'लिखते तो वह लोग हैं, जिनके अंदर कुछ दर्द है, अनुराग है, लगन है, विचार है। जिन्होंने धन और भोग-विलास को जीवन का लक्ष्य बना लिया, वह क्या लिखेंगे?'
- प्रेमचंद
"प्रगतिशील लेखकों का एक उसूल ये है कि उन्हें हमेशा अवाम के भले को नज़र के सामने रखना चाहिए चाहे ख़ास लोगों की नज़र में वो मुल्क-दुश्मन ही क्यों न ठहरें"
#फ़ैज़अहमद'फ़ैज़
#Faizahmadfaiz#BirthAnniversary