतों और गतिविधियों की जानकारी लगातार देते रहने के लिए कहा गया था.
झड़ापिया ने , “मैं यह नहीं कह रहा कि मोदी ने पांड्या की हत्या कराई. लेकिन यह भी सच है कि बीजेपी के भीतर अगर कोई मोदी के ख़िलाफ़ मुंह खोलता है तो वह राजनीतिक या शारीरिक रूप से ख़त्म हो जाता है.”
पूरा लेख पढ़ें: https://t.co/blhYtJTfQ9
#NarendraModi
''अमित शाह जवाब दो - लाठी का हिसाब दो''
विपक्ष के सांसदों ने छात्रों पर हुई लाठीचार्ज के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। मोदी सरकार को छात्रों पर किए गए जुल्मों का हिसाब देना होगा।
📍 संसद परिसर, दिल्ली