1965 में बना ये पुल आज भी हजारों गड्ढों, टूटी रेलिंग और बढ़ते जलस्तर के बीच जनता की परीक्षा ले रहा है।
लगता है जिम्मेदारों को मरम्मत से पहले किसी बड़े हादसे का इंतजार है, तभी शायद फाइल भी खुलेगी और आंखें भी!
(छतरपुर-पन्ना NH-39 पर केन नदी का पुल)
ब्राह्मण यहां भीख मांग कर गुज़र बसर कर रहा है....
वहीं सरकार के हिसाब से ये बहुत बड़का पैसा वाला हैं, 4 ताले और 500 बीघे की हवेली में रहता है,
ना इन्हें और ना इनके बच्चों को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिलनी चाहिए यही इनका सामाजिक न्याय है।
मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा; इस भावनात्मक ब्लैकमेल में मत फँसाइए। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल कोई बदतर पार्टी आई तो उसे सड़कों पर निपट लेंगे।
दूसरी तरफ़ घनघोर अयोग्यता को कोचिंग से लेकर मेरिट, PG, नौकरी और प्रमोशन तक लगातार छूट, ये अनंत काल तक नहीं चल सकता।
This has to stop!
ये ठाकुर हैं… इसलिए इनके हिस्से में आरक्षण नहीं आएगा।
फूटी हुई दीवारें, टपकती छत, और अंधेरा कमरा…
एक विधवा बहु चुपचाप आंसू पोंछ रही है,
एक छोटा पोता भूख से बिलख रहा है, पेट में दर्द है लेकिन खाने को कुछ नहीं।
सरकार की नजरें यहां तक नहीं पहुंचतीं।
क्योंकि जाति ठाकुर है, तो ये उनकी फाइलों में अरबपति बन जाते हैं।
गरीबी दिखाई नहीं देती, सिर्फ जाति दिखाई देती है।
आरक्षण का हक सिर्फ उस इंसान को मिलना चाहिए जिसके पास रोटी नहीं, छत नहीं, और जिसके बच्चे भूख से सोते हैं चाहे वो किसी भी जाति का हो।
ये तस्वीर देखकर दिल दहल जाता है।
प्रतापगढ़ के संतोष मिश्रा जी की मदद के लिए जो भी लोग आगे आए हैं, उन सभी का हृदय से आभार।
ताज़ा अपडेट: गुजरात की Volta Transformers कंपनी संतोष मिश्रा जी की सहायता के लिए आगे आई है और उनका घर बनवाने की जिम्मेदारी अपने हाथ में ली है।
इस सराहनीय पहल के लिए कंपनी का विशेष धन्यवाद। साथ ही उन पत्रकारों का भी आभार, जिन्होंने संतोष मिश्रा जी की कहानी को लोगों तक पहुँचाया, और सोशल मीडिया पर संवेदनशीलता के साथ उनकी आवाज़ उठाने वाले सभी लोगों का भी बहुत-बहुत धन्यवाद।
आप सभी के प्रयासों ने मिलकर एक जरूरतमंद परिवार के जीवन में उम्मीद की नई किरण जगाई है।
रात के 3 बजे... गोद में 3 महीने का मासूम बच्चा और पुलिस गाड़ी जब्त कर पति-पत्नी को सड़क पर ही छोड़कर चली गई।
राजस्थान के बारां में मनीष सुमन अपनी पत्नी और 3 महीने के मासूम बच्चे को देवी दर्शन कराने ले जा रहे थे। रात के 3 बजे पुलिस ने उनकी कार रोक ली। कार नई थी। कागज़ घर पर रह गए थे, लेकिन पुलिस ने चोरी का आरोप लगाकर गाड़ी जब्त कर ली।
मनीष ने विनती की – “गाड़ी ले लो, हमें घर तक छोड़ दो।” लेकिन पुलिस ने पति-पत्नी और नन्हे बच्चे को सुनसान सड़क पर ही अकेला छोड़ दिया।
वीडियो बनाने की कोशिश पर धमकाया भी।
क्या गज़ब हराम... मौजहबी गंदगी है 🚨
उत्तराखण्ड में. मोहम्मद नसीम इन बाइक्स और स्कूटी के सीट कवर्स को ब्लेड से काट रहा है....
पता है क्यों... क्यों कि सामने उसकी पंचर और सीट कवर की दुकान है ✍️
ये शैतानों से भी बदतर हैं.. और कुछ लोग इन्हे इंसान समझने की भूल करते हैं 🚨
🚨 THE PAMPHLET पर एक्सक्लूसिव 🚨
@SauravDassss के मकान मालिक आनंद ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं।
वे दिल्ली के जीके-1 (Greater Kailash-1) में अपने पॉश और शानदार घर का किराया ₹12 लाख देते हैं।
घर का पूरा टूर देखें
आपको शायद पता न हो कि 'Lord Baba Sahab' इतने गरीब थे कि जिस समय भारत की 90% जनता को दो वक्त की रोटी भी नसीब नहीं होती थी, उस समय उनकी तस्वीरें खींचने के लिए फोटोग्राफर विदेश से आते थे।
सूट-बूट, टाई... और वह भी 1896 में..
क्या आपके पास आपके परदादा के पिता की ऐसी कोई फोटो है ?
रिजर्वेशन को बढ़ाकर बिश्वगुरु बनने के सपने दिखाए जा रहे हैं, लेकिन ज़रा देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत भी देख लीजिए।
बिहार के शिवहर की 20 वर्षीय रेखा कुमारी कान का इलाज कराने पटना के महावीर आरोग्य संस्थान गई थीं। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद नर्स ने नस की बजाय आर्टरी में इंजेक्शन लगा दिया। रेखा ने दर्द और तकलीफ़ की शिकायत भी की, लेकिन कथित तौर पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा इन्फेक्शन इतना बढ़ा कि उनका हाथ काटना पड़ा। नवंबर में होने वाली शादी भी टूट गई। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि FIR दर्ज कराने गए तो पुलिस ने मना कर दिया।
सोचिए, जिस देश में इलाज कराने जाओ और इलाज के बदले अपना हाथ गंवाकर लौटो, वहाँ सिर्फ़ नारे लगाने से क्या होगा? पहले अस्पतालों में जवाबदेही, डॉक्टरों-नर्सों की जिम्मेदारी और पीड़ितों को न्याय तो सुनिश्चित कीजिए। 100 में से 99 पाने वाले घर बैठेंगे और -40 लानेवाले इलाज करेंगे तो और क्या ही उम्मीद करेंगे हम सब ।
नारों से नहीं, व्यवस्था से देश महान बनता है।
रांची के रिम्स अस्पताल में लबालब पानी भरा है,
लेकिन आप स्वास्थ्य मंत्री जी रीलें देखेंगे तो पूरी फीड में औचक निरीक्षण खूब दिखेगा।
उम्मीद है इसकी भी एक रील बना के जल्द ही अपने इंस्टाग्राम फीड को सुसज्जित करेंगे।
CM हेमंत सोरेन का विरोध करना हमारा हक है।
लेकिन CM हेमंत सोरेन को गाली देना हमारा हक नहीं है।
झारखंड के छात्र आंदोलन में और CJP के आंदोलन में बहुत अंतर है।
हम यहां किसी को गाली नहीं दे रहे हैं, हम भी छात्र हैं, हम भी GenZ हैं।
: झारखंड छात्र आंदोलन का एक छात्र
झारखंड में बड़े स्तर पर परीक्षा में धांधली हुई है।
मुझे मेरे कुछ दोस्तों ने पहले ही बता दिया था किसका चयन होने वाला है।
झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन पूरी तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।
हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना चाहिए।
: एक छात्र
वाह रे लोकतंत्र! अब पार्टी की सदस्यता निमंत्रण से नहीं, कथित धमकी से दिलाई जाएगी?
दीपके का आरोप है कि उन पर भाजपा में शामिल होने का दबाव बनाया गया और इनकार करने पर परिवार को परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
दुनिया में कितना ग़म है, मेरा ग़म कितना कम है।
इस दुनिया में इंसान कितना दुख झेल रहा है।
भगवान की कृपा से हम में से ज़्यादातर लोग ऐसे दुखों से बहुत दूर हैं। फिर भी हम अक्सर भगवान से शिकायत करते रहते हैं।
असल में इंसान अपने दुख से उतना परेशान नहीं होता, जितना दूसरों की खुशी देखकर हो जाता है।
अब इस मामले को ही देख लीजिए।
इंदौर में "महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी" के नाम से एक वृद्ध आश्रम चल रहा है। वहाँ एक नाबालिग लड़का अक्सर बुजुर्गों के साथ मारपीट करता है और बेचारों के पास सब कुछ सहने के अलावा कोई रास्ता नहीं है।
क्या आप कभी सोच सकते हैं कि अपने ही जीवन में ऐसा दुख झेलना पड़े, जैसा ये बेबस बुजुर्ग झेल रहे हैं?
इस वीडियो को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए, ताकि इस नालायक को उसके किए की सज़ा मिल सके।
20 जुलाई का एक और CCTV फुटेज सामने है। प्रदर्शनकारी उस दिन भारत को नेपाल बनाने के लिए संसद भवन के 100 मीटर के पास तक पहुंच गए थे। क्या यह षडयंत्र बनाया गया था कि संसद का गेट तोड़ा जाए, सुरक्षाकर्मी मजबूरन गोली चलाएं, कुछ लोग मारे जाएं और फिर देश में अराजकता फैल जाए ? कौन था इस साजिश के पीछे ?