@Mishravikant10 When the idea was initiated I was one of the few who had voiced our concern even then. But to no avail. It's been put to inform people like you what your vote has done to your Army. You will soon see many more outcomes very soon when the first batch gets released.
It was shocking to learn from serving senior NCOs that many have stopped appearing in promotion cadres & tests in Army because they feel it's no use when the Agniveers openly disregard their orders on the plea that most of them will be out soon. Another Agniveer impact.
“मेरा मरीज़ को जला के मार दिया ….”~ परिजन
जिस राज्य का CM जाति और गमछा का रंग ढूँढने में लगा हो,वहाँ आप किनसे न्याय की उम्मीद करेंगे!
जैसे नीतीश जी तमाशा देखते थे वही तमाशा अब सम्राट चौधरी जी देख रहे!
बिहार के किस्मत में रोना लिख दिए है!
हृदयविदारक!
THIS IS WHERE A 17-YEAR-OLD SHAMED THE MEDIA 🔥
KARAN THAPAR: If these tender changes had not been made, would Coempt Edutech have qualified?
SARTHAK: Absolutely not, sir.
KARAN THAPAR: So Coempt Edutech practically benefited from the changes?
SARTHAK: You could say that, sir.
KARAN THAPAR: How concerned are you by what you found?
SARTHAK 🎯: I am concerned that the system is not transparent enough. These things should not be uncovered by students like me. They should be available to journalists and investigators.
COBRAPOST EXCLUSIVE: When Money Laundering comes packaged in pan masala! Watch how the Chaurasia family, owners of the Kamla Pasand Group, allegedly moved ~₹2,547.49 crore of unaccounted cash into banking channels. #KamlaPasandKahani
COBRAPOST’S EXCLUSIVE STORY: https://t.co/IBZFuCPM7v
YouTube Videos: https://t.co/zHnDfm6bkU
@SnoopingChacha In Armed forces Respect and Discipline is the backbone. Promotion and financial gain comes last. Can be understood by someone who has served in it.
#EVM_Sarkar को आम जनता की कोई चिंता नहीं! लोग सड़कों पे उतरें, तो पुलिस के डंडों से पीटो, आवाज उठाएं तो NSA लगाकर जेल में सड़ा दो! या फिर उन्हें आतंकवादी, पाकिस्तानी बता दो!
EVM हटाए बिना और #ECI में लोकतांत्रिक सुधार लाये बिना बदमाश लुटेरी सरकार को हटाना संभव नहीं!!
#BanEVM
No Hindenburg Research report can wake up a country where a Rajesh Exports can claim 99% fraud revenue worth Rs.15 lakh crore for 5 years straight. The country has decided to blindly get conned on a per hour basis. No one ever can stir or awaken such a people.
इस देश मे कुछ सवाल सिर्फ राहुल गांधी के लिए रिजर्व हैं।
जिनका दायरा, मोहम्मद गोरी लेकर खलजी, बाबर, औरंगजेब, अंग्रेज, नेहरू, इन्दिरा, मनमोहन तक फैला हो सकता है।
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राहुल की क्वालिफिकेशन के बारे मे रामचन्द्र गुहा का सवाल, ऐसा ही स्पेशल सवाल है। भारत के 99% नेता, नेता बनने के पहले क्या करते थे, इसकी जानकारी न तो आम लोगो है,
न वे इसकी परवाह करते हैं।
मसलन, बिना कोई अनुभव , बिना कोई चुनाव लड़े, डायरेक्ट शपथ लेकर अनिर्वाचित मुख्यमंत्री बनने के पहले, हमारे प्रधानमंत्री क्या करते थे??
पब्लिक डोमेन में इसकी सूचना शून्य है।
अब भले वे खुद स्वीकार करें, कि वे पढ़े लिख नही पाये, स्टेशन पर चाय बेची, 35 वर्ष भिक्षाटन करते रहे - तो भी इससे किसी को फर्क नही पड़ता।
मगर राहुल के बारे मे जानना है।
गहराई से, और तथ्यपरक जानना है।
और नकारना है।
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दरअसल राहुल से उसकी योग्यता नही पूछी जाती, उन्हें प्रच्छन्न रूप से निर्योग्य घोषित किया जाता है। और निर्योग्यता का एक ही कारण है- गांधी सरनेम के साथ पैदा होना..
और दरअसल यही गुहा जैसो का ऑब्जेक्शन है। वरना तो 5 बार का सांसद, 4 राज्य सरकारो का पॉवर सेंटर, केंद्रीय सरकार में 10 साल तक निर्णय बदलने की ताकत रखने वाला शख्स.
जिसे विभिन्न संसदीय समितियों में दो दशक का अनुभव हो,
पब्लिक पॉलिसी की पुख्ता समझ हो, कैम्ब्रिज मे पढ़ा हो और और अर्थव्यवस्था की दशा दिशा की बार बार सटीक पूर्वसूचना देता हो, अगर किसी और दल या देश में में 100 सांसद लेकर बैठा होता..
तो उससे यह सवाल करने की हिम्मत किसी मे न होती।
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लेकिन आप राहुल से पूछ सकते है।
क्योकि राहुल से डर नही लगता।
रामचन्द्र गुहा का वह वीडियो हमने देखा है, जिसमे सरकार के विरुद्ध तख्ती लेकर खड़े हो जाने भर से पुलिस उन्हें कुत्तो की तरह घसीटकर ले गई। इसके बाद वे दोबारा सरकार के नाम की तख्ती लेकर चौराहे पर नही गए।
राहुल के नाम की तख्ती सेफ है।
गुहा को पता है।
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और यही "सेफ" फीलिंग राहुल की उपलब्धि है। उसके 20 साल के पोलिटिकल करियर का एसेंस है।
रामचन्द्र गुहा इस देश मे भाजपा/ मोदी की हेजेमनी को राहुल पर थोपते है, तो उनके इतिहासकार होने की समझ पर शक होता है।दरअसल, जो वे स्वीकार करने से बच रहे है, वो यह कि आज देश की राजनीतिक हालात, एक आम चुनावी राजनीति नही, एक कंट्रोल्ड सामाजिक परिवर्तन है।
यह परिवर्तन, मीडिया, ज्युडिशयरी, चुनाव आयोग, ब्यूरोक्रेसी और एजेंसियों के शीर्ष पर कठपुतलियां बिठाकर थोपा गया है। जिसके नीचे जनाक्रोश उबल रहा है।
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इस आक्रोश की प्रतिक्रिया को विस्फोटक, और विध्वंसक होने से बचाने, और गृहयुद्ध समान हालात टालने के लिए किसी भी विपक्ष को बहुत धैर्यवान, सॉफ्ट होने की जरूरत है।
वरना जिस स्ट्रीट फाइट, सँगठनीकरण और आक्रामक राजनीति की अपेक्षा, राम गुहा आज राहुल गांधी से कर रहे है- उसका नतीजा पिछले 1 माह का बंगाल, और 3 साल से मणिपुर देखकर समझ लेना चाहिए।
आप पूरे देश मे ऐसा चाहते हैं???
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गम्भीर इतिहासकार जानता है, कि ऐसी सत्ता अपनी कब्र खुद बड़ी गहरी खोदती है।
मौजूदा दौर उन भावनाओ का एक्सप्रेशन है, जिसे हमारे समाज ने 70 साल तक ऐसे छिपा रखा था रखी थी, जैसे कोई बूढा अपने किशोर उम्र के कुटैव छिपाकर रखता है। बेहयाई को मान्यता मिलते ही वह धारा खुलकर खेल रही है।
लेकिन तमाम धन, ताकत, नंगई और मैनिपुलेशन के बावजूद 37-38% जनसमर्थन उसका पीक था। अब तो आगे सिर्फ ढलान है।
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गुहा हों, या उनकी तरह डेस्परेट दूसरे लोग, जान लें कि हिंदुस्तान की आत्मा इस तरह बहुत देर कुचली नही जा सकती।
इस झँजवात से बाहर निकलने का रास्ता, यह देश जल्द तय करेगा। पर उस उबाल का पथ प्रदर्शक कोई ईमानदार, दूरदर्शी, और नैतिक मूल्यों पर ठहराव रखने वाला ऐसा शख्स होना चाहिए। जो शांति, साहचर्य और मेल मिलाप का चेहरा हो।
इस वक्त, बिलाशक..
वह राहुल है।
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इस दौर का बुद्ध है।
जिसे महज राजघराने की पैदाइश की वजह से खारिज कर देना, और खास तरह की प्रतिक्रियाओं की आशा रखना, बौद्धिक नही- बायस्ड होने के लक्षण हैं।
जो राम गुहा कई बार प्रदर्शित कर चुके हैं। उनका फैन होने के नाते उन्हें सप्रेम सलाह है कि वे समाज मे अपनी उम्र औऱ अनुभव का आडम्बर बनाये रखें। भ्रम और खीज की शिकार जुबान को विराम दें।
और मौन की शक्ति महसूस करें।
राहुल गांधी इस देश के नेता विपक्ष होकर सरकार का सामना कैसे कर रहे हैं - कैसे लोगों की बात रख रहे हैं - कैसे उनके मुद्दों को उठा रहे हैं - इसके लिए उन्हें किसी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए
क्योंकि प्रत्यक्षम किम प्रमाणम!
लेकिन राहुल गांधी को भला बुरा कहना - उनके ऊपर तीखी टिप्पणी करना जितना BJP का पसंदीदा काम है उतना ही कुछ liberals का भी
एक ऐसे लोगों की जमात है जो अपने आपको वैसे तो BJP का आलोचक बतायेंगे, लेकिन इस देश की बर्बादी के लिए BJP से पहले राहुल जी से सवाल पूछेंगे - उनको ज़िम्मेदार ठहरायेंगे
ऐसे लोगों से मेरे कुछ सवाल हैं👇
▪️राहुल गांधी के अलावा एक विपक्ष का नेता बता दीजिए जिससे BJP वालों की रूह काँपती हो
▪️राहुल गांधी के अलावा एक विपक्ष का नेता बता दीजिए जिसके बारे में यह दावा किया जा सके कि दुनिया इधर से उधर हो जाये यह BJP से हाथ नहीं मिलायेंगे - समझौता नहीं करेंगे
▪️एक ऐसा नेता बताइए जो नरेंद्र मोदी की आँख में आँख डाल कर उनको compromised और कायर कहता हो
▪️एक ऐसा नेता जो बिना लाग लपेट के मोदी और अडानी के रिश्ते पर सरकार की कलई खोलता हो
▪️एक ऐसा नेता जिसको मोदी की ED, CBI, IncomeTax झुका नहीं सकतीं
▪️एक ऐसा नेता जिसकी एक ट्वीट से पूरी सरकार हरकत में आ जाती हो
▪️एक ऐसा नेता जिसकी छवि बर्बाद करने के लिए लाखों करोड़ों रुपए फूंके गए और अधिकांश मीडिया को काम पर लगाया गया हो
▪️एक ऐसा नेता जिसने COVID से लेकर economic तूफ़ान, आरक्षण, पेट्रोल डीजल गैस- जो कुछ भी कहा हो - वह सब सही साबित हुआ हो
▪️एक ऐसा नेता जिसको ग़लत सिद्ध करने के लिए पूरी BJP, सारे मंत्री, सारे सांसद, प्रधानमंत्री सबको जुटकर झूठ बोलना पड़ता है
▪️एक ऐसा नेता जिसने नफ़रत से झुलसते इस देश में मोहब्बत की बात की
▪️एक ऐसा नेता जिसने कन्याकुमारी से कश्मीर पैदल नाप दिए जिससे कि यह देश जुड़ा रहे
▪️एक ऐसा नेता जिसने अजनबियों को गले लगाया, लोगों के आँसू पोंछे, उन्हें विश्वास दिलाया कि वह उनकी आवाज़ है, उनकी उम्मीद है, उनका बंदा है
▪️एक ऐसा नेता जिसने संविधान हाथ में उठा कर अहंकारी सत्ता की नकेल कस दी- इस देश को याद दिलाया कि हम सब बराबर हैं और संविधान से बड़ी हमारी दूसरी कोई ताक़त नहीं है
▪️एक ऐसा नेता जो किसानों से, मोटर मैकेनिक से, सफ़ाई कर्मचारी से, छात्रों से, युवाओं से, मज़दूरों से, ऑटो चालक से दिल खोल कर मिलता है, उनकी परेशानियां सुनता है, उनके मुद्दे उठाता है
▪️एक ऐसा नेता जो महाराष्ट्र के यवतमाल में एक गरीब, किसान विधवा कलावती के घर पहुंच कर उसकी समस्या सुनते हैं. जो भट्टा पारसौल पहुंच कर अपने हक की लड़ाई लड़ रहे किसानों की आवाज़ को और बुलंद करते हैं
▪️एक ऐसा नेता जिसकी पहल से भूमि अधिग्रहण कानून बना जिसमें किसान को उसकी ज़मीन का चौगुना मुआवज़ा मिला
▪️एक ऐसा नेता जो अपनी सरकार के कार्यकाल में ओडिशा के कालाहांडी जाकर उन आदिवासियों के साथ खड़ा होता है जो वेदांता माइनिंग प्रोजेक्ट के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे
▪️एक ऐसा नेता जो श्रावस्ती में दलित ग्राम प्रधान छेदी पासी के घर से लेकर बुंदेलखंड के मेंढकी गांव में दलित कुंजीलाल के घर, अलीगढ़ के मरोड़ गांव में दलित रघुवीर के घर, अमेठी की सुनीता कोरी के घर पहुँच कर उनकी समस्याओं को सुनते हैं, उनका हल निकालते हैं
👉तो असलियत ये है कि तमाम हमलों, तमाम धमकियों, तमाम दुष्प्रचार के बावजूद भी अगर कोई एक अकेला आदमी आज भी बिना समझौते, बिना डर, अडिग होकर इस सरकार से लड़ रहा है तो वो राहुल गांधी हैं
और राहुल गांधी को किसी का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए
In my opinion, while alternate media is doing well to bring out the wrongs in current politics and have destroyed the credibility of main stream godi media but instead of giving opposition a clear cut political alternative are creating more confusion.