स्टूडियो में ही चिल्लाती रहती हो चाची.!
कभी मैदान में आकर रिपोर्टिंग कर लो.. चाची तुम्हारी जुबाँ से निकले जहर का ही असर है जो रिपोर्टर पीटे जा रहे हैं
बहुत गालियाँ गिनने का शौक है न तुमको.!
जंतर मंतर आओ और गालियाँ गिनों.. साथ में अंजना, रुबिका, सुशांत, अमीश, सुधीर सबको लेकर आओ!
कसम से बता रहा हूँ चाची.. रास्ते में ही बिछा न दिए फूल तो कहना!