A very relevant issue raised by Sh @AshwiniUpadhyay. Government of India should take opinion of legal luminaries and make it a criminal offence which will eliminate fribulous litigation.
चाय की दुकान पर एक चर्चा चल रही थी
अगर भारतीय जनता पार्टी वाकई में सनातन का सम्मान करती है तो
“देवी देवताओं का अपमान करने वालो को उम्रक़ैद की सजा का कानून बनवाये”
नहीं तो यही माना जाएगा की बीजेपी सनातन का सम्मान नहीं करती सिर्फ़ वोट बैंक के लिए इस्तेमाल करती है !!
रिजर्वेशन में रिफॉर्म्स होना चाहिए। बौद्ध धर्म में कन्वर्ट हो चुके दलित और ईसाई धर्म में कन्वर्ट हो चुके आदिवासियों को एससी/एससी आरक्षण से बाहर किया जाना चाहिए। @narendramodi#ReservationReforms
जिस तरह से आरक्षण के कोढ़ ने कॉलेज कैम्पसों में जातिवाद को घटाने की जगह री-इन्फोर्स किया है, वैसे ही मोदी एक्ट के कारण आने वाले एकाध महीने में सोशल मीडिया पर आपको इतने नील-विरोधी मीम्स, AI स्लॉप मिलेंगे और लोग बिना जाति का नाम लिए इतनी गालियाँ देंगे कि इस कानून का लक्ष्य उल्टा हो जाएगा।
मोदी ने जो यह शाहबानो किया, उसका दुर्भाग्य यह है कि मुसलमान तो कॉन्ग्रेस को वोट देते रहे, पर मोदी एक्ट को इतना कठोर बनाने के बाद भी जाटव उन्हें घंटा वोट नहीं दे रहा।
दोनों ही स्थितियों में समाज में जातिवाद केवल और केवल बढ़ेगा, भाजपा का वोट घटेगा (जाटव का मिलेगा नहीं, सामान्य वर्ग चिढ़ कर देगा नहीं)। बाकी, GC+non-dominant OBC+non-dominant SC का एक समीकरण है जो किसी भी नई पार्टी के लिए एक स्थान बना सकती है।
पांडे जी, हमको झाँट भर फर्क नहीं पड़ता तुम्हारे विरोध में चलने वाली ‘विदेशी साजिशों’ से। मेरे नाक से दूध नहीं बहता। माँग सही है, बात खत्म। देश में हर वर्ष पाँच चुनाव होते हैं, तो वक्त तो कभी सही होगा नहीं।
तुम ही लोग तो चूतिए थे न साले कि हर्ष दूबे को स्टूडियो-स्टूडियो घुमा रहे थे?
तुमने सोचा कि राम मंदिर की डकैती के बवासीर को CJP बिठा कर डायवर्ट कर देंगे। वो बवासीर बना तो दूबे को ले आए NEET पर बोलने के लिए कि वो डायवर्ट हो जाए। फिर वो दबा तो तुमने उस विषय पर उससे बुलवाना चालू किया जिसे अचानक से तुम आज ‘सेंसिटिव’ मान रहे हो।
फिर मैं आ गया आउट ऑफ सिलेबस। और मैं, दूबे या दीपके तो हूँ नहीं कि तुम प्रधान को हटा दोगे मैं नाचने लगूँगा क्योंकि मेरी माँग न तो मेरी नेतागीरी के लिए है, न ईगो सेटिस्फैक्शन के लिए।
तुमने ऐसा व्यक्ति देखा ही नहीं है, इसलिए पुरानी से ले कर नई आइटी सेल और मोमो की दुकानों की तरह हर नुक्कड़ पर फोन लिए डीप स्टेट, विदेशी साजिश टाइप करने वाले मीशो के अजय सान्यालों को समझ ही में नहीं आ रहा है कि टैकल कैसे करें।
आज भी मेरी माँ के मरने को ले कर बातें लिखी जा रही हैं। पर भाई, मैंने उसे अपने हाथों से मुखाग्नि दे कर उसकी राख को गंगाजी में बहा दिया है। तुम मुझे ‘इसकी माँ और उसकी माँ’ कह कर अपमानित नहीं कर सकते। हाँ क्रोधित कर सकते हो। और वह अच्छा नहीं होगा, इसकी मैं गारंटी दे सकता हूँ।
खैर, तुम्हें इतना समझ में नहीं आएगा क्योंकि आईटी सेल में निम्न स्तरीय बुद्धि होना एक अपेक्षित मानदंड है। तुम वैसे भी राज्य के आइटी सेल के हो। अतः, तीन वाक्यों में यह समझ लो:
पार्टी के भटकाव की आलोचना देशद्रोह नहीं है। पार्टी के नेता द्वारा समाज को एक्टिवली बाँटने का उपक्रम देशद्रोह और गद्दारी है। गांड में दम है तो उस नेता का नाम कमेंट में लिखो।
मेरे ऊपर SC/ST एक्ट में FIR पर कुछ बातें सवर्ण समाज से
कोई मेरी माँ या बहन पर सीधे बलात्कारी मानसिकता के साथ यह कहे कि उसका विवाह मैं चंद्रशेखर के साथ करा दूँ, और मैं चुप रह जाऊँ तो आप बताइए कि मैं कैसा पुत्र या भाई हूँ?
इतने पर भी चंद्रशेखर को ले कर मैंने कोई जातिसूचक शब्द नहीं बोला, जो उक्त वीडियो में है। जब स्टेज से ब्राह्मणों की बेटियों को खींचने की बातें होती हैं और किसी SC नेता का चेला सोच-समझ कर उकसाने के लिए ऐसी बात करेगा, तो मैं चुप कैसे रहूँगा?
आज व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों को समझे या न समझे, वह यह अवश्य जानता है कि SC/ST एक्ट क्या है। तो मैं जब बोलता हूँ तो मुझे अपनी सीमाएँ (चाहे वह कितनी ही अनुचित क्यों न हों) पता हैं कि क्या बोलना है, क्या नहीं।
मैं जानता हूँ कि दिल्ली पुलिस के नॉर्थ अवेन्यू स्टेशन में आजाद समाज पार्टी वालों ने कितना दवाब दे कर रात के बारह बजे यह FIR लिखवाया है जो कोर्ट में दो मिनट नहीं टिकेगा। एक भी धारा ऐसी नहीं है जो होल्ड करेगी।
मैं सैनिक स्कूल का छात्र हूँ और इतनी रैगिंग झेल चुका हूँ कि मेरा मनोबल तोड़ने के लिए दिल्ली पुलिस को कस्टडी में मेरी हत्या करनी पड़ेगी, दो-चार डंडों से मेरा मनोबल नहीं टूटने वाला। और यदि मैं जीवित बच गया तो इसी स्थिति में जंतर मंतर जाऊँगा और अपने समाज से कहूँगा कि बताओ, तुम्हारी बहन और माँ को ले कर कोई ऐसी टिप्पणी करे तो क्या करोगे?
यदि ऐसा कमेंट फिर मेरे वीडियो पर आया तो मैं पुनः उसी तरीके से उत्तर दूँगा जो मैंने दिया। कानून जब तक है, संशोधन नहीं होता, मैं उसका सम्मान करूँगा और दिल्ली पुलिस के साथ पूर्ण सहयोग करूँगा। 92% ऐसे केस केवल प्रताड़ित करने के लिए होते हैं।
अंत में, सवर्ण समाज से यह पूछना चाहता हूँ कि क्या इस तरह की टिप्पणी पर मुझे सह लेनी चाहिए थी क्योंकि किसी पार्टी के लोग नाराज हो जाएँगे? क्या ब्राह्मणों की माँ और बहनें इन रेप मैंटिलिटी से संचालित गुंडों के शाब्दिक बलात्कार के लिए जन्म लेती हैं?
आज का लाइव ऐसा होगा
फिर कभी नहीं जैसा होगा
एट्रोसिटी एक्ट के खोलेंगे धागे
रख कर दलितों को ही आगे
चुन-चुन कर वीडियो लाएँगे
सब तथ्य दिखाए जाएँगे
मंचों के बोल भी आएँगे
हर इमेज सजाए जाएँगे
सवर्णों की भी बेटी होती है
उसकी भी इज्जत होती है
वो राह चलती वेश्या नहीं
मैं चुप सुनने वाला प्रेश्या नहीं
हर रंग दिखाऊँगा तुमको
धो-धो के सुखाऊँगा सबको
—
मित्रों, आप सबके स्नेह और समर्थन का आभार! मेरी बहन आपकी भी बहन है, और आपकी बहन मेरी भी बहन है। मेरे वचन तब कटु हुए जब किसी ने उसे राह चलती किसी वस्तु की तरह देखा। मेरी बहन का ऑब्जेक्टिफिकेशन किसी नारीवादी को नहीं दिखा, पर जब एक कथित रावण समर्थक को मैंने लक्षित करके कुछ कहा तो तुम्हें ध्यान आया कि मेरी मानसिकता सड़ी हुई है।
मैं जहाँ से आता हूँ, यदि यह बात मुझे कोई सामने से कहता तो मेरे ऊपर यह धाराएँ नहीं लगती, वो कोई और धारा होती। मैं आत्मनियंत्रण वाला व्यक्ति हूँ और ट्रोल की ट्रोलिंग को उसी तरह से थामना जानता हूँ।
बाकी, जो भी होगा वह प्रारब्ध है। पर हाँ, सवर्णों की बेटियाँ किसी भी शोषित-वंचित के डिजिटल उपभोग या विकृत यौन मानसिकता के प्रयोग की वस्तु नहीं।
The SC/ST Act used against Ajeet Bharti is draconian
RT if you support him and if you want amendments in the SC/ST Law
This case should be made an example of how the SC/ST Act is misused
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
Jio और Airtel दोनों सिम मेरे फोन में लगे हैं, दोनों में अनलिमिटेड रिचार्ज करवा रखा है, दोनों 5G सपोर्ट करते हैं,
फिर भी हाल ये है कि 280p में भी वीडियो ठीक से नहीं चलता और वीडियो कॉल भी अटक अटक कर होती है।
नेटवर्क की हालत देखिए कितनी बुरी है,
Jio में फिर भी थोड़ा बहुत नेटवर्क आ जाता है,
लेकिन रिचार्ज का दाम बढ़ाने वाला airtel तो 50 MB भी ठीक से इस्तेमाल नहीं करने देता
नेट चलता ही नहीं, कॉल भी नहीं लगती, नेटवर्क बिल्कुल खराब है।