मासिक बैठक
बसपा 261 इलाहाबाद पश्चिम विधानसभा की मासिक बैठक 2 अक्टूबर 2026 को बौद्ध विहार, पंतरवा, बमरौली, प्रयागराज में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में मा० राजू गौतम जी (मुख्य मण्डल प्रभारी, प्रयागराज मण्डल), मा० अतुल कुमार टीटू जी (मुख्य मण्डल प्रभारी, प्रयागराज मण्डल) एवं मा० चौधरी सईद अहमद जी (महानगर अध्यक्ष, प्रयागराज) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर AIMIM के वरिष्ठ नेता मा० मोहिबुल हक साहब ने अपने कई साथियों के साथ बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उन्हें बहुजन समाज पार्टी में शामिल कराने में वरिष्ठ नेता मा० मोहम्मद वैस साहब की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
वहीं, समाजवादी पार्टी छोड़कर श्री शिव लाल यादव जी ने भी बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।
बैठक की अध्यक्षता विधानसभा प्रभारी श्री तिलकराज बौद्ध जी ने की। बैठक में विधानसभा अध्यक्ष श्री राजेश कुमार चौधरी जी के साथ विधानसभा कमेटी, सेक्टर अध्यक्ष एवं महासचिव, पूर्व पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समर्थक एवं पार्टी के अनेक शुभचिंतक उपस्थित रहे।
मान्यवर कांशीराम जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
बैठक में मुख्य अतिथियों ने बहनजी के निर्देशानुसार हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक, मान्यवर श्री कांशीराम जी की पुण्यतिथि के अवसर पर 9 अक्टूबर 2026 को मान्यवर श्री कांशीराम जी स्मारक स्थल, VIP रोड, लखनऊ में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करने का आह्वान किया।
बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पूरी मेहनत के साथ जुटने का आह्वान करते हुए 2027 में बहुजन समाज पार्टी की पांचवीं बार सरकार बनाने तथा आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लक्ष्य के लिए कार्य करने का संदेश दिया गया।
मिशन 2027
💙💙जयभीम 💙💙
🐘🐘जय बसपा 🐘🐘
अनिल कुमार एडवोकेट
हाईकोर्ट इलाहाबाद
आज़ादी के दशकों बाद भी भारतीय मुसलमानों के सामने शिक्षा सरकारी रोजगार कारोबार राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आर्थिक सुरक्षा के गंभीर सवाल मौजूद हैं।
यह केवल भावनाओं का विषय नहीं है सच्चर समिति की रिपोर्ट ने मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में गंभीर पिछड़ेपन को दस्तावेज़ित किया था।
केंद्र सरकार के आधिकारिक अभिलेखों में भी मुस्लिमों की सरकारी रोजगार में कम भागीदारी दर्ज की गई है।
लेकिन सवाल यह है हमारी रणनीति क्या है?
इस्लाम ने ज़कात को केवल दान नहीं बनाया, बल्कि उसके हकदारों की स्पष्ट श्रेणियाँ बताईं। कुरआन में ज़कात के काम पर नियुक्त लोग, कर्ज़दार और अन्य निर्धारित श्रेणियाँ बताई गई हैं।
इसलिए ज़कात का उद्देश्य केवल तत्काल राहत नहीं, बल्कि जरूरतमंद इंसान की गरिमा और जीवन-सुधार से भी जुड़ा हुआ है।
अगर कोई गरीब बच्चा हर साल ज़कात पर निर्भर रहकर पढ़ता रहे, लेकिन उसे आधुनिक शिक्षा, विज्ञान, अंग्रेज़ी, तकनीकी कौशल और रोजगार के अवसर न मिलें, तो हमें मदद के तरीके पर भी आत्ममंथन करना होगा।
मदरसों और मकतबों का धार्मिक एवं शैक्षणिक महत्व अपनी जगह है, लेकिन मुस्लिम समाज को यह भी सोचना होगा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले जिससे वे डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, वकील, वैज्ञानिक, उद्यमी और सरकारी अधिकारी बन सकें।
और यह जिम्मेदारी केवल समाज या ज़कात देने वालों की नहीं है।
राज्य और केंद्र सरकारें भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अल्पसंख्यक कल्याण की सार्वजनिक नीतियों के माध्यम से नागरिकों के विकास में भूमिका निभाती हैं।
उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा के लिए राज्य का अपना कानून और प्रशासनिक ढाँचा मौजूद है।
मुसलमानों को केवल किसी एक पार्टी को हराने के लिए वोट देने के बजाय अपने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, कारोबार, सुरक्षा, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संवैधानिक अधिकारों पर प्रत्येक दल का रिकॉर्ड और वर्तमान नीति देखनी चाहिए।
किसी पार्टी को समर्थन देना या न देना प्रत्येक नागरिक का अपना लोकतांत्रिक निर्णय है। लेकिन सवाल पूछना लोकतंत्र का अधिकार है
हमारे बच्चों के लिए कितने अच्छे स्कूल?
कितनी छात्रवृत्तियाँ?
कितने रोजगार?
कितने सरकारी अधिकारी?
कितने डॉक्टर और इंजीनियर?
कितने मजबूत अस्पताल?
कितने सफल उद्यमी?
और राजनीति में हमारी वास्तविक हिस्सेदारी कितनी?
उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकारों और माननीय बहन जी मायावती जी के कार्यकाल से जुड़े मुस्लिम कल्याण के कई निर्णय सरकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं।
2007–2012 के कार्यकाल के बारे में BSP की प्रकाशित रिपोर्टिंग में उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड, उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति, उर्दू-अरबी-फारसी शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना तथा कब्रिस्तानों की सुरक्षा/चारदीवारी जैसे निर्णयों का उल्लेख मिलता है।
2010 में BSP सरकार के दौरान 61 और मदरसों को सरकारी सहायता के दायरे में लेने की खबर दर्ज हुई; इससे उस समय सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या 100 बताई गई थी और अतिरिक्त व्यय ₹11.18 करोड़ बताया गया था।
2011 में BSP सरकार ने मोअल्लिम-ए-उर्दू डिग्रीधारकों को सरकारी स्कूलों में उर्दू शिक्षक नियुक्ति का रास्ता साफ किया। रिपोर्ट के अनुसार इससे लगभग 10,000 डिग्रीधारकों को लाभ मिलने की उम्मीद थी। उसी वर्ष मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाली मुस्लिम छात्राओं को सावित्रीबाई फुले बालिका शिक्षा योजना में शामिल करने का निर्णय भी दर्ज हुआ; लगभग 58,000 मुस्लिम छात्राओं को संभावित लाभार्थी बताया गया।
2002–03 के BSP शासन से संबंधित अभिलेखों में मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में 577 प्राथमिक और 144 वरिष्ठ बेसिक विद्यालय खोलने की योजना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में मदरसों के माध्यम से तकनीकी शिक्षा की पहल का भी उल्लेख मिलता है।
माननीय बहन जी मायावती जी के नेतृत्व में BSP ने मुस्लिम समाज को बहुजन राजनीति के व्यापक ढाँचे में जोड़ने की बात भी लगातार रखी है। आज आवश्यकता यह देखने की है कि भविष्य की राजनीति में मुस्लिम समाज को केवल चुनावी संख्या नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सत्ता और नीति-निर्माण में वास्तविक भागीदारी कैसे मिले।
असली परिवर्तन
मुस्लिम समाज को केवल ज़कात लेने वाला समाज नहीं, बल्कि ज़कात देने वाला, रोजगार पैदा करने वाला, कारोबार करने वाला और राष्ट्र निर्माण में नेतृत्व करने वाला समाज बनना होगा।
मस्जिदें रहें।
मदरसे रहें।
मकतब रहें।
लेकिन साथ में आधुनिक स्कूल भी हों।
अस्पताल हों।
ITI और कौशल केंद्र हों।
कॉलेज और विश्वविद्यालय हों।
व्यवस्थित मुस्लिम व्यापारिक नेटवर्क हो।
और गरीब बच्चे भी उच्च शिक्षा तक पहुँचें।
@kashe05252 जो समाज के लिए काम किया है वो ठीकेदार तो बनेगा ही एक दो सीट के लिए दर दर पर रोने वाले अब समाज को स्वाभिमान बताएंगे । रोहिणी घावरी रोज बोल रही है वो चरित्रहीन ने मेरा शोषण किया अमित शाह का पाला है सरकार मेरा FIR नहीं दर्ज कर रही
@grok@AnilYadavmedia1 सपा बसपा में से किसने वास्तव में दलित पिछड़ों के लिए काम किया। औरदलित पिछड़े महापुरुषों के नाम जिलों को किसने बदला। और घर के बाहर किस पार्टी ने पिछड़ों को सांसद बनाए
परम आदरणीय बहन जी,
आप मेरी राजनैतिक गुरु हैं, मेरी प्रेरणा हैं, और मेरी बुआ माँ भी हैं।
राजनीति में मैंने जो कुछ सीखा, वो आप से ही सीखा, जो कुछ किया, आपके मार्गदर्शन में किया। इसलिए आज अपनी बात सीधे आपके सामने और पूरे बहुजन समाज के सामने रखना चाहता हूँ।
पिछले कुछ दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया में मेरे बारे में कई तरह की ख़बरें और अफ़वाहें चल रही हैं। मैं साफ़ कर देना चाहता हूँ: मैं किसी दूसरे राजनीतिक दल में नहीं जा रहा। न आज, न कभी। BSP मेरे लिए सिर्फ़ एक पार्टी नहीं, मेरा परिवार है।
श्री अशोक सिद्धार्थ जी को पार्टी से निकालने और उनके संन्यास का आपका फ़ैसला पूरी तरह उचित है, और मैं उस फ़ैसले के साथ खड़ा हूँ। रिश्ते अपनी जगह हैं, पर मिशन उनसे बड़ा है। व्यक्तिगत और पारिवारिक हितों से ऊपर पार्टी और आंदोलन का हित रखना मेरी ज़िम्मेदारी है।
उस समय मैंने ख़ुद को सोशल मीडिया से दूर कर लिया था, इसलिए आपके उस पोस्ट को रिपोस्ट नहीं कर पाया। मेरी उस चुप्पी को ग़लत समझा गया, और अफ़वाहों को जगह मिली। अगर इससे आपको ठेस पहुँची है, तो मैं उसके लिए आपसे क्षमा चाहता हूँ।
मैं सिर्फ़ आपके नेतृत्व में फिर से पार्टी और मिशन की सेवा का अवसर चाहता हूँ। विश्वास शब्दों से नहीं, काम से बनता है, और मैं उसे अपने आचरण और अपनी मेहनत से साबित करूँगा।
बाबा साहेब का मिशन, मान्यवर साहेब का रास्ता, और आपका नेतृत्व। यही मेरी राजनीति है।
जय भीम।
जय बसपा।
एक भी सपा का मुस्लिम नाराज नहीं है लेकिन जितने मुस्लिम आज X पर पोस्ट कर रहे हैं उनकी टाइमलाइन चेक करना सब ओवैसी के चेले हैं।😂
इनको लगता है कि यूपी में कयादत होगी और ये वजीर बनकर भाजपा को हरा देंगे।
मुस्लिम समाज कह रहा है अखिलेश यादव जी हमारा वोट तो लिया,लेकिन बदले में सिर्फ़ हमें झुनझुना पकड़ा दिए।
न वक्फ़ के मुद्दे पर मजबूती से खड़े मिलें,न CAA-NRC पर, न हमारे घरों पर बुलडोज़र चलने पर । अब वोट सिर्फ बहुजन समाज पार्टी
समाजवादी पार्टी को मजबूत करने में @DrLaxman_Yadav मेहनत और भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
लेकिन जब राज्यसभा भेजने की बात आई, तो रामगोपाल यादव को भेजे जाने पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लक्ष्मण यादव को न्याय दो!
घर से बाहर निकलकर एक सवर्ण की जगह एक OBC को राज्यसभा भेजो।