मै जाट, मै ग़ुज्जर, मै ब्राह्मण, मै चमार, मै बनिया, मै विश्वकर्मा, मै फलाना ढिमकाना,,,सबकी अपनी समिति है लेकिन अपने अपने शहर के शराब के ठेके हटा नहीं सकते और कहने को इनसे बड़ा समाज सुधारक नहीं कोई,जिस दिन तत्वज्ञान से जुड़ ��र सब एक हो जाओगे धरती पर नशीली चीजों का नाम नहीं मिलेगा