🚨 SHOCKING ALLEGATION FROM HARDOI, UP
Officer: “Tumhari jaati kya hai?”
Farmer: “Main Pandey hoon, aur woh Pasi hai.”
Officer: “Chalo, ise SC/ST wala lagaao!”
A Revenue Department officer is allegedly accused of threatening a farmer with the SC/ST Act during a land measurement dispute in Hardoi.
बनारस में आरक्षण, मोदी एक्ट एवम् UGC नियमावली के विरोध में भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों को कल रात्रि पुलिस ने जबरन हटा दिया। उनके टेंट आदि उखाड़ लिए गए।
मेरी बनारस के लोगों से प्रार्थना है कि अपने सांसद का कार्यालय और सांसद प्रतिनिधि से जा कर पूछिए कि क्या प्रदर्शन के मौलिक अधिकारों का हनन ऐसे ही होता रहेगा?
BHU के युवाओं से अनुरोध है कि आप लोग प्रदर्शन के लिए निकलिए। एक दिन का ही रखो, पर भीड़ ले कर जाइए और केवल इतना पूछिए कि परीक्षा पर चर्चा करने वाले प्रधानमंत्री विद्यार्थियों के प्रश्नों से कब तक भागेंगे? UGC का अभिशाप आप पर ही पड़ेगा।
IIT बॉम्बे को आधार बना कर कि ‘आज भी दलित आत्महत्या कर रहे हैं’, @PMOIndia की योजना यही है कि UGC नियमावली को अंततः हर कैमप्स में लागू किया जाए। यदि यह योजना नहीं है तो सरकार सात महीने में दूसरी डेट क्यों ले रही है सुप्रीम कोर्ट से? क्या यह यूपी चुनाव तक टाल कर, इसे जैसे का तैसा अप्रैल से लागू करने का षड्यंत्र नहीं है?
आप यदि इसे कोई छोटी प्रतिक्रिया मान कर चुप बैठेंगे तो सारे लोगों का मनोबल टूटेगा। हमें वह नहीं होने देना है। आप चुप बैठेंगे, समाज शांत हो जाएगा। बहुत परिश्रम और मूल्य चुकाने के उपरांत आज हम इस स्थिति में हैं कि चर्चा हो रही है।
इसे समाप्त मत होने दीजिए।
गलत रिपोर्ट है, मैं नहीं मानता इसको, सवर्णों को छोड़ भी दो, तो भी 4 प्रतिशत को खुश करने के लिए कोई OBC वर्ग को क्यों नाराज़ करेगा?
SC/ST एक्ट मै मुकदमे OBC समाज पर सबसे ज्यादा हो रहे हैं।
और UGC अगर आया तो नुकसान क्या केवल सवर्णों का ही होगा? क्या OBC समाज इससे वंचित रहेगा?
RHA को ले कर सरकार से कुछ बात और माँगें
सरकार अपने स्तर से हर आंदोलन को फूट, समझौता, बल-प्रयोग, समझदारी, मिसइन्फॉर्मेशन कैम्पेन या कायरता दिखा कर कर समाप्त करना चाहती है। और वही उनका कार्य भी है। RHA का नाम ले कर कुछ लोगों ने आंदोलन के लिए जनता को बुलाया और लगभग 7000 की भीड़ जंतर मंतर पर भीतर दिखी, उतने को ही बाहर होल्ड किया गया या लौटा दिया गया।
मैंने केवल दिल्ली पुलिस की बकलोली की अवज्ञा के लिए इसमें भाग लेने की बात की और फिर बहुत लोग मेरे आने पर भी आए। फिर दुबे को पाठक जी ने नेता मान कर एक ऐसे पत्र पर चर्चा के लिए आश्वासन दिया जिसमें आरक्षण शब्द ही नहीं है।
खैर, मैं ये सब तकनीक देखता और जानता आया हूँ। मुझे इस विषय पर सरकार को भीड़ दिखाने की आवश्यकता न पहले थी, न आज है, पर जब चाहूँ वह भी कर सकता हूँ। अगली बार बिना अनुमति के भी ऐसा किया जा सकता है यदि प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट चाहिए, तो वह भी दिखा देंगे। पर मेरा लक्ष्य वह है ही नहीं।
सरकार को ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से इसलिए नहीं डरना चाहिए क्योंकि एक भीड़ पूरे कनॉट प्लेस को घर कर पत्थरबाजी करते हुए संसद घेर लेगी। सरकार को इसलिए डरना चाहिए कि ऐसी कोई भीड़ ही नहीं है, न ही हम संसद को घेरने की योजना बना रहे हैं।
आंदोलन की तपन केवल जलती हुई कार की आग और अराजक भीड़ की ही नहीं होती। एक तपन ऐसी भी होती है जब जनमानस को वैचारिक रूप से इतना सक्षम बना दिया जाता है कि वह स्वयं ही अपने लिए वह निर्णय कर ले, जो वो कल तक किसी दूसरे बहकावे में आ कर कर रहा था।
हमारी माँगें:
१. आरक्षण पर श्वेत-पत्र: क्या लाभ हुआ, किन जातियों को अनुपात से अधिक लाभ लगातार मिला, कौन सी जातियाँ पूर्णतः छूट गईं। आरक्षण किस तरह से देश या समाज के उत्थान में सहायक है, उसके लिए आँकड़े क्या कहते हैं आदि आदि! इस से जुड़ी हर वह रिपोर्ट और सर्वेक्षण जो सार्वजनिक नहीं हुई।
२. EWS को हर वह आर्थिक सहायता दी जाए जो SC को मिलती है। निःशुल्क कोचिंग, निःशुल्क फॉर्म, शून्य हॉस्टल और कोर्स फीस। फिर भी लोन यदि लेना पड़े तो उसमें भी सुविधा।
३. तीनों ही आरक्षित वर्ग में ‘कोटा विदिन कोटा’ लागू हो ताकि वास्तविक दलित-पीड़ित-वंचित जातियों तक लाभ पहुँचे। अभी SC और OBC में हजार-हजार जातियाँ ऐसी हैं जिन्हें नगण्य आरक्षण मिला है। और 4-5 जातियाँ ऐसी हैं जो 70-80% आरक्षण खा रही हैं। इसका आधार पारिवारिक आय हो, न कि वैयक्तिक और दुरुपयोग की संभावना न रहे।
४. मेरिट का सम्मान हो। आरक्षित वर्ग का कटऑफ किसी भी हालत में सामान्य वर्ग के कटऑफ के (से नहीं) 10% के रेंज से बाहर न जाए। और यह भी आज की परीक्षा के अधिकतम आयु सीमा वाले बच्चों की आयु के बाद समाप्त किया जाए। न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स तो तय होना ही चाहिए।
५. सरकार यह सर्वेक्षण करे कि क्या गरीबी, भेदभाव या पिछड़ेपन से किसी की बौद्धिक क्षमता घट या बढ़ सकती है? इम्पीरिकल एविडेंस सार्वजनिक करें और उसी आधार पर आरक्षण की नीतियाँ बनें।
६. एक व्यक्ति को एक बार आरक्षण मिले। एक परिवार को एक बार आरक्षण मिले।
७. दशकीय समीक्षा हो। समाप्ति के लिए एक ‘सनसेट क्लॉज’ या रोडमैप कि कब तक रहेगा।
८. कॉलेज/यूनिवर्सिटी पुस्तकालयों में पुस्तकों के अलॉटमेंट का आरक्षण तत्काल निरस्त हो। इसका कोई लॉजिक नहीं है। यह आरक्षण से लड़ कर वहाँ पहुँचे बच्चों को सताने की व्यवस्था मात्र है। या आप पुस्तकों की मात्रा दोगुनी कीजिए और वहाँ ‘आरक्षित सेक्शन’ लिख दीजिए।
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अन्य माँगें:
९. यूजीसी नियमावली निरस्त हो या समीक्षा कर के हर जाति समूह को इसमें सम्मिलित किया जाए।
१०. SC/ST Act की तर्ज पर ‘सवर्ण उत्पीड़न (रोकथाम) कानून पास’ हो। दोनों ही कानून में केस झूठा पाए जाने पर, उस केस में होने वाला दंड आरोप लगाने वाले को झेलना पड़े। आर्थिक जुर्माना भी वसूला जाए।
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सरकार और सुधिजन देख लें। बाकी, चाहे आप दुबे, शेखावत या अन्य को मैनेज कर लें, आंदोलन चलता रहेगा।
प्रधानमंत्री बनकर अति-पिछड़े, मुख्यमंत्री बनकर दलित का जाप,
सवर्णों के हिस्से क्यों हर बार सिर्फ़ सवाल और संताप?
जाति की राजनीति छोड़ो, सबको मिले बराबर सम्मान—
हर समाज की भागीदारी से ही मजबूत होगा हिंदुस्तान।
All GC people.
Request all of you to post about antireservation-UGC protest at Jantar Mantar on your respective timelines.
Share all videos, across all social media platforms!
Media has blacked us out.
But you make sure our voice reaches everyone.
#21AugReservationHataoAndolan
Dear BJP,
These were your unconditional foot soldiers, the bedrock of your movement. For decades, they carried the flag of Hindutva and stood firmly behind you at the ballot box, asking for little in return except the protection and dignity of the civilization.
They made conscious compromises with reservations and the harsh realities of the Atrocities Act, suppressing their own grievances for what they believed was a grander purpose: the consolidation and unification of Hindu society. But instead of delivering that unity, you fell into the comfortable rut of identity-driven social engineering and competitive appeasement.
The crowd on the streets may number in the thousands, but the resentment is shared by millions. Do not mistake loyalty for subservience, and do not treat your most reliable supporters like disposable political collateral. Listen to them, address their grievances, and afford them the equal dignity they deserve before their alienation becomes permanent.
यूपी प्रयागराज में सेप्टिक टैंक में काम करने के दौरान रजत शुक्ला और निहाल शुक्ला की मौत हो गई।
इनके घर की हालत देखिए ये करोड़पति ब्राह्मण थे?
ये हाल है ब्राह्मणों का, नाला-गटर साफ़ कर रहे है।
This is just one reason.
During Sawan, many of these insects are eaten by animals, and those are the same animals that we consume. These insects can carry all kinds of diseases, and humans themselves can also be vulnerable to various infections.
Similarly, the same insects also infest leafy vegetables. That is why some communities avoid consuming leafy vegetables during Sawan as well.
Questioning every cultural practice just to look cool is, ironically, not cool.
Ajeet Bharti destroyed the fake Victimhood culture of Ambedkarites in a debate organised by Delhi Union on Reservation . 🔥 🔥
Dhanyawad
@ajeetbharti Bhaiya 🙏🙏