मित्र अखिलेश जी,
हाईकोर्ट का आदेश तो आपने पढ़ा हो होगा। स्कूलों में हिजाब पहनने पर हाईकोर्ट को तरफ़ से रोक लगा दी गई है।
आपके प्रवक्ता तो खुलकर हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ खड़े हो गए हैं। आपका क्या रुख़ है? क्या आप भी हाईकोर्ट के ख़िलाफ़ खड़े होंगे?
कह दीजिए अपने मन की। कह दीजिए हाईकोर्ट के इस आदेश से आपका मन दुखा है।
इंतज़ार है आपके जवाब का? बताइए हिजाब को लेकर आप क्या सोचते हैं? मौलाना लोग जानना चाहते हैं?
जय संविधान।
@yadavakhilesh
@priyanka2bharti आपसे बहस करना क्यों ?? बहस हमेशा अपने समान बुद्धि वालो से करी जानी चाहिए आप किसी इस्लामिक स्कॉलर से बहस करिए वो आपको दिन में तारे दिखा देगा
अपना लटकन बैंकॉक गया था बॉडी मसाज करवाने इसको अंदर ले गए वहां के मशहूर लेडी बॉय गिरा कर लटकन की गान मार दी तब से यहां x पर भड़ास निकाल रहा है 🤪 वो बता भी नहीं सकता कि गान मरवा आकर वापस आया है 🤪
@ashutosh83B बहुतेरे 8 साल की बच्ची से निकाह को सही मानते है इसपर चर्चा भी कर लो करोगे ?? नहीं ना अच्छा फिर हलाला पर ही कर लो करोगे?? कोई बात नहीं हमें पता है आपको चर्चा नहीं करना है आपको बाटना है
रक्षाबंधन के पहले प्रदेश के रसोइयों हेतु चार उपहार...
1- मानदेय में वृद्धि
2- दुर्घटना होने पर परिवार को ₹2 लाख की सहायता
3- प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का कैशलेस उपचार
4- साड़ी के लिए धनराशि बढ़ाकर ₹1,000
राहुल गांधी जब महिलाओं को 'आजादी' दिलाने के लिए पिंजड़ा तोड़ अभियान लेकर मैदान में आ ही गए हैं तो उम्मीद है कि वे डॉ. बी. आर. आंबेडकर के बुर्क़ा और समान सिविल कोड (यूसीसी) संबंधी विचार को पढ़ेंगे और विचार करेंगे।
बाबा साहब बुर्का को भारतीय महिलाओं की सबसे गंभीर समस्या मानते हैं। हिंदू व अन्य महिलाओं को वे मुसलमान महिलाओं से बेहतर स्थिति में पाते हैं।
आगे के शब्द बाबा साहब के हैं.
“सड़कों पर चलती हुई बुर्क़ा पहनी महिलाएँ भारत में देखे जा सकने वाले सबसे भयानक दृश्यों में से एक हैं।”
“इस तरह का अलगाव मुस्लिम महिलाओं के शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाले बिना नहीं रहता।”
“वे आम तौर पर खून की कमी, टीबी और दाँत-मसूड़ों की बीमारी से पीड़ित रहती हैं। उनके शरीर कमजोर और बिगड़े हुए होते हैं, पीठ झुकी हुई, हड्डियाँ उभरी हुई, हाथ-पैर टेढ़े। पसलियाँ, जोड़ और लगभग सारी हड्डियों में दर्द रहता है। दिल की धड़कन तेज़ होना भी आम है।”
“इस तरह की शारीरिक विकृति का नतीजा अक्सर प्रसव के समय असमय मृत्यु होता है। पर्दा-प्रथा मुस्लिम महिलाओं को मानसिक और नैतिक पोषण से वंचित कर देती है।”
“स्वस्थ सामाजिक जीवन से वंचित होने के कारण नैतिक गिरावट शुरू हो जाती है। बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग रहने के कारण वे छोटी-छोटी पारिवारिक बातों और झगड़ों में उलझी रहती हैं, जिससे उनकी सोच संकीर्ण और सीमित हो जाती है।”
“वे अन्य समुदायों की महिलाओं से पीछे रह जाती हैं, किसी बाहरी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले पातीं और गुलाम-सी मानसिकता तथा हीन भावना से दब जाती हैं।”
“उन्हें ज्ञान की इच्छा नहीं रहती, क्योंकि उन्हें सिखाया जाता है कि घर की चार दीवारों के बाहर किसी चीज़ में रुचि न लें।”
“खासकर पर्दा करने वाली महिलाएँ असहाय, डरपोक और जीवन की किसी भी लड़ाई के लिए अयोग्य हो जाती हैं। भारत में मुस्लिम समाज में पर्दा करने वाली महिलाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए, पर्दा की समस्या की गंभीरता आसानी से समझी जा सकती है।”
“पर्दा के शारीरिक और बौद्धिक प्रभाव उसकी नैतिक क्षति की तुलना में कुछ भी नहीं हैं। पर्दा की जड़ पुरुष और महिला-दोनों की यौन प्रवृत्तियों को लेकर गहरे शक में है, और इसका उद्देश्य स्त्री-पुरुष को अलग रखकर इन्हें नियंत्रित करना है। लेकिन उद्देश्य पूरा होने के बजाय, पर्दा ने मुस्लिम पुरुषों की नैतिकता को नुकसान पहुँचाया है।"
"पर्दा के कारण मुस्लिम पुरुष का अपने घर की महिलाओं के अलावा किसी अन्य महिला से कोई संपर्क नहीं होता, और घर में भी संपर्क बहुत सीमित रहता है। इससे पुरुषों की नैतिकता पर बुरा असर पड़ना स्वाभाविक है। किसी मनोविशेषज्ञ की जरूरत नहीं यह समझने के लिए कि ऐसा सामाजिक ढाँचा अस्वस्थ यौन प्रवृत्तियों को जन्म देता है।”
“हिंदू सही कहते हैं कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच सामाजिक संपर्क स्थापित करना कठिन है, क्योंकि ऐसा संपर्क एक ओर महिलाओं और दूसरी ओर पुरुषों के बीच संपर्क में बदल जाता है।”
“यह नहीं है कि पर्दा और उससे जुड़ी बुराइयाँ देश के कुछ हिस्सों में कुछ हिंदू वर्गों में नहीं मिलतीं। फर्क यह है कि मुसलमानों में पर्दा को धार्मिक पवित्रता प्राप्त है, जो हिंदुओं में नहीं है।”
“मुसलमानों में पर्दा की जड़ें हिंदुओं की तुलना में कहीं गहरी हैं और इसे हटाना तभी संभव है जब धार्मिक आदेशों और सामाजिक ज़रूरतों के बीच टकराव का सामना किया जाए।”
“पर्दा की समस्या मुसलमानों के लिए एक वास्तविक समस्या है जबकि हिंदुओं के लिए नहीं। मुसलमानों द्वारा इसे समाप्त करने के किसी गंभीर प्रयास के प्रमाण नहीं मिलते।”
(Pakistan or Partition of India, 1945, पृष्ठ 230–231, वॉल्यूम 18 में भी मिलेगा। हर लाइब्रेरी और ऑनलाइन बुक स्टोर में उपलब्ध)
राहुल गांधी के इसलिए पढ़ना चाहिए क्योंकि बाबा साहब ने मुसलमान महिलाओं को हिंदू महिलाओं से ज्यादा बुरी हालत में देखा।
क्या आप रमरतिया देवी को जानते हैं?
रमरतिया देवी ही इन दिनों भारत की राजनीति को चला रही हैं. रमरतिया देवी खुश तो सरकारें चलेंगी. रमरतिया देवी नाराज तो सरकार गई.
पति मांगे तो कई बार रमरतिया देवी उसे कुछ रुपए भी दे देती है, पर शराब पीकर आने पर डांट भी देती हैं.
नैरेटिव वगैरह कुछ नहीं होता. ये सब फैंसी चीज है. जब तक नरेंद्र मोदी रमरतिया देवी के इस सपने को जिंदा रखेंगे कि उनकी जिंदगी और बेहतर होने वाली है, तब तक विपक्ष के लिए कोई उम्मीद नहीं है.
रमरतिया देवी कौन?
- रमरतिया देवी उन 32 करोड़ महिलाओं में हैं जिनका मोदी युग में पहली बार बैंक खाता खुला.
- रमरतिया देवी के नाम पर प्रधानमंत्री आवास का पक्का मकान है, ऐसी लगभग दो करोड़ रमरतिया देवी देश में हैं.
- रमरतिया देवी ने मुद्रा लोन लिया है. हर तीन में दो लोन किसी रमरतिया देवी को ही मिला है.
- रमरतिया देवी उन 4 करोड़ लखपति दीदी में से एक बनने वाली हैं, जिनकी सालाना आय एक लाख रुपए या ज्यादा होगी.
- रमरतिया देवी की बेटी का सुकन्या समृद्धि खाता है. ऐसे साढ़े चार करोड़ खाते चल रहे हैं.
- रमरतिया देवी की सर्वाइकल कैंसर के लिए मुफ्त जांच हुई है और उनको बिना किसी खर्च के टीका लगाया गया है.
- रमरतिया देवी उन साढ़े बाइस करोड़ महिलाओं में हैं, जिनका आयुष्मान कार्ड है और जिनको मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है.
- रमरतिया देवी इस चिंता से मुक्त हैं कि घर में अनाज है या नहीं.
- रमरतिया देवी के पास जी राम जी नरेगा कार्ड है. काम भी मिल जाता है.
- रमरतिया देवी के पास सब्सिडी वाला एलपीजी सिलेंडर है. देश में दस करोड़ से ज्यादा रमरतिया देवी को ये कनेक्शन मिला है.
- रमरतिया देवी के घर में पहली बार टॉयलेट बना है. किसी और के खेत में जाने के अपमान से मुक्ति पाकर वे खुश हैं.
रमरतिया देवी के जनधन एकाउंट में कई तरह का पैसा आ रहा है.
नरेंद्र मोदी की सुविधा है कि रमरतिया देवी खुश हैं. लेकिन रमरतिया देवी इतने से संतुष्ट नहीं हैं. उनको और चाहिए.
अहिरों और अशफ़ाक़ों के प्रिय अखिलेश जी,
आप आरक्षण की बात कर रहे हैं! ताज्जुब है।
ग़ज़ब करते हैं महाराज आप। आप वही हैं ना जो यादव और मुस्लिमों के अलावा किसी को कुछ समझते नहीं थे? आप वही हैं ना जिनके राज में यादव और मुसलमान ख़ुद को सीएम समझते थे? आप वही हैं ना जिसके MY वाले लोग हफ़्ता वसूली करते थे?
जब आप सत्ता में थे तब क्या आपने कभी राजभर, कुर्मी, जाट, निषाद, नाई धोबी, गोंड, प्रजापति, आर्कवंशी, बंजारा, बहेरिया, मुसहर, पासी से लेकर दर्जनों जातियों को उनका सम्मान देने की सोची? नहीं ना? हमारी बात पर यक़ीन ना हो तो किसी गांव-टोले में चले जाइए, लोग इतिहास गिना देंगे।
जब आप लोग संघ प्रमुख के बयान को ग़लत तरीक़े से पेश करके लोगों को भरमा रहे थे, तब प्रधानमंत्री जी ने जो कहा था, वो याद भी है? ना हो तो ये वीडियो भी सुन लीजिए। पीएम मोदी ने कहा था, “अगर कोई आरक्षण छीनने की कोशिश करेगा तो मोदी अपनी जान की बाजी लगा देगा”।
झूठ मत फैलाइये, जैसे संविधान के नाम पर दो साल पहले आपने और आपके दुलारे मित्र राहुल जी ने फैलाया था। लोग आपको जानते हैं। अभी सरकार नहीं आई लेकिन आपके पीडीए वाले “ए” बेक़ाबू हो चले हैं। अहिर और अशफ़ाक़ पीट रहा है, हत्या कर रहा है, इनके तो कहने ही क्या!
रही बात आपकी सोच की तो शिवपाल जी आज़म ख़ान को गृह मंत्री बनाने की बात कर रहे हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि वो अशफ़ाक़ को कहना चाह रहे कि जो करना है करो, आज़म आयेंगे तो सब माफ़।
बस इतना समझ लीजिए। आप लोगों को सरकार में तो आना नहीं है। बेमतलब अहिरों और अशफ़ाक़ों को क्यों बर्बाद कर रहे हैं। ताव में आकर ये हरकत करेंगे, फिर बाबा की सरकार इन्हें वहीं पहुँचायेगी जहां इनकी जगह है। फिर आप रोयेंगे कि अत्याचार हो रहा है।
अपनों को बर्बाद मत कीजिए। परिवार बचाइए। पार्टी ही परिवार है और परिवार ही पार्टी है। बचेगा तो आपका परिवार भी नहीं। चच्चू पर नज़र रखियेगा। हर लंका में एक विभीषण ज़रूर होता है। बाक़ी आप समझदार हैं।
जय भारत, जय श्रीराम, जय श्री कृष्ण,
जय परशुराम, जय महाराजा सुहेलदेव।
@yadavakhilesh
अखिलेश जी! नमस्ते।
सत्ताईस में सत्ता की सोचने से पहले सत्ताईस से पहले सपा कैसे बचाई जाये, ये सोचना शुरू कर दीजिए। क्योंकि आपके लोग खुद आपके पीडीए की पोल खोल रहे हैं।
पता है न! आपके पीडीए का पी आपके साथ है नहीं, ना पंडित और ना पिछड़ा। आपके झूठ से जो थोड़ा सा ‘डी' आपके साथ आया था, वो भी अब आपके खिलाफ खुल के खड़ा होने लगा है। बचेगा सिर्फ अशफ़ाक़ वाला ए’।
सहारनपुर सर्किट हाउस में आपके वाले पीडीए की असली वाली पोल बहुत धूम-धड़ाके के साथ खुल के सामने आ गई है? यक़ीन ना हो तो अपने प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल जी से पूछ लीजिएगा, वो वहीं सर्किट हाउस में बैठकर बस मुंह ताकने का काम कर रहे थे।
दलित समाज की जिला पंचायत सदस्य बहन ममता चौधरी ने भरी मीटिंग में आपके नेताओं को बहुत कायदे से सुनाया है। उनके साथ दलित समाज और गैर यादव पिछड़ा समाज के सपा कार्यकर्ताओं ने भी मिलकर आपके 'पीडीए यानी पीट देगा अहीर, पीट देगा अल्पसंख्यक’ (सपाई) की कायदे से पोल खोली है।
दलित और गैर यादव पिछड़ा समाज के आपके लोग ही अब सामने आकर चीख चीख के आपके 'पीट देगा अहिर' और 'पीट देगा अशफाक' गैंग का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं और आप हैं कि सोशल मीडिया पर टाइम पास करने से ही फुरसत नहीं हैं।
ए अखिलेश बाबू, आप तो ट्विटर एसी पीसी के महारथी हैं, तो अपने लोडरों को शांति से पीसी करने का सलीका भी सिखाइए।
सहारनपुर सर्किट हाउस में ऊ कुल लोडरवा सब कुर्सी के लिए लड़ रहे थे... बताइए! यही संस्कार दिये हैं आप?
बाकि, पत्रकारों को जलीज करना, गाली-गलौच और मारपीट करना तो आप सपाई गुंडों ने जैसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझ रखा है।
ए मित्र, सत्ता की चाभी तो मिलने से रही, अब टेंशन सपा को बचाने की लीजिए।
जय भारत, जय श्रीराम, जय श्री कृष्ण, जय महाराज सुहेलदेव!
@yadavakhilesh
हिरण पूरे दिन घास खाने मे लगा रहता है, और घास को प्रोटीन में बदलने में ही लगा रहता है।
ब्रह्मांड में प्रोटीन का प्राइमरी सोर्स पौधों से ही मिलता है
दूसरी तरफ माँसाहारी जानवरों को जब तक भूख नहीं लगती, तबतक आराम से पड़े रहते हैं। क्योंकि उन्हें पता है कि उनके लिए प्रोटीन का इंतजाम करने के लिए हिरण जो काम पर लगा हुआ है। हिरण पौधों से प्रोटीन लेकर फिर उसे अपने शरीर में जैविक प्रोटीन में बदल देगा
जब तक हिरण जिंदा है, जंगल में खूंखार जानवर मस्त सोते है, पर हिरण जब कम होने लगते हैं तो ये भूखे खूंखार भेड़िये नए जंगल की तलाश करता है।
हिन्दू रूपी हिरणों ने बड़ी मेहनत से सोना, चांदी, हीरे, ज्ञान-विज्ञान, जमीन, धंधा, फैक्ट्री इकट्ठा किया था, क्या हुआ ?
एक खूंखार नस्ल आई और साफ कर गई सब। ईरान लिया, अफगानिस्तान लिया, पाकिस्तान ले गये, कश्मीर लिया, बांग्लादेश लिया, केरल, बंगाल और असम भी लगभग गया ही समझो।
उस नस्ल ने सिर्फ शिकारी के गुण विकसित किये हैं...
अब पाकिस्तान और बांग्लादेश में खाने पीने की भयंकर कमी आ रही है, और महंगाई चरम पर है। क्योंकि हिन्दू, पंजाबी, सिंधी जैसे हिरण कम हो चुके हैं, जिनकी वजह से इकॉनोमी चल रही थी। शेष कार्य सिर्फ शरीयत को 100 प्रतिशत लागू करना है, *जिसकी वजह से धीरे धीरे पाकिस्तान बांग्लादेश में हिरण खत्म हो रहे हैं,और खूंखार नरभक्षी बढ़ रहे हैं। अब उन नरभक्षियों की नजर नए जंगलों पर है, वो है भारत*। इसे ही वो गज़वा ए हिन्द कहते हैं और उनकी मजहबी किताबों में सैकड़ों साल पहले इसका जिक्र हो चुका है, हर शांतिप्रिय भेड़िये के मन में वो ऐसे बैठा हुआ है, जैसे तुम्हारे लिए राष्ट्रगीत।
इस आखरी जंग मे सेना कुछ नही कर पायेगी क्योंकि ये जंग अंदर से शुरू होगी फिर बाहर से.....
जितनी तेजी से पाक-बांग्लादेश से हिरण रूपी हिंदू कम हो रहे हैं, उतनी ही जल्दी इसकी संभावना बढ़ रही है और ये जंग अचानक नहीं होगी, तुम पहले से ही हो इस जंग में। विश्वास न हो तो असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, केरल आदि राज्यों के उनके बाहुल्य इलाके में घूम के आओ, वहाँ से हिंदू रूपी हिरणों ने घर और संपत्ति बेचकर कहीं और बसेरा बना लिया है।
हमारे यहाँ के हिरण कहाँ जाने की सोच रहे हैं ?
समझ लो ...
जब किसी मोहल्ले या कालोनी में हिन्दू 20% रह जाते हैं तब एक साइलेंट उत्पीड़न का दौर शुरू होता है ....
कुछ इस प्रकार
1 - आप ... आपका परिवार रात को बेधड़क सो रहा होता है तभी आपका पड़ोसी सलमान अपनी दीवार जो के आपके दीवार के साथ मिली होती है, में रात के 11बजे कील ठोंकना शुरू कर देता है ।
2- मुर्गे बेचने वाला अब्दुल हजार मुसलमानो के घर छोड़ के सिर्फ आपके सामने वाले सलीम के चबूतरे पर बैठ के मुर्गे काटना शुरू कर देता है ।
3- कल रात अब्दुल के घर आई मीट की खाली काली पन्नी सुबह आपके दरवाजे पे फड़फड़ाती मिलेगी ।
4 - रजिया का बच्चा रोज आपके चबूतरे पे टट्टी कर जाएगा। कभी रजिया आके साफ करेगी कभी कह देगी मेरे बच्चे ने नही किया है । मजबूरन आपको साफ करना पड़ेगा ।
5- आपके घर मे जवान बहु बेटी है तो आपसे तीन मकान छोड़ के रहने वाले गफूर मियां के यहां दिन भर अवारागर्दों का अड्डा जमा रहेगा।
वो आवारा गाहे बगाहे बिना जरूरत ही आप के घर के सामने से बार बार निकलेंगे आपस मे गन्दी भद्दी गालियों भरी भाषा आपकी ही बहन बेटियों को सुनाते हुए।
6- नामाज के टाइम आप से चौथे मकान वाले शारफ्त मियां आपका tv बंद कराना कभी नही भूलते ।
7 - होली के रंग और पानी से इस्लाम खतरे में पड़ जाता है और दीवाली के पटाखे से बकरियों को परेशानी होती है ।
7- बकरीद पे तो माहींनो तलक आप को गंदगी और बदबू से निजात नही मिलने वाली ।
7 - आप कितने भी शरीफ हों ... महीने में तीन चार बार आप से लड़ाई का बहाना वो ढूंढ ही लेते हैं ।
8 - पुलिस प्रशासन से शिकायत करें तो आप अकेले पड़ जायँगे और उनकी तरफ से हजार लोग आपको ही झगड़ालू और साम्प्रदायिक बताने लग जायँगे ।
ये सब उत्पीड़न के तौर तरीक़े साबित करना आपके बस की बात नहीं ।
आपके शुभचिंतक आपको वहाँ से पलायन की सलाह देंगे और प्रशासन इसे आपका निजी मामला बताएगा !!
बाकी करना क्या है आप खुद समझदार हैं, दिमाग़ में आया सोचा बता दूँ, नहीं विश्वास तो अपने बाप दादा या किसी बजूर्ग़ से पूछ लेना जिन्होंने भारत पाकिस्तान का विभाजन अपनी आँखो से देखा है वो सब बता देग़े।
कांग्रेस मुस्लिम लीग कब बनी?
कांग्रेस ने 1896 में जब पहली बार वंदे मातरम पूरा यानी "त्वं हि दुर्गा..." समेत गाया था, उस साल कांग्रेस के अध्यक्ष रहीमतुल्ला सयानी थे. बाद में हकीम अजमल खान और मुहम्मद अली जहौर कांग्रेस अध्यक्ष बने तक भी वंदे मातरम सबने गाया.
कांग्रेस मुस्लिम लीग बाद में बनी.
नेहरू 1937 में कांग्रेस अध्यक्ष बने.
जिन्ना को खुश करने के लिए नेहरू ने वंदे मातरम को कटवा दिया. जिन्ना ने नेहरू के हाथों गीत कटवा दिया पर पाकिस्तान की मांग नहीं छोड़ी.
हालांकि कांग्रेस पूरी तरह मुस्लिम लीग शाहबानो जजमेंट और सच्चर तथा रंगनाथ मिश्रा कमेटी के बाद बनी.
राजस्थान के पूर्व राज्यपाल, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, 'पद्म विभूषण' ‘बाबूजी’ कल्याण सिंह जी की पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।
परम 'रामभक्त' 'बाबूजी' का संपूर्ण जीवन रामकाज, राष्ट्रनिष्ठा, सांस्कृतिक चेतना एवं लोक-कल्याण के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी आदर्श है।
उनके साहसिक, ऐतिहासिक योगदान और सुशासन के प्रति अखंड प्रतिबद्धता को राष्ट्र युग-युगांतर तक स्मरण करेगा।