@mohitbharatiya_ अब जो महाराष्ट्र में हो रहा है, ये साबित करता है कि पार्टी से अलग हुए विधायकों ने कितना सही निर्णय लिया है।अजीब है शासक पक्ष के कार्यकर्ता अराजकता फैला रहे है और अपनी ही पार्टी को निम्नस्तर की साबित करने के लिए कॉम्पटीशन कर रहे है।
@BJP4India@smritiirani कई मुख्यमंत्री अपने राज्यो को छोड़ भ्र्ष्टाचारको ग्लोरीफाई करने आ गए है। अगर राहुल सही है तो,माहौल बिगाड़ने की क्या ज़रूरत? कोंग्रेसका कोई राजकीय स्तर ही नही रह गया ये आजकी कोंग्रेस ने बता दिया। देश को कोरोना से बचाया जा सकता है पर कोंग्रेसी मानसिकता को कोंग्रेस को ही ले डूबेगी
@sambitswaraj कई मुख्यमंत्री अपने राज्योको छोड़ भ्र्ष्टाचारको ग्लोरीफाई करने आ गए है। अगर राहुल सही है तो,माहौल बिगाड़ने की क्या ज़रूरत?कोंग्रेसका कोई राजकीय स्तर ही नही रह गया ये आजकी कोंग्रेस ने बता दिया। देश को कोरोना से बचाया जा सकता है पर कोंग्रेसी मानसिकता को कोंग्रेस को ही ले डूबेगी
@NupurSharmaहरेक प्रवक्ता अपनी पार्टीका प्रतिनिधित्व करता है इसलिए कोई भी पार्टी किसीभी मुद्देको लेक��� पल्ला नहीं ज़ाड सकती। राजनीतिक पार्टियो के फैसले जनहित की भावनाओंको देखके लिए जाते है जो कि, धर्म ,कॉम,रीतिरिवाजों, व्यक्तिगत स्वार्थ जैसे कई पहलू से बढ़कर होते है।
ये नियम मीडिया पे भी लागू होता है ज्यादातर एंकर जजका एटीट्यूड रखते है।अपना द���शहीत अगर दूसरे देशोकि इच्छाओंपे चलने लगे तो लोकतंत्रकी धज्जियां उड़ेगी ही।शासक पक्षका बेबस होना लोकतंत्रके लिए घातक साबित होगा।