इस मामले में मैं कुछ बोलना नहीं चाहता था लेकिन कुछ 🐗 होस ही नहीं ले रहे है !
1963 जब तुम्हें DU का D नहीं पता था तब बहादुर सिंह महलावत DUSU के JS, सेक्रेटरी और अध्यक्ष बने लगातार 4 साल (1968 में अतर सिंह महलावत VP)
1972 में शेर सिंह डागर सेक्रेटरी बने
2006 से पहले लिंगदोह कमेटी की सिफारिश लागू होने से पहले कोई भी छात्र एक से अधिक बार DUSU यानी दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ का चुनाव लड़ सकता था।
इसी परिस्थितियों में सिर्फ 16 के करीब ही ऐसे कैंडिडेट रहे हैं जो दो बार या उससे अधिक DUSU में पदाधिकारी चुने गए हैं जिसमें 6 जाट हैं ।
1.शालू मालिक NSUI
2.जयवीर राणा ABVP
3.रोहित चौधरी (शौकीन) NSUI
4.नरिंदर टोकस NSUI
5.अमित मलिक NSUI
6.बहादुर सिंह महलावत
इनके अलावा एक एक बार चुनाव जीतने वाले जाटों की बड़ी लिस्ट है 2013 से पहले की इतने में ही रोना नहीं रुक रहा तुम्हारा वो देखकर तो दहाड़े मार दोगे।
और ये दिल्ली यूनिवर्सिटी है यहां चुनाव पैसे या नेताओं से नहीं व्यवहार और भाईचारे से जीता जाता है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने गायक अंकित बालियान हत्याकांड में शामिल दो मुख्य शूटरों मोहित और सुमित को एक मुठभेड़ में मार गिराया है, जबकि इस मामले में कुख्यात गोगी गैंग की संलिप्तता सामने आई है।
DGP राजीव कृष्णा के अनुसार, हत्या की साजिश चार लोगों ने रची थी और बालियान के एक गाने को 2021 में रोहिणी कोर्ट में मारे गए गैंगस्टर गोगी की हत्या से जोड़े जाने के कारण इस वारदात को अंजाम दिया गया।
उत्तर प्रदेश पुलिस मामले के शेष अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
किसी भी अपराध में पीड़ित के साथ सभ्य समाज की संवेदना होती है, और सम्पूर्ण समाज का सहारा होता है।
हत्या जैसा संगीन अपराध में मृतक की जाति को तलाशना और कहना की उसके जाति के लोगों में आक्रोश है, अपने आप में संवेदनहीनता है क्योंकि ऐसी घड़ी में सभी विचार, जाति और क्षेत्र या अन्य भेद से ऊपर उठकर मानवीय रिश्तों को आगे रखते हैं।
अंकित बाल्यान के परिवार को न्याय मिले, ये एक जाति या फिर गोत्र का विषय नहीं, मेरा और हर न्याय प्रिय व्यक्ति का है।
राष्ट्रीय लोकदल की सीटों की फिक्र है.... अपनी नहीं
गुलाब जामुन, रसगुल्ले के कीमत की चिंता है.... गन्ना किसानों की नहीं!
गाड़ी के माइलेज पर दुखी हैं, भारत की ऊर्जा स्वाधीनता की परवाह नहीं!
सियासत की लड़ाई में कुछ सस्ते शब्द बोलने ही थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते,
कोई बात नहीं थी…
जाट समाज को टारगेट करना और कहना ABCD हमने सिखाई?
मैं इस अहंकार को देख चुका हूँ करीब से और मानता हूँ ऐसा आचरण सिर्फ़ पतन लाता है!
मुजफ्फरनगर : अखिलेश के बयान पर कैबिनेट मंत्री का पलटवार
➡️मंत्री अनिल कुमार ने बयान को आपत्तिजनक बताया
➡️सपा मुखिया का बयान दुर्भाग्यपूर्ण
➡️बयान की जितनी निंदा हो कम- अनिल कुमार
➡️‘सपा संस्थापक ने चरण सिंह की विचारधारा का सम्मान किया’
➡️‘2022 में रालोद गठबंधन से सपा को 111 सीटें मिलीं’
➡️2027 में एनडीए सपा को क्लीन स्वीप करेगा- अनिल
#Muzaffarnagar #AkhileshYadav @AnilKumarMZN
साथियों बार-बार एक बात चर्चा में आती है की राष्ट्रीय लोकदल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री माननीय चौधरी जयंत सिंह जी को अखिलेश यादव जी ने राज्यसभा भेजा। साथियों 2022 के उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन की बातचीत हुई उस समय 36 सीट लोक दल को देने की बात तय हुई थी जबकि बाद में रालोद को दी 33 सीट ।तथा उसी के साथ माननीय जयंत चौधरी जी को राज्यसभा भेजने की बात भी हुई थी यह बात माननीय अखिलेश यादव जी ने हरेंद्र मलिक के आवास मुजफ्फरनगर में समाज के संभ्रांत नागरिकों के बीच कही थी कि जयंत चौधरी को राज्यसभा गठबंधन भेजेगा उसके बाद विधान चुनाव हुआ सीटों पर विवाद हुआ ।
जो विधान सभा सीट समझोते में रालोद को दी गई थी ।
अपनी तानाशाही दिखाते हुए अखिलेश यादव जी ने उन सीटों पर अपने आप फ़ैसला करते हुए उन सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए। जिन में मथुरा की मांट विधान सभा सीट भी शामिल थी।जिसके कारण कार्यकर्ताओं में असमंजस्य की स्थिति रही और असंतोष के कारण 8 से 10 सीट रालोद बहुत कम अंतर से हार गया।उसके बाद माननीय जयंत चौधरी जी ने गठबंधन धर्म निभाते हए गठबंधन जारी रखा। इसके बाद
उत्तर प्रदेश में नगर पालिका और नगर निगम का चुनाव हुआ जिसके लिए रालोद एव सपा की एक संयुक्त कमेटी बनाई गई कमेटी द्वारा रालोद के कोटे की घोषित सीटों पर सपा ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए।
जब कमेटी के लोगों ने उच्च स्तर पर बातचीत की तो सपा ने अपने कुछ प्रत्याशी वापिस लिय जबकि कुछ सीटों पर दोनों पार्टी के प्रत्याशी चुनाव लड़ते रहे । जिससे गठबंधन के प्रत्याशी अखिलेश यादव जी की जिद के कारण चुनाव हार गए। उसके बाद लोकसभा के चुनाव के लिए गठबंधन में रालोद को 7 लोकसभा सीट देने की बात तय हुई ।
उसके बाद अखिलेश यादव जी ने उन सीटों में पांच सीटों पर सपा के प्रत्याशी लड़ाने की बात कही। जो बात चौधरी साहब को खराब लगी उन्होंने गठबंधन से अलग होने का फैसला किया। अखिलेश यादव जी के द्वारा किसी भी चुनाव में गठबंधन धर्म नहीं निभाया गया। उनकी हठधर्मिता के कारण गठबंधन टूटा।
छात्रा: मैं ताइक्वांडो की नेशनल खिलाड़ी हूं. मेरा इंटरनेशनल के लिए सलेक्शन हुआ, लेकिन मुझसे 1.5 लाख रुपए मांगे गए. इसलिए मैं इंटरनेशनल नहीं खेल पाई.
मुख्यमंत्री पुस्कर धामी: चलो बेटा अभी बैठ जाओ, कोई बात नहीं.
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सोचिए BJP की सरकार में किस लेवल का भ्रष्टाचार है. ये लाइव अब हर जगह से हटा दिया गया है.
2 दिन पहले उत्तराखंड सरकार ने 'मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन' किया. मुख्यमंत्री पुस्कर धामी बच्चों से बात कर रहे थे, तभी इस बच्ची ने भ्रष्टाचार का मामला सामने रख दिया.
पहले ये कार्यक्रम BJP उत्तराखंड के पेज और सरकार के Uttarakhand DIPR और सरकार से जुड़े तमाम पेज पर लाइव था. अब हर जगह से डिलीट हो गया है.
@Sagar_Baliyann@JAT_SAMAAJ To bhai vo khud media ko bhi bol raha tha sarkar ko bhi galat bol rha tha usne kbhi humare samaj ko kuch thodi bola to hum kis haq se bol sakte hai use media to biki hui hai yeh to sab jante hai.... lekin hum ek insan ko nhi keh sakte na