Social Worker and Entrepreneur/Founder & Hon. Gen. Sec. at Ehsaas NGO/Organic Farmer. Pranic Healer/ Reiki Channel/ Life Motto: Celebrate life and spread joiy!
Vinesh, you are a champion among champions! You are India's pride and an inspiration for each and every Indian.
Today's setback hurts. I wish words could express the sense of despair that I am experiencing.
At the same time, I know that you epitomise resilience. It has always been your nature to take challenges head on.
Come back stronger! We are all rooting for you.
@Phogat_Vinesh
कब बदलेगा गोमती नदी का ये मंजर? हम जलकुंभी क्यों नहीं हटा सकते? क्या यह चांद पर जाने से भी ज्यादा मुश्किल काम है? क्या इसके लिए एक रेलवे स्टेशन को बदलने से अधिक धन की आवश्यकता है? ऐसा न हो कि बहुत देर हो जाए.@CMOfficeUP@SudhirMisraNBT@Live_Gyan@MoJSDoWRRDGR
उफ यह मनुष्य का लालच
गोमती नदी को लेकर हाल ही में जानकारी में आए इस शासनादेश को लेकर पर्यावरणविदों में काफी नाराजगी है। इस आदेश में गंगा की सहायक नदी गोमती को बरसाती नदी घोषित किया गया है। हाई कोर्ट समेत तक कई पुराने आदेश हैं जिनमें कहा गया है कि गोमती के फैलाव में आने वाले दोनो तरफ के सौ मीटर में कोई निर्माण नहीं होगा। अब नए आदेश में इसे पचास मीटर कर दिया गया है। आरोप हैं कि ऐसा कुछ अफसरों, नेताओं और भूमाफियाओं की मिलीभगत से हो रहा है। इस बारे में नदियों को प्यार करने वालों और पूजने वालों को सवाल करने चाहिए। वरना हिमालय से लेकर अरब सागर तक मनुष्य के लालच के दुष्परिणाम कुदरत के कहर के तौर पर हम देख ही रहे हैं। #गोमतीबचाओ
करने वालों और पूजने वालों को सवाल करने चाहिए। वरना हिमालय से लेकर अरब सागर तक मनुष्य के लालच के दुष्परिणाम कुदरत के कहर के तौर पर हम देख ही रहे हैं।बाढ़ के मैदान नदी के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, वे नदी से अविभाज्य हैं। ऐसा लगता है कि इसी प्रतिगामी आदेश से नदी के अंग4.
हाई कोर्ट समेत तक कई पुराने आदेश हैं जिनमें कहा गया है कि गोमती के फैलाव में आने वाले दोनो तरफ के सौ मीटर में कोई निर्माण नहीं होगा। अब नए आदेश में इसे पचास मीटर कर दिया गया है। आरोप हैं कि ऐसा कुछ अफसरों, नेताओं और भूमाफियाओं की मिलीभगत से हो रहा है। इस बारे में नदियों को प्यार3
@shachi100@Venkatesh_D@UPGovt @sushmabjplko @narendramodi
*मां गोमती को किया बरसाती नदी घोषित*
गोमती नदी को लेकर हाल ही में जानकारी में आए इस शासनादेश को लेकर पर्यावरणविदों में काफी नाराजगी है। इस आदेश में गंगा की सहायक नदी गोमती को बरसाती नदी घोषित किया गया है। 2
@SudhirMisraNBT यह नदी कई हजार वर्षों से बहती आ रही है।बहुत विस्तृत बाढ़ क्षेत्र, मानसून दौरान कई गुना बढती है और गंगा जी में बहुत सारा जल लाती है। कैसी विडम्बना है कि हिंडन नदी को बारहमासी और गोमती को मौसमी नदी रखा गया है। एक ही झटके में हमने नदी से इतनी जमीन ले ली.@PMOIndia@myogioffice
*मां गोमती को किया बरसाती नदी घोषित* : बाढ़ के मैदान नदी के स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, वे नदी से अविभाज्य हैं। ऐसा लगता है कि इसी प्रतिगामी आदेश से नदी के अंग काट दिये गये हैं। आप एक बारहमासी नदी को मौसमी नदी कैसे घोषित कर सकते हैं?यह नदी कई हजार वर्षों से बहती आ रही
उफ यह मनुष्य का लालच
गोमती नदी को लेकर हाल ही में जानकारी में आए इस शासनादेश को लेकर पर्यावरणविदों में काफी नाराजगी है। इस आदेश में गंगा की सहायक नदी गोमती को बरसाती नदी घोषित किया गया है। हाई कोर्ट समेत तक कई पुराने आदेश हैं जिनमें कहा गया है कि गोमती के फैलाव में आने वाले दोनो तरफ के सौ मीटर में कोई निर्माण नहीं होगा। अब नए आदेश में इसे पचास मीटर कर दिया गया है। आरोप हैं कि ऐसा कुछ अफसरों, नेताओं और भूमाफियाओं की मिलीभगत से हो रहा है। इस बारे में नदियों को प्यार करने वालों और पूजने वालों को सवाल करने चाहिए। वरना हिमालय से लेकर अरब सागर तक मनुष्य के लालच के दुष्परिणाम कुदरत के कहर के तौर पर हम देख ही रहे हैं। #गोमतीबचाओ
Shameful. Police is there to protect the people. This is breach of trust. Strictest action should be taken so that no officer should dare to repeat this act .
लखनऊ के विनीत सिंह आई ए एस की तैयारी कर रहें हैं । लखनऊ के बाराबीरवा चौराहे पर कुछ पुलिस वाले एक @Olacabs के ड्राइवर को पीट रहे थे । विनीत ने इसका विरोध किया फिर पुलिस वाले विनीत पर टूट पड़े पहले वही पीटा फिर ई रिक्शे पर लादकर रेल की पटरी के किनारे ले गए वहां पीटा । गांजा और स्मैक की पुड़िया बरामदगी दिखाकर थाने ले गए । जेल भेजने की तैयारी कर रहे थे फिर किसी तरह विनीत ने अपने एक दोस्त जो ट्रेनी आई पी एस है उसे फोन किया । दोस्त ने ए सी पी काकोरी से बात की तब जाकर विनीत की जान छूटी । अब ऐसे दिलेर पुलिस वालो को क्या इनाम मिलना चाहिए।
अभिषेक ने खुद तो गड्ढा खोदकर पानी नहीं भरा न? हर डूबे इलाके के किसी छोर पर सूखी साफ जगह दिख जाएगी।क्या इससे लोगों की तकलीफ कम हो जाती है? इस तरह की रिपोर्टिंग शायद उस फील को दिखाना है जो वहां रहने या वहां से गुजरने वाले झेलते हैं। सब चलता है।
नीलमा नाहीद दुर्रानी का शेर है-
औरत अपना आप बचाए तब भी मुजरिम होती है
औरत अपना आप गँवाए तब भी मुजरिम होती है
प्रज्ञा से करीब तीन साल पहले एक गांव में मुलाकात हुई थी। तब शायद वह सातवीं क्लास में थी, अभी दसवीं पास कर चुकी है। दो दिन पहले उसका वाट्सअप पर मैसेज आया-सर, मैने तय किया है कि घर वाले कितना भी दबाव डालें, मैं तब तक शादी नहीं करूंगी जब तक पढ़ लिखकर खुद अपने पैरों पर न खड़ी हो जाऊं। एसडीएम मैडम वाले मामले में लोग जिस तरह से पढ़ाई कर रही बीबियों को टारगेट करके ट्रोल कर रहे हैं, उसे देखकर तो मैने घर वालों को भी यह बात साफ साफ बता दी है। आप भी जरूर कुछ लिखिए इस पर।
उसका संदेश पढ़ा और फिर मेरी नजर उसी दौरान हरियाणा सरकार के एक फैसले पर पड़ी। यहां कुआरों को हर महीने 2750 रुपए देने का एलान हुआ है। पैंतालिस से साठ साल के ऐसे प्रौढ़ जिनकी सालाना आय एक लाख अस्सी हजार रुपए से कम है। इसके अलावा विधुरों के लिए भी पेंशन की घोषणा की गई है। अब आप लोगों को लग रहा होगा कि प्रज्ञा के फैसले और हरियाणा में कुआरों की पेंशन का क्या लेना-देना है ? इसे समझने के लिए थोड़ा गहराई में जाना होगा। सोचिए कि देश में हरियाणा ही ऐसा राज्य क्यों है जहां कुआरों को पेंशन देनी पड़ेगी। वह इसलिए कि तमाम कोशिशों के बावजूद सेक्स रेशियो की हालत बाकी देश के मुकाबले अभी भी हरियाणा में बहुत अच्छी नहीं है। आज भी यहां कम से कम पांच जिले ऐसे हैं जहां लड़कियों की संख्या लड़कों के मुकाबले बहुत कम है। हजार पर नौ हजार से भी नीचे। जाहिर है यहां कुंआरे ज्यादा होंगे। अभी ही उम्मीद की जा रही है कि लाख से ऊपर लाभार्थी तो तत्काल तैयार बैठे हैं।
उत्तर प्रदेश की एक एसडीएम के निजी रिश्तों को लेकर गंगा यमुना के दोआबे में जिस तरह का उबाल आया है, उसे देखकर लगता है कि काऊ बेल्ट के कई राज्यो में आगे कुंआरों की पेंशन का ऐलान करना पड़ सकता है। एसडीएम का किस्सा यह है कि उनकी शादी एक सफाई कर्मचारी से हुई। उस वक्त एसडीएम नहीं थीं बल्कि पढ़ाई कर रही थीं। बाद में उनके बच्चे हुए और वह अपनी मेहनत से एसडीएम बन गईं। इस दौरान पति से रिश्ते खराब हुए और उनकी किसी दूसरे अफसर मित्र से निजी बातचीत के अंश मीडिया में लीक कर दिए गए। यह सुनते ही पुरुष समाज भड़क उठा। बिहार में तो तमाम वीडियो और एलबम रिलीज हो गए कि शादी के बाद लड़कियों को पढ़ाया तो समझो ससुराल वालों का बंटाधार। इस माहौल में कुछ लोगों ने तो वाकई अपनी पत्नियों की पढ़ाई छुड़वा दी कि कहीं वह भी पढ़ लिखकर पति को छोड़ न दे। इस हो हल्ले और शोरगुल से लगता है कि इससे शादी करने के बाद महिलाओं का तो वाकई बहुत नुकसान हो गया। पर इसका अनदेखा पहलू यह है कि महिलाओं की पढ़ाई की इस ट्रोलिंग से युवा पुरुषों का ही नुकसान होने वाला है।
अब प्रज्ञा के उदाहरण से इसे समझ सकते हैं। यह एक मौन क्रांति है जिसका असर आने वाले वक्त में दिखेगा। जिन बच्चियों के माँ बाप समझ रखते हैं, वह अब बेटियों की जल्दी शादी पर जोर नहीं देंगे। ऐसे में उस कैटेगीरी के समाज का सबसे ज्यादा नुकसान होने वाला है जो अपने लड़कों की जल्दी शादी करने को समझदारी मानता है। ऐसे लड़के जो जवानी के दौरान पढ़ाई लिखाई और खुद की तरक्की पर मेहनत करने के बजाए आवारागर्दी करते हैं और यह दावा करते हैं कि उन्होंने अपनी पत्नी को पढ़ाया या पढ़ा रहे हैं, अब परेशान होंगे। लड़कियां तय कर रही हैं कि उन्हें तब तक शादी ही नहीं करनी जब तक वह खुद अपने पैरों पर खड़ी न हो जाएं। उन्हें अब अपना स्वाभिमान प्यारा लग रहा है और वह आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। दाम्पत्य में एक बराबरी का रिश्ता रखकर साझी जिम्मेदारी उठाना चाहती हैं कि जिसमें कोई किसी पर बोझ न हो। तो अब समझने की बारी उस समाज की है कि जो देसी एल्बम और वीडियो देखकर नाच रहा है या हंस रहा है। गांव, कस्बों और छोटे शहरों की लड़कियों में यह ट्रेंड जैसे जैसे बढ़ेगा, वैसे वैसे कम उम्र में शादियों का चलन कम होता जाएगा। जब पढ़लिखकर और कुछ बनकर एक युवती विवाह करने का फैसला करेगी तब वह यह देखेगी कि लड़का कितना काबिल है। लड़कियां ऐसा भी मानने लगी हैं कि शादी इतनी जरूरी भी नहीं। अब यह लड़कों के सोचने समझने का वक्त है कि वह किसी एक एसडीएम या सफाईकर्मी की जिंदगी के निजी झगड़ों पर ही विमर्श करते रहेंगे या फिर वह समझेंगे जो परतों के नीचे छिपा है और उन्हें दिख नहीं रहा। पुरुषवादी सोच से मुक्त होने का वक्त है वरना जो पेंशन हरियाणा में शुरू हुई है, उसकी जरूरत हिंदी पट्टी के दूसरे राज्यों में भी पड़ सकती है। बहरहाल इस विर्मश पर क़ाबिल अजमेरी का यह शेर और बात खत्म कि-
वक़्त करता है परवरिश बरसों
हादिसा एक दम नहीं होता
@manojmuntashir Dear Manoj ji,
Situations come in life to only give us important lessons. Take the lessons from this. The position you have reached does not permit small mistakes also. Stay calm , stay firm , you are a good soul and you will triumph. God bless you 😇
पिछले कई दशकों से हर सामाजिक समस्या का निवारण सिर्फ नए कानून से करने का प्रयास किया गया। नतीजा समाज में दायित्व बोध खत्म हुआ और अकर्मण्यता आई। समाज के विघटन को रोकना होगा। सामाजिक समस्या के सामाजिक समाधान निकलने चाहिए तभी समाज सशक्त बनेगा।
समाज कितना सड़ चुका है। दिल्ली में साक्षी हत्याकांड के वक्त में लोग चुपचाप मर्डर होते देखते रहे। एक मुकदमा तो उन सब पर भी बनता है जो आगे बढ़कर हत्या को रोक नहीं सके। #डरावनीदिल्ली
@ShobhnaYadava Completely agree. The young mind influenced by market forces has forgotten basic etiquettes of dressing according to occasion and place. Preserving our culture is our Right .
Frankly, the Surahi is also superior from the point of view of design & aesthetics. In a world increasingly preoccupied with being planet-positive, the humble Surahi could become a premium lifestyle accessory. 👍🏽(credit: @EducatedMoron)