कितने ख़ुशरंगी के मंज़र देता है
वो, जो मेरी आह में असर देता है
बेचैन रूह में उतरना कमाल है
नफ़स नफ़स को सुकून-ए-तर देता है
खामोश पड़ी ज़िन्दगी सोने को चले जब
चुपके से ख़्वाबों की डगर देता है..
#शीतल_स्पर्श@sheetalsparsh#Manzar#Asar#Shair
मन मरया ममता मुई, जहं गई सब छूटी।
जोगी था सो रमि गया, आसणि रही बिभूति ।
मन को मार डाला ममता भी समाप्त हो गई अहंकार सब नष्ट हो गया जो योगी था वह तो यहाँ से चला गया अब आसन पर उसकी भस्म – विभूति पड़ी रह गई अर्थात संसार में केवल उसका यश रह गया।
#संतकबीर
कविता की आलंकारिक भाषा चाहे इस घटना को जैसे भी अभिव्यक्त करे पर यह सच असंदिग्ध है कि रानी लक्ष्मीबाई ने अपने संकल्पों के माध्यम से पुरूष का पर्याय समझने जाने वाले पराक्रम की परिधि को लैंगिक पूर्वाग्रह से परे एक व्यापक विस्तार दिया।
स्वाधीनता की दीवानी, शौर्य व साहस की सबसे बड़ी प्रतिमूर्ति तथा वीरांगना शब्द की सबसे निकट पर्याय रानी लक्ष्मीबाई को जन्मदिवस पर आकाश भर प्रणाम! 🙏🏻
#RaniLakshmiBai
ज़ुल्म बढ़ते गए मौसमों के लिए।
कुछ नहीं कर सके बादलों के लिए।
बादलों का ज़मीं से न अब वास्ता
आसमाँ ताकते हसरतों के लिए।
वो बनाते गए कारखाने नए
हम तरसते रहे बारिशों के लिए।
#शीतल_स्पर्श@sheetalsparsh