@Krishan88701400@ajitanjum@Santjii007 कसाई मुर्गियां काट रहा है और इनको लगता है की वो तो शेर है उनको कुछ नहीं होगा, जब अपने नही होंगे तो आपके होने या ना होने से क्या फर्क पड़ेगा
@Santjii007 Bahot badhiya likha @Santjii007 perfectly write, we also feel that but no words finding to write it properly, please spread more and more, it's reflecting current scenario
#अप्पी_की_सलवार
गोल्ड_रश 2 में लिखी एक बात में संशोधन करना
चाहती हूँ
'इस्लाम तलवार के दम पर फैला...' की जगह 'इस्लाम तलवार और सलवार के दम पर फैला...' सलवारें सिर्फ दूसरों की ही नहीं बल्कि खुद के खानदान की उतरवाईं गई....
मुग़ल जिधऱ से आये वो इलाक़ा असल में बंजर.....उजाड़....
तंबूओं में कबीलाई समाज और कुछ थोड़ी बहुत शहरी आबादी....
शहर क्या....??? बस जहाँ कुछ उपजाऊ जगह मिली, गांव बस गए..... खेती का कोई ख़ास उस ज़माने में चलन न था तो शिकार और अपने आप उपजी चीज़ेँ....
जब ऐसी नंगई थी तो लड़ाई भिड़ाई, मार काट मचनी ही थी..... और जब संसाधन कम हों तो जो सबसे जरुरी होता है वो है प्रजनन..... तो वहाँ की सबसे कीमती चीज क्या थी.....???
"औरत...."
तोहफा..... वफादारी.... जंग.... सब औरत
और जिसके पास ताक़त, वो उतनी औरतों पर काबिज़....
बाबर जब उज़्बेक सरदार #शायबानी_खान द्वारा खदेड़ा गया फ़रगना से..... तो बाबर को अपना सबकुछ लुटा भागना पड़ा.... हरम से जो निकल पाई, वही साथ थीं........
बाबर की सगी मौसी और छोटी अम्मी #मिहर_निगार_ख़ानम शायबानी ने रख ली तो उसकी बीवी आयशा भी.... पर फिर भी न माना..... बाबर को जान के लाले थे.... तब जाकर उसे अपनी अप्पी भी शायबानी को देनी पड़ी यानी #खानज़ादा_बेग़म....यानी फुल अम्मी-अप्पी-बीवी एक हुईं....
खैर आगे दीन आड़े आया तो साल भर हरम में रख बाबर की अप्पीजान यानी खानज़ादा बेग़म को शायबानी ने लौटा दिया.....
ये अप्पी अब बाबर के काम आई.... बाबर को अफगानों से रिश्तेदारी करनी पड़ी और एक और उज़्बेग #महदी_ख़्वाजा को अपनी अप्पी देनी पड़ी.... तब जाकर एक लुटेरा दस्ता तैयार हुआ....
10-12 हज़ार लश्कर लेकर बाबर हिंदुस्तान आया... पानीपत की लड़ाई जीती....
अब बाबर को तुर्क सरदारों को अपनी तरफ मिलाना था.... अप्पी फिर काम आई....
अबके #सैय्यद_हाडा के बिस्तर में पहुँचा दी गयी......
कुल जमा बाबर की अप्पी बिस्तर बदलती रही और बाबर आगे बढ़ता रहा..... तीन खाविंद तो लिखित दर्ज़ हैं.... बाकी कौन कब कहाँ क्या क्या खेल गया सब लिखा थोड़े न जाता है....
इसके आगे हिन्दुओं में गद्दारों की कमी तो थी ही नहीं खैर.....
खैर बाबरनामा में अप्पी जान को #आका_जानम कहते हुए पन्ने पर पन्ने रंगे गए..... रंगने भी चाहिए आखिर अप्पी की सलवार ने एक बेघर बंजारे को सुल्तान बाबर बना दिया था...
बात खुली है तो दूर तलक जाएगी....
😂😂😂😂