काम और पीआर में बस यही महीन फर्क होता है...
राजेन्द्र राठौड़ को खुद शुभेंदु अधिकारी ने एप्रीशिएट किया है।
सुबह से कुछ दूसरे ऐसे ट्वीट देखने को मिल रहे थे कि राजस्थान का फलां नेता बंगाल झंडे गाड़ आया, फलां से ये पहाड़ पलट दिया।
उस�� दौरान मेरे दिमाग में एक बार के लिए ये बात आई कि राजस्थान के सीनियर लीडर राजेन्द्र राठौड़ भी तो बंगाल में ठीक काम करके आए हैं उनके समर्थक और कार्यकर्ता राठौड़ साब की पीठ क्यों नहीं थपथपा रहे ?
लेकिन फिर हुआ यूं कि सम्भवतः बंगाल के होने वाले अगले मुख्यमंत्री ने खुद मीडिया में आकर बता दिया कि राजेन्द्र राठौड़ ने उनके लिए बहुत काम किया। और असल में शुभेंदु अधिकारी का ये स्टेटमेंट सब पीआर पर भारी है।
@Rajendra4BJP बधाई आपको
मेरी व्यक्तिगत राजनीतिक समझ कहती है कि सरकार के सलाहकारों ने भवानी निकेतन के गेट बंद करने का फ़ैसला ग़लत लिया है.
कई बार इस तरह की घटनाएँ कोई समाज अपने स्वाभिमान पर लेता है, समाज अपमानित होता है और असर आने वाले कई चुनावों तक दिखता है
सरकार के भीतर कोई विपक्ष का आदमी त�� नहीं ?
समझ-बूझ-विज्ञान की नैया में ख़ुद ही छेद करता हुआ एक सुंदर देश।
सभी छात्र-छात्राओं से अनुरोध है - यदि पढ़ाई-लिखाई-ज्ञानसंचय के सपने देखते हो तो निकल लो जितना जल्दी हो सके।
इनको सरकार का संरक्षण है, तुमको केवल अपनी प्रतिभा का।
राजस्थान के शिक्षा मंत्री का फिलहाल पूरा ध्यान बाबा बागेश्वर द्वारा आयोजित धार्मिक सभा में केंद्रित दिखाई देता है। यह वीडियो उसी सभा से लिया गया है।
इसे देखकर प्रत���त होता है कि प्रदेश में सबसे अधिक आवश्यकता यदि किसी चीज़ की है, तो वह शिक्षा है। एक समय इस देश को जादू-टोने वालों का देश कहकर अपमानित किया जाता था। आज जब हम स्वयं को विश्वगुरु बनाने के सपने देख रहे हैं, तब ऐसे दृश्य हमारे सामने आते हैं, जो हमारे संकल्पों और दिशा दोनों पर ही गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर देते हैं।
राजस्थान में सरकार और प्रशासन के बीच चल रही रस्साकशी थमने का नाम नहीं ले रही। हालात ये हैं कि मुख्यमंत्री खुद भी असमंजस की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
कुछ दिन पहले हाईकोर्ट आदेश पर श्रेय लेने म���ं सबसे आगे रही सरकार ने अब SI भर्ती मामले में उसी आदेश के खिलाफ अपील दायर कर दी है।
जोधपुर के बनाड़ में वरिष्ठ अध्यापक भर्ती का प्रश्न पत्र खुला मिलने का मामला बेहद गंभीर है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जब उन्होंने इसकी शिकायत की तो उन पर केस लगाने की धमकी देकर डराने का प्रयास किया गया। अभ्यर्थियों को धमक���ना इसे और संदिग्ध बनाता है। RAS 2024 प्री परीक्षा के पेपर का भी लिफाफा खुला मिला परन्तु इसकी कोई जांच नहीं की गई। ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार केवल क्रेडिट लेने के उद्देश्य से परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं रखना चाहती।
SOG को बिना किसी दबाव में आए अविलंब इस मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू करनी चाहिए।
@bhati_viru81711@ashokshera94 Kaisa trend bhai gross level par discrepancy huee h isliye court Ne ise radd kiya h
Government to wese bhi nahi kr rahi thi
Or mass ke intrests ke liye kuch logo ke intrests ko avoid Krna pdega
Is vacancy me allmost half fake selected h isliye iska radd hona jroori tha bhai .