सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ पर फिर तेज हुई राजनीतिक बहस। 🇮🇳
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया कि 10,000 बांग्लादेशी नागरिकों को आधिकारिक रूप से निर्वासित किया गया है, जबकि अनौपचारिक रूप से लौटने वालों क��� कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। यह बयान सीमा प्रबंधन और अवैध प्रवासन पर जारी चर्चा को फिर केंद्र में लाता है।
Illegal Immigration | Border Security | Deportation | Border Management
@SuvenduWB
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राष्ट्ररक्षक: वीरता की अमर गाथा - 15
'सीमाओं की सुरक्षा ही राष्ट्र की संप्रभुता का प्रथम आधार है।'
"लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के."
लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. का चयन 'नाविका सागर परिक्रमा–II' अभियान के लिए किया गया, जो आईएनएसवी तारिणी पर दो महिला अधिकारियों द्वारा विश्व की परिक्रमा का एक ऐतिहासिक नौसैनिक अभियान था।
02 अक्टूबर 2024 से 29 मई 2025 के बीच उन्होंने 25,600 से अधिक समुद्री मील की यात्रा करते हुए हिंद महासागर, प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर तथा दक्षिणी महासागर को पार किया। इस दौरान उन्होंने समुद्र के एकांत, भीषण मौसम तथा अनेक तकनीकी चुनौतियों का अदम्य साहस के साथ सामना किया।
प्रशांत महासागर में अभियान के दौरान पो�� की विद्युत प्रणाली पूरी तरह ठप हो गई, जिससे नौवहन एवं अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियाँ निष्क्रिय हो गईं। ऐसी अत्यंत जोखिमपूर्ण स्थिति में उन्हें पूरी तरह मैनुअल संचालन और पारंपरिक नौचालन तकनीकों के सहारे अभियान जारी रखना पड़ा।
इसके अतिरिक्त, अत्यंत दुर्गम ड्रेक पैसेज से गुजरते समय भीषण तूफानों और प्रचंड समुद्री लहरों के कारण पोत अत्यधिक एक ओर झुक गया। ऐसी विकट परिस्थितियों में पोत पर पुनः ���ियंत्रण स्थापित करने के लिए असाधारण तकनीकी दक्षता, अद्भुत धैर्य और अप्रतिम साहस की आवश्यकता थी। दोनों ही घटनाओं में उनकी तकनीकी कुशलता, शांतचित्त नेतृत्व और दृढ़ मनोबल ने पोत की स्थिरता एवं दल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
इस अभियान के दौरान वे अपने द�� के साथ पाल नौका द्वारा 'पॉइंट नीमो' - जो महासागरों का सबसे दुर्गम एवं सबसे दूरस्थ बिंदु माना जाता है - तक पहुंचने वाली प्रथम भारतीय बनीं।
दो सदस्यीय इस अभियान में 24 घंटे सतत निगरानी, नौवहन, उपकरणों का रखरखाव तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निरंतर निपटने की आवश्यकता थी। अत्यधिक थकान, उपकरणों की खराबी तथा जीवन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करने वाली समुद्री परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अदम्य स���हस, उत्कृष्ट नौसैनिक कौशल और प्रेरणादायी नेतृत्व का परिचय दिया।
लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. का निडर आचरण, उच्च कोटि की पेशेवर दक्षता तथा विपरीत परिस्थितियों में अटूट संकल्प भारतीय नौसेना की सर्वोच्च परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।
इस अभूतपूर्व अभियान के दौरान प्रदर्शित उनकी असाधारण सहनशक्ति, वीरता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण के लिए लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के. को 'शौर्य चक्र' से स��्मानित किया गया।
"सीमा प्रहरी का प्रत्येक क्षण राष्ट्र के सुरक्षित भविष्य को समर्पित होता है।"
🇮🇳भारत माता की जय🇮🇳
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🇮🇳 मजबूत सेनाएँ केवल आधुनिक हथियारों से नहीं, बल्कि सक्षम नेतृत्व से भी बनती हैं।
Indian Army की प्रतिष्ठित Rising Star Corps में नेतृत्व परिवर्तन के तहत लेफ्टिनेंट जनरल राजन शरावत ने अपना कार्यभार लेफ्टिनेंट जनरल आकाश जोहर को सौंपा। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने ऑपरेशनल उत्कृष्टता, सैनिक कल्याण और युद्धक तैयारियों को नई मजबूती दी। Operation SINDOOR में भी कोर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता और राष्ट्र सुरक्षा के प्रति अपने समर्पण को सशक्त रूप से प्रदर्शित किया।
Leadership Transition • Rising Star Corps • Operation SINDOOR • Combat Readiness
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राष्ट्ररक्षक: वीरता की अमर गाथा - 14
"बहुमुखी क्षमता ही हर चुनौती का सबसे बड़ा उत्तर है। 'संरक्षण एवं सुरक्षा' केवल आदर्श वाक्य नहीं, हमारा जीवन-मंत्र है।"
'लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए.'
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. का चयन 'नाविका सागर परिक्रमा–II' अभियान के लिए किया गया, जो आईएनएसवी तारिणी पर दो महिला अधिकारियों द्वारा विश्व की परिक्रमा का एक ऐ��िहासिक नौसैनिक अभियान था।
02 अक्टूबर 2024 से 29 मई 2025 तक चले 238 दिनों के इस अभियान में उन्होंने 25,600 से अधिक समुद्री मील की यात्रा करते हुए चार महासागरों को पार किया। इस दौरान उन्होंने केप हॉर्न तथा अत्यंत दुर्गम और खतरनाक ड्रेक पैसेज जैसी समुद्री जलधाराओं का सामना किया, जहां भीषण तूफानों और तेज़ समुद्री धाराओं के कारण पोत के पलटने तक की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।
प्रशांत महासागर के चरण के दौरान पोत की विद्युत प्रणाली पूरी तरह ठप हो गई, जिससे नौवहन और संचार व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई। ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में उन्हें विशाल महासागर के बीच पारंपरिक नौचालन तकनीकों तथा पूरी तरह मैनुअल संचालन के माध्यम से अभियान जारी रखना पड़ा।
विपरीत परिस्थितियों में शांतचित्त रहकर निर्णायक नेतृत्व प्रदान करने तथा महत्वपूर्ण प्रणालियों को पुनः संचालित करने की उनकी क्षमता ने उनके असाधारण कौ���ल, धैर्य और दृढ़ ��ंकल्प का परिचय दिया।
इस अभियान के दौरान वे अपने दल के साथ पाल नौका द्वारा 'पॉइंट नीमो' पहुंचने वाली भारत की प्रथम महिलाओं में भी शामिल हुईं।
इस मिशन में निरंतर निगरानी, उपकरणों की मरम्मत, संसाधनों का कुशल प्रबंधन तथा जीवन के लिए अत्यंत जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में शांत एवं प्रभावी नेतृत्व की आवश्यकता थी। ऐसे प्रत्येक चुनौतीपूर्ण क्षण में उनकी सूझ-बूझ और साहस ने अभियान को सफल बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई।
लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. का अटूट साहस, उत्कृष्ट परिचालन क्षमता तथा गंभीर विपरीत परिस्थितियों में भी अडिग मनोबल भारतीय नौसेना की सर्वोच्च परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।
जीवन और मृत्यु जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में प्रदर्शित उनकी असाधारण वीरता और साहसिक कार्यों के सम्मानस्वरूप लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए. को "शौर्य चक्र" से सम्मानित किया गया।
"हर कदम राष्ट��रहित में, हर निर्णय जनहित में।"
🇮🇳भारत माता की जय🇮🇳
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राष्ट्ररक्षक: वीरता की अमर अमरगाथाएं
नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा एक अत्यंत कुशल और अनुभवी सैनिक हैं, जो किष्टवाड़ जिले के दुर्गम और कठिन क्षेत्र में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व कर रहे थे।
11 अप्रैल 2025 को किष्टवाड़ के एक जंगल में चलाए जा रहे तलाशी अभियान के दौरान उन्होंने दो आतंकवादियों को एक नाले को पार करते हुए देखा। उन्होंने तुरंत अपनी टीम की स्थिति बदली और आतंकवादियों को चारों ओर से घेरकर उनके भागने के रास्ते बंद कर दिए।
जब आतंकवादियों को एहसास हुआ कि वे घिर चुके हैं, तो उन्होंने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी ताकि सैनिकों को नुकसान पहुँचाकर भाग सकें। नायब सूबेदार सुब्बा ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और सटीक गोलीबारी से एक आतं���वादी को घायल कर दिया। इसके बाद दोनों आतंकवादी एक बड़े पत्थर की आड़ में छिप गए।
अपनी गोलीबारी को कम प्रभावी देखते हुए, नायब सूबेदार सुब्बा ने अपनी जान की परवाह किए बिना भारी गोलीबारी के बीच चुपचाप आगे बढ़कर एक बेहतर स्थिति प्राप्त की। जब उन्होंने दोबारा फायरिंग शुरू की, तो एक आतंकवादी अचानक उनके बिल्कुल सामने आ गया।
नायब सूबेदार सुब्बा ने अद्भुत साहस और धैर्य का परिचय देते हुए बेहद नज़दी��� से उस खूंखार विदेशी आतंकवादी को मार गिर��या। इसके बाद भी उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरे आतंकवादी पर सटीक निशाना साधते हुए गोलीबारी जारी रखी, जिसके परिणामस्वरूप वह भी मारा गया।
असाधारण वीरता, अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने के लिए नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा को "कीर्ति चक्र" से सम्मानित किया गया। 🇮🇳
नायब सूबेदार डोलेश्वर सुब्बा की वीरता केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र की संप्रभुता, सुरक्षा और अखंडता की रक्षा के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है।
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📍 मैकमोहन रेखा (McMahon Line) भारत-चीन सीमा विवाद को समझने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। वर्ष 1914 में शिमला सम्मेलन के दौरान ब्रिटिश भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों के बीच इस सीमा रेखा का निर्धारण किया गया था। भारत इसे अपनी पूर्वी अंतरराष्ट्रीय ��ीमा मानता है, जबकि चीन इस समझौते को स्वीकार नहीं करता। यही असहमति आज भी अरुणाचल प्रदेश से जुड़े सीमा विवाद का प्रमुख कारण है। राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमाई रणनीति और भारत-चीन संबंधों की चर्चा में मैकमोहन रेखा का विशेष महत्व बना हुआ है। 🇮🇳
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हिमालय की गोद में बसा माणा सिर्फ भारत का पहला गांव नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, आस्था और शौर्य का जीवित प्रतीक है। 🇮🇳
करीब 10 हज़ार फीट की ���ँचाई पर स्थित यह गांव सरस्वती नदी, भीम पुल और हिमालयी परंपराओं के लिए दुनियाभर में जाना जाता है।
सीमा के इतने करीब होने के बावजूद यहाँ की सादगी, मेहमाननवाज़ी और देशभक्ति हर किसी का दिल जीत लेती है।
माणा हमें याद दिलाता है कि भारत सिर्फ नक्शे की सीमा नहीं… बल्कि आत्मा, इतिहास और गौरव की पहचान है। 🏔️✨
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तुलबुल बैराज परियोजना केवल एक आधारभूत संरचना नहीं बल्कि कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन क्षमता और राष्ट्रीय विकास के नए युग का प्रतीक बन सकती है। झेलम नदी में नौवहन की पुनर्स्थापना से जल परि��हन को बढ़ावा मिलेगा, वुल्लर झील और उसके आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन का विस्तार होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
प्राकृतिक संसाधनों का राष्ट्रहित में संतुलित और दूरदर्शी उपयोग ही आत्मनिर्भर भारत की पहचान है। यदि यह परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण होती है तो यह कश्मीर को विकास, पर्यटन और समृद्धि के एक नए अध्याय से जोड़ने वाली ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगी। #राष्ट्र_प्रथम @PMOIndia @HMOIndia @prodefencejammu @tourismgoi @gssjodhpur
सुरक्षित सीमाएं किसी राष्ट्र की रक्षा पंक्ति भर नहीं होतीं, वे उसके विकास, स्थिरता और संप्रभुता की प्रथम शर्त होती हैं। आधुनिक और स्वदेशी सीमा सुरक्षा तंत्र उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण निवेश है।
सीमा सुरक्षा केवल चौकसी का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र की दीर्घकालिक सामरिक दृष्टि का अनिवार्य अंग है।
यदि आधुनिक तकनीक, स्वदेशी नवाचार और स्थानीय सहभागिता के माध्यम से सीमाओं को घुसपैठ, तस्करी और संगठित अपराधों से मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है, तो यह केवल सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
सुरक्षित सरहदें ही सुरक्षित समाज, सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और आत्मविश्वासी राष्ट्र की आधारशिला होती हैं।
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सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी मोबाइल संकेतों का भारतीय भूभाग तक पहुंचना राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर विचार का विषय है। भारत सरकार एवं संबंधित एजेंसियों से अपेक्षा है कि सीमाई क्षेत्रों में स्वदेशी दूरसंचार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं सुरक्षित बनाया जाए। राष्ट्र की संचार सुरक्षा भी उसकी संप्रभुता और अखण्डता की रक्षा का महत्वपूर्ण आधार है।
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सीमाएं केवल भू-भाग की रेखाएं नहीं होतीं, वे राष्ट्र की सभ्यता, स्वाभिमान और संप्रभुता की मर्यादा होती हैं। भारत की अखण्डता के विरुद्ध उठाया गया प्रत्येक कदम अस्वीकार्य है। राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय सम्पूर्णत�� की रक्षा भारत का अटल और अपरिवर्तनीय संकल्प है।
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‘भारत के प्रथम गांव’ में विरासत को नई पहचान: माना में ‘शौर्य केंद्र’ की नींव
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने उत्तराखंड के माना गांव, जिसे ‘भारत का पहला गांव’ कहा जाता है, में शौर्य सांस्कृतिक एवं पारंपरिक केंद्र की आधारशिला रखी। यह पहल गढ़वाल की समृद्ध संस्कृति, वीरता की परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में बड़ा कदम है। उत्तराखंड सरकार के सहयोग से बन रहा यह केंद्र संस्कृति, सैन्य गौरव और राष्ट्रीय एकता का संगम बनेगा, जो देवभूमि में भारत की पहचान को और मजबूत करेगा।
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मेशाई: सरहद पर बसा भारत का पहला प्रहरी गांव
अरुणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में स्थित मेशाई गांव सिर्फ एक बस्ती नहीं, बल्कि भारत की सीमा का पहला मजबूत प्रहरी है। LAC के बेहद करीब बसे इस गांव को वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के तहत ‘आदर्श सीमावर्ती गांव’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। काहो और किबिथू के साथ मिलकर यहां इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और जीवन सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। यह पहल दिखाती है कि जहां पहले पलायन होता था, वहां अब विकास और ��िश्वास दोनों लौट रहे हैं। मेशाई अब सीमा पर भारत की जीवंत पहचान बन रहा है।
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विजयनगर: भारत का छुपा हुआ रत्न, सरहद पर बसी अनोखी दुनिया
अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग जिले में स्थित विजयनगर (Bijoynagar) भारत के सबसे दूरस्थ आबाद क्षेत्रों में से एक है। तीन तरफ से म्यांमार से घिरी घाटी में बसा यह ��लाका लंबे समय तक दुनिया से कटा रहा। आज भी यहां पहुंचना आसान नहीं, लेकिन हाल ही में सड़क संपर्क बनने से यह जगह धीरे-धीरे लोगों के लिए खुल रही है। प्राकृतिक सुंदरता, शांति और अनछुई वादियों के बीच बसा विजयनगर एक छुपा हुआ रत्न है, जहां जीवन सादगी और साहस के साथ चलता है।
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Bangladesh Geopolitics Explained
क्या बांग्लादेश में बदल रही है सत्ता की दिशा?
भारत और दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?
देखिए पूरा विश्लेषण आज रात 7 बजे
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Seema Sanghosh Podcast पर बहुत जल्द
बांग्लादेश की बदलती राजनीति, क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और रणनीतिक समीकरणों पर होगा गहन विश्लेषण।
यह सिर्फ चर्चा नहीं, दक्षिण एशिया के भविष्य की दिशा समझने का मौका है।
पड़ोसी देश की राजनीति से लेकर क्षेत्रीय सुरक्षा तक,
एक ऐसा एपिसोड जो हर जागरूक दर्शक को जरूर सुनना चाहिए।
📢 Coming Soon
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दिल्ली दंगों में अपने प्राणों की आहुति देने वाले इन बलिदानियों को शत्-शत् नमन।
दिलबर नेगी, अंकित शर्मा, विनोद कुमार, नितिन कुमार, रतनलाल, नरेश सैनी, दिनेश कुमार, राहुल सोलंकी, राहुल ठा���ुर, प्रेम सिंह...
ना हम भूलें, ना आप भूलिए।
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