अग्रतः चतुरो वेदाः पृष्ठतः सशरं धनुः। इदं ब्राह्मं इदं क्षात्रं शापादपि शरादपि।
भौतिक विज्ञान में परास्नातक ट्वीट मेरे निजी विचार है,रिX सहमति नहीं है।
The Atrocity Literature is so fake; On one hand they say, Brahmins survived on alms like helpless beggars.
The next moment they say, Brahmins were the all-powerful, elite oppressing everyone.
And they receive Reservations based on such Literature.
#EndReservation
Merit is decided by caste.
• Fees are decided by caste.
• Seats are decided by caste.
And then someone who barely got admission with 30% marks posts on Instagram:
"The education system is unfair."
Ideally shri Dharmendra Pradhan ji should have been made to resign when he got the UGC regulations.
If that would have happened the most Hon'ble PM & the current Government would not be in the mess they are today.
But then this government does not value peaceful protesters!
१. सामान्य वर्ग के निर्धन विद्यार्थियों को फॉर्म की फीस में छूट हो, हॉस्टल/एडमिशन सहित हर उस जगह छूट हो जहाँ अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को छूट मिलती है। आप हर समाज को जाति के आधार पर आरक्षण भी देते हैं और फिर उसे उसी जाति के आधार पर निर्धन मान कर फीस में भी छूट। सामान्य वर्ग को कम से कम आर्थिक आधार पर सरकार हर स्तर पर वैसी ही आर्थिक छूट दें जो SC/ST को उपलब्ध है।
२. सीटें बढ़ी हैं, यह सत्य है, पर जनसंख्या और साक्षरता भी बढ़ी है। और सीट इसलिए नहीं बढ़ी थी कि भविष्य में भरेंगी, बल्कि इसलिए कि पहले बहुत ही कम थीं। इसलिए, प्रतिभाहीन लोगों को जबरन सरकारी कॉलेजों में चार नंबर पर भरने की जगह, उन सीटों की एक न्यूनतम पात्रता निर्धारित हो, यदि आरक्षित उसे पूरा करते हैं तो उत्तम, अन्यथा अनारक्षित से उसे भरा जाना चाहिए।
३. धर्मेन्द्र प्रधान जैसे नकारों को नकारे मंत्रालय दें, न कि ऐसा जिससे भारत का भविष्य तय होता है। ऐसे हर मंत्री जो निकम्मे हैं, उनसे त्यागपत्र तो ले ही लिया जाना चाहिए।
४. यह स्वीकारिए कि आपने एक कुकृत्य किया है, और लगातार सामान्य वर्ग उसका शिकार होता रहा है। अपने भाषणों से ‘पीड़ित, वंचित, शोषित’ का सामूहिक गायन बंद कीजिए। अपने भाषणों को सही अर्थों में सर्व समावेशी बनाइए।
५. आपके लाभार्थी वर्ग में, अब सामान्य वर्ग के निर्धन छात्र-छात्राएँ होने ही चाहिए। उन्हें 40% पर समेट कर आप विकसित भारत का झुनझुना नहीं बजा सकते।
६. हर राज्य में कुकुरमुत्ते की तरह पास होते सामान्य वर्ग के हिन्दुओं को अपराधी बनाने वाले कानून पर आपकी पार्टी के वकील उसका प्रतिकार कोर्ट में करें। यदि आप ऐसा नहीं कर पाते तो यह सत्य हो जाता है कि आप सामान्य वर्ग की प्रतिभा का सामूहिक संहार करना चाहते हैं।
७. सामान्य वर्ग एक बहुत बड़े हिस्से का मोहभंग हो चुका है। उनका विश्वास यूजीसी पर मोदी/भाजपा की चुप्पी के कारण डिग चुका है। बाकी का ‘सत्कार्य’ आपके आइटी सेल के गिरहकट लोगों ने वैयक्तिक आक्षेप से ले कर, तार्किक काउंटर की जगह, निजी जीवन को निशाना बना कर कर ही दिया है। तार्किक काउंटर लोग भूल जाते हैं, पर्सनल अटैक याद रहता है।
८. सामान्य वर्ग अब किसी भी प्रकार का चूरण नहीं फाँकेगा, उसे तंत्रगत सुधार चाहिए। ‘बदला लेंगे’ की बात कितनी उचित है, वह चर्चा का विषय है, पर उन्होंने ऐसा सोच लिया है, इससे आप इनकार नहीं कर सकते। उसे अब मोदी/भाजपा की हार, अपमान आदि पहले की तरह ‘पर्सनल’ नहीं लगते। वो कह रहा है कि जब हमारा भविष्य ही नहीं रहेगा तो हम तुम्हारे नेतृत्व का करेंगे क्या?
९. जो बेचारे ‘इन्हें पार्टी का काम मत दो’ की धमकी दे रहे हैं, वो ऐसा करवा कर देख लें, लोगों के घर के चूल्हे बंद नहीं होंगे। वैसे भी पार्टी का विश्वास लल्लनटॉप जैसों पर अधिक है, वो लोग काम कर ही देंगे।
77 दिन का मौन चीत्कार क्या किसी की जान से बड़ा भी कोई राजनीतिक गणित है?
रवींद्र जठेड़ी जी पिछले 77 दिनों से SC/ST एक्ट और आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर आमरण अनशन पर हैं। यदि किसी नागरिक की हालत लगातार बिगड़ रही है, तो कम से कम उसकी बात को सुनना और उस पर संवाद करना लोकतंत्र की जिम्मेदारी होनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसी व्यक्ति की आवाज़ तभी सुनी जाएगी जब उसके पीछे बड़ा संगठन, मीडिया अभियान या प्रभावशाली राजनीतिक समर्थन हो? क्या शांतिपूर्ण विरोध अब पर्याप्त नहीं रह गया है?
राजनीतिक दल हों या सामाजिक संगठन यदि वे किसी मुद्दे को अपना बताते हैं, तो कठिन समय में भी उनके साथ खड़ा होना चाहिए। केवल मुद्दों पर राजनीति करना और संकट की घड़ी में मौन रह जाना लोगों का भरोसा कमजोर करता है।
लोकतंत्र की असली ताकत संवाद, लेकिन जेठड़ी जी से कोई संवाद क्यों नहीं किया जा रहा है। संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण सुनवाई क्यों नहीं हो रही क्योंकि आप केवल भीड़ या शक्ति प्रदर्शन को सुनते देखते महसूस करते है…..।
असहमति से सहमत होना ज़रूरी नहीं, लेकिन किसी नागरिक की आवाज़ को अनसुना कर देना भी लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
नरेंद्र मोदी जी ये देश देख रहा है कि आपके पाले साँप कैसे एक वर्ग को डंस रहें हैं और आप अपनी राजनीति चमकाने मे व्यस्त हैं।
#RavindraJathedi
#Democracy
दलितों को घोड़ी कौन नहीं चढ़ने देता, OBC समाज के दबंग जातियां बिल्कुल ठीक ठोका सज्जन सिंह ने।
मै तो एक लाइन और एड करूंगा कि कुछ जगह पर दबंग दलित जातियां कमजोर दलित जातियों का शोषण करती है।
अपनी डूबती हुई नैया को बचाने के लिए फैज़ल खान उर्फ खान सर बहुत पैसा फूंक रहा है , खबर है कि उसने नोएडा के टीचर्स को 5 लाख और यूट्यूबर्स को 50 हजार रुपये का लालच दिया , मानो या न मानो फैजल खान भाजपा का एजेंट है नहीं तो धर्मेंद प्रधान का इस्तीफा हो ही जाता ।
@Abhinav_Pan जो दम्भ भरता है कि उसके संस्थान से 12000 अभ्यर्थी पुलिस बने और कुल आंकड़ा रहा 76 का, जो 21/51 रूपये मे अल्ट्रासाउंड की बात कहकर 251 मे अल्ट्रासाउंड कराता है ऊस झूठे की तारीफ मे कसीदे पढ़ रहे...!!
अभिनव क्रांति सही जगह करो
सूखी रहोगे झूठे मक्कारो की तारीफ़ करना बंद करो।
@Abhinav_Pan तुम वही अभिनव हो न जो मेवात, नूह जाता है तो हाथ का कलावा काट लेता है।
तुम वही अभिनव हो जो बंगलादेश मे शेख हसीना के लहराये जा रहे ब्रा को वहां के युवाओं को क्रांति बता रहे थे....!!
जो खुद को मुसलमान बताता है उसे मुस्लमान नहीं कहेंगे तो क्या फैसल अभिनव पाण्डेय कहेंगे?