पूरे देश के लाखों शिक्षक इस से प्रभावित है जबकि यह पूरी तरह अनुचित प्रतीत होता है कि 20-30 वर्ष सेवा देने के बाद पात्रता परीक्षा का अनिवार्य करना।
केंद्र सरकार से अनुरोध है उक्त आदेश में वांछनीय संशोधन करने का कष्ट करें। आप कर सकते हैं और करना भी चाहिए
#काला_कानून_वापस_लो@narendramodi Sir @PMOIndia@dpradhanbjp Sir
#काला_क़ानून_वापस_लो
माननीय उच्चतम न्यायालय का आदेश लाखों शिक्षकों को आहत करने वाला है शिक्षकों के परिवार के सदस्यों सहित लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित हो रही है
जिसकी आजीविका पर प्रश्न चिन्ह लग गया हो वह किस बात जश्न मनाए और कैसे जश्न मनाए
माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से दुःखी लाखों शिक्षक नहीं मनायेंगे शिक्षक दिवस ।
01 सितम्बर 2025 को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये आदेश से देश भर में 10 लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों की नौकरी पर संकट मँडरा गया है ।यदि आदेश को निजी स्कूलों पर लागू किया गया तो इससे प्रभावित शिक्षकों की सम्भावित संख्या करोड़ में होगी ।इसके निर्णय के शिक्षक दुःखी एवं चिन्तित हैं ।
सदैव की भाँति कल 5 सितम्बर को देश एवं सभी प्रदेश की सरकारें मंच सजाकर चंद शिक्षकों को चंद लम्हों का सम्मान देंगी ।उनमें कुछ ऐसे शिक्षक भी होंगे जिन्हें भारत सरकार द्वारा tet को लेकर बनाये गये कानून के कारण दो साल बाद सेवा से निकालने की चिंता सता रही होगी ।क्या ऐसे विषम परिस्थिति में मिलने वाले उस सम्मान को शिक्षक मन से स्वीकार करेगा ।भारत सरकार द्वारा tet को लेकर बनाये गये कानून के क्रम में मा सुप्रीमकोर्ट द्वारा दिए गये निर्णय से देश भर के दस लाख से अधिक सरकारी शिक्षकों के सामने दो वर्ष बाद सेवा से बाहर किए जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है इसलिए हम माननीय प्रधानमंत्री जी एवं केन्द्रीय शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध करते हैं कि शिक्षकों के साथ न्याय करने की घोषणा करने की कृपा करें ।आपकी घोषणा ही शिक्षकों के लिए वास्तविक सम्मान होगा।
@DrDCSHARMAUPPSS@UPPSS1921
अपना गांव के विद्यालय कि पेरिंग दूसरे विद्यालय मैं किये जाने तथा गांव का विद्यालय बंद किये जाने पर ग्रामीण माताओं कि प्रतिक्रिया...
@DrDCSHARMAUPPSS@myogioffice
आंखों में आंसू आ रहे हैं पर हम रोना नहीं चाहते । प्रा. चौखटाखेड़ा लखनऊ की एक अध्यापिका के शब्द।
हम तो फिर भी स्कूल आकर अपना काम करेंगे। पर हमारा सब खत्म हो गया। हमारे बच्चे के माता-पिता अपने बच्चों का नाम काटने को बोल रहे हैं। वो नहीं भेजना चाहते हैं इतनी दूर इस स्कूल में।
सैलरी1,5 लाख, केवल आना जाना और काम कुछ नहीं, जब हम यह बात एक सम्मानित शिक्षक के बारे में कहते हैं तब हमें पता होना चाहिए की 150000 यह संख्या बताना, आना जाना कुछ न करना, इन सारे शब्दों का ज्ञान हमें एक शिक्षक ने ही दिया है, जब हम कहते हैं कि एक शिक्षक काम नहीं करता, कामचोर है स्कूल में नहीं जाता जाता बच्चों को नहीं पढ़ाता तो हमें पता होना चाहिए यह विवेक और यह ज्ञान उसी शिक्षक ने हमें दिया है कि हम उसके बारे में ये टिप्पणी करने लायक हो गए हैं, या कर रहे, हैं जिस गुरु के दिए ज्ञान से हमें इस चर, अचर जगत के बारे में जानकारी मिलती है उसी गुरु के बारे में इतनी हल्की बात कहना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है ज्ञान की महत्ता तब भी थी, आज भी है, और कल भी रहेगी, ज्ञान तब भी राज करता था, आज भी राज कर रहा है, कल भी करेगा, ज्ञान की किसी से तुलना नहीं हो सकती है और ज्ञान को कोई उपदेश देने लायक इस जगत में कोई नहीं है, ज्ञान को उपदेश देने का अर्थ है कि अपने दामन में खुद झाँककर देख लेना चाहिए जब हम किसी पर एक अंगुली उठाते हैं तो 3 अंगुलियाँ कहती हैं पहले अपने आप को देखो और एक अंगुली ऊपर की तरफ इशारा करती है कहती है कम से कम ईश्वर से डरो जिन लोगों के मन में शिक्षकों के प्रति ये भाव हैं उनको अपने भी आत्मा में झांक के देखना चाहिए, और ईश्वर से डरना चाहिए , राकेश सिंह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अलीगढ़ 15/7/25
@Info_4Education सच में सर क्या बात कही है आपने सही बात है बिल्कुल👏🏻
तब वहीं व्यक्ति राशन लेगा जिसे सचमुच में जरूरत है राशन की जो सच में सक्षम नहीं है प्राप्त करने के लिए।।
@Info_4Education सरकार ऐसा क्यों करने लगी जबकि उसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक शिक्षा का निजीकरण है इसीलिए स्कूल बन्द किये जा रहे है और शराब के ठेके खोले जा रहे है, अनपढ़ रहो, खाने का राशन 5 किलो सरकार देगी, महिलाओ को लाडली बहन के पैसे देगी और मर्दो के लिए नशा बस फिर क्या है कोई नौकरी नहीं माँगेगा
@Info_4Education 🛑 विरोध दर्ज करें | आवाज़ उठाएं
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"वेतन एक से डेढ़ लाख रुपए महीना,
कार्य – आओ बैठो और जाओ"
– दैनिक जागरण (10 जुलाई 2025)
📍 यह शीर्षक न केवल शिक्षकों और कर्मचारियों का अपमान है, बल्कि उनकी निष्ठा और मेहनत पर तंज है।
✊ हम इस घटिया और भ्रामक भाषा का विरोध करते हैं।