गौर-कीजिए:-
जो कथा वाचक आपकों बोलते है की धन कमाकर कर क्या करोगे सब मोह माया है!
आईए जानते है उनकी कथा की फीस और खर्च !
यकीन मानिए आप आश्चर्य मानेंगे !!
1️⃣ साध्वी चित्र लेखा 2 लाख
2️⃣ धीरेंद्र शास्त्री 3 से 5 लाख
3️⃣ देवकीनंदन ठाकुर 10 से 12 लाख
4️⃣ पंडित मिश्रा 5 से 10 लाख
5️⃣ अनिरुद्राचार्य 7 से 10 लाख
6️⃣ जया किशोरी 9 लाख
7️⃣ मुरारी बापू 15_30 लाख
नोट:- सभी बाबा के पास सरकारी सिक्योरिटी और करोड़ो की संपति भी है जो हमारे और आपके पैसे से ही बनाई गई है!
अभी तो हमें और जलील होना है..
दोस्तों, भारत एक गरीब देश है। यहां किसी के पास पैसे नही हैं। यहां राष्ट्रपति गरीब है। उपराष्ट्रपति भी गरीब है।
प्रधानमंत्री का तो कहना ही क्या, वो तो गरीबी की फोर्ब्स लिस्ट में टॉप पर बैठा है। याने भीख मांगकर खाया है। जब बेचारे की माँ दूसरो के घर झाड़ू पोंछा, चौका बर्तन करती थी, तब वह शादियों में लोगो के कपड़े स्टेपल करके टाइम पास करता था।
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देश की गरीबी का आलम यह है कि किसान को फसल का भाव देने को पैसा नही। जवान को एक रैंक एक पेंशन देने को पैसा नही।
युवाओं को नौकरी देने को पैसा नही। परीक्षा का पर्चा फूटने से रोकने को पैसा नही। चीन पांच गुना बड़ी इकॉनमी है, उसे लाल आंख दिखाने को पैसा नही।
राज्यो को निर्धारित जीएसटी का हिस्सा देने को पैसा नही। ऐसे एक हजार और जरूरी चीजें है, जिनके लिए पैसा नही। पैसे का टोटा चहुं ओर है।
जाहिर है वित्तमंत्री के पास पैसे कैसे हों??
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गरीबो की फोर्ब्स लिस्ट में आज ताई का नाम भी स्वर्णाक्षरों में लिख लिया गया है। एक गरीब देश का वित्तमंत्री होने का यही नुकसान है, उनके पास चुनाव लड़ने को पैसा नही होता है।
दरअसल निम्मो ताई में दूरदर्शिता का अभाव उनकी आर्थिक नीतियों में हमेशा दिखा है।
अगर रक्षा मंत्री और वित्तमंत्री रहने के दौरान, उन्होंने "डिफेंस मिनिस्टर केयर फंड" या "एफएम केयर फंड" बना लिया होता.. तो आज यह दुर्दिन न देखने पड़ते।
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इससे यह भी पता चलता है कि चुनाव धनी लोगो का खेल है। धन का खेल है। सन्सद आना है, तो धन लगाना होगा।
बेचारी, जिसके पास प्याज खाने को पैसा न था, पार्टी को देने या चुनाव लड़ने को कहाँ से लाये। उन्होंने पार्टी को दलील दे दी है। लेकिन दलील से टिकट नही मिलता ताई, फंड रहे तो मिलता है।
तो पार्टी ने दलील स्वीकार ���र ली है। ठेंगा दिखा दिया है।
●●
मैं प्रसन्न हो सकता हूँ कि एक अक्षम वित्तमंत्री से देश को छुटकारा मिलेगा।
लेकिन जब देखता हूँ कि पहले मंत्रिमंडल में कम से कम आधा दर्जन बुद्धिमान थे, दूसरे में थोड़े बहुत औसत बुद्धि, बाकी बौड़म लोगो का का दबदबा रहा।
याने गिरावट की दर से देखें, तो जो नया आएगा, एब्सोल्यूट बौड़म होगा। ऐसे में प्रसन्नता तिरोहित हो जाती है।
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अब तक 400 से ज्यादा कैंडिडेट घोषित हो चुके, मगर दूर दराज तक कोई दिखता नही जिसमे बुद्धि हो।
तो अगर बौड़म होना अनिवार्य मंत्रिमंडलीय योग्यता है, तो मेरी मांग है कि मंडी से स्टार प्रत्याशी, जिसके बाद पास चुनाव लड़ने योग्य धन है, और यौवन है, वही, देश की अगली..
और लम्बे समय के लिए वित्तमंत्री बने। क्योकि इस देश और देशवासियों को ठीक ठीक मालूम है, अब अच्छे से मालूम है-
कि अभी तो हमे ��र भी जलील होना है।
अभी तो हमें और जलील होना है..
दोस्तों, भारत एक गरीब देश है। यहां किसी के पास पैसे नही हैं। यहां राष्ट्रपति गरीब है। उपराष्ट्रपति भी गरीब है।
प्रधानमंत्री का तो कहना ही क्या, वो तो गरीबी की फोर्ब्स लिस्ट में टॉप पर बैठा है। याने भीख मांगकर खाया है। जब बेचारे की माँ दूसरो के घर झाड़ू पोंछा, चौका बर्तन करती थी, तब वह शादियों में लोगो के कपड़े स्टेपल करके टाइम पास करता था।
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देश की गरीबी का आलम यह है कि किसान को फसल का भाव देने को पैसा नही। जवान को एक रैंक एक पेंशन देने को पैसा नही।
युवाओं को नौकरी देने को पैसा नही। परीक्षा का पर्चा फूटने से रोकने को पैसा नही। चीन पांच गुना बड़ी इकॉनमी है, उसे लाल आंख दिखाने को पैसा नही।
राज्यो को निर्धारित जीएसटी का हिस्सा देने को पैसा नही। ऐसे एक हजार और जरूरी चीजें है, जिनके लिए पैसा नही। पैसे का टोटा चहुं ओर है।
जाहिर है वित्तमंत्री के पास पैसे कैसे हों??
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गरीबो की फोर्ब्स लिस्ट में आज ताई का नाम भी स्वर्णाक्षरों में ���िख लिया गया है। एक गरीब देश का वित्तमंत्री होने का यही नुकसान है, उनके पास चुनाव लड़ने को पैसा नही होता है।
दरअसल निम्मो ताई में दूरदर्शिता का अभाव उनकी आर्थिक नीतियों में हमेशा दिखा है।
अगर रक्षा मंत्री और वित्तमंत्री रहने के दौरान, उन्होंने "डिफेंस मिनिस्टर केयर फंड" या "एफएम केयर फंड" बना लिया होता.. तो आज यह दुर्दिन न देखने पड़ते।
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इससे यह भी पता चलता है कि चुनाव धनी लोगो का खेल है। ��न का खेल है। सन्सद आना है, तो धन लगाना होगा।
बेचारी, जिसके पास प्याज खाने को पैसा न था, पार्टी को देने या चुनाव लड़ने को कहाँ से लाये। उन्होंने पार्टी को दलील दे दी है। लेकिन दलील से टिकट नही मिलता ताई, फंड रहे तो मिलता है।
तो पार्टी ने दलील स्वीकार कर ली है। ठेंगा दिखा दिया है।
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मैं प्रसन्न हो सकता हूँ कि एक अक्षम वित्तमंत्री से देश को छुटकारा मिलेगा।
लेकिन जब देखता हूँ कि पहले मंत्रिमंड��� में कम से कम आधा दर्जन बुद्धिमान थे, दूसरे में थोड़े बहुत औसत बुद्धि, बाकी बौड़म लोगो का का दबदबा रहा।
याने गिरावट की दर से देखें, तो जो नया आएगा, एब्सोल्यूट बौड़म होगा। ऐसे में प्रसन्नता तिरोहित हो जाती है।
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अब तक 400 से ज्यादा कैंडिडेट घोषित हो चुके, मगर दूर दराज तक कोई दिखता नही जिसमे बुद्धि हो।
तो अगर बौड़म होना अनिवार्य मंत्रिमंडलीय योग्यता है, तो मेरी मांग है कि मंडी से स्टार प्रत्या���ी, जिसके बाद पास चुनाव लड़ने योग्य धन है, और यौवन है, वही, देश की अगली..
और लम्बे समय के लिए वित्तमंत्री बने। क्योकि इस देश और देशवासियों को ठीक ठीक मालूम है, अब अच्छे से मालूम है-
कि अभी तो हमे और भी जलील होना है।
नरेंद्र मोदी ने ‘चंदे के धंधे’ को छिपाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।
जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इलेक्टोरल बॉण्ड का सच जानना देशवासियों का हक़ है, तब SBI क्यों चाहता है कि चुनाव से पहले यह जानकारी ��ार्वजनिक न हो पाए?
एक क्लिक पर निकाली जा सकने वाली जानकारी के लिए 30 जून तक का समय मांगना बताता है कि दाल में कुछ काला नहीं है, पूरी दाल ही काली है।
देश की हर स्वतंत्र संस्था ‘मोडानी परिवार’ बन कर उनके भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने में लगी है।
चुनाव से पहले मोदी के ‘असली चेहरे’ को छिपाने का यह ‘अंतिम प्रयास’ है।
आज भाजपा ने परिवारवाद पर करारा प्रहार किया है। अमित शाह जी के बगल में खड़े ओमप्रकाश राजभर जी हैं और उनके अलावा एक और पीला गमछा डाले खड़े अरविंद राजभर जी हैं। अरविंद राजभर ओमप्रकाश राजभर जी के बेटे हैं।
आज सुभासपा ने घोषी सीट से अरविंद राजभर को लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर दिया है। सुभासपा यानि ओमप्रकाश राजभर जी की पार्टी NDA गठबंधन का हि���्सा है तो इसका अर्थ है कि अरविंद राजभर जी NDA के प्रत्याशी हैं।
BJP परिवारवाद के ख़िलाफ़ एक जंग लड़ रही है और ज़रा अब आप भी देख लीजिए वह जंग कैसे लड़ी जा रही है।
Bjp khud brastachar s bhari hue party hai wo kisi ka kya ukhad lega jindke khar sishe k hote hai wo dusro k ghar pathar nahi marte,waqt ka chakr chalega or modi bjp rss sab ukhad jayenge.
AAP को ख़त्म करने के लिए BJP HQ में फ़र्ज़ी Liquor Scam लिखा गया
ED को इतने छापों के बाद भी एक चवन्नी भी नहीं मिली
जब ED को पता चला कि अरविंद ��ेजरीवाल जी को गिरफ़्तार करना मुश्किल है
तो CBI के ज़रिए CrPC के Section 41 A का नोटिस निकाल कर गिरफ़्तार करने का प्लान बनाया जा रहा है
लेकिन दिल्ली की जनता मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी के साथ है
-@PKakkar_
#ModiThreatensKejriwalWithCBI
Inko mandir Jana chahiye hospital to garib lachar log jaate hai inko to bhagwan apne paas bulna chahte hai to hospital kya Jana sidha bhagwan k paas jaaye
एक महापुरूष ने एक बार कहा था कि राममंदिर जाएंगे तो अस्पताल जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी l तो क्या यह मान लिया जाय कि इन महाराजजी पर राम की कृपा नहीं है l
@JaikyYadav16 टारगेट क्या होता है??
अमीश देवगन ने बोला और इस बाबा न�� खुद ने बोला है!
ये बाबा बीजेपी का प्रचारक है संत नही!
ये राहुल गांधी को पप्पू बोलता है
मरे मुलायम काशीराम जोर से बोलो जय श्री खुलेआम बोलता है!!
बीमार हर कोई हो जाता हे लेकीन पाखंड तो इन्होने ही फैलाया है!!
जोशीजी की भुला दी गयी रथ यात्रा ...
सन 90 में आडवाणी ने राम रथ यात्रा की थी। जिसका काफी फायदा मिल रहा था।
फायदे का मतलब देश भर में जबरजस्त तनाव और अखबारों में भाजपा और आडवाणी की रोजना हेडलाइनें..
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इस यात्रा ने आडवाणी को एकदम नोबडी से स्टार बना दिया। अभी तक भाजपा में अटल , देश भर अटल एक जाने पहचाने पुराने नाम थे। यात्रा से आडवाणी उनके बराबर आकर खड���े हो गए थे।
इसमे एक तीसरा बन्दा था, जो कहने को तो पार्टी के तीन बड़ों में शामिल था, लेकिन उसकी कहीं चर्चा न होती।
ये थे मुरली मनोहर जोशी।
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वे दौड़ में पीछे छूट रहे थे, तो उन्हें भी चाहिए थी फुल इज्जत।
उन्होंने तय किया कि अब वे भी एक रथयात्रा करेंगे। आडवाणी की राम रथ यात्रा अहमदाबाद से अयोध्या तक हुई थी, एक्रोस हिंदी हार्टलैंड। नक्शे पर बाएं से दायें।
तो मुरली मनोहर जोशी की यात्रा नीचे से ऊपर प्रपोज हुई। कन्याकुमारी से कश���मीर तक। तब कश्मीर में आतंक नया नया शुरू हुआ था। इसलिए यात्रा का नाम हुआ-
एकता यात्रा..
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पार्टी के भीतर उन्होंने समर्थन जुटाया।मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान के लीडर्स उनके समर्थन में थे। वहीं कार्यकर्ता जुटाए जाने थे, जो दक्षिण से उत्तर तक जाते।
प्लान के अनुसार यह यात्रा राम रथ यात्रा से लम्बी होती। जोशी ज्यादा समय तक ��खबारों में छाए रहते।
और अंत में दो लाख भारतीय लोगों को लेकर कश्मीर में प्रवेश करते, वहां लाल चौक पर तिरंगा फहराते, जानो मानो नेपोलियन ने जनता मार्च कर पेरिस पे झंडा लहरा दिया।
क्या ही मस्त सीन होता बाबू ..
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तो योजना पार्टी ने मान ली। वही डीसीएम टोयोटा मॉडल लिया, वही बढ़ई पकड़ा और रथनुमा शेप में ढाला,
और वही कन्वेनर काम पर लगाया गया, जिसने राम रथयात्रा का इंतजाम सम्हाला था।
यह कन्वेनर नरेंद्र मोदी थे।
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यात्रा शुरू से फिसड्डी रही। दक्षिण में पार्टी कोई खास समर्थन नही था। प्रचार भी खास नही मिला।
भीड़ जबरन बुलाई जाती, सभा बहुत छोटीहोती। जोशीजी को लगा कि पार्टी सही सहयोग नही कर रही।
खिसिया गए।
यात्रा छोटी कर दी गयी।
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रुट के बीच बीच के शहरों में जम्प करके फटाफट कश्मीर तक पहुँचा गया।
और लाल चौक में दो लाख ��दमी तो क्या, दो हजार या दो सौ नही थे।
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यात्रा में शामिल, एक मित्र के मित्र ने , जो भयंकर भक्त थे, तब 1996 में हंसते हुए मुझे बताया था।
"जम्मू में हम ठहरे थे। वहां से बसों में भरकर पुलिस के प्रोटेक्शन में हम लोगो को श्रीनगर के लाल चौक ले जाया गया। आतंकवाद का चरम दौर था, सबकी फटी पड़ी थी। लाल चौक में कर्फ्यू था, और दूर दूर तक चारों ओर पुलिस के जवान घेरा लगाए हुए थे।
हम कुछ 10-15 लोग थे। झटपट झंडा निकाला, अगरबत्ती जलाई, फटाफट एक डंडे पर खोसा, फहरा कर बसों में आकर बैठे, और तत्काल जम्मू निकल गए
झंडा फहराने में कम,अगरबत्ती जलाने में ज्यादा समय लगा क्योकि तेज हवाओं के कारण माचिस जल नही पा रही थी"
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बरसों बाद इस तिरंगा यात्रा का एक मूवी में फिल्मांकन हुआ।
उसमे मोदी जी याने विवेक ओबेरॉय झंडा उठाये शेर की तरह चले जा रहे हैं। सांय सांय गोली चल रही है, अगल बगल लोग गिर रहे हैं।
लेकिन अपना शेर झण्डा लिए बढ़ा चला जा रहा है। बैकग्राउंड में देशभक्ति का रोंगटे खड़ा कर देने वाला म्यूजिक बज रहा है।
सब ठीक है, पर मेन हीरो याने जोशीजी कहाँ है??
😂😂
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यह सीन एकता यात्रा से नही, चार्ल्स डी गाल द्वारा दूसरे विश्वयुद्ध के बाद पेरिस में पुनः प्रवेश से प्रेरित था।
छुपे नाजी गोली चला रहे थे, अगल बगल लोग गिरते रहे, लेकिन चार्ल्स रुके नही।
इस��� कश्मीर में 1991 एकता यात्रा पर इम्पोज करना इतिहास की सबसे शानदार स्टैण्ड अप कॉमेडी है।
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बहरहाल।
नीचे तस्वीर में उस शानदार शो के दो कलाकार, मिलकर कश्मीर पे अगरबत्ती लगाने की कोशिश करते हुए।
😋🙏
@news24tvchannel Y to antaryami hai inko sab pata rahna chahiye kab inki tabiyat bigadegi or khud bimari ka ilaj v pata hona chahiye hospital ki inko kya jarurat hai.
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बीजेपी ने वोटों की चोरी की। ये लोग देश के लोकतंत्र के लिए ख़तरा हैं। जनतंत्र और देश को बचाने के लिए अगर सड़कों पर भी उतरना पड़ा तो हम उतरेंगे। https://t.co/AIpL6X47xH