जो किया है इस प्रकृति संग, वो तुम्हें लौटा रही है। बात इतनी सी नही है, जो तुम्हें समझा रही है। कोरोना जैसे वायरसों का दौर तुम अब पाओगे। जख्म के दर्दो की आहट,सोच तुम थराओ गे। अब नही सँभले तो फिर,खत्म सब हो जाएगा। इस धरा पर अपनो से,मिलने नही आ पाओगे। मेरी कविता
देश के बड़े उद्योगपतियों , खिलाड़ियों और अभिनेताओं को देश के प्रति इस संकट काल में अपना फ़र्ज़ निभाना चाहिए --आप देश को हाथ धोना सिखाने के स्थान पर बड़ा आर्थिक सहयोग करें -- आपके पास जो भी है वो इस देश का ही दिया हुआ है ---#Covid_19india