@Aarti202 जापान के Toco नाम के व्यक्ति ने खुद को कुत्ते जैसा दिखाने के लिए एक बहुत realistic Rough Collie dog costume बनवाया था।
इस costume की कीमत करीब 20 लाख जापानी येन थी। उस समय यह लगभग ₹10–18 लाख के आसपास बैठती थी, ₹220 करोड़ नहीं। �
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आखिर क्यों प्रभावहीन हो गई राजनैतिक दलों की युवा विंग
जेन जी के आंदोलन से कई सवाल अब खड़े हो रहे है ।कई सवालों के बीच ये मुद्दा भी अब सामने है कि जो काम राजनीतिक दलों के युवा शाखाओं को करना चाहिए वो कार्य ऐसे युवा कर रहे है जिन्हें राजनीति या आंदोलनों से अभी तक कोई लेना देना नहीं था।क्या राजनीतिक दलों के युवा मोर्चा या युवा संगठनों की साख गिर गई है।इसके कई कारण तलाशे जा सकते है। सभी को अपनी बात रखने का हक है चाहे आम युवा हो या राजनीतिक दलों से जुड़ा युवा। लेकिन जब देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजूबत बनाए रखने की बात होगी तो स्वर विश्वविद्यालयों के कैंपस या राजनीतिक दलों के युवा संगठनों की तरफ से उठे ,ये बेहतर रहेगा।आखिर क्यों युवाओं की नब्ज पकड़ने में अब युवा नेता नाकामयाब हो रहे है। एक कारण कई जगहों पर कॉलेजो में छात्र संघ चुनाव पर रोक लगना हो सकता है । जिससे अब युवा नेतृत्व कैंपस से नहीं उभर रहे। दूसरा मुद्दा राजनैतिक दलों या संगठनों के युवा शाखाओं में परिवारवाद का है।किसी नेता के परिवार से निकले युवाओं ने आप तौर पर संघर्ष नहीं देखा होता है फिर वो युवाओं की असली समस्याओं ने कनेक्ट नहीं हो पाते है। न तो नेताओं के घरों से निकले युवा नेता को कभी फीस की दिक्कत होती है। न ही कॉलेज आने जाने में कोई समस्या, न ही रोजगार की चिंता ।लिहाजा ये मसले उनके लिए गौड़ नजर आते है। युवा शाखा के जरिए जल्द से जल्द मुख्य शाखा में जाना और जनप्रतिनिधि बनना ही उनका अंतिम लक्ष्य होता है न कि छात्रों के हितों पर आंदोलन करना , संघर्ष करना । हालांकि अपवाद भी कुछ युवा नेता रहे है जो नेताओं के परिवार से आने के बावजूद अच्छे युवा नेता साबित हुए है। लेकिन समस्या तब गंभीर हो जाती है जब हर दूसरा स्थापित नेता अपने बेटा, बेटी को राजनीतिक दल के युवा विंग में एडजस्ट करता है जिससे उसका दावा भविष्य में मजबूत हो जाता है।आम परिवार से निकला प्रतिभाशाली युवा संघर्ष करता रह जाता है।जेन जी के जंतर मंतर पर हुए हालिया आंदोलन से एक और गंभीर सवाल उठे है कि क्या हम युवाओं के मुद्दे पर उन युवाओं को आगे करना चाहते है जो खुद कहते है कि उन्हें भारत की मिट्टी से प्रेम नहीं है वो मौका मिलने पर भारत छोड़कर विदेश बसना चाहते है। जाहिर है कोई भी देश भक्त युवा ऐसे युवा नेतृत्व को उभरता हुआ नहीं देखना चाहेगा।फिर निदान क्या है। अपने बेटा, बेटी को फिट करने में लगे राजनेताओं से ज्यादा उम्मीद नहीं है लेकिन फिर भी आज देश में ऐसे नेताओं की संख्या भी कम नहीं जो गैर राजनीतिक पृष्ठभूमि से शिखर तक पहुंचे है या मजबूत पहचान बनायी है। राजनीतिक दलों के युवा शाखाओं को अधिक सक्रिय कीजिये। युवा संगठनों को परिवारवाद के घुन से बचाये नहीं तो इनकी प्रासंगिकता और जरूरत खत्म होती चली जायेगी। जिन राज्यों में छात्र राजनीति पर ताला लगा है उन्हें खोलिये यानी विश्वविद्यालयों में नियमित रूप से छात्र संघ का चुनाव हो। ये सुनिश्चित करे कि वहां धन बल बाहुबल की कोई जगह न हो। देश हित के लिए जरूरी है कि छात्रों, युवाओं से जुड़े मुद्दे, असली छात्र और वो युवा उठाए जिनके अंदर देश प्रेम हो, भारत के संसदीय लोकतंत्र की महत्ता का ज्ञान हो। @BJP4India@RSSorg #युवा #छात्र #देशहित
#educationreform#reservationreform राष्ट्र के लिए.
एजुकेशन रिफॉर्म और रिजर्वेशन रिफॉर्म राष्ट्र के भविष्य से जुड़े विषय हैं। मैं सभी राष्ट्रहित में सोचने वाले नागरिकों से अनुरोध करता हूँ कि वे इस विषय पर खुली और रचनात्मक चर्चा का समर्थन करें। यह आंदोलन किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग के लिए है।
मेरा मानना है कि यदि गरीब, वंचित और शोषित वर्गों को कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर विद्यालय, आवश्यक संसाधन और आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया जाए, तो उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए अधिक अवसर प्राप्त होंगे। हमें ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जहाँ प्रत्येक बच्चे को समान प्रारंभिक अवसर मिलें और वह अपनी क्षमता के आधार पर आगे बढ़ सके।
आज भारत को स्वास्थ्य, विज्ञान और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में विश्व के अग्रणी देशों की श्रेणी में लाने के लिए शिक्षा में व्यापक सुधारों की आवश्यकता है। एक मजबूत और समावेशी शिक्षा प्रणाली ही देश की वास्तविक शक्ति बन सकती है। हमें इस बात पर गंभीरता से विचार करना होगा कि आने वाली पीढ़ियों को कैसे बेहतर अवसर और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की जाए।
यदि हम भारत को इन क्षेत्रों में नंबर वन बनाना चाहते हैं, तो शिक्षा सुधारों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और ठोस कदम उठाना आवश्यक है। आप सभी से अनुरोध है कि इस विषय पर अपनी आवाज़ उठाएँ, सकारात्मक संवाद को आगे बढ़ाएँ और इसे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा करें।
रिजर्वेशन पर चर्चा किए बिना जेन्यून रिफॉर्म्स की बात नहीं हो सकती। अगर लक्ष्य सामाजिक न्याय और समान अवसर है, तो हमें यह भी पूछना चाहिए कि SC/ST छात्रों को शुरुआत से ही बेहतर शिक्षा, संसाधन और अवसर क्यों नहीं मिलते। केवल अंतिम चरण में आरक्षण देना ही पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता।
सरकार को उनकी शुरुआती शिक्षा में निवेश करना चाहिए, ताकि हर छात्र को शुरुआत से ही समान अवसर मिलें और वह अपनी क्षमता के आधार पर आगे बढ़ सके।
#BREAKING: Prime Minister @narendramodi posts new video on Instagram thanking youth for immense positive feedback on last night’s video. The video posted last night has 303 million views and over 16 million likes. The video last night and tonight seem to be self-made on a device.
क्यों नहीं बनाया नरोत्तम मिश्रा को भाजपा ने अपना उम्मीदवार?
नरोत्तम मिश्रा वो ठहरा हुआ समंदर हैं, जो कभी भी सुनामी का रूप ले सकते हैं। 2020 से 2023 की शिवराज सरकार में नरोत्तम मिश्रा ने कई बार शिवराज सिंह चौहान को लाल आँख दिखाई।
उन्होंने ख़ुद को शिवराज सिंह से बड़ा दिखाया और गृह विभाग पर ऐसा नियंत्रण रखा कि शिवराज सिंह चौहान की ख़ुद की फाइलें तक अटकी रहती थीं।
मोहन यादव भी तब शिवराज सरकार में मंत्री थे और वे नरोत्तम मिश्रा को अच्छी तरह जानते थे कि सरकार में उनका भौकाल और दख़ल किस प्रकार रहता था।
आज मोहन यादव ने अपनी पूरी ताक़त लगाकर नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटवा दिया। अगर नरोत्तम मिश्रा चुनाव जीत जाते, तो वे मोहन यादव को चैन से बैठने नहीं देते।
मोहन यादव पहले ही शिवराज सिंह चौहान, प्रह्लाद पटेल, कैलाश विजयवर्गीय और उमा भारती जैसे नेताओं से परेशान हैं। ऐसे में एक और प्रभावशाली नेता उनकी सरकार के लिए अड़चन बनता।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस्तीफे का ऐलान किया
◆ दरअसल, ट्रंप ने भविष्यवाणी की थी कि ब्रिटिश नेता कीर स्टार्मर जल्द ही इस्तीफा दे देंगे
@Keir_Starmer | Keir Starmer | Britain PM | #Trump | Trump | #KeirStarmer | Labour Party | Britain
अब अखबार में खाना परोसा तो होगी कार्रवाई, FSSAI ने लगाई रोक
◆ FSSAI ने देश के सभी खाद्य विक्रेताओं, रेस्तरां मालिकों, स्ट्रीट फूड वेंडर्स और फूड बिजनेस ऑपरेटरों को सख्त चेतावनी जारी की
◆ FSSAI ने निर्देश देते हुए खाने-पीने की चीजों को अखबार में पैक करने या परोसने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है
#FSSAI | Eating food in Newspaper | #Newspaper
मां के मरने के बाद और पिता काम पर चलें जाते है...
डेढ़ साल के भाई का ध्यान रखने के लिए रोज साथ ले जाती है कक्षा 9 की अस्मिता....💗
वाकई एक बहन मां होती है... 💗
कल डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पर एक लंबा-चौड़ा पोस्ट किया था। उस पोस्ट में उन्होंने तमाम बातों के साथ सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि मुस्लिम देशों को -और उन्होंने देशों के नाम भी लिए -Abraham Accord पर हस्ताक्षर कर देने चाहिए।
अब इस Accord में सीधे-सीधे इजरायल को मान्यता देने की बात है। अमेरिका के करीबी मुस्लिम देशों के लिए यह न निगलते बन रहा है, न उगलते वाली स्थिति हो गई है।
क्या है पूरा मामला, समझिए 👇🏽
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