आपको क्या लगता है कि तेल में गन्ने का जूस मिलाने का फैसला इस गैंडे ने खुद लिया है?
आपको नहीं लगता कि अंतिम फैसला तो वो दाढ़ी वाले उड़नखोर बूढ़े का ही रहा होगा?
तो फिर जवाब देने को अकेला गैंडा क्यों फंसे, बूढ़े को भी पकड़ो जब सैर सपाटे से वापिस आए 2-4 दिन के लिए।
🏆 #FIFAWorldCup
Ganó todo, lo logró todo, pero esas lágrimas demuestran que su hambre de gloria y su amor por esta camiseta no tienen techo 🥹
¡Gracias por sentirlo así, Capitán! 👑🐐
नड्डा जी, यह लोकतंत्र है
आप लोग राजा नहीं हैं
यहाँ कोई राज नहीं करता
आप और हम जनता के सेवक हैं
सत्ता का अहंकार सिर चढ़ गया है आपके - यह नशा उतरता ज़रूर है
हद हैं एक फ़िल्म को लेकर इतनी समस्या हो जा रही है।जिसने भी देखा है इस फ़िल्म की तारीफ की है। वापस दिखाई जानी चाहिए। अगर दानपात्र का कोई सीन है तो वो बस काट लीजिए।
मुझे कार की बहुत ज़रूरत नहीं पड़ती है। महीने में दो तीन दिन ही घर से निकलता हूँ। आज कई दिनों बाद कार चलाने गया तो पता चला कि मेरी कार का माइलेज 14km/lसे घट कर 9.6km/lit हो गया है। मेरी कार 2024 की है। 5.4 किलोमीटर प्रति लीटर कम हो गया है। परिवार के लोग इस्तेमाल करते हैं। तेल का ख़र्चा काफ़ी बढ़ गया है।
मुझे लगता है कि E20 भी नोटबंदी है। इसके ज़रिये कार और बाइक चालकों पर निष्ठा प्रयोग हो रहा है कि वे किस हद तक मोदी सरकार को सपोर्ट कर सकते हैं। ज़्यादा पैसे ख़र्च कर घटिया ईंधन ख़रीदने और कार डैमेज होने पर चुप रह सकते हैं। मोदी सरकार का प्रयोग सौ फीसद सफल हो गया है। जिस स्केल पर माइलेज गिरा है, मनमोहन सिंह की सरकार होती तो सारे गोदी संपादक पेट्रोल पंप से लाइव रिपोर्ट कर रहे होते।
नोट चोरी, वोट चोरी, चंदा चोरी, पेपर चोरी के बाद तेल चोरी को भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह काम केवल मोदी सरकार कर सकती है। उसके समर्थकों का जवाब नहीं। जो लोग 500 रुपया लीटर पेट्रोल ख़रीदने का सपना देख रहे थे, E20 से पूरा करने का मौका मिल गया है। पेट्रोल और कार की मरम्मत का ख़र्चा जोड़ कर इतना हो जाता होगा।
सरकार चाहे तो एक और प्रयोग कर सकती है। पेट्रोल पंप पर मोदी समर्थक 38 प्रतिशत वोटर के लिए E20 का विकल्प दे और मोदी विरोधी 62 प्रतिशत को E10 का विकल्प दे। मुझे लगता है कि डिफ़ेंडर वाली मोहतरमा भी निष्ठा नहीं बदलेंगी और E20 ही भराएँगी। अगर ये हो जाए तो मोदी समर्थकों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहेगा। 😎
इथेनॉल बहस में कार कंपनियों की कोई आवाज़ नहीं है। उन्हें सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। उनके सर्विस स्टेशन में कारें आती होंगी। बाइक आती होगी। कुछ तो फीडबैक होगा। उन्हें पता होगा कि मंत्री सही बोल रहे हैं या नहीं। क्या उन्हें भी डर लग रहा है? इतनी बड़ी बड़ी कार कंपनियाँ हैं और चूँ तक नहीं ? डर इस देश का बुनियादी चरित्र हो गया है।
"BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर? — जज ने कहा: नागरिक गुलाम नहीं हैं
आज बॉम्बे हाईकोर्ट में कुछ असाधारण हुआ।
एक जज ने वह कहा — जो शायद ही कभी किसी अदालत ने इतनी साफगोई से कहा हो।
जस्टिस माधव जामदार ने कहा — "नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है। वे प्रदर्शन नहीं कर सकते, आंदोलन नहीं कर सकते — यह क्या है?"
मामला क्या था
Socialist Democratic Party of India के महासचिव सईद अहमद अब्दुल वहीद चौधरी CAA और ज्ञानवापी विवाद के खिलाफ मोर्चे और धरने आयोजित कर रहे थे।
मुंबई पुलिस ने उन्हें एक साल के लिए जिला बदर कर दिया — पांच FIR के आधार पर जो ज़्यादातर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए थीं।
जस्टिस जामदार ने यह आदेश देखा।
और आगबबूला हो गए।
जज ने जो कहा — वह इतिहास में दर्ज होगा
"याचिकाकर्ता ने तो सिर्फ 'BJP Government Murdabad', 'Amit Shah Murdabad' जैसे नारे लगाए। नागरिक ऐसे नारे क्यों नहीं लगा सकते? ऐसे नारों के लिए जिला बदर आदेश क्यों?"
"पुलिस मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री की सेवक नहीं है — वे जनसेवक हैं। मैं आपके अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाऊंगा।"
"अगर लोग विरोध करें तो आप केस थोप देंगे — यह क्या है? नागरिकों का प्रदर्शन करना उनका अधिकार है।"
और फिर — "वॉशिंग मशीन" वाली टिप्पणी
जस्टिस जामदार ने महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे "horse-trading" पर भी टिप्पणी की।
उन्होंने कहा — "एक 10 साल के बच्चे की दुर्घटना में मौत हो गई और राज्य विधानसभा में चर्चा हो रही थी कि Presiding Officer कैसे चुना जाए और वह एक पार्टी से दूसरी पार्टी में कैसे shift हो गया। पूरे महाराष्ट्र में horse-trading चल रही है — केस बदलने पर विचार करें, वॉशिंग मशीन है।"
फैसला
जस्टिस जामदार ने अपने आदेश में लिखा — "सरकार के फैसलों का विरोध करने और उसके खिलाफ नारे लगाने मात्र से किसी नागरिक को जिला बदर नहीं किया जा सकता। यह कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण है और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।"
जिला बदर आदेश रद्द।
यह फैसला इतना बड़ा क्यों है
आज के भारत में —
जहाँ असहमति को देशद्रोह कहा जाता है।
जहाँ विरोध प्रदर्शन पर UAPA लगाया जाता है।
जहाँ "BJP मुर्दाबाद" कहने पर जिला बदर किया जाता है।
एक जज ने खड़े होकर कहा — नागरिक गुलाम नहीं हैं।
पुलिस प्रधानमंत्री की नौकर नहीं है।
विरोध करना — अधिकार है।
यह फैसला नज़ीर है।
इसे शेयर करें।
क्योंकि जब अदालतें जागती हैं —
तो लोकतंत्र सांस लेता है।
- ज्ञानेंद्र अवस्थी जी की पोस्ट
चित्रा जी, आसाराम को जानने वालों से भी बात कीजिए।कोई नहीं कहेगा वो दरिंदा है। जंतर मंतर पर लोग सालों उसकी तस्वीर की आरती उतारते रहे। सब कहेंगे ईश्वर का रूप है। लेकिन उसने अपनी साधिकाओं को भी नहीं छोड़ा। वो कहती हैं आसाराम भेड़िया है। आपको क्या लगता है आसाराम भगवान है या भेड़िया?
🚨 People lost lives in Air Pollution, BJP STILL WON
🚨 People lost lives in Cough Syrup Scam, BJP STILL WON
🚨 People lost lives in Demonetization, BJP STILL WON
🚨 People lost lives in Farmers protest, BJP STILL WON
🚨 People lost lives in Stampedes, BJP STILL WON
🚨 Electoral Bonds was exposed, BJP STILL WON
And bhakts after voting for BJP despite so many mess, are abusing Rahul Gandhi for not raising Ethanol blending issue 🤣🤣
Keep ranting
राम मंदिर लुट गया, लेकिन आपने इस धूर्त @DrKumarVishwas की आवाज़ तक सुनी। इसने राम के नाम से कथाये करके अपने लिए नए कपड़े सिलवाये, करोड़ो के महल खड़े कर दिए, घर में लिफ्ट, स्पा सब लगवा लिया।
और राम मंदिर पूरा लुटवा दिया गया और ये अभागा स्वर्ण अब किन्नर बनकर कहीं मुंह छुपाए बैठा है।