कभी-कभी रातों के सन्नाटे में
चौंक कर उठ जाता हूँ
सोचता हुआ
कि कहीं यह सन्नाटा किसी ऐसी चीज़ के
टूटने का तो नहीं
जिसे हम हड़बड़ी में बहुत पीछे छोड़ आए हों !
~ नरेश सक्सेना 🌸💌
रोना हो आसान हमारा,
इतना कर नुकसान हमारा।
बात नहीं करनी तो मत कर,
चेहरा तो पहचान हमारा।
खुशफेहमी हो जाएगी हमको,
मत रख इतना ध्यान हमारा।
पहली चोट में जान गए हम,
इश्क़ नहीं मैदान हमारा।
जीत गया तेरा भोलापन,
हार गया शैतान हमारा।
मौत ने आकर बांध लिया था,
पहले ही सामान हमारा।
शारिक कैफ़ी