यह कोई साधारण महिलाएं नही हैं ये है ISRO की वैज्ञानिक.... तन पर साड़ी, माथे पर कुंकुम और गले में मंगलसूत्र पहने ये महिलाएं कोई आम घरेलू महिलाएं नहीं बल्कि इसरो की वैज्ञानिक हैं जिन्होंने हाल में ही #चंद्रयान_3 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। महिलाओं की आजादी के नाम पर पिछले कुछ सालों में टी-शर्ट, जींस और बरमूडा पहनने का चलन आम हो गया है, जिसका खोखलापन इन दक्षिण भारतीय महिला वैज्ञानिकों ने दिखाया है। इन्हीं वैज्ञानिकों ने पिछले दिनों चंद्रयान के प्रक्षेपण से पहले बालाजी के दर्शन किये थे. यह तस्वीर इस बात का अच्छा उदाहरण है कि संस्कृति कभी भी प्रौद्योगिकी के आड़े नहीं आती.... दूसरी ओर, कुछ लोग अल्प ज्ञानी होते हुए खुद को बहुत बड़ा वैज्ञानिक होने का दिखावा करते रहते है...परन्तु वास्तव में ऐसे लोगों को विज्ञान का सामान्य ज्ञान भी नहीं होता...
जय हिंद 🇮🇳
#Chandrayaan3
'चंद्रयान 3' इसीलिए सफलतापूर्वक लैंड हो गया क्योंकि ISRO CEO एस सोमनाथ और सारे वैज्ञानिकों ने मेहनत की। साथ ही मंदिरों में पूजा-अर्चना की।
वैज्ञानिक नमाज पढ़ने नहीं गए, मस्जिद में नहीं गए। वो मंदिर में गए, क्योंकि उन्हें पता है कि विज्ञान का असली जुड़ाव सनातन से है, अध्यात्म से है।
#Chandrayaan3 #IndiaOnTheMoon
कौन कहता है की चांद सिर्फ बातें करता हैं तारों से,
आज देखना तुम वो चांद बातें करेगा हमारे(भारत के) इसरो से 🙌
आइए महादेव से चंद्रयान की सफल लैंडिंग के लिए मिलकर प्रार्थना करें 🙏
अब घुसपैठिए जहाँ मन चाहेंगे अवैध अतिक्रमण करेंगे, उन्हें अगर किसी ने रोका तो सुप्रीम कोर्ट डंडा चला देगा। केंद्र सरकार भी कुछ नहीं कर सकती।
मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर रेलवे की जमीन पर मुस्लिम बस्ती बसा दी गई। जब रेलवे ने बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की तो औरंगजेब की औलादें सुप्रीम कोर्ट पहुँच गईं। भले ही आम आदमी को अपनी याचिका सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचाने में पूरी ज़िन्दगी लग जाए, जब याचिकाकर्ता कोई अवैध अतिक्रमणकारी याकूब शाह होगा तब तो CJI चंद्रचूड़ उसे तुरंत लिस्ट करेगा। हुआ भी यही। याचिका तुरंत लिस्ट हुई, सुनवाई हुई और बुलडोजर की कार्रवाई रोक दी गई।
मामला श्रीकृष्ण जन्मभूमि का, जमीन रेलवे की, लेकिन बसेंगे घुसपैठिए। भले ही छोटी लाइन को बड़ी लाइन न किया जाए, भले ही 'वन्दे भारत' न चले, भले ही मथुरा-वृन्दावन के बीच आवागमन और सुलभ न हो, भले ही श्रद्धालुओं को परेशानी हो, भले ही बस्ती बसा कर गायें काटी जाएँ - सुप्रीम कोर्ट के लिए ज़्यादा ज़रूरी है कि किसी याकूब शाह को दिक्कत न हो। एक तो औरंगजेब ने मंदिर तोड़ कर उसके ऊपर मस्जिद बनवा दी, ऊपर से उसके आसपास विकास कार्य न हों इसके लिए मुस्लिम बस्ती बसा दी गई, अब सुप्रीम कोर्ट उनकी रक्षा कर रहा है।
भूमि रेलवे की, मंदिर हिन्दुओं का, अतिक्रमण समुदाय विशेष का। विधिक सूचना देने के उपरांत विध्वंसक कार्रवाई आरंभ हुई। भूमि को अतिक्रमण मुक्त किया गया ताकि रेलवे अपने पटरियों का विस्तार कर सके।
सुप्रीम कोर्ट ने दस दिनों की रोक लगा दी। प्रशासन, पुलिस और रेलवे के दलों ने सर्वेक्षण के बाद ‘नई बस्ती’ को तोड़ने का निर्णय लिया था। लगभग दो सौ घर थे जो तोड़े गए।
‘नई बस्ती’ एक अतिक्रमण मॉडल है समुदाय विशेष द्वारा जो आपको हर रेलवे स्टेशन से सटे स्लम में दिख जाएगा। मथुरा में वंदे भारत के परिचालन हेतु ब्रॉड गेज पटरी बिछानी है। हर रेलवे स्टेशन के आस-पास रेलवे बड़ी भूमि भविष्य के विस्तारीकरण हेतु रखती है।
जब तक नया प्रोजेक्ट नहीं आता, तब तक वो रिक्त होती है जिस पर समुदाय विशेष अपनी पैतृक संपत्ति समझ कर पन्नी, फ्लैक्स से होते हुए पक्के मकान बना लेता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस अतिक्रमण मॉडल को बढ़ावा देने हेतु अपने पूर्व के एक आदेश में इन अतिक्रमण करने वालों को प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से किसी नियत स्थान पर भूमि और आवास देने के लिए जिलाधीश को निर्देशित किया था।
ये डेमोग्रफी बदलने का उत्तम मार्ग है। कहीं से भी आ कर वैसी जगह बसो जहाँ जनसंख्या कम है, फिर मानवता की बात कर के, कोर्ट के माध्यम से अवैध को वैध बनवा लो। रेलवे के पास अवैध बस्ती सुरक्षा की दृष्टि से भी उचित नहीं है। रेलवे के वकील क्या कर रहे हैं, पता नहीं।
यदि वो बाहर से आए हैं, तो उन्हें उनके अपने राज्यों में उन्हीं जगहों पर बसाया जाए, जहाँ के वो निवासी थे। किसी भी राज में किसी भी समुदाय के प्रति किसी भी प्रकार के उत्पीड़न की समस्या जब नहीं है तो ये अतिक्रमण मॉडल क्यों?
मास रिपोर्टिंग के लिए निशाना बनाया जा रहा है। कृपया मुझे ज़्यादा से ज़्यादा मेंशन करें ताकि इनकी पोल खोलता रहूँ, एकाउंट बचा रहेगा।
मेरे ट्वीट में लिखे तथ्यों पर क्यों नहीं बात कर रहे ये लोग। क्या बिहारी होना पाप है?
I join the 140 crore people of India in paying homage to the remarkable Atal Ji on his Punya Tithi. India benefitted greatly from his leadership. He played a pivotal role in boosting our nation's progress and in taking it to the 21st century in a wide range of sectors.