Ordered this product for Rs. 149 and when delivered, the MRP on the product says it's for Rs. 99. Selling price > MRP?Is this the new normal? @amazonIN
I hear Cockroach Janata Party accounts are being blocked. Small warning: cockroaches have outlived empires, pandemics and probably a few IT cells too. Block one, ten more emerge from the dark corners. MIND IT! 😃
अखिलेश जी, आइये तेल दामों की क्रोनोलॉजी समझते हैं:
> मोदी सरकार ने 2014 में कार्यभार संभालते ही पेट्रोलियम उत्पादों की सब्सिडी बिल्कुल खत्म कर दी, जिससे LPG और डीजल आम उपभोक्ता के लिए महंगे हो गए।
> 2015-16 में मोदी खुद को किस्मतवाला बताते थे कि उनके आने के बाद कच्चे तेल की कीमत $30 प्रति बैरल से भी नीचे गिर गई है। लेकिन उस वक्त भी उन्होंने दाम पड़ोसी देशों से ऊपर रखे। पेट्रोल और डीजल औसतन ₹59 और ₹46 तक बना रहा।
> 2016 से 2019 के बीच कच्चा तेल $65-70 प्रति बैरल रहा और पेट्रोल और डीजल औसतन ₹70 और ₹66 तक बना रहा।
> 2020 में कोरोना की आड़ लेकर तेल के दामों में केंद्रीय टैक्स अप्रत्याशित रूप से बढ़ा दिए गए, हालांकि कच्चे तेल की कीमतें गिरती रहीं और लॉकडाउन में तो $20 प्रति बैरल भी आ गिरी। पेट्रोल और डीजल औसतन ₹84 और ₹76 तक बना रहा।
> 2021 में जब कच्चा तेल वापिस से $65-70 की पुरानी रेंज में आया तो हमें बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल उछाल ले रहा है। इसलिए अक्टूबर 2021 में पहली बार पेट्रोल ₹100 पार कर गया और डीजल ₹90 पार कर गया। हालांकि कच्चे तेल की ये कीमतें 2019 के बराबर ही थी। लेकिन कोरोना के बहाने टैक्स का पहाड़ ऐसा खड़ा कर दिया गया कि 2019 के मुकाबले एक्साइज ड्यूटी लगभग 30 रुपए ज्यादा बढ़ा दी गई थी।
> 2022 में रूस यूक्रेन युद्ध की आहट से कुछ महीने कच्चा तेल $100 प्रति बैरल क्रॉस कर गया। सरकार ने कुछ महीने बड़ा एहसान जताया कि हम एक्साइज ड्यूटी ₹8 कम करके रिटेल प्राइस नहीं बढ़ने देंगे। लेकिन दिसंबर 2022 तक क्रूड वापिस से $70-75 की रेंज में आ गया।
> 2023-2025 के बीच हमें बताया गया कि भारत रूस से $25-$30 सस्ता तेल खरीद रहा है। बाजार में कीमत $75-80 थी, लेकिन भारत को $50-55 मिलता रहा। लेकिन फिर भी करिश्माई रूप से पेट्रोल और डीजल का दाम 90 रूपये से ज्यादा बना रहा। गौरतलब है कि 2015 में कच्चे तेल की इस कीमत पर ये दाम 55-60 रूपये था।
> रूस से सस्ते तेल के आयातकों में सबसे बड़ा रिलायंस था, रोजाना 4 लाख बैरल से ज्यादा। इस दौरान रिलायंस ने हजारों करोड़ का मुनाफा कमाया। तेल का शुद्धिकरण करके यूरोप को बेचा गया। यहां तक कि भारत में शुद्धिकरण हुआ तेल नेपाल, भूटान और श्रीलंका में भी हमारे मुकाबले 30 रुपए लीटर सस्ता बिकता रहा।
> सस्ते रूसी तेल का सारा प्रॉफिट अंबानी को और भारत को इसके बदले 2025 में अमेरिका से टैरिफ की सौगात मिली। लेकिन ट्रंप परिवार और अंबानी परिवार की सांझ बहुत अच्छी है, अब यही सैटिंग वेनेजुएला के तेल में शुरू हो चुकी है।
तो अब अगर कोई ये कहता है कि 2022 से 2025 के बीच में तेल के दाम नहीं बढ़े तो भाषा सरकारी है। कायदे से रेट घटने चाहिए थे, हमने अपने पड़ोसी देशों के मुकाबले ₹30-35 महंगा तेल खरीदा है 3 साल तक।
मोदी कोई महंगाई मई में क्यों याद आई, सबसे गहरा संकट तो मार्च और अप्रैल में था। चुनाव के तुरंत बाद ये माहौल क्यों बनाया जा रहा है?
इज़रायल के चंगुल में फंसकर ईरान की नाराजगी किसने मोल ली है?
ये संकट हमारे ऊपर मोदी ने लादा है और उपरोक्त आंकड़े बता रहे हैं कि जब संकट नहीं था तो मोदी सरकार ने रिलायंस के साथ मिलकर उपभोक्ता को लूटा है।
प्रणाम।
My mamaji is on ventilator. He had all his life’s savings within PSU bank in FDs. All his accounts have been sealed as due to being bed ridden he could not do re-KYC in person. His kids asked bank to take humane view. Bank said if he cannot come in person, accounts will not open.
FDs in PSU banks can be useless in time of need due to KYC regulations.
@narendramodi@RBI this KYC mess is draconian. Please help in this time of need
@ShivAroor Time for India to abolish the Governor post.
Governors cost the public over ₹700 crore annually & live in the biggest palaces of any state.
They serve NO function that cannot be handled by existing institutions.
End this colonial nonsense. 😀