अन्याय केवल शिक्षक समुदाय से ही क्यों..
माननीय प्रधानमंत्री @narendramodi
जी कृपया संज्ञान में लेकर लाखों शिक्षक परिवारों की आवाज को सुनने का कष्ट करें
@DrDCSHARMAUPPSS
#बिना_परीक्षा_माननीय_सुप्रीम_कोर्ट_में5_नये_जज_नियुक्त
Law के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री LLB लेकर वकील बनते हैं ।इसी प्रकार स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में प्रोफेशनल डिग्री बी एड या बीटीसी लेकर शिक्षक बनते हैं ।
simple एलएलबी की डिग्री लेकर बने अधिवक्ता बिना किसी परीक्षा के केवल अनुभव के आधार पर हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस ,फिर चीफ जस्टिस ,सुप्रीम कोर्ट के मा जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट के chief justice तक बन सकते हैं।
लेकिन बी एड या बीटीसी की डिग्री या डिप्लोमा लेकर बने शिक्षक को नियुक्ति के 25-30 वर्षों बाद प्रमोशन तो दूर नौकरी में बने रहने के लिए भी नई परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी और सफल न होने पर नौकरी से निकाल दिये जाएँगे ।क्या यह न्याय है?
हम माननीय प्रधानमन्त्री जी से अनुरोध करेंगे कि देश के 25 लाख शिक्षकों के साथ हो रहे इस अन्याय का संज्ञान लें और एनसीटीई द्वारा 23 August 2010 में निर्धारित योग्यता को आरटीई में सम्मिलित करने की कृपा करें ।🙏
@narendramodi@AmitShah@rajnathsingh@RahulGandhi@dpradhanbjp@myogiadityanath
#इति_सिद्धम
वे अपने लिये संसद के बनाये क़ानून को भी नहीं मानेंगे ,क्योंकि उनको न्यायिक स्वतन्त्रता चाहिये ।
बिना किसी परीक्षा में सम्मिलित हुए केवल अनुभव और सिफारिश के आधार पर नियुक्ति और प्रमोशन लेते रहेंगे ।
आप पर वे नियम थोपे जाएँगे जो संसद ने आपके लिए बनाए ही नहीं हैं
2017 के संशोधन सहित आरटीई में कहीं टेट का उल्लेख नहीं है आरटीई के 23(1) के द्वारा प्रदत्त शक्ति से एनसीटीई ने 23 August 2010 को minimum qualification परिभाषित की है जोकि नियुक्ति वर्षों के अनुसार with tet और without tet है लेकिन माननीय जी ने minimum qualification को TET लिख दिया तो लिख दिया ।
आपको नियुक्ति हेतु निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करने के नियुक्त होने के 20-25 वर्षों बाद भी परीक्षा में बैठायेंगे ।
अनुभव के आधार पर पदोन्नति तो दूर नौकरी (उस नौकरी में जिसमें नियुक्ति की प्रक्रिया में कोई दोष या आपत्ति नहीं है)में भी आप नहीं रहेंगे ।20-25 lakhलाख शिक्षकों की नौकरी जाये तो जाये उन पर कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
हमने सदैव कहा कि रास्ता संसद से निकलेगा ।इसलिए अब minimum qualification को parliament से define कराने हेतु आगे बढ़ेंगे ।
@narendramodi@AmitShah@dpradhanbjp@myogiadityanath
#आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट लागू करने के निर्णय से व्यथित व लगातार फ़ोन करके अपडेट माँग रहे शिक्षक साथियों को अवगत कराना चाहता हूँ कि सुप्रीम कोर्ट में क़ानूनी कार्यवाही हेतु अधिवक्ताओं से हुई बातचीत के क्रम में शीघ्र अपना पक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी चल रही है ।
आप सब भली भाँति जानते हैं कि इस समस्या के पीछे एनसीटीई के भ्रामक शपथ पत्र और २३ अगस्त २०१० के पैरा ४ को स्पष्ट न करना है ।
एनसीटीई को भारत सरकार के निर्देश के बाद ही इस समस्या का हल है
इसलिए भारत व्यापी आंदोलन हेतु अन्य राज्यों से लगातार वार्ता चल रही है ।शीघ्र ही दिल्ली कूच की तिथि घोषित की जाएगी ।
सभी साथी एक्स (X) पर सक्रिय रहें और अपने प्रदेश व अन्य राज्यों के साथियों को जागरूक करें ।
आपकी एकता ही आपको सफलता प्रदान करेगी ।आपका सदैव नारा रहा है कि
“हर जोर जुल्म की टक्कर पर संघर्ष हमारा नारा है “।देश के लाखों शिक्षकों की कोई जीविका छीन ले ।इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।
#शिक्षक_एकता_जिन्दाबाद
शिक्षकों ने नियुक्ति के समय सारी पात्रताएं पूर्ण की और अब जब सेवा में कई वर्ष बीतने के बाद उनके ज्ञान व अनुभव का परीक्षण करना कहाँ तक न्यायसंगत है?
"हमने बच्चों के भविष्य को संवारा है,
अब सरकार से अपना सहारा है।"
#काला_क़ानून_वापस_लो
किसी भर्ती के पूर्व सरकार द्वारा संबंधित पद हेतु जो भी योग्यता निर्धारित की जाती है उसको पूर्ण करने वाले अभ्यर्थी ही भर्ती किये जाते हैं ।प्रदेश सरकार द्वारा समय समय पर शिक्षकों की भर्ती हेतु जो भी योग्यता निर्धारित की गई उसको पूरा करने पर ही शिक्षक भर्ती हुए हैं
जैसे हाईस्कूल बीटीसी,इण्टर बीटीसी,स्नातक बीटीसी/बिशिष्ट बीटीसी ,स्नातक बीटीसी/बिशिष्ट बीटीसी /बी एड इत्यादि
25- 30 वर्ष पूर्व निर्धारित योग्यता पर नियुक्त शिक्षकों पर वर्तमान भर्ती हेतु निर्धारित योग्यता थोपने हेतु बनाया गया कोई भी कानून केवल काला कानून ही कहा जायेगा ।
23 अगस्त 2010 की एनसीटीई की गाइड लाइन में संशोधन देश भर के शिक्षकों के साथ छल कपट व धोखा है जिसे देश का शिक्षक सहन नहीं करेगा ।हम भारत सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस अन्याय के विरुद्ध देश के शिक्षकों को सड़क पर उतरने हेतु मजबूर न किया जाये ।भारत सरकार इस काले कानून को वापस लेकर शिक्षकों के साथ न्याय करे ।
#काला_कानून_वापस_लो