X एक toxic place है
परेशान होकर मैंने उसे दो साल से छोड दिया था
अब BB के लिए मैं फिर यहाँ वापिस आई
और फिर वही गंद मेरी टाइमलाइन पर दिखने लगा
कितने Block कर दिए और कितने Block करूँ कि ऐसे मैसेज मुझे ना दिखे
TV मैं देखती नही और YT पर वैसा content ही दिखता है,जो regularआप देखते हो
गरीब पिता प्राइवेट हॉस्पिटल का बिल नही दे पा रहा था। प्राइवेट हॉस्पिटल वाले ने 7 साल के critical patient को lama करके discharge दिखा दिया और अपनी एम्बुलेंस में पेशेंट को जयपुर के एक सरकारी हॉस्पिटल में admit कर दिया। बच्चे की हालत और खराब हो गयी है।
अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, कौन व्यक्ति कौन सा मंत्रालय संभालेगा, कौन कहाँ से चुनाव लड़ेगा, ये लीक नहीं हो पाता,
लेकिन जहां जहां सरकार बनाते हैं वहाँ तुरंत पेपर लीक हो जाता है, अजीब समस्या है
The social media is full of examples. Workshops are replete with vehicles facing issues due to incompatible fuel. Just because you keep repeating the same "challenge" while arrogantly ignoring the response, the problem doesn't go away.
@nitin_gadkari open your eyes, ears and mind to the grievances of ordinary people of this country. Don't be an ostrich.
गैस सिलेंडर पर जब सब्सिडी दी जा रही थी…
तब सरकार ने सक्षम और अमीर लोगों से अपील की थी
आप अपनी सब्सिडी छोड़ दिजिये, ताकि गरीब लोगों को ज़्यादा से ज़्यादा सब्सिडी मिल सके…
लेकिन जब बात नेताओं पर आती है
तब गरीब जाए भाड मे…
ज़्यादा से ज़्यादा सब्सिडी हमें मिलनीं चाहिए…!!!
वाह रे मेरे देश के कर्णधार नेताओं…
सदके जावा तुम्हारे दोगलेपन पर…!!!
दरभंगा AIIMS की असलियत....?
2014 में चुनाव जीतने ही मोदी जी ने घोषणाओं का दौर शुरू किया।
उसी दौर में एक घोषणा हुई थी दरभंगा में AIIMS बनाने की।
2015 में घोषणा हुई।
2016 में 1264 करोड़ का बजट मिल गया।
उसके बाद काम शुरू हुआ और सबसे पहले AIIIMS का मैन गेट बना।
फिर शायद वो गेट मोदी जी को पसंद नहीं आया।
फिर उस गेट का रंग बदला गया।
रंग बदलते ही पैसे खत्म फिर 2026 में 700 करोड़ का बजट दिया गया।
आज 11 साल और 1964 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी सरकार से सिर्फ एक गेट बना है।
आखिर ऐसी लापरवाही और ढिलाई क्यों?
आप लोगों की क्या राय है?
AIIMS की घोषणा और 1964 करोड़ रुपए की क्या कहानी है?
जयपुर राजस्थान का सबसे सुनियोजित ढंग से बसाया गया शहर हैं…
शहर बसाने वालों ने सोचा था कि अगले हज़ार साल तक यहाँ किसी तरह की अव्यवस्था नहीं होगी…
लेकिन उनको क्या पता था कि एक ऐसी नालायक पीढ़ी आएगी…
जो तीन सौ साल होते होते ही शहर का सत्यानाश कर देगी…
Saturday night humour:
Recent Announcement:
Marriage Certificate is Not A Proof That You Are Married.
It’s Just a Document To Show That You Had Attended Your Marriage Ceremony.
😁😁
A friend shifted his son from a ₹40,000 school to a ₹3 lakh school.
New campus.
Air-conditioned classrooms.
Smart boards.
Fancy annual functions.
One year later, he compared the textbooks.
90% were the same.
Then he stopped tuition for a few months.
The grades crashed.
That’s when he realized:
The school was selling a premium experience.
The actual learning was being delivered by parents and coaching classes.
@kkjourno इन लोगो के हिसाब से सैनिक सेना में वेतन के लिए काम कर रहे है और ये उनका फर्ज है
बस नेता लोगो को ही फ्री की salary और पद ना होने पर भी पेंशन और मुफ्त की सुविधाएँ लेने का जायज हक है
बाकि जनता तो नेतारूपी आका की गुलामी के लिए पैदा हुई ।उसे बुरा मानने या आवाज उठाने का कोई हक नही है
इन लोगो के हिसाब से सैनिक सेना में वेतन के लिए काम कर रहे है और ये उनका फर्ज है
बस नेता लोगो को ही फ्री की salary और पद ना होने पर भी पेंशन और मुफ्त की सुविधाएँ लेने का जायज हक है
बाकि जनता तो नेतारूपी आका की गुलामी के लिए पैदा हुई ।उसे बुरा मानने या आवाज उठाने का कोई हक नही है
देश की संसद में झूठ बोला गया था कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत का एक भी जवान शहीद नहीं हुआ।
अब इसी ऑपरेशन में शहीद होने वाले छह सैनिकों के नाम सार्वजनिक किए गए हैं।
सूबेदार मेजर पवन कुमार
राइफलमैन सुनील कुमार
लांस नायक दिनेश कुमार
एविएशन टेक्नीशियन मुरलीनाइक
हवलदार सुनील कुमार सिंह
सार्जेंट सुरेंद्र कुमार
जिनके बेटे देश के लिए शहीद हो गए, उन्हें कैसा महसूस हुआ होगा जब अपनी पीठ ठोंकने के लिए उनकी शहादत को नकार दिया गया?
आप बिल्कुल ग़लत नहीं है। चंपत राय और धर्मेंद्र प्रधान ग़लत नहीं हैं तो आप क्यों होंगे? आप ग़लती मान लेंगे तब भी हम आपको ग़लत नहीं मानेंगे। मोहन यादव भी तो सीएम बनने से पहले रीयल इस्टटे का बिज़नेस कर रहे हैं। आप तो खीरा उगा रहे हैं। रीयल इस्टेट के सामने ये जीरा है। मंत्रिमंडल में आप बने रहें यही भारत का हर खीरा दुआ कर रहा है। खीरा है सदा के लिए। हीरा है मैडम बाइडन के लिए।
>ब्रो का नाम भागीरथ चौधरी है
>ब्रो अपना केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री है
>ब्रो को खीरे बहुत पसंद है
>ब्रो ने खीरे की खेती करने का सोचा
>ब्रो ने अपने मंत्रालय से 99 लाख की सब्सिडी पेल दी
>किसानों की आय बढ़े न बढ़े ब्रो की आय कई गुना बढ़ गयी
>ब्रो कोई नया मंत्रालय मिलने पर और बड़ा घोटाला करेगा
>ब्रो अपना कूल है
एक आदमी ₹40 लाख का प्लॉट खरीदने जा रहा था?
उसने सोचा कि पैसे दूंगा, रजिस्ट्री होगी और जमीन मेरे नाम हो जाएगी।
लेकिन रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचते ही उससे पूछा गया,
"कौन-सी रजिस्ट्री करवानी है?"
वह हैरान रह गया।
उसे लगा था कि ₹40 लाख का प्लॉट हो या ₹4 करोड़ का मकान,
हर जगह एक ही तरह की रजिस्ट्री होती होगी।
तब उसे समझाया गया कि Property की कीमत नहीं,
बल्कि उसका लेन-देन किस तरीके से हो रहा है, उसी के हिसाब से रजिस्ट्री तय होती है।
अगर आपने ₹40 लाख का प्लॉट खरीदा है,
तो Sale Deed बनती है।
अगर कोई पिता अपनी ₹60 लाख की जमीन बेटे या बेटी को बिना पैसे लिए देना चाहते हैं,
तो Gift Deed बनती है।
अगर दो भाइयों के बीच ₹1 करोड़ की पुश्तैनी जमीन का बंटवारा होना है,
तो Partition Deed की जरूरत पड़ती है।
अगर परिवार का कोई सदस्य ₹25 लाख के अपने हिस्से का अधिकार छोड़ना चाहता है,
तो Relinquishment Deed (हक त्याग डीड) बनती है।
अगर दो लोग ₹30-30 लाख की अपनी-अपनी जमीन आपस में बदलना चाहते हैं,
तो Exchange Deed बनाई जाती है।
अगर ₹50 लाख का Home Loan लेने के लिए मकान बैंक के पास गिरवी रखा जाता है,
तो Mortgage Deed बनती है।
और अगर ₹20 लाख की दुकान या ₹80 लाख का मकान 11 साल के लिए पट्टे पर देना हो,
तो Lease Deed का इस्तेमाल किया जाता है।
तब उस आदमी को समझ आया कि अगर ₹40 लाख की Property पर गलत रजिस्ट्री बन गई,
तो आगे चलकर कानूनी विवाद और लाखों रुपये का नुकसान भी हो सकता है।
इसलिए उसने सीखा कि Property खरीदते समय सिर्फ कीमत नहीं,
सही रजिस्ट्री चुनना भी उतना ही जरूरी ह?
Government is destroying the homes of Adivasi community in Barmer, Rajasthan. No Media coverage.
First, their water, forests and land were taken. Now their homes are being destroyed. Instead of protecting indigenous communities, the government is pushing them further towards displacement and insecurity.
The Bhil Adivasi community in Barmer is raising questions about justice, dignity and the government's priority.
कुर्सी पर बैठे बाबू की तानाशाही और सरकारी भ्रष्टाचार को देखिए। मजदूर से 30 हजार चढ़ावा मांग रहा है।
फोटो में मिट्टी वाला कलर में शर्ट में रो रहा यह शख्स एक गरीब मजदूर है,
जिसके पास रहने को पक्का घर तक नहीं है।
इसका प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हो चुका है और मोबाइल पर किस्त का मैसेज भी आ गया, लेकिन खाते में पैसा नहीं पहुंचा।
जब यह पीड़ित मैनपुरी के डूडा कार्यालय गया, तो वहां कुर्सी पर बैठे बाबू ने साफ कह दिया कि
खाता गड़बड़ है और जब तक 30 हजार रुपये रिश्वत नहीं दोगे, किस्त खाते में नहीं आएगी।
अपना हक पाने के लिए यह गरीब मजदूर 14 बार चक्कर काटकर थक चुका है,
लेकिन मैनपुरी डूडा दफ्तर में इसकी कोई सुनने वाला नहीं है।
Hindutva Scum calls for killing of a judge who sent 7 criminals to jail for lynching a Muslim
Instead of arresting the scum,MHA
Cyber Cell sent me a notice to remove the video or face action
Only in India,a criminal goes scot free while the whistleblower faces intimidation
Bro is Kishan Nayak, a sitting BJP councillor from Agra
His ward people were facing issues related to water logging and drainage
So bro lodged complaint with higher authorities ruled by BJP. Not once or twice but 12 times.
Still they ignored his complaints. Even local BJP MLA & MP didn’t do anything.
Tired of excuses, bro protested by celebrating his birthday by standing on a drainage with full media
Bro didn’t care about what action BJP will take, bro didn’t worry about ED. Bro stood for his own people.
Bro is a good man in a wrong party. Be like bro.
मंदिरों में VIP दर्शन क्यों होते हैं? -
क्योंकि पुजारियों को पता रहता है कि पाप नहीं लगेगा
मंदिरों में चढ़ावे के लिए फोर्स क्यों किया जाता है?
क्योंकि उनको पता है कि पाप नहीं लगेगा,
मंदिरों में चंदा चोरी क्यों होता है?
क्योंकि उनको पता है कि पाप नहीं लगेगा।
सिर्फ गरीब आदमी को लगता है कि ये सब करने से पाप लगेगा, बड़े लोग पाप पुण्य से दूर रहते हैं।
लोग चंपत राय और उनकी टीम से अपने दिए हुए चढ़ावे का हिसाब माँग रहे हैं, कोई पूछा रहा है हमारी चाँदी की ईंट कहां गई, कोई कह रहा है कि हमें कैश की रसीद नहीं मिली।
भैया अगर आपसे पलट कर चंपत जी ने जवाब माँग लिया कि चढ़ावे के बदले जो पुण्य कमाया है, उसका हिसाब दो। तो क्या आप दे पाओगे?
दान-पुण्य भावना का खेल होता है, इसमें हिसाब नहीं चलता।
इसलिए कहा गया है कि एक हाथ से दान दो तो दूसरे को पता नहीं चलना चाहिए। पेटी में डालो और आगे बढ़ो। मथुरा और काशी में अभी बहुत काम बाकी है।
जय माधव, जय महादेव 🙏🏼