पश्चिम बंगाल के भाइयों-बहनों,
विचारधारा की इस लड़ाई में BJP को सिर्फ कांग्रेस ही हरा सकती है। वो अधिकार छीनते हैं, हम दिलाते हैं। वो संविधान मिटाते हैं, हम बचाते हैं।
वो भारत की विविधता मिटाना चाहते हैं, हम बंगाल के साथ हर संस्कृति, हर भाषा का सम्मान करते हैं।
आइए, कांग्रेस को भारी मतों से विजयी बनाकर बंगाल में न्याय, सम्मान और प्रगति की सरकार बनाएं।
ऊना की चीख आज भी इंसाफ के दरवाज़े पर दस्तक दे रही है।
बीते 10 सालों से पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
अपमान, हिंसा और हत्या - BJP शासित गुजरात में दलितों, आदिवासियों की यही हकीकत बना दी गई है।
मोदी जी के इसी असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण मॉडल को पूरे देश पर थोपा जा रहा है।
पूर्व सेना प्रमुख का बयान उजागर कर देगा कि मोदी जी और राजनाथ जी ने सेना को कैसे निराश किया।
अपने पर्दाफ़ाश के डर से वो मुझे संसद में बोलने नहीं दे रहे।
राहुल गांधी ने ये बात सही कही थी...
साहब के लिए दो भारत हैं, अमीरों के लिए अलग कानून और गरीबों के लिए अलग कानून?
गरीबों को जेल और अमीर को बेल मिलती है?
यार ये राहुल गांधी जी किस मिट्टी के बने है...
रात को 12:30 बजे एम्स दिल्ली में इलाज के लिए देशभर से आए मरीज़ों और उनके परिवारों से मुलाकात कर, उनका दर्द सुना और हिम्मत दी। https://t.co/KneArfN0bz
"कुछ नहीं बचता है!"
अजीत भाई के ये चार शब्द और उनके आसूं आज भारत के हर मेहनतकश गरीब और मध्यमवर्गीय की कहानी बयां कर रहे हैं।
नाई से लेकर मोची, कुम्हार से लेकर बढ़ई - घटती आमदनी और बढ़ती महंगाई ने हाथ से काम करने वालों से अपनी दुकान, अपना मकान और स्वाभिमान तक के अरमान छीन लिए हैं।
आज की ज़रूरत है ऐसे आधुनिक उपाय और नई योजनाएं, जो आमदनी में बढ़त और घरों में बचत वापस लाएं।
और, एक ऐसा समाज जहां हुनर को हक़ मिले और मेहनत का हर कदम आपको तरक्की की सीढ़ियां चढ़ाए।
Today, I met with a group of Manipuri people living in Delhi who shared their heartbreaking struggles since the onset of the conflict in their region. They spoke of the pain of being separated from loved ones and the physical and mental toll the conflict has taken on their communities.
Out of concern for their safety, they requested that their faces not be shown, fearing retribution. This is the harsh reality our brothers and sisters in Manipur endure—a state of constant fear.
As we celebrate Independence Day, let us reflect on the plight of Manipur, where true freedom remains elusive. I urge the Prime Minister once again to visit Manipur and impress upon both Central and State governments to work towards a peaceful resolution at the earliest.