Very good, this is how it should be done.
This is how Viksit Bharat 2047 to be achieved.
In fact, all IIT professors across India should do mass resignations.
This govt has made mockery of talents…
अक्ल के अंधों को वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह जी का वर्तमान राजनीति पर यह विश्लेषण जरूर सुनना चाहिए। अब यह मत कह देना प्रदीप सिंह भी बिक गया है। याद रखना कड़वे सच कहने का साहस बहुत कम पत्रकार कर पाता है, वो भी सत्ता के शीर्ष के खिलाफ।
प्रदीप सिंह : भाजपा के लिए कोर समर्थक भाजपा के अलावा किसी दूसरे पार्टी को वोट देना नहीं चाहता है। लेकिन भाजपा ने ऐसी परिस्थिति उत्पन्न कर दिया है कि वे भाजपा को वोट ना देकर दूसरे पार्टी को वोट दे। अब भाजपा को तय करना है उसे अपने कोर समर्थकों को अपने साथ रखना है या उसे बाहर करना है।
भीम आर्मी के गुंडों ने अलीगढ़ में सचिन राघव को पीटा, हत्या का प्रयास किया, अपमानित किया। और अब पुलिस स्टेशन भी घेर कर बैठ गए हैं। क्या सवर्णों की यही स्थिति बनी रहेगी? क्या सवर्ण होना और सड़क पर निकलना भी अपराध हो गया है?
हमारी बहन-बेटियों पर हर दिन टिप्पणी होती है, सरकार सोई रहती है। अब भीड़ बना कर घेरा और पीटा जा रहा है। ध्यान रहे, जिस दिन सवर्ण ने इन्हीं गुंडों की तरह कानून से डरना बंद कर दिया, वह दिन बहुत विकट होगा समाज के लिए।
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यह एक्सप्लेनर वीडियो खूब चर्चित हो रहा है, क्यूंकि लाग लपेट छोड़कर यह वीडियो तथ्यात्मक और सिलसिलेवार तरीके से बतलाता है कि कैसे एससी एसटी एट्रोसिटी एक्ट भाजपा और मोदी का शाह-बानो मोमेंट है। इसे स्वीकारने में समर्थकों को तकलीफ़ ज़रूर होगी, परंतु आँखें बंद कर लेने से सूरज अस्त नहीं होता।
भाई @rai_kaushlesh जी का बाबा नीम करौली पर ये वीडियो देखा। संत परंपरा में बाबा नीम करौली राष्ट्रीय स्तर पर नहीं जाने गए पर बड़े बड़े विदेशी चेहरों ने उन्हें जीवंत किया। परंतु भारत में वह लोगो के बीच जाने जाते थे। आप भी सुनिए इस कहानी को। जानकारी वर्धक है।
https://t.co/k7yXRS85G2
क्या थी स्कूलिंग की स्थिति अंग्रेजों के समय में? क्या ब्राह्मणों का एकाधिकार था? स्वयं देखिए इस वीडियो में @rai_kaushlesh ने बनाया है।
https://t.co/2Z3zXslByl
Why are officials so insensitive. During service, my office personnel order had a standing order that any services personnel was the first priority in meeting me. Always. These people sign the contract of service with their blood.
रात्रि काल में अचानक से कमरे में तापमान अत्यधिक बढ़ता अनुभव हुआ, पीली-पीली आग की लपटें दिख रही थी! हड़बड़ा कर उठा तो पाया कि बाबा साहेब संविधान में आग लगा रहे थे।
मैंने चेक किया तो पाया कि आज तो September 2, 1953 भी नहीं है, फिर बाबा साहेब ऐसा क्यों कर रहे होंगे! फिर अचानक से मैं जग कर बैठ गया। अजीत जी, आप एक ही सपने में दो बार कैसे जग गए?
इन्सेप्शन हो रहा था, सपने में सपना चल रहा था। अब मैं सोच रहा हूँ कि जिस बाबा साहेब को एक ब्राह्मण ने अपना उपनाम दिया, एक राजपूत ने पढ़ाया, और एक देश ने अपनाया, देश का भविष्य लिखने के लिए बी एन राव, राजेंद्र प्रसाद के समकक्ष उन्हें संविधान समिति में, बिना उनकी जाति देखे बिठाया, वो भला संविधान में आग क्यों लगाएँगे?
फिर मैंने देखा कि 40 दिन बाद यहाँ दलित को याद आता है कि उसे जातिसूचक गाली दी गई थी, एक भीड़ पुलिस स्टेशन को घेर कर धाराएँ जुड़वा देती है ताकि राहुल गांधी वहाँ आकर क्रेडिट ना ले ले, और फिर एक 14 वर्ष की बच्ची को स्कूल भेजने की जगह किसी गुंडे की राजनीति को आगे बढ़ाने का हथियार बनाया जाता है। ऐसे में यदि बाबा साहेब आज होते तो संविधान में तो आग लगा ही देते।
can you connect me to her please @mananbhattnavy ?
my foundation @FlagsOfHonour has helped many families in similar situations -- having to deal with unempathetic local and state govt bureaucrats and politicos.
😡🤬
i will do my best to solve her issues.
its our duty to stand by families of our bravehearts 🙏🏻 we will.
प्रभु श्रीराम का मंदिर बना था। समूचा हिंदू ऐतिहासिक न्याय के आईने में स्वयं को देख रहा था। हर हिंदू एकसूत्र में बंध रहा था। कितना सुंदर था। असल में जातिवाद की विषबेल के विरुद्ध इससे बेहतर कोई रचनात्मक प्रयास नहीं हो सकता था।
फिर कम्बख़्त सियासी नज़रिए से भी देखें तो भाजपा जीत रही थी। अधिक प्रयोग की ज़रूरत ही न थी!
फिर न जाने इन्हें किस घड़ी यह सूझा कि नहीं, हिंदुओं की नहीं, दलित-पिछड़ों की पार्टी बनना है। नए-नए थे तो इन्होंने अधिक प्याज खाए। और फिर वही जाति के इर्दगिर्द विमर्श जीवंत हो गया। दो वर्ष भी उस एकत्र हिन्दुभावना को सहेज नहीं पाए हम।
आख़िर यह कौनसी राजनीति है जिसे हम जैसे कमसिन लोग समझ ही नहीं पा रहे?
They won't answer... coz we all know ki kya hua hoga... बस थोड़ा सा लेनदेन..थोड़ा सा चाय पानी..और यहां सब काम "सेट" हो जाता है..इस बार भी अगर एमसीडी वालों को सही और कड़ी सज़ा नहीं मिली तो बस अगले हादसे का इंतज़ार कीजिए ..और हां.. कड़ी सज़ा का मतलब निलंबन कतई नहीं होता है..हत्या के मामले में जेल जाने चाहिए सब..मालवीय नगर वाले भी🙏 @MCD_Delhi@CMODelhi@gupta_rekha
देश अब भीड़ से ही चल रहा है। आपके पास भीड़ है तो आप थाना घेर लीजिए, धाराएँ लगा दी जाएँगी। आपके देवी-देवताओं पर स्टेज से घटिया बातें की जाएँगी, पर त्रिपुंडधारी मोदी के मुँह से एक शब्द नहीं फूटेगा।
आपके देवी-देवताओं पर हर दिन हज़ारों ट्वीट, फेसबुक पोस्ट, यूट्यूब वीडियोज डाले जाते रहेंगे, यही महामानव कभी भी इन्हें हटाने के लिए किसी भी tech प्लेटफार्म को नहीं बुलाएगा, पर हाँ इनका अपना पोस्ट डिलीट हो जाए तो तुरंत जवाब माँग लेगा।
मेरे जैसे लोग इतना कटु बोल कर भी केवल इसलिए बचे हुए हैं क्योंकि सरकार को लगता है कि अभी इसे उठाने का उचित समय नहीं है। जिस दिन उन्हें लगेगा, ऐसा हर व्यक्ति, ऐसे हर प्लेटफार्म से धीरे धीरे गायब हो जाएगा या मोदी चालीसा गाता हुआ वीडियो और पोस्ट डालने लगेगा।
मैं वैसे समय को लेकर चिंतित हूँ क्योंकि तब सब कुछ समाप्त हो जाएगा। इसलिए आप चाहे मोदी के फैन हों, या आलोचक, सही को सही कहिए, ग़लत को ग़लत। किसी के बाप का यह देश नहीं है, देश हमारा है, आपका है और हमने किसी पार्टी को देश का संचालन करने दिया है, यह उनकी बपौती नहीं है।
7-8 दिन से चीनी छोड़ रखी थी। फिर आज 1200 पन्ने पढ़कर 10,500 शब्दों की स्क्रिप्ट फाइनल करने बैठा।Brain Fog सा होने लगा। सुबह से 2 कप लेमन टी में 6 चम्मच चीनी, फिर स्ट्रेस में एक ग्लास पेप्सी और यानी चार चम्मच चीनी और। अब स्क्रिप्ट लगभग फाइनल है, पर दिमाग में गिल्ट फुल एचडी में चल रहा है। ग़रीब आदमी के जीवन में दुख ही दुख है।
आज़ादी के सालों बाद देश के सबसे निचले स्तर पर बैठे व्यक्ति को उच्च पद पर बैठाना ही असली स्वतंत्रता है !!
जो भी देशवासी इस सपने को पूरा करने में हमारी मदद करेंगे वो हमारे अपने !!
अब देखती हूँ कितने जाटव इस मुहिम में साथ आते है !!
देश में सबको मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा मिला क्या वाल्मीकि समाज को यह अधिकार नहीं ?
जिस जाति को सालों तक साफ़ सफ़ाई के लायक समझा अब उसके अधिकार की लड़ाई है !!
#ValmikiCM #India #Dalit #Reservation