1. यू.पी. के अयोध्या में श्री राम मन्दिर के बाद अब उत्तराखण्ड स्टेट में भी बद्रीनाथ धाम चढ़ावा में चोरी व ग़बन आदि होने का मामला काफी सुर्ख़ियों में हैं। इन दोनों विख्यात धार्मिक स्थलों में इनके ट्रस्ट से जुड़े ��ुख्य प्रबन्धकों की भी सही से जाँच होनी चाहिये वरना फिर आगे चलकर इनकी आड़ में इनके स्थान पर दूसरे बने मुख्य प्रबन्धक भी इसका दुरुपयोग कर सकते हैं। क्योंकि ऐसी आम चर्चा है कि निचले स्तर पर जो भी गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए या तो मुख्य प्रबन्धकों की मिलीभगत है या फिर उनकी लापरवाही की वजह से यह सब कुछ हुआ है। अतः इस प्रकरण की अब सही से जाँच होनी बहुत ज़रूरी है तथा इस मामले में सरकार व एस.आई.टी. को भी व���शेष ध्यान देना है।
2. साथ ही सपा, कांग्रेस व आम आदमी पार्टी आदि के जिन वरिष्ठ नेताओं द्वारा यहाँ (श्री राम मन्दिर) चढ़ावे में काफी मोटी रकम की चोरी व ग़बन आदि होने की बात कही जा रही है तो उनसे भी इसके पुख़्ता सबूत लेने चाहिये, ताकि कोई भी चोरी व ग़बनकर्ता बच ना सके, वरना इसकी आड़ में इसे कोरी राजनीति ही माना जायेगा अर्थात् श्रद्धा नहीं, जो जनहित के मुद्दों को दरकिनार करके, अब इस मुद्दे की आड़ में ये पार्टियाँ चुनाव में जाना चाहती हैं, ऐसी भी आम चर्चा है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा वर्तमान में सपा सांसद श्री अखिलेश यादव जी को आज उनके जन्मदिन पर उन्हें व उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं उनके अच्छे जीवन व लम्बी उम्र की शुभकामनायें।
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर से चढ़ावे की हुई चोरी, ग़बन व हेराफेरी आदि करने की मीडिया में आएदिन क़िस्म-क़िस्म की आ रही ख़बरें अति-गम्भीर व चिन्तनीय। ऐसे लोग क़तई भी बख़्शे नहीं जाने चाहिये, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।
साथ ही, अब यहाँ मन्दिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आये, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मन्दिरों में ��ढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहाँ व्यवस्था है तो उनका यहाँ अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिये तो यह उचित होगा।
इतना ही नहीं बल्कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बी.एस.पी. की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी ���ह अपील।
नीट का exam फिर से हो गया। एडमिशन भी हो जाएगा। लेकिन अनुसुचित जाति के संगठनों से एक प्रश्न है कि उन्होंने इस बात पर कितना ध्यान दिया कि;
"बहन कुमारी मायावती जी ने स्पेशल कम्पोनेंट प्लान अनुसुचित जाति के कल्याण के लिए रखे फंड से जो चार मेडिकल कॉलेज सहरानपुर, जालौन, अम्बेडकरनगर, कन्नौज में बनाये थे, उनमे एडमिशन बहनजी द्वारा दी गयी व्यवस्था से होंगे या फिर आर्टिकल 30 में विशेष आरक्षण प्राप्त साबरा अहमद व उनके यादव वकील द्वारा हाईकोर्ट से रद्द करवाए अनुसार होगा?"
1.इन चारों मेडकिल कॉलेज में 340 के लगभग शीट है।
2.बहनजी ने मुस्लिम ���े आर्टिकल 30 में मेडिकल, इंजीनियरिंग या किसी भी प्रकार के अल्पसंख्यक संस्थान में अल्पसंख्यक के लिए आरक्षित 50% शीट की तर्ज पर इन चारों संस्थान में 70% सीट एससी व 20 शीट एसटी के लिए लिए आरक्षित करी थी। जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया ओर राज्य सरकार ने स्वीकार करके 70% से सीधा 21% पर ला दिया। जब हम लोगो ने विरोध किया तब इस साल की छूट देकर सुप्रीम क��र्ट जाने की जानकारी दी।।
3.बहनजी के अनुसार एडमिशन पर =
एससी = 248 शीट
एसटी = 20 शीट
ओबीसी = 44 शीट
सामान्य = 20 शीट
4.साबरा अहमद व यादव वकील की पिटीशन पर निर्णय के बाद स्तिथी यह है कि;
एससी = 340 का 21% = 68 शीट
अथार्त नुकसान है;
248-68 = 180 शीट का है।
5.आप समझ सकते है कि मेडिकल की एक एक शीट कितनी कीमती होती है।।अनुसुचित जाति के 180 डॉक्टर कम बनेंगे।
इंहा ध्यान देने वाली बात है कि यह मेडिकल कॉलेज अनुसुचित जाति के कल्य��ण के लिए रखे फंड से बने थे। जिसमे एससी से अलग ओबीसी, एसटी, सामान्य तक को शीट दी गयी। इसलिए इसके लिए राज्य सरकार से कोई विशेष फंड नही allot हुआ जिससे साबरा अहमद या अन्य को दिक्कत होती।
6.अब बहनजी ने सत्ता में रहते एससी के लिए कार्य कर दिया। उन्हें बचाने की जिम्मेदारी एससी समाज व उनके संगठनों की है। एससी के अधिकतर सन्गठन ऐसे मामलों पर गायब मिलते है। इंहा तक कि;
"चन्द्रशेखर से लेकर चिराग पासवान व अन��य अम्बेडकर के नाम पर सभा/महासभा वाले द���ित नेता तक इसपर कोई बयान देते नही दिखते"
7.अब नीट में एडमिशन होने वाला है। इन 4 संस्थान में किस प्रकार एडमिशन होंगे यह पूछने वाला कोई नही है?
मजेदार बात यह है कि;
"अधिकतर अपने घर मौज मस्ती करते हुए मुझे कहते है कि आप क्यो नही रिट दाखिल करते। जबकिं यह मामला मेने ही वायरल किया, जिसके कारण राज्य सरकार को डबल बैंच से आदेश पर रोक लगवाकर 1 साल की छूट दिलवाई गयी व असीम अरुण ने बताया कि इसके खिलाफ सुप्री�� कोर्ट जा रहे है। नही तो मामला ही सामने नही आ पाता। अब;
"घर बेचकर इसी काम मे लगा दूँ क्या। मतलब मेने इतना बड़ा नुकसान बताया तो यह मेरी ही जिम्मेदारी है कि इसे में ही देखूं"
अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट गए या नही। अगर गए तो निर्णय तक किस प्रकार एडमिशन होंगे, इसकी किसी को जानकारी नही है"
विकास कुमार जाटव
आज छत्रपति राजर्षि ��ाहू जी महाराज की जयंती है, एक ऐसे महापुरुष को याद करने का दिन, जिन्होंने अपने समय से बहुत आगे की सोच रखी।
1902 में, जब देश का बड़ा हिस���सा जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता से जूझ रहा था, तब शाहू जी महाराज ने पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण लागू कर यह साबित किया कि सत्ता का असली उद्देश्य समाज के आख़िरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी न्याय दिलाना होता है, न कि केवल कुछ लोगों के हितों की रक्षा करना।
मैं मानता हूँ कि हर पीढ़ी को बराबरी की लड़ाई अपने तरीक़े से लड़नी होती है। शाहू जी महाराज ने अपनी पीढ़ी की लड़ाई पूरी ईमानदारी से लड़ी। आज जब संविधान, आरक्षण और समान अवसर जैसे सवालों पर बहसें फिर से तेज़ हैं तो उनका जीवन हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र की ताक़त उसके सबसे ऊँचे पदों से नहीं, उसके सबसे आख़िरी नागरिक के साथ हुए व्यवहार से मापी जाती है।
आज सिर्फ़ श्रद्धांजलि देना काफ़ी नहीं है। उनके अधूरे काम को आगे बढ़ाना हर वंचित और पिछड़े व्यक्ति तक शिक्षा, सम्मान और बराबर अवसर पहुँचाना ही शाहू जी महाराज के लिए हमारी असली श्रद्धांजलि होगी।
छत्रपति राजर्षि शाहू जी महाराज को मेरा कोटि कोटि नमन।
यूपी की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेन्टर में आज दोपहर बाद हुई अग्निकाण्ड में अनेक लोगों की मौत तथा और भी कई लोगों के घायल हो जाने की घटना अति-दुखद। इस प्रकार की जानलेवा घटनायें दिल को दहलाने वाली होती हैं तथा कितने ही परिवार की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी दुखद घटना��ं की रोकथाम के लिये सबको मिलकर सही से काम करने की ज़रूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।
बहुजन समाज पार्टी ने उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारियों के मद्देनज़र जब से अपरकास्ट समाज और उसमें से ख़ासकर ब्राह्मण समाज को, उनके बी.एस.पी. में जुड़ने को ध्यान में रखकर, पार्टी का उम्मीदवार बनाना शुरू कर दिया है, तब से सभी विरोधी पार्टियों ��ें व ख़ासकर समाजवादी पार्टी में उनकी नींद उड़ा देने वाली बेचैनी देखने को मिल रही है, जो कि सन् 2007 की तरह ब्राह्मण समाज के योगदान से बी.एस.पी को पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने जैसा ही इस बार के आगामी चुनाव परिणाम के रिपीट होने की संभावना के तहत् स्वाभाविक ही प्रतीत होता है।
वैसे भी यह सर्वविदित है कि यूपी जैसे विशाल आबादी वाले प्रदेश में अपरकास्ट में से ख़ासकर ’ब्राह्मण समाज का हित बी.एस.पी. में ही सुरक्षित है’, जिस अपनी इस ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ के सिद्धान्त, नीयत व नीति को बहुजन समाज पार्टी ने पहले पार्टी स्तर पर अमल करके और फिर सरकार बनने पर भी उन्हें भरपूर आदर-सम्मान के साथ-साथ उन्हें हर स्तर पर पूरी-पूरी भागीदारी देकर यह साबित भी कर दिया है, जबकि दूसरी पार्टियों की सरकारों में इस वर्ग के लोग पिछले काफी समय से अपने आपको काफी उपेक्षित, असुरक्षित व ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बल्कि ’ब्राह्मण समाज द्वारा सामाजिक भाईचारा के आधार पर बी.एस.पी. से जुड़ने की इनकी तैयारियों को ध्यान में रखकर इन्हें पार्टी उम्मीदवार बनाने की प्रक्रिया जारी है तथा इन्हें बी.एस.पी. की आयरन लेडी नेतृत्व पर पूरा यह यक़ीन भी है कि बी.एस.पी. की सरकार बनने पर उन्��ें पहले की तरह ही हर स्तर पर भरपूर आदर-सम्मान ज़रूर दिया जायेगा, जो कि इनकी वास्तविक चिन्ता व दूसरी पार्टियों से मुँह मोड़ने का कारण है।
इसके साथ ही, अपरकास्ट में से क्षत्रिय, वैश्य आदि व अन्य समाज के ��ोगों को भी उनकी बी.एस.पी. से जुड़ने की तैयारी अर्थात् ’जिसकी जितनी तैयारी उसकी उतनी भागीदारी’ के आधार पर चुनाव में उम्मीदवार भी ज़रूर बनाया जायेगा, जिसकी तैयारी हर स्तर पर लगातार जारी है।
बी.एस.पी., दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है और इसीलिये बी.एस.प��. की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।
देश मे दलितों के साथ जाति वाद ऊँच नीचे और अत्याचार रुकने का नाम नहीं ले रहा.गुजरात जहाँ से देश के माननीय PM आते हैं वहाँ के साबरकांठा के रूपाल गाँव के दलित अपना घर बार छोड़कर कहीं और जाना चाहते हैं हालत यह है कि आप वहाँ अच्छे कपडे नहीं पहन सकते अगर कोई मेहमान भी अच्छे कपडे पहनता है तो उसके साथ भी मारपीट करते है कोई साइकिल या मोटरसाइकिल से चलता है उससे मारपीट करते हैं, स्कूल मे दलित बच्चों के ���िने का पानी अलग रखा जाता है हर तरफ से इनके पर अत्याचार होता है. इसी तरह के हालात उत्तराखण्ड मे भी जहाँ संडे को टिहरी मे 18 वर्ष के केतन को जातिवादियों ने अपनी लड़की के मोबाइल से फोन कर बुलाया फिर रात भर बेरहमी लोहे की रॉड से पिट पिट कर हाथ और पैर तोड़े उसके नाखून कुचले जिससे उसकी मौत हो गयी . इस तरह की जातिवादी दानव आये दिन दलितों के साथ अत्याचार करते रहते हैं.लेकिन सरकार इन दलितों का भला और न्याय ���ा करके इन जातिवादियों का ही साथ देती है.अब अपने आप को बचाना है तो सामाजिक एकता ही आखिरी रास्ता ��ै. अब तो sc/st कानून को भी कमजोर कर दिया.बड़ी चालाकी से sc/st के अन्दर भी इन्ही लोगो ने आपसी वैमनस्यता भी पैदा कर दी.ताकि एक ना हो. तुम्हारी सामाजिक एकता से ही तुम्हारा भला होगा. क्योंकि सामाजिक एकता ही राजनीतिक ताकत देती है. जय भीम जय भारत
दिल्ली के मालवीय नगर अग्निकांड में जान गँवाने वाले हर व्यक्ति और उनके परिवार के साथ मेरी गहरी संवेदनाएं है। जिन्होंने अपनों को खोया, उनके दुख की कोई भरपाई नहीं लेकिन इतना ज़रूर है कि ��े इ�� घड़ी में अकेले नहीं हैं। पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
मैं जानता हूँ कि कोई भी हादसा पूरी तरह रोका नहीं जा सकता। लेकिन कुछ हादसे ऐसे होते हैं जिनकी कहानी हम पहले भी सुन चुके होते हैं और यही सबसे तकलीफ़देह बात है। उपहार सिनेमा से लेकर आज तक, दिल्ली ने आग से होने वाली मौतों का यह सिलसिला बार-बार झेला है। हर बार वही सवाल उठते हैं, और हर बार जवाब अधूरे रह जाते हैं।
ईमानदारी से कहूँ तो इन घटनाओं की ज़ि���्मेदारी किसी एक पार्टी पर नहीं डाली जा सकती। दिल्ली में बारी-बारी से कांग्रेस, बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने सरकार चलाई है, नगर निगम भी इनके पास रहा है और फिर भी फायर सेफ्टी के बुनियादी नियम लागू करना किसी की प्राथमिकता नहीं बन सका। बिना मंज़ूरी के रेस्टोरेंट चलते रहे, अनाधिकृत निर्माण होते रहे, और जिनकी ज़िम्मेदारी निगरानी की थी, वे कहीं और देखते रहे। यह सिर्फ़ प्रशास��� की चूक नहीं है यह उस भरोसे की चूक है जो हर नागरिक अपनी सरकार से करता है।
दिल्ली के लोग सिर्फ़ फ़रियाद नहीं कर रहे वे यह माँग रहे हैं कि अगली बार किसी और परिवार को इस त्रासदी को ना झेलना पड़े। यह माँग बहुत बड़ी नहीं है। यह वही बुनियादी माँग है जिसका हर लोकतंत्र अपने नागरिकों से वादा करता है।
हम मिलकर इसे बदल सकते हैं,पार्टी से ऊपर उठकर, चुनाव से ऊपर उठकर। यही उन परिवारों के प्रति सच्ची संवेदना होगी जिन्होंने आज अपनों को खोया है।
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित।
भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।
यू.पी. के जिला गाजियाबाद में खोड़ा के एक नौजवान युवक सूर्या चौहान की हुई हत्या की घटना अति दुखद व चिन्ताजनक। इस प्रकार की आयदिन हो रही घटनाओं की रोकथाम के लिए शासन व प्��शासन को सही कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही इस घटना में शामिल अपराधियों की पहचान करके उन्हें कानूनी सजा जरूर दी जाए।
इसके साथ ही चुनाव का समय जैसे-जैसे नज़दीक आता जाएगा ऐसी घटनाओं के व्यापक दुष्परिणाम होंगे। अतः सरकार पूरी तरह सतर्क रहे।
1. यू.पी. के ग्रेटर नोएडा के जेवर में की गई लगभग 15 वर्ष के गोपाल शर्मा की हत्या अति दुःखद व चिन्ताजनक। सरकार इस घटना की उच्च-स्तरीय जाँच कराये और इसके सभी अभियुक्तों को कड़ी सजा दी जाये।
2. साथ ही कल हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल के गिरने से कई मजदूरों की हुई मौत के प्रकरण को भी सरकार गम्भीरता से लेते हुये मृतकों के आश्रितों को उचित आर्थिक मदद दे तथा घायलों का भी विशेष ध्यान रखा जाये, बी.एस.पी. की यह भी मांग।
आप सभी को ईद-उल-अज़हा की दिली मुबारकबाद।
कुर्बानी का ये पाक त्योहार हमें त्याग, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम देता है।
आदरणीय बहन कु. मायावती जी के चार बार के शासनकाल में हर खास ओ आम क��� घर में बरकत, हर दिल में अमन और हर बस्ती में खुशहाली थी। हमें एक बार फिर वैसा ही प्रदेश बनाना है।
बीएसपी, अपनी सर्वसमाज-हितैषी सरकार के लिए आज भी प्रतिबद्ध है।
आज जब देश में नफरत की राजनीति हो रही है, भाई को भाई से लड़ाया जा रहा है ईद का यह पैगाम और भी ज़रूरी हो जाता है।
परमपूज्य बाबा साहब का संविधान हमें सिखाता है कि इस देश में हर नागरिक बराबर है, चाहे उसका मज़हब कोई भी हो, जाति कोई भी हो।
हम उस राजनीति के खिलाफ हैं जो मंदिर-मस्जिद में बाँटकर वोट माँगती है।
हम उस भारत के साथ हैं जहाँ ईद, दिवाली और होली, सब मिलकर मनाए जाते हैं।
भारत एक रहे, मज़बूत रहे।
ईद मुबारक।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की कम अपूर्ति व कटौती आदि की आम शिकायतों व उसको लेकर विशेषकर ग़रीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारियों व अन्य करोड़ों मेह��तकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है तथा इसको लेकर लोग विभिन्न रूपों में अपना ��क्रोश भी प्रकट कर रहे हैं, जिसकी चर्चा मीडिया में भी काफी व निरन्तर रहती है।
अतः सरकार से अपील है कि वह बिजली आपूर्ति सम्बंधी लोगों के कष्ट व परेशानियों को ध्यान में रखते हुये ज़रूरी उपाय तत्काल सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, नये पावर प्लाण्ट आदि के माध्यम से भी आगे के लिये बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास करे तो यह व्यापक जनहित में उचित होगा।
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की कम अपूर्ति व कटौती आदि की आम शिकायतों व उसको लेकर विशेषकर ग़रीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारियों व अन्य करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है तथा इसको लेकर लोग विभिन्न रूपों में अपना आक्रोश भी प्रकट कर रहे हैं, जिसकी चर्चा मीडिया में भी काफी व निरन्तर रहती है।
अतः सरकार से अपील है कि वह बिजली आपूर्ति सम्बंधी लोगों के कष्ट व परेशानियों को ध्यान में रखते हुये ज़रूरी उपाय तत्काल सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, नये पावर प्लाण्ट आदि के माध्यम से भी आगे के लिये बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास करे तो यह व्य��पक जनहित में उचित होगा।
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं ��ानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़��यत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदे��ी, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, यह उन लाखों परिवारों के भरोसे की बात है, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए सपने देखे, मेहनत से पढ़ाया और यह माना कि अगर बच्चा ईमानदारी से पढ़ेगा, तो व्यवस्था भी उसके साथ ईमानदारी से पेश आएगी।
मैं जानता हूँ कि देश ���र में एक साथ परीक्षा कराना आसान काम नहीं है। लेकिन हमारे युवाओं को इतना अधिकार तो है कि उनकी मेहनत का सम्मान हो, और उनका भविष्य किसी की लापरवाही की भेंट न चढ़े।
जब पेपर लीक एक के बाद एक दोहराए जाएँ, और छात्र सड़कों पर न्याय माँगने को मजबूर हों तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रह जाती, यह हमारे साझा भरोसे की चूक बन जाती है।
हमारे परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया था। उस हथियार को कमजोर करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
सरकार और एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर हर बार युवाओं का भविष्य ही क्यों दांव पर लगाया जाता है?
देश के सभी छात्रों के साथ हमारी पूरी संवेदना और एकजुटता है। न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है।
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