The inscription in Siddham/Kutila script in Sanskrit commemorates the dedication of a Shiva temple In Alwar, by Mathandeva, to his mother Lachhuk Devi in 959 CE/1016 VS.
It is one of the rare instances where the feudatory of Vijayapaldev identifies himself as Gurjara Pratihara.
"गुर्जर" की वीरता का बखान दुनिया कर रही है, दोस्तो इटली की राजधानी रोम में आज भारत मां के वीर सपूत जिसने अपनी वीरता का परिचय देते हुए द्वितीय विश्वयुद्ध में मित्र राष्ट्रो के जीतने में अहम भूमिका निभाई थी आज उस वीर योद्धा कैप्टन कमलराम गुर्जर (वी. सी.) की प्रतिमा का विदेशी धरती पर अनावरण किया गया है और उनके नाम से स्मारक बनाया गया है, यह पूरे भारत देश के लिए गौरवान्वित करने वाला पल है,
#captain_kamalram_vc 🇮🇳🙏
समाज के लिए गौरवमयी क्षण।
जीवन में अगर आप कोई अत्यंत विशेष ऐतिहासिक कार्य करते हैं तो आप को समय समय पर सम्मानपूर्वक याद किया जाना सुनिश्चित है ।
12 मई 1944 को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, विकट परिस्थितियों में इटली की गैरी नदी के निकट गाँव धोलूपुरा , जिला करौली 1/2
Western UP Gurjar Aristocracy -
Raja Jai Singh Mawai (Peernagar, Hapur) and on Thakur Tej Singh Thekura (Anandpur-Kakrauli, Firozabad)
UPPER DOAB x BRAJ
Archaeological Survey of India के उच्चपद (Head) पर आसीन रहे पद्मश्री के के मोहम्मद जी ने गुर्जर प्रतिहार वंश के महान सम्राट गुर्जर प्रतिहार मिहिर भोज के बारे मैं बताते हुए कि उनका इतिहास कितना विराट था.
@BalbirBhati_7@MaheshGurjar43 अपनों और परायों में फर्क करना ज़िंदगी का सबसे बड़ा सबक है। जब फैसला करना हो कि किसका साथ दूँ, तो हमेशा अपनों का साथ दें। चाहे अपनों से थोड़ी नाराज़गी हो,लेकिन परायों की चापलूसी और मीठी बातों में कभी नहीं फंसे।पराये सिर्फ़ फ़ायदा देखते हैं, अपनों का प्यार बिना स्वार्थ के होता है।
@NekadiGanesh एनसीआर के गुर्जर अपनों को ठुकराकर,परायों के हाथ जोड़ते हैं,अपनों का साथ न देकर,दूसरों की जी-हुजूरी करते है अपनी जड़ों को काटकर, पराये आँगन में फूल बिखेरते है।
बेशर्म इतने की अपनी माँ बहन की गालियां सुनने और अपने ही भाईबंधु का सर धड से अलग करने की धमकी में भी इन्हें आनंद आ रहा है।
@talk2anuradha@NCSC_GoI दिल्ली जवाहर भवन परिचर्चा की वीडियो क्लिप काटकर दुष्प्रचार करने और राजकुमार भाटी पर मिथ्या अरोप लगा कर उनकी छवि बिगाड़ने के लिए आप के खिलाफ भी मानहानी का दावा बनता है।
क्या इस देश में सवरनो को खुली आजादी मिली हुई है झूठ फैलाने की?
@rajkumarbhatisp@Uppolice@UPGovt
@rajkumarbhatisp कितनी ही सफाई दे दिजिये,माफ़ी मांग लिजिये मगर ये लोग दुस्प्रचार जारी रखेंगे।आप सोचते हैं इन्हें आपकी माफ़ी चाहिए? अगर ऐसा होता तो 7सेकंड का क्लिप काटकर वीडियो वायरल क्यों करते?इनका मकसद पाखंडवाद को बचाना है।आप पाखंडवाद पर प्रहार जारी रखिये और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलते रहिये।
@iamAKstalin दिल्ली के जवाहर भवन परिचर्चा की वीडियो क्लिप काट कर जिसने भी चलाई है उसके खिलाफ मानहानी का दावा बनता है। साथ ही साथ जो लोग इसको बढ़ावा दे रहे हैं उनके खिलाफ भी कार्यावाही होना चाहिए।
@rajkumarbhatisp
पूरा बहुजन समाज आपके साथ है।
@VoiceOfBrahmins दिल्ली के जवाहर भवन परिचर्चा की वीडियो क्लिप काट कर जिसने भी चलाई है उसके खिलाफ मानहानी का दावा बनता है। साथ ही साथ जो लोग इसको बढ़ावा दे रहे हैं उनके खिलाफ भी कार्यावाही होना चाहिए।
@rajkumarbhatisp आपको इस पर कार्रवाई करनी चाहिए ।
पूरा बहुजन समाज आपके साथ है।
@rajkumarbhatisp कितनी ही सफाई दे दिजिये,माफ़ी मांग लिजिये मगर ये लोग दुस्प्रचार जारी रखेंगे।आप सोचते हैं इन्हें आपकी माफ़ी चाहिए? अगर ऐसा होता तो 7सेकंड का क्लिप काटकर वीडियो वायरल क्यों करते?इनका मकसद पाखंडवाद को बचाना है।आप पाखंडवाद पर प्रहार जारी रखिये और सामाजिक न्याय के मार्ग पर चलते रहिये।
आज 14 मई, 1857 की वह ऐतिहासिक तारीख है, जब परीक्षितगढ़ (हस्तिनापुर) के महान नरेश राजा राव कदम सिंह जी के चाचा लगने वाले, दनकौर के जुनेदपुर गांव निवासी, 58 वर्षीय वीर योद्धा राव दरियाव सिंह नागर ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ अभूतपूर्व वीरता का प्रदर्शन किया।
मेरठ की क्रांति और लाल किले पर स्वाधीनता की पताका फहराने के बाद, राजा राव कदम सिंह जी को क्रांति का नेता घोषित किए जाने के उपरांत, राव दरियाव सिंह नागर ने देश के प्रथम सशस्त्र हमले का नेतृत्व किया। सिकंदराबाद तहसील पर उनका यह आक्रमण 1857 की क्रांति का एक अनुपम उदाहरण बना।
सुबह-सवेरे, पंजाब सिंह जी के नेतृत्व में गुर्जर क्रांतिकारियों की टुकड़ी ने सिकंदराबाद पर धावा बोल दिया। ईस्ट इंडिया कंपनी के सैकड़ों सशस्त्र सैनिकों और पुलिस अधिकारियों पर भयंकर प्रहार किया गया। एक-एक कर अत्याचारी अंग्रेज अधिकारी और उनके समर्थक धराशायी हो गए। सिकंदराबाद पूर्णतः मुक्त हो गया। कुछ अंग्रेज सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जिन्हें गिरफ्तार करके दनकौर लाया गया। वहाँ क्रांतिकारियों ने उन्हें खेती-किसानी का कार्य करवाया — यही था वीर गुर्जरों का अद्भुत न्याय और शौर्य।
आज का यह दिन अत्यंत पावन और गौरवशाली है।
हम अपने महान नेता, स्वतंत्रता संग्राम के प्रेरणा स्रोत, राजा राव कदम सिंह जी (हस्तिनापुर नरेश) को शत-शत नमन करते हैं। उनके साथ उन वीर सपूत राव दरियाव सिंह नागर जी को भी कोटि-कोटि प्रणाम, जिन्होंने 58 वर्ष की आयु में भी अदम्य साहस, अजेय शौर्य और देशभक्ति का परिचय दिया।
साथ ही हम उन हजारों-लाखों गुमनाम गुर्जर क्रांतिकारियों को भी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जिनकी वीरता और बलिदान के कारण ही यह क्रांति इतनी विशाल और प्रचंड हो सकी।
जय गुर्जर! जय हिंद!
राव दरियाव सिंह नागर अमर रहें!
राजा राव कदम सिंह महाराज की जय!
@DushyantNaagar@rajkumarbhatisp कुछ लोग @rajkumarbhatisp राजकुमार भाटी जी की बढ़ती लोकप्रियता और पखंड के खिलाफ बोलने से परेशान होकर उनके खिलाफ पडयंत्र करना चाहते हैं मगर उनकी यह कोशिश बेकार साबित होगी