आज के नजरिए से मत देखिए.. उस दौर को सुनिए देखिए जब गरीबों को देखकर लोग नाक भौं सिकोड़ लेते थे।
ऐसे में बिहार में एक मसीहा @laluprasadrjd पैदा हुए और उन्होंने बिहार के कमजोर दलित पिछड़े गरीबों को एक नया जीवन दिया।
नरेंद्र मोदी ने भारत को अमेरिका का उपनिवेश बना दिया है। जो अमेरिका 1971 में हमारे खिलाफ अपना सातवां जंगी बेड़ा भेज रहा था, मोदी उसके लिए काम करते दिख रहे हैं।
ब्लूमबर्ग की यह रिपोर्ट कह रही है कि भारत में तेल मंत्रालय के अधिकारी विदेश मंत्रालय से अपील कर रहे हैं कि अमेरिका से आग्रह कीजिए, वह रूस से तेल ख़रीदने की इज़ाज़त दे दे।
यह कब शुरू हुआ कि भारत अपने निर्णय के लिए अमेरिका की इजाजत लेगा ?
भारत के विपक्ष को और जनता को इस मामले में बहुत सख्त हो जाना चाहिए। भारत को अमेरिका की गुलामी में धकेलकर भारत की बर्बादी की पटकथा लिखी जा रही है।
भाजपा में नैतिकता की गिरावट व शेयर बाज़ार में गिरावट के बीच कम्पटीशन चल रहा है, दोनों ही बेतहाशा गिर रहे हैं। इन दोनों ही हालातों में नुक़सान देशवासियों का ही है।
पहले जनता का अब निवेशकों का भरोसा भाजपा से उठ गया है।
ये लीजिए योगी जी,
आपकी भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी “बटेंगे तो कटेंगे” की भाई-भतीजावाद वाली सरकार का एक और चेहरा।
लखीमपुर अर्बन कोआपरेटिव बैंक भर्ती की तस्वीर।
27 भर्तियाँ।
इनमें 55% यानी 15 ठाकुर बिरादरी के हैं।
4 ब्राह्मण।
केवल 2 एससी-एसटी को नौकरी दी, जबकि 6 को देना था।
नेताओं और अधिकारियों के रिश्तेदार भर लिए गए हैं। सबका नाम समेत ब्योरा है!!
कर लीजिए दैनिक भास्कर पर एफआईआर।
अगर पत्रकारों पर एफआईआर कराना ही भगवा की आड़ में भ्रष्टाचार और जातिवाद की “गिनीज़” बुक में दर्ज हो चुके नाम को छिपाना है, तो ये भी हसरत पूरी कर लेनी चाहिए।
मिर्ज़ा ग़ालिब लिख गए हैं-
“हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले!!”
अतिमहत्वपूर्ण बात.!
इस एक मिनट की वीडियो क्लिप देश के हर देशभक्त/अंधदेशभक्त/संघी देशभक्त नागरिक के मोबाइल फोन में होनी चाहिए।
हर चट्टी-चौराहें, गली-मुहल्ले, में सुना कर पूछा जाना चाहिए कि क्या भारत को भाजपा ने अमेरिका का गुलाम बना दिया.!
#parliamentsession2025@yadavakhilesh
6 साल बेमिसाल,
एको अहं, द्वितीयो नास्ति,
न भूतो न भविष्यति!
आज का दिन वो ऐतिहासिक दिन है जब सूचना विभाग में निदेशक के पद पर 15 नवंबर 2018 की शिशिर ऋतु में प्रमोटी #IAS शिशिर सिंह ने निदेशक का पद सम्भाला था।
इस पद पर 6 सालों में शिशिर सिंह ने कई कीर्तिमान बनाये हैं ,जिसमें “कम्बल ओढ़ के घी पीना” पहले नम्बर पर आता है।कहावत है दिल पर ना लें…
6 साल लगातार निदेशक सूचना के पद पर रहते हुए हर साल लगभग 1000 करोड़, शिशिर सिंह ने अपनी कलम से खर्च किए यानि कुल 6000 करोड़ से अधिक खर्च करने वाले पहले सूचना निदेशक बने हैं सिंह साहब। अब बताइए तलवार 🗡️ बड़ी या कलम 🔏??
जानकार बताते हैं इनके कई करीबी जो 6 साल पहले तक आल्टो गाड़ी से चलते थे वो अब BMW X7 जैसी लग्ज़री गाड़ियों के मालिक हो गए हैं।
सूचना विभाग के क्रिया कलाप जग जाहिर हैं, भई जब किसी ने निदेशक पद का “बैनामा” ही करा लिया हो तो नीति, नियत और नियमों की चर्चा करना ही बेमानी हो जाता है!!
पॉवर कारिडोर में दबी ज़ुबान में चर्चा किसी रेट कार्ड की जरूर है। इसलिए मुझे ये नहीं पता कि किस काम में 30% का रेट है या किस काम में मामला फिफ्टी फिफ्टी हो जाता है!!
वैसे हर साल 15 -25 मार्च के आस पास जारी हुए कामों को किस जादू की छड़ी से कराया जाता है जिसका भुगतान भी 31 मार्च तक हो जाता है?? कोई बता रहा था ‘अजी रेट बहुत हाई है ऐसा मामला 80% तक जाता है लेकिन मुझे शक है ऐसा कैसे सम्भव है? सब झूठ है बदनाम करने की साज़िश है।
तो किसी ने कहा पिछले 6 साल के भुगतानों का ब्यौरा #CBI जैसी जाँच एजेंसी खंगाले तो कई महानुभाव सूचना आफिस के छठे तल से छलांग लगाते नजर आयेंगे, हाँ नहीं तो 😏
ऐसा सुनकर मैंने बड़ी हिम्मत जुटा कर कैलकुलेटर निकाला और 6000 करोड़ को औसतन 40% से गुणा भाग किया तो गिनती 2000 करोड़ से अधिक आई तो सिर खुजाते हुए अपने विचारों को “दाखिल दफ्तर” करते हुए मुँह ढक कर सो जाना ही उचित समझा।
तभी किसी ने मेरे कान में आकर कहा “महाकुम्भ” आ रहा सूचना के लिए “धनकुम्भ” है, समझिए तभी साहब कमर में चोट के बावजूद “कमर तोड़ चाल” चल रहे वैसे तो डॉक्टर ने बेड रेस्ट बताया है लेकिन % बड़ी चीज है….रीढ़ विहीन प्राणी वैसे भी रीढ़ के दर्द की चिंता नहीं किया करते…
अग्रिम भविष्य की शुभकामना के साथ
जय सिया राम
मेला क्षेत्र में जमीन आवंटन को लेकर सन्तों के दो गुटों के बीच मारपीट।
मेला प्राधिकरण कार्यालय में आज महाकुंभ के दौरान मेला क्षेत्र में अलग अलग अखाड़ा के। नए ज़मीन आवंटन होना था जिसमें सन्तों ने एक दूसरे पर जमकर बरसाए मुक्के।
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष के सामने हुई मारपीट
#महाकुंभ2025
जिस ओर जवानी चलती है,
घ्वस्त देश और इकॉनमी। 1950 मे जापान की नई पीढी को ये सौगात मिली थी।
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देश राख से खड़ा़ करना था। शुरूआती कनफ्यूजन के बाद, जापान सरकार और केन्द्रीय बैंक ने अर्थव्यवस्था खड़ा करना शुरू किया।
एक क्रेडिट सिस्टम शुरू किया -
विण्डो गाइडेंस
यह युद्ध के दौर की फंडिंग का ही प्रतिरूप था। तब टैंक के लिए, प्लेन के लिए, बंदूको, हथियार इंडस्ट्री के लिए लक्ष्य तय होता था। बैंक सिर्फ ऋण ही नही देता था, बल्कि उत्पादन मे कोई बाधा न आए, ये भी देखता।
यह व्यवस्था युद्ध के बाद सिविल सेक्टर में लागू हुई। स्टील मे, बिजली, हाउसिंग, आटो मोबाइल.. हर सेक्टर मेे इन्वेस्टमेंट तय किया।
छोटे व्यवसाइयों को खोजे, उन्हे काम के लिए लोन दिये।
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जॉब क्रिएशन हुआ, तो स्किल्ड लोग चाहिए।
सरकार ने सस्ते मे अच्छी शिक्षा दी। कालेज यूनिवर्सिटी से छात्र निकल, सीधे इन फैक्ट्रियों मे पहुंचे।
छोटी छोटी कंपनियां - सान्यो, माजदा, होंडा, टोयोटा, कैनन, सोनी, पैनासोनिक, लैक्सस बनकर दुनिया पर छा गई।
दुनिया मे जापानी सामान बिकता और दुनिया का पैसा जापान आ जाता। याने और इन्वेस्टमेण्ट..
और समृद्धि!!
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यही काम 18 वी सदी से ब्रिटेन, दुनिया की फैक्ट्री बनकर कर रहा था। जापान ने महज 15 साल में उसे उसे पीछे छोड़ दिया। USA क्व बाद दूसरी बड़ी इकॉनमी।
अगली पीढी को भी यही कर्मठता, इनोवेशन, एजुकेशन घुट्टी मे मिली। महज 2 पीढी मे जापानियो का जीवन स्तर दुनिया मे सबसे उंचा हो गया।
आज जापान विगत 20 साल से मंदी और स्थिरता मे फंसा है। घटती आबादी, घटता कन्ज्मप्शन, इसका कारण है।
शानदार हेल्थकेयर के कारण इंसान 100 साल जीता है। आबादी मे बूढे ज्यादा है, जवान कम, वर्कफोर्स कम।
पर इससे जीवन स्तर मे कोई गिरावट नही आई।
इन बूढों के पास सेविंग है। घर है, पेंशन है ..
जिंदगी के मजे है।
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यही माडल चीन ने अपनाया। अपनी अथाह आबादी को काम पर लगा दिया। पिछले 20 साल से दुनिया का कारखाना, चीन है।
इस रास्ते 1990 के बाद से उसने 80 करोड लोगों को गरीबी से बाहर निकाला। अब वो दुनिया का ट्रेड किंग है।
उस पैसे से सुपरपावर बन गया है।उसकी भी आबादी बढना रूक चुकी है। जन्म दर कम है, मृत्यु दर और भी कम।
तो चीन 20 साल बाद बूढों का देश होगा।
लेकिन समृद्ध, आत्मनिर्भर बूढों का।
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यही माडल हमने भी अपनाया।
सन 2000 से 2015 के बीच आप 15+ साल के थे, तो भारत मे पैदा होने का सुनहरा वक्त था।ये विश्व का सबसे जवान देश था, जिसकी 65% आबादी युवा थी।
ये ईश्वरीय अवसर था।
और सफलता कदम चूम भी रही थी।
भारत इमर्जिंग इकानमी था। नए बिजनेस खुल रहे थे। नए बाजार, नए मॉल, नए पॉवर प्लांट, स्टील फैक्ट्री, रिफाइनरी..नई खदाने, नये कॉल सेंटर, बीपीओ।
IIT और IIM के ग्रेजुएट तो एक्सपोर्ट हो रहे थे। घरेलू जरूरतों के लिए आसपास धड़ाधड़ इंजीनियरिंग और MBA कालेज खुले।
उनसे लाखो लड़के निकले।
एग्जीक्यूटिव, मैंनेजर, सीईओ बने।
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और तब हमारा धर्म खतरे मे आ गया।
डर हुआ कि देश मे इस्लाम बढ़ रहा है। सबको राजनीति और इतिहास में रुचि हुई। शिक्षा महंगी हुई, इन्टरनेट सस्ता। इससे रैलियों मे भीड़ बढ़ी, पार्टी के कार्यकर्ता भी।
हमारा युवा, टीवी और व्हाट्सप पर नेहरू को गरियाने, चीन को कटियाने, पाकिस्तान को लतियाने का मौका खोजने लगा। भूखों से जय श्रीराम बोलवाया गया।
नंगे तलवार लेकर नाचने लगे।
मंदिर बना, सेन्ट्रल विस्टा बना, 370 हट गई और तीन तलाक बैन हो गया। पप्पू मूत्र पीवक, वामी, और जेएनयू धूल चाटने लगे।
मुल्ले खूब टाइट हुए।
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व्यापार, इन्वेस्टमेंट, रोजगार भी टाइट हुआ। ग्रोथ थमी,कर्ज बढा। मॉल बंद हो रहे है, नए बिजनेस के अवसर सीमित हैं।
कालेजो को छात्र नही मिल रहे, और ग्रेजुएट्स को जॉब्स नही मिल रहे। इस वर्ष IIT बॉम्बे में 35% को प्लेसमेंट नही मिला।
पर जवानी मुल्ले टाइट करके खुश है। बाप के खून पसीने से सना बेटा, फिलिस्तीन को ट्रोल कर रहा है, इजराइल के साथ खड़ा है।
कभी कभी पेपर आउट होने के खिलाफ हैशटैग भी चलाता है।
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दुनिया में जन्म दर गिर रही है। देश के देश बुढापे की जकड़ में बढ़ रहे हैं। हम भी उस राह पर हैं।
डेमोग्राफिक डिवीडेंट का जो मौका, चार हजार साल के इतिहास मे पहली बार आया था, बस यूं ही फिसल गया।
अधिकांश युवा के पास न स्किल्स है, न जॉब है, न सेविंग। 30 साल बाद कोई पेंशन भी नही होगी।
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नेहरू की पेंशन खाने वाले 10 साल मे साफ हो जाएंगे। अटल की नाममात्र की पेंशन वाले भी अपने बच्चों पर निर्भर होंगे।
और वो बच्चे?
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वो खुद मिडिल एज, थकी, चीट करी गई, हताश, बेकार आबादी होगी। यह भविष्य, इन्होंने अपनी हाथ से लकीरों मे जबरन खोदा है।
जिस ओर जवानी चलती है,
बुढापा वहीं पहुंचता है।
कल्पना कीजिए कि आपके घर में किसी को अचानक रात में पेट दर्द हो जाये। आप इमरजेंसी में ज़िला सदर अस्पताल में ले कर मरीज़ को जाते हैं जहाँ पे डॉक्टर उसे तुरंत किसी बड़े मेडिकल कॉलेज में रेफेर कर देते हैं।
एंबुलेंस से तुरंत आप वहाँ से निकलते हैं। चूँकि आपको पता है कि मेडिकल कॉलेज में पता नहीं कितनी भीड़ होगी इसलिए आप एंबुलेंस से किसी निजी अस्पताल में उतरते हैं।
और अस्पताल में मरीज़ जैसे ही बेड पर लेटा, अभी कुछ इलाज शुरू भी नहीं हुआ है, डॉ ने देखा भी नहीं और आपका बिल हो गया 20,000 रुपए।
मार्केटिंग के नाम पर कमीशन के खेल ने तथा सरकारी अस्पताल के कर्मियों / डॉक्टरों , एंबुलेंस और निजी अस्पताल के गठजोड़ ने यही स्तिथि बना कर रखी है।
और इतनी भयावह स्थिति के बावजूद कोई इसके विरोध में कुछ लिखना तो छोड़िए, बात नहीं करना चाहता।
मुंबई में बांद्रा स्टेशन पर भीड़ के कारण मची भगदड़। कई लाेग घायल। कुछ की हालत गंभीर। अधिकतर यात्री पूर्वांचल के थे जो त्योहार में घर जाने के लिए ट्रेन पकड़ने आए थे।
मेरा बेटा यहीं हैं भारत में । ये उन कमीनों के लिए हैं जो मेरे बच्चों के नागरिकता पे मुझसे प्रश्न कर रहे ?? शर्म हया बची हैं कि नहीं ? अगर तर्क या विचार नहीं तो बच्चों पे उतरने में भी संकोच नहीं होता !!! छी । कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता लगे रहो मुन्ना भाई जान
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निजी आवास पर बैरिकेडिंग लगा कर रास्ता सील किया गया है।
पुलिस ने निजी आवास से बाहर न निकलने की व्यवस्था की है।
आज सुबह 10:00 बजे JPNIC पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का कार्यक्रम है।
#जयप्रकाश_नारायण
टीन की चद्दर लगाकर विचाधाराओं को नही रोक सकते : अखिलेश यादव
रात के 11 बजे अखिलेश यादव JPNIC पहुँचे और जयप्रकाश नारायण जी के सम्पूर्ण क्रांति का फिर से आह्वान किया। सरकार की बेचने वाली मंशा को उजागर किया।
कल जयप्रकाश नारायण जी की जयंती है और लखनऊ में भाजपा सरकार #JPNIC मेमोरियल के गेट को टीन का चद्दर लगाकर ढ़क रही है।
समाजवादी कल बड़ी सी सीढ़ी लेकर आएंगे और समाजवादी नेता जयप्रकाश जी को श्रद्धांजलि अर्पित करेगे।
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