अभी दो-तीन दिन पहले रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम का अचानक निधन हुआ था।
वह भारत-विरोधी रुख और विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते थे।
उन्होंने एक विधेयक का ड्राफ्ट तैयार किया था, जिसमें रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था।
अब उसी विधेयक का संशोधित संस्करण अमेरिकी कांग्रेस में पेश किया गया है।
रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक सांसदों ने इस बिल लिंडसे ग्राहम की राजनीतिक विरासत के रूप में प्रस्तुत किया है।
इस बिल में भारत और चीन सहित पांच देशों पर, जो रूस से तेल खरीदते हैं, 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है।
तर्क यह दिया गया है कि रूस से तेल खरीदकर ये देश उसकी युद्ध अर्थव्यवस्था को वित्तीय मदद पहुंचा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि रूस से गैस खरीदने वाले 15 यूरोपीय देशों को इस प्रस्तावित टैरिफ से छूट दी गई है।
एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए, आप किसी का भाग्य नहीं बदल सकते - चाहे जितना प्रयास करके देख लो। अतः एक सीमा के बाद सब नियति पर छोड़ देना चाहिए, क्योंकि सबके अपने अपने कर्म हैं जिन्हें उनको भोगना ही है। वे इससे बच ही नहीं सकते, आप अत्यधिक हस्तक्षेप से उनकी और अपनी प्रगति रोक सकते।
अबकी घर लौटा तो देखा वह नहीं था—
वही बूढ़ा चौकीदार वृक्ष
जो हमेशा मिलता था घर के दरवाज़े पर तैनात।
पुराने चमड़े का बना उसका शरीर
वही सख़्त जान
झुर्रियोंदार खुरदुरा तना मैला-कुचैला,
राइफ़िल-सी एक सूखी डाल,
एक पगड़ी फूल पत्तीदार,
पाँवों में फटा-पुराना जूता
चरमराता लेकिन अक्खड़ बल-बूता
धूप में बारिश में
गर्मी में सर्दी में
हमेशा चौकन्ना
अपनी ख़ाकी वर्दी में
दूर से ही ललकारता, “कौन?”
मैं जवाब देता, “दोस्त!”
और पल भर को बैठ जाता
उसकी ठंडी छाँव में
दरअसल, शुरू से ही था हमारे अंदेशों में
कहीं एक जानी दुश्मन
कि घर को बचाना है लुटेरों से
शहर को बचाना है नादिरों से
देश को बचाना है देश के दुश्मनों से
बचाना है—
नदियों को नाला हो जाने से
हवा को धुआँ हो जाने से
खाने को ज़हर हो जाने से :
बचाना है—जंगल को मरुस्थल हो जाने से,
बचाना है—मनुष्य को जंगल हो जाने से।
कुँवर नारायण
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नोट: Follow & Notification On
My relationship status with tea:
extremely committed ☕
7 AM - Wake up tea.
9 AM - “Need strength for meetings” tea.
11 AM - The tea I forgot existed but still drank.
1 PM - Lunch companion tea.
3 PM - Emotionally exhausted tea.
5 PM - “This meeting could’ve been an email” tea.
7 PM - Relaxation tea.
9 PM - Tea while pretending to work.
At this point, my blood group might actually be chai.
I am fine.
The tea told me so 😝
[ 💚 for the stunning pics by urtimud.89 ]
देश के जाने-माने अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने कल के Indian Express में भारत के वर्तमान चिंताजनक आर्थिक हालात को लेकर एक विचारोत्तेजक लेख लिखा। बहुत से लोगों ने उस लेख को शेयर भी किया था।
अंग्रेजी में उसका शीर्षक था -
BJP is winning the elections but losing the economy.
हिंदी में -
बीजेपी चुनाव जीत रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था हार रही है।
उस लेख में क्या कहा गया है, यह संक्षेप में जानने के लिए सौरभ द्विवेदी का यह वीडियो देख सकते हैं।
I colloqui con il Primo Ministro Meloni sono stati eccellenti. Il suo impegno nel promuovere l'amicizia tra India e Italia è encomiabile. I legami bilaterali tra le nostre nazioni hanno compiuto progressi significativi in settori come il commercio, lo spazio, la tecnologia e altri ancora. Al fine di approfondire ulteriormente i legami, abbiamo elevato le nostre relazioni a Partenariato Strategico Speciale.
@GiorgiaMeloni
दुनिया के सबसे freest press वाले देश नॉर्वे के सबसे बड़े अखबार में यह कार्टून छापा गया।
इसमें सिर्फ भारत के प्रधानमंत्री का मजाक नहीं उड़ाया गया है, बल्कि भारत को लेकर पश्चिमी दुनिया के भीतर अब भी मौजूद नस्ली और स्टीरियोटाइप सोच की झलक भी दिखती है। आज भी वे भारत को सपेरों का देश दिखाने में गुदगुदी महसूस करते हैं। रंग, संस्कृति और प्रतीकों को लेकर जो छिपा हुआ उपहास है, वह इस कार्टून में साफ नजर आता है।
और दुखद यह है कि हमारे यहां भी एक वर्ग ऐसा है, जिसे लगता है कि गोरी चमड़ी और अंग्रेजी में कही गई हर बात अपने-आप वैध और बौद्धिक हो जाती है। वे हर बार पश्चिमी स्वीकृति और validation की तरफ देखते हैं।
उन्हें भी यह बात अच्छी तरह पता है -और शायद इसी वजह से वे बार-बार इसका फायदा उठाते हैं।
दुनिया के सबसे freest press वाले देश नॉर्वे के सबसे बड़े अखबार में यह कार्टून छापा गया।
इसमें सिर्फ भारत के प्रधानमंत्री का मजाक नहीं उड़ाया गया है, बल्कि भारत को लेकर पश्चिमी दुनिया के भीतर अब भी मौजूद नस्ली और स्टीरियोटाइप सोच की झलक भी दिखती है। आज भी वे भारत को सपेरों का देश दिखाने में गुदगुदी महसूस करते हैं। रंग, संस्कृति और प्रतीकों को लेकर जो छिपा हुआ उपहास है, वह इस कार्टून में साफ नजर आता है।
और दुखद यह है कि हमारे यहां भी एक वर्ग ऐसा है, जिसे लगता है कि गोरी चमड़ी और अंग्रेजी में कही गई हर बात अपने-आप वैध और बौद्धिक हो जाती है। वे हर बार पश्चिमी स्वीकृति और validation की तरफ देखते हैं।
उन्हें भी यह बात अच्छी तरह पता है -और शायद इसी वजह से वे बार-बार इसका फायदा उठाते हैं।
आनैमंगलम ताम्रपत्र (11वीं शताब्दी) अब फिर भारत के पास हैं.
यह धरोहर प्रधानमंत्री मोदी को नीदरलैंड यात्रा के दौरान सौंपी गई.
इसमें तांबे की 30 किलो वजन वाली 24 पट्टिकाएं हैंः 21 बड़ी और 3 छोटी.
प्लेट्स को बांधने वाली कांस्य की अंगूठी पर राजेन्द्र चोल की राजमुद्रा अंकित है. इन्हें सम्राट राजेन्द्र चोल ने जारी किया था.
इनमें उनके पिता राजराजा चोल का आदेश दर्ज है कि उन्होंने नागपट्टिनम के पास आनैमंगलम गांव को बौद्ध विहार के लिए समर्पित किया है.
पट्टिकाओं में संस्कृत और तमिल भाषा में भगवान विष्णु की स्तुति और चोल वंश की वंश परंपरा भी दर्ज है.
इसे डच ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से ले गई थी और 1862 में इसे लीडेन विश्वविद्यालय (Leiden University) को सौंप दिया गया था.
#Anaimangalamplates #CholaEmpire #Leidenplates #Netherlands
नागरिक तैयार रहें! युद्ध सर पर खड़ा है ! बहुत नज़दीक है ! बहुत ही नज़दीक और भयावह!
प्रधानमंत्री के अनुरोध को मज़ाक़ में ना लें
प्रधानमंत्री का अचानक विदेश दौरा यूँ ही नहीं हो रहा ! और ना ट्रंप यूँ ही चीन जा रहा !
आपरेशन सिंदूर 2 में पाकिस्तान उतना कमज़ोर नज़र नहीं आने वाला ! अमेरिका ने हथियारों से भर दिया है पाकिस्तान को !
बांग्लादेश के नेता ऐसे ही बड़े बड़े बोल नही बोल रहे
कुछ बड़ा होने वाला है जल्द ही
यूजीसी पर विधवा विलाप कर रहा बाभन आंखे खोल ले वरना कुम।। त्ते की मौ म एगा।
जिसे हम सदियों से आस्था की आँखों से देखते आए थे, अब विज्ञान ने उसकी पुष्टि कर दी है।
प्रयागराज के संगम को हमेशा से गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के मिलन का स्थान माना गया है। एक त्रिवेणी, जिसमें दो नदियाँ दिखती थीं, और तीसरी सिर्फ़ श्रद्धा में बहती थी।
अब हैदराबाद के CSIR-नेशनल जियोफ़िज़िकल रिसर्च इंस्टिट्यूट (NGRI) के वैज्ञानिकों ने इस पौराणिक मान्यता को एक ठोस वैज्ञानिक आधार दे दिया है। हेलीकॉप्टर से किए गए एयरबोर्न सर्वे और ज़मीन पर की गई कन्फ़र्मेटरी ड्रिलिंग के बाद, डॉ. सुभाष चंद्र की टीम ने पुष्टि की है कि गंगा और यमुना के बीच, ज़मीन से 10 से 15 मीटर नीचे, एक विशाल प्राचीन नदी दबी हुई है। इसकी चौड़ाई, गहराई और आधार स्तर, तीनों गंगा और यमुना के बराबर हैं।
यानी यह कोई छोटी सहायक धारा नहीं थी। यह स्वयं एक मुख्य नदी थी।
विज्ञान इसे "पेलियो रिवर" कहता है। आस्था इसे सरस्वती कहती है। दोनों एक ही सच की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्रयागराज अब सिर्फ़ आस्था का संगम नहीं रहा, यह विज्ञान और परंपरा का भी संगम बन गया है। जहाँ हज़ारों वर्षों की स्मृति, और आज की तकनीक, एक ही कहानी कहती हैं।
माँ सरस्वती कभी सूखी नहीं थीं। बस छिप गई थीं। और आज, फिर से सामने आ रही हैं।
@cleanganganmcg