मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
Mr. Modi, our students are demanding Dharmendra Pradhan’s resignation.
Don’t insult their intelligence with this pathetic midnight video.
1. Sack Pradhan.
2. Punish those who beat students.
3. Apologise
PM Modi has cut off internet around Jantar Mantar, which is creating immense panic.
This is a direct assault on freedom of speech, to silence the voice of India’s youth and hide the Delhi Police’s brutalities.
Be warned, Mr. Modi - any untoward step to quash this youth protest will be deeply disastrous and the people will deliver a historic punishment against you.
What the hell is going on? This js the Leader of Opposition of the world’s largest democracy. Modi Shah’s goon police have shut down all central Delhi just so they can do all this. Enough!!
किशनगंज से कांग्रेस सांसद @DrMdJawaid1 जी को बिना वर्दी वाले गुंडों द्वारा PM House के बाहर घसीटना और मारना सिर्फ एक सांसद पर हमला नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर हमला है।
अमित शाह जी, कल छात्र और आज सांसद.. किस किस को मारेंगे?
भाजपा को शिक्षा में भी साम्प्रदायिकता नज़र आती है। शिक्षा, शिक्षक, शिक्षार्थी और शिक्षा के बाद मिलनेवाली नौकरी भाजपा के एजेंडे में है ही नहीं।
भाजपा अपने अनरजिस्टर्ड संगी-साथियों के अवैधानिक भवनों को कब ढहाएगी? जब संगी-साथी ही अपंजीकृत है, तो उनके भवन, कार्यालय, संस्थान कैसे जायज़ होंगे?
निंदनीय!
4-5 दिन हो गए इस बात को जब भाजपा की मंत्री के पति ने बिहार की बेटियों की 20-25k बोली लगाई थी।
आज तक NDA के एक नेता का मुँह नहीं खुला! जब मोदी जी के माँ को एक पागल ने गाली दी थी तो ये आँसू बहा रहे थे!
बिहार की बेटियों की बोली लगी तो आँसू नहीं छलके नेता जी?
2012 में निर्भया कांड ने पूरे भारत को एकजुट कर दिया था।
राष्ट्रपति भवन तक लोग सड़कों पर उतर आए थे और गुस्सा साफ़-साफ़ कांग्रेस सरकार पर था।
लेकिन 2014 के बाद क्या हुआ?
🚨 प्रज्वल रेवन्ना के मामले पर देश नहीं उबलता
🚨 हाथरस की दरिंदगी पर भी वैसा आक्रोश नहीं दिखा
🚨 उन्नाव में कुलदीप सेंगर पर भी देशभर में ग़ुस्सा नहीं उमड़ा
आख़िर ऐसा क्या बदल गया? 😢
"मैम, मुझे CRPF के लोग बंदी बना चुके है,
गृह मंत्रालय से आर्डर आ गया है!
मैम अगर मैं घर गई तो मकान मालिक, मकान खाली करा देंगे!
मेरी मां को सड़क पर फेंक दिया गया है"
यह उन्नाव की रेप पीड़िता कह रही है!
अरे साहब लोग अगर आपको रेप पीड़िता से इतनी ही नफरत है तो उल्टा उन्हें ही फांसी पर चढ़ा दीजिए न!
ऐसे क्यों तड़पा रहे है, प्रताड़ित कर रहे है!
पहले तो उसके साथ बलात्कार करने वालों को सज़ा से मुक्त कर दिया, फिर ज़मानत और अब पीड़िता को बंदी बना दिया!
शर्मनाक है ये देश के लिए!
मध्यप्रदेश भोपाल में एक रेप सर्वाइवर…
जिसे न्याय मिलना चाहिए था,वो 7 महीने तक डर, धमकी और मानसिक यातना सहती रही।
आख़िरकार टूटकर उसने आत्महत्या की कोशिश की।
जाने से पहले उसने 6 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा—
जिसमें उसने मध्य प्रदेश के एक BJP नेता के परिवार पर
मानसिक उत्पीड़न और डराने के आरोप लगाए।
ये सिर्फ़ एक सुसाइड नोट नहीं,
ये सिस्टम पर लिखा गया आरोप पत्र है।
जब पीड़ित ही ख़ामोश कर दिए जाएँ,
तो सवाल उठता है—
न्याय किसके लिए है?
#JusticeForHer #RapeSurvivor #StopHarassment #HerVoice #IndiaAsks #NoMoreSilence
झारखंड में महागठबंधन की सरकार का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला
बिहार में महिला डॉक्टर डॉ. नुसरत प्रवीण के साथ हुई अमानवीय और शर्मनाक घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया।
हिजाब खींचना सिर्फ एक महिला का नहीं, संविधान और इंसानियत का अपमान है।
झारखंड के लोकप्रिय मुख्यमंत्री आदरणीय हेमंत सोरेन जी @HemantSorenJMM के नेतृत्व में और स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के मानवीय निर्णय से यह साफ संदेश गया है—
झारखंड में बेटियों और डॉक्टरों के सम्मान से कोई समझौता नहीं।
👉 डॉ. नुसरत प्रवीण को झारखंड में
✔️ ₹3,00,000 मासिक वेतन
✔️ सरकारी नौकरी
✔️ मनचाही पोस्टिंग
✔️ सरकारी फ्लैट
✔️ पूर्ण सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण
यह नियुक्ति नहीं, सम्मान की जीत है।
जहां अपमान था, वहां झारखंड ने इंसानियत की मिसाल पेश की।
#RahulGandhi
#JharkhandModel
#RespectWomen
#DoctorSafety
#HemantSoren
#DrIrfanAnsari
#SaveDignity
#kalpanasoren
@sirivellaprasad@INCBihar@BJP4Jharkhand
ये भारत सरकार में कैबिनेट मंत्री, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री तथा हम पार्टी के संरक्षक श्री जीतन राम मांझी जी है जो ठगेश कुमार जैसे पिद्दी पालतू आयुक्त के मुँह पर करारा तमाचा जड़ डंके की चोट पर खुले मंच से चुनाव नतीजों में हेरा-फेरी, मशीनरी और धांधली से चुनाव जितने का शाही फॉर्मूला बता रहे हैं।
ये बता रहे है कि कैसे इनकी पार्टी ने 2020 में 2700 वोट से हारने के बाद भी टिकारी विधानसभा का चुनाव जीता था और कैसे त्रिपुरा कैडर के 2006 बैच के बिहार में डेप्युटेशन पर पदस्थापित तत्कालीन भ्रष्ट, जातिवादी, निकम्मे, नालायक व नाजायज जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने अपनी शपथ भूल बाबा साहेब के संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए अनैतिक रूप से चुनाव जिताने में उनकी मदद की थी। इसका उस भ्रष्ट अधिकारी को ईनाम भी मिलता रहा और वह बिहार में एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन प्राप्त करता रहा।
केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी इस बार 2025 चुनाव में टिकारी विधानसभा क्षेत्र से का चुनाव हारने तथा पिछला कारनामा ना दोहरा पाने पर अफसोस जता रहे हैं। साथ ही त्रिपुरा में बैठा यह अधिकारी भी शोक मना रहा है। अब कहाँ है बिकाऊ चुनाव आयुक्त और चुनाव आयोग? क्या यही है लोकतंत्र?
यही मोदी की कृत्रिम लोकप्रियता और बेईमानी के चाणक्य की सच्चाई है। इन लोगों ने मिलकर दोनों चुनाव में युवा जुझारू क्रांतिकारी नेता तेजस्वी यादव का राजनीतिक वध करने का असफल प्रयास किया। लेकिन सच को कब तक छुपाओगे? कब तक जनता को 41 हज़ार करोड़ बांटकर, बेईमानी कर, धांधली कर, मशीन की मदद से भ्रष्ट अधिकारी के काले कारनामों से झूठे चुनाव जीतते रहेंगे? तुम्हारा भांडा अवश्य फूटेगा।
#Bihar #TejashwiYadav #RJD #news
जदयू प्रवक्ता बार- बार कह रहे " नीतीश जी की देन है कि मुस्लिम महिला डॉक्टर बनी है! हम गौरवान्वित है"
लग तो ऐसा रहा है जदयू नकाब खींचने पर गौरवान्वित है!
नीतीश जी जिस महिला डॉ का नकाब खींचे अब वो नौकरी करने से डर रही है, उन्होंने बिहार छोड़ दिया!
अब भी गौरवान्वित हो रहे होंगे?
यह क्या हो गया है नीतीश जी को?
मानसिक स्थिति बिल्कुल ही अब दयनीय स्थिति में पहुंच चुकी है या नीतीश बाबू अब 100% संघी हो चुके हैं?
@yadavtejashwi#RJD#bihar#TejashwiYadav
सार्वजनिक मंच पर एक महिला के साथ किया गया मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का व्यवहार यह साबित करने के लिए काफी है कि मुख्यमंत्री पद की गरिमा संभालने की मानसिक क्षमता वे खो चुके हैं।
जो व्यक्ति स्वयं को सुशासन और नैतिकता का प्रतीक बताता था, आज वही व्यक्ति सत्ता के अहंकार में एक महिला की गरिमा पर हाथ डालने से भी नहीं हिचकता। यह कोई व्यक्तिगत चूक नहीं, बल्कि आरएसएस-बीजेपी की उसी पितृसत्तात्मक मानसिकता का परिणाम है, जिसकी गोद में बैठकर नीतीश कुमार अब अपनी पहचान और विवेक दोनों खो चुके हैं।
मुख्यमंत्री का यह आचरण स्पष्ट करता है कि वे अब संवैधानिक मर्यादाओं, महिला अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बन चुके हैं। एक महिला को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना अपराध की श्रेणी में आता है—उसे सत्ता में बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
नीतीश कुमार का मानसिक संतुलन समाप्त हो चुका है और उनका मुख्यमंत्री पद पर बने रहना बिहार की महिलाओं के सम्मान पर सीधा खतरा है। इसलिए अब किसी स्पष्टीकरण, सफ़ाई या नाटक की नहीं, तत्काल इस्तीफे की आवश्यकता है।
बिहार की जनता, खासकर महिलाएं, अब यह अपमान और बर्दाश्त नहीं करेंगी। नीतीश कुमार को अविलंब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए—यही लोकतंत्र, महिला सम्मान और बिहार की गरिमा की मांग है।
@Gyaneshwar_Jour@OfficeOfSanjay@yadavtejashwi@laluprasadrjd@RJDforIndia