Questioning a judge is not a new phenomenon.
History is full of examples where judges and the judicial system were questioned when people believed justice had failed.
1908 – Lokmanya Bal Gangadhar Tilak refused to accept the legitimacy of his conviction under British rule.
1922 – Mahatma Gandhi told the judge that if the law was unjust, he should resign; otherwise, award the maximum punishment.
1930 – Bhagat Singh challenged the Special Tribunal constituted by the British and boycotted the proceedings after protesting the court’s conduct.
1973 – The supersession of three senior Supreme Court judges after the Kesavananda Bharati judgment sparked one of the biggest debates on judicial independence in independent India.
2018 – Four sitting Supreme Court judges held an unprecedented press conference, warning that “democracy is in danger” if the institution was not protected.
Questioning a judge or the judiciary is not, by itself, unprecedented.
Throughout history, people—including freedom fighters and judges themselves—have questioned judicial actions when they believed the principles of justice or judicial independence were at stake.
History shows that institutions are strengthened by accountability, not weakened by it.
🇮🇳 एक सैनिक सीमा पर दुश्मन से लड़ते हुए अपना अंग गंवा देता है। फिर भी वो ड्यूटी नहीं छोड़ता, पूरी सेवा करता है।
लेकिन बजट 2026 में सरकार ने उसके Disability Pension को "आम आय" मानकर टैक्स लगाने का फैसला कर लिया है।
जो जवान मेडिकल बोर्ड से invalided out हो जाता है उसकी पेंशन टैक्स फ्री।
लेकिन जो घायल होने के बावजूद ड्यूटी पर डटा रहता है, पूरी उम्र देश की सेवा करता है उसकी पेंशन पर अब टैक्स?
ये क्या अन्याय है? एक ही बलिदान, एक ही घाव, फिर भी दो कैटेगरी? सैनिक जो ज्यादा समर्पित है, उसे सजा मिल रही है।
Disability Pension कोई सैलरी या बोनस नहीं है ये आजीवन दर्द, मेडिकल खर्च और बलिदान का मुआवजा है। 1922 से चली आ रही छूट को अब वापस लेना सैनिकों का अपमान है।
हमारे जवान देश के लिए सब कुछ कुर्बान कर देते हैं परिवार, आराम, जिंदगी। क्या हम उन्हें सिर्फ सैल्यूट देकर छोड़ देंगे? या टैक्स नोटिस भेजेंगे?
सरकार से अपील — इस फैसले को वापस लो। सैनिकों के बलिदान को टैक्स मत लगाओ!
दिल्ली के स्वरूप नगर की यह तस्वीर है। बारिश में यह बच्चियां ट्रांसफार्मर का सहारा लेकर सड़क पार कर रही हैं।
सोचिये अगर ट्रांसफार्मर में करंट आ गया तो..
हमारे देश में गजबे हो रहा है
Bachelor of Mass Media वाले Economist बने हुए हैं
फर्जी डिग्री वाले चौकीदार बने घूम रहे हैं
कानून की डिग्री वाले लोगों के स्वास्थ्य का ठेका लिए बैठे हैं
और बिना डिग्री वाले मंत्री IAS को बता रहे हैं कि पालिसी कैसे बनानी हैं
ये बाबा ब्राह्मण हैं-40 बीघे के जमींदार थे।
जवानिया गांव बाढ़ में बह गया, लगभग सभी जातियों को जमीन मिला-इन्हें नहीं मिला क्योंकि ये ब्राह्मण समाज से थे, जब ये ब्राह्मण सुखी-सम्पन्न थे तब इन्होंने कई जातियों के लोगों को बसाया था अपने जमीन पर, और आज इनकी ऐसी हालत है,,,ब्राह्मण की पीड़ा ह्रदय विदारक है- वह चुपचाप सहता है किन्तु उसका मन व्यथित है, क्या यह न्याय है?क्या संविधान सबके लिए समान है??
Useless news channels…I am not asking you not cover Ketan’s case…but can you please do something about this as well? Our govt is busy in dividing the money they took for development of roads during rains…
Can you take this up so they notice this case?
बाईस साल पहले हिमाचल प्रदेश के एक गाँव से एक पत्र रक्षा मंत्रालय के पास पहुँचा....
पत्र लिखने वाले एक स्कूल के शिक्षक थे....उन्होंने अनुरोध किया था कि यदि संभव हो तो क्या उन्हें और उनकी पत्नी को उस स्थान को देखने की अनुमति दी जा सकती है...?????
जहाँ कारगिल युद्ध में उनके पुत्र की मृत्यु हुई थी....
उनकी पहली मृत्यु की बरसी 07/07/2000 को थी, उनका कहना था कि यदि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के विरुद्ध है तो उस स्थिति में वे अपना आवेदन वापस ले लेंगे.... कोई जबरदस्ती नहीं करेंगे.....
पत्र पढ़ने वाले विभाग के अधिकारी ने सोचा कि उस शहीद के माता पिता के दौरे को प्रोयोजित करने में काफी रकम का खर्च आयेगा।
पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उनके दौरे की कीमत क्या है....
पत्र पाने वाले उस अधिकारी ने सोचा कि अगर विभाग तैयार नहीं होता तो इस दौरे के खर्च को वह अपने वेतन से भुगतान कर देगा.....
उसने एक आदेश जारी किया कि उस शिक्षक और उनकी पत्नी को उस स्थान पर ले जाया जाए जहाँ उनका इकलौता बेटा शहीद हुए था.....
अतः उस दिवंगत नायक के स्मरण दिवस पर बुजुर्ग दंपत्ति को सम्मान के साथ बुलाया गया....
जब उन्हें उस स्थान पर ले जाया जा रहा था जहाँ उनका पुत्र शहीद हुए था तो ड्यूटी पर मौजूद सभी लोगों ने खड़े होकर सलामी दी.....
लेकिन एक सिपाही ने उन्हें फूलों का गुच्छा दिया और झुककर उनके पैर छुए।
दोनों माँ-बाप की आँखें पोंछीं और उन्हें प्रणाम किया....
शिक्षक ने कहा: आप एक वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप मेरे पैर क्यों छूते हो...?????
"ठीक है, सर!"
उस अधिकारी ने कहा!
"मैं यहाँ अकेला हूँ जो उस समय आपके बेटे के साथ था,जिसने आपके बेटे की वीरता को मैदान पर देखा था...
पाकिस्तानी अपने एल.एम.जी. से प्रति मिनट सैकड़ों गोलियां दाग रहे थे। हम में से पाँच जवान तीस फीट की दूरी तक आगे बढ़े....हम सब एक चट्टान के पीछे छिपे हुए थे...
मैंने कहा: " सर, मैं 'डेथ चार्ज' के लिए उनकी गोलियों के सामने जा रहा हूँ।
मैं उनके बंकर में जाकर ग्रेनेड फेंकूँगा। उसके बाद आप सब उनके बंकर पर कब्जा कर सकते हैं....
मैं उनके बंकर की ओर भागने ही वाला था, लेकिन.......
आपके बेटे ने कहा:
क्या तुम पागल हो ? "तुम्हारी पत्नी और बच्चे हैं।
"मैं अविवाहित हूँ,""मैं जाता हूँ।"
"आई विल डू द 'डेथ चार्ज' एंड यू डू द कवरिंग!"
बिना किसी हिचकिचाहट के उसने मुझसे ग्रेनेड छीन लिया और 'डेथ चार्ज" के लिए भागे.....
पाकिस्तान की ओर से
एच.एम.जी. की गोलियां बारिश हो रही थीं........
आपका बेटा उन्हें चकमा देते हुए गोलियों को अपनी छाती पर झेलते हुए पाकिस्तानी बंकर के पास पहुंचा, ग्रेनेड से पिन निकाला और उसे ठीक बंकर में फेंक दिया।
तेरह पाकिस्तानियों को मौत के घाट उतार दिया गया।
उनका हमला समाप्त हो गया और क्षेत्र हमारे नियंत्रण में आ गया।
मैंने आपके बेटे का शव उठा लिया सर!
उसे बयालीस गोलियां लगी थीं।
मैंने उसका सिर अपने हाथों में लिया।
उसी वक्त पेट के बल उठकर उसने अपनी आखिरी साँस के साथ कहा;
ये दिल मांगे मोर
"जय हिंद!"
मैंने अपने सीनियर से कहा कि वह आपके बेटे के ताबूत को आपके गाँव लाने की अनुमति दे! लेकिन उसने मना कर दिया।
मुझे इन फूलों को उनके चरणों में रखने का सौभाग्य कभी नहीं मिला!
लेकिन मुझे उन्हें आपके चरणों में रखने का सौभाग्य मिला रहा है, श्रीमान.....
शिक्षक की पत्नी अपने पल्लू के कोने में धीरे से रो रही थी, लेकिन शिक्षक नहीं रोया.......।
उस शिक्षक ने जवान से कहा कि मैंने अपने बेटे के छुट्टी पर आने पर पहनने के लिए एक शर्ट खरीदी थी !
लेकिन वो कभी घर नहीं आया और कभी आएगा भी नहीं।
सो मैं वो शर्ट वहीं रखने को ले आया हूं जहाँ पर वो शहीद हुए थे......
पर अब आप इसे क्यों नहीं पहन लेते बेटा......
कारगिल के इस नायक का नाम था कैप्टन विक्रम बत्रा।
उनके शिक्षक पिता का नाम गिरधारी लाल बत्रा है..... उनकी माता का नाम कमल कांता है...
(खैर अब माता जी की मृत्यु हो चुकी है )
मेरे प्यारे दोस्तों।, यही हमारे असली हीरो हैं,,,,,,,
जय हिन्द ,,नमन कैप्टन विक्रम बत्रा सर को....Read News
I haven’t been able to stop thinking about her.
Thirteen years old. A child. Brutalised by 32 men. She fought for her life… and today, she lost that battle.
How do you even process this? What kind of monsters do this? What kind of society allows it to happen?
These men deserve nothing less than capital punishment. Crimes of this brutality against a child demand the strongest punishment our justice system provides.
She should have been worrying about school, friends, and dreams—not fighting for her life.
I’m angry. I’m heartbroken. And I’m ashamed that we keep failing our daughters.
ये देश की राजधानी दिल्ली है । केंद्र और राज्य दोनों में बीजेपी की सरकार है ॥
देश के प्रधान मंत्री तो विदेश घूमने में लगे है ।अब देश भगवान भरोसे चल रहा है ।
अपनी जान की सुरक्षा ख़ुद करे सरकार सिर्फ़ आपके मारने पे शोक और एक दो लाख की मदद करके अपना फ़र्ज़ पूरा कर देगी ॥
जिसको कुत्ता नहीं पूछता वही लोग आपको जिताकर विधानसभा पहुंचाते है ,
जिसको कुत्ता नहीं पूछता उन्हीं लोगों के पैरों में गिरकर वोट मांगते हो ,
जिनको कुत्ता नहीं पूछता उन्हीं के टैक्स के पैसों पर पलते हो !
"Inki Chhoriyan Choro Se Kam Hai Ke!"
SENSATIONAL: Muslim girl trapped minor 13-year-old Hindu girl in dance class, introduced Muslim boys, screen recorded calls for blackmail to force conversion in Etawah, UP.
Pressure her to leave parents, to go to Goa for conversion, badmouthing Hindu religion; threats of chats leak.
Police arrested 4.
@etawahpolice