वैश्विक सूचकांक में भारत को कम और बांग्लादेश को ज्यादा खुशहाल और आर्थिक समृद्ध बताने वाले लोग जरा इस ख़बर पर गौर करे, वहा के लोग कर्ज ��ुकाने के लिए अपनी किडनिया बेंच रहे है।यह बानगी तो सिर्फ जयपुर में है बाकी पूरे देश ��ें कितने बांग्लादेशी डोनर है इसका अंदाजा लगाना मुश्किल
आज रविवार है वादे के मुताबिक #नेशनल_फ्रीडम_यूनियन के सदस्यों को आपस में जोड़ने का कार्यक्रम रहता है
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@Kushalburdak
@Pradeep005808 गैर वर्चस्व वाली जातियों के थोथे सरंक्षण कारी बनकर चुनावों को जातिवादी रंग दे दिया और राजपूतों पर सामंतसाही का लेबल लगाकर अन्य जातियों को डायवर्ट करने का गेम भी इसी चुनाव में थार की धरती पर खेला गया।
@Pradeep005808 आखिर इंतजार आपको हो भी क्यों नही क्योंकि इस चुनाव में दो जातियों का वर्चस्व दांव पर लगा हुआ है।और राजपूत बेचारे इस चुनाव में सामंत भी बन गए जो पिछली दो बार के चुनाव में कैलाश चौधरी की जीत पर 36 कोम का हिस्सा हुआ करते थे।खेर इंतजार 4 जून का सबको है
@Pradeep005808 जाखड़ साहब भाटी चुनाव हारेगा तो हार जायेगा ,कोई बड़ी बात नही लेकिन बंदे ने दो बार के केंद्रीय मंत्री को तीसरे नंबर पर धकेल के चुनाव रो���ांचक बना दिया यह बड़ी बात है ।बाकी विधायक तो है और समय इनके पास खूब है।सांसद तो फिर कभी बन जायेंगे लेकिन आपको इनकी हार का बेसब्री से इंतजार है
एक पीढ़ी के संघर्ष और आत्म विश्वास की कहानी
ये है नाथू सिंह राठौड, निवासी मोड़ी कलां (नागौर)
गांव से जयपुर गए , MA, BEd किया, नौकरी नहीं मिली तो सब्ज़ी का ठेला लगाया । ठेले वालों की पुलिस द्वारा की जाने वाली जलालत और चौथ वसूली के खिलाफ आवा��़ उठाई, यूनियन बनाई और उनको संरक्षण दिया । छोटा मोटा व्यापार कर जयपुर में जडे जमाई, ताकि अपने बच्चों का भविष्य संवार सके। सात पीढ़ी में कोई सरकारी नौकर नहीं ।
बिटिया मृणालिका राठौड ने अच्छे नंबरों से स्कूल कर आगे पढ़ने की इच्छा जाहिर की । पिता ने उसकी इच्छानुसार लेडी श्रीराम कॉलेज दिल्ली में दाखिला कराया ।PG कर एक NGO में नौकरी करते हुए civil services के लिए मेहनत की ।
इस बार 125वीं रैंक हासिल कर IAS में चयनित हुई ।
दोनों का प्रेरणा दायक संघर्ष ।
खुदी को कर बुलंद इतना कि खुदा बन्दे से पूछे
बता तेरी रज़ा क्या है ।
शुभकामनायें मृणालिका राठौड़ को ।
(साभार: बहादुरसिंह राठौड़)
@Kushalburdak सोसल मीडिया को तलाक दे ,आध्यात्म का सहारा ले,शांतिपूर्वक और स्लो मोशन वाले भजन सुने,खुद को ज्यादा से ज्यादा व्यस्त रखे,सामाजिक मेल मिलाप का दायरा बढ़ाए और किताबो के साथ स्नेह रखते हुए उन्हे उचित समय दे,सब नॉर्मल हो जायेगा और बाकी नियति पर छोड़ दे,जो होगा अच्छा होगा