यह केस पहले भी लिखा था, सरकारी अध्यापक की पत्नी 40 दिन की बच्ची छोड़ कर चली गई थी और फिर डेढ़ वर्ष बाद आई कि बच्ची उसको दे दी जाए। Child वेलफेयर कमिटी ने भी पैसे खा कर, बच्ची के बाप पर दबाव बनाना शुरू किया। मास्टरजी ने श्रुत सखा को कॉल किया तो पहले मैंने चाइल्ड वेलफेयर कमिटी का थोड़ा बैंड बजाया तो वो अलग हो गए। इसके बाद अध्यापक जी से कहा जल्दी से कस्टडी फाइल कर दो। उन्होंने कस्टडी फाइल की और उनकी पत्नी ने दहेज, घेरलू हिंसा के केस के साथ ही, बंदी प्रत्यक्षीकरण(habeas corpus)फाइल किया। हमने उनको समझाया कि केस sustain नहीं करेगा, वकील को बताइए कि कस्टडी filed है जज से कहे और यह भी कि गैर कानून ढंग से बच्ची को थोड़ी रखा है कि hebeas corpus लागू हो, बच्ची अपने पिता और दादी के पास सुरक्षित है।
मास्टरजी ने बताया कि -जज साहब ने भी यही कहा कि इसमें बंदी प्रत्यक्षीकरण बनता ही नहीं, अगर दुबारा ऐसा केस लेकर कोर्ट का समय खराब करने आई तो 50,000 जुर्माना लगा देंगे। @shrutsakha
NCW takes suo moto cognizance on Madhur Virli but forgot to do the same with Sejal Pawar, Apoorva Makhija, Aishwarya Mohanraj, Shreeja Chaturvedi @NCWIndia
48 year old Amit Brahme, an employee of TCS Hinjewadi, died by suicide. In his suicide note, he accused two females and male employee of harassment.
Workplace harassment of men is never fun, it's a cruel and terrible thing to do to them. Harrasment law doesn't cover men so where would a man go ?
सुमन झा, अविनाश की माताजी से अभी बात हुई, बेटे अविनाश झा की आत्महत्या को अब पूरे दो साल हो गए हैं। अविनाश ने 2024 में पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर ली थी।बड़ी मुश्किल से 306 का केस पुलिस ने दर्ज किया था मगर कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। धीमी प्रक्रिया का फायदा उठा कर अविनाश की पत्नी ऋचा ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत करवा ली। इस केस में कुछ होगा नहीं,सुमन जी से बात करके दिल भर आया, इसलिए शेयर किया।
What is the point of confessing to a false case after 10/12 years, when the damage is already done?
A man's reputation, credibility, business, relationships, and peace of mind may have been destroyed long ago. A delayed confession doesn't restore what was lost.
Nobody can understand this better than someone who has closely witnessed lives being shattered by false allegations. The consequences don't end with a court case they affect families, careers, mental health, and social standing for years.
This isn't courage or honesty. It's an acknowledgment of a grave wrong after the consequences have already been borne by someone else.
False cases hurt not only the accused but also genuine victims who seek justice. Such misuse of the law must never be trivialized or excused.
आप लोग स्टैंड आप कॉमेडी, फिल्म इत्यादि में समय क्यों बरबाद करते हो ? जिस देश की न्याय व्यवस्था में आला दर्जे की कोमडी चल रही हो वहां दूसरा कुछ क्यों देखना ? पत्नी जिंदा बैठी है और पति पर उसको आत्महत्या के लिए उकसाने का केस बना कर 6 महीने के लिए जेल में डाल दिया गया।
एक तो यह पेटीकोट मरद स्त्रियों के आगे नाचना छोड़ेंगे ही नहीं। इनका एक ही ध्येय होता है कि बिगड़ैल स्त्रियां यह करती रहें ताकि इनको सप्लाई जारी रहे। अगर अभी पति छोड़ दे तो इनका गणिका क्रंदन अलग तरह का रहेगा। बुढ़ापे में भी उम्मीद से हैं !
"किसी भी महिला का शादी के बाद अपने पूर्व प्रेमी से एक बार मिलना व्यभिचार (एडल्ट्री) को साबित नहीं कर सकता"
◆ पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई पर कहा
#HighCourt | Adultary | Punjab Court
नौ महीने पहले कट्टर होंडा शेरनियां इनके लिए गणिका क्रंदन वैसे ही कर रहीं थीं,जैसे अभी ट्विशा के लिए जारी है। जब समझौता हो जाएगा तब क्रंदन की देवियाँ कुछ और बहाना ढूंढ लेंगी। मैंने तथाकथित दहेज हत्या पर ऐसे समझौते होते खूब देखे हैं। बहुत ज्यादा बात होने का मतलब होता है, मोटा पैसा खींचना। सब बिजनेस है आजकल !
Indian women are consuming endless reels about toxic saas-bahu drama, cheating husbands, manipulative families and then projecting it onto their own lives.
“My husband is exactly like this.” “My saas also does this.”There is very less truth in it. Constant consumption of outrage-content slowly rewires the brain to see conflict everywhere.A 2 min (or may be less )reel shouldn’t have the power to effect real relationships, yet it often does.
Internet content shapes emotions more than people realize. Maybe it’s time to stop feeding the mind with daily family-war entertainment.
Action has been taken on retired judge Giribala Singh and Adv. Samarth Singh but no action has been taken on judge Rita Kaushik. Let that sink in ! #equality
जो लोग कह रहे हैं समाज ज्यादा जरुरी था बेटी नहीं,तभी बेटी नहीं बचा पाए। उनको बता दूं कि बचाया तो बेटों को भी नहीं न जा रहा। अगर आप जेंडर की आंखों से न देखें तो परिवार/समाज एक ऐसे कगार पर है, जहां कब कौन भरभरा कर गिरेगा पता नहीं है। ट्विशा और दीपिका नागर मामले में अरेस्ट होकर रहेगी और सजा भी होगी। इस लड़के को पत्नी और सास ने जलाया है मगर लड़कों के पास दहेज हत्या वाला कानून नहीं है।
ट्विशा ड्रग्स करती थी या नहीं करती थी,इससे अंतर नहीं पड़ता। बात सिर्फ इतनी है कि आपके देश में एक अंधा कानून है, जो सात वर्ष के भीतर हुई किसी भी विवाहिता की मृत्यु को दहेज हत्या मानता है। मेरे साथ ही कई बहनें added हैं, जिनके भाई, मां और वो स्वयं दहेज हत्या में जेल गए हैं। जबकि लड़की की मृत्यु मानसिक रोग, पहले के अफेयर के कारण आत्महत्या या किसी पुरानी बीमारी के कारण हुई। कानून यह सब नहीं देखता, कानून देखता है कि एक स्त्री की मृत्यु हुई है तो अब दोष पति और ससुराल पर आना ही चाहिए।इस रोग की जड़ कहीं और हम केवल symptoms का इलाज कर रहे हैं।