#CUETPG2026 परीक्षा में महा-अपारदर्शिता: NTA की दो 'Final Answer Keys' ने खोला गोपनीयता का राज!
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित CUET (PG) - 2026 परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। NTA के अपने आधिकारिक दस्तावेजों (Final Answer Keys) से यह साबित हो चुका है कि एक ही पेपर कोड की परीक्षा बिना किसी सार्वजनिक सूचना के दो अलग-अलग तारीखों पर ली गई।
यह सीधे तौर पर देश के लाखों ईमानदार और मेहनती छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
📄 अकाट्य सबूत और मुख्य विसंगतियां:
1. एक ही विषय (HUQP18), दो अलग-अलग परीक्षा तिथियां:
सबूत 1: NTA की पहली आधिकारिक फाइनल आंसर-की के अनुसार, HUQP18 - Political Science की परीक्षा 11.03.2026 (Shift-1) को आयोजित की गई।
सबूत 2: NTA की ही दूसरी फाइनल आंसर-की के अनुसार, इसी HUQP18 - Political Science की परीक्षा दोबारा 30.03.2026 (Shift-1) को आयोजित की गई।
2. आधिकारिक समय-सीमा (Deadline) का खुला उल्लंघन:
NTA के 14 फरवरी के पब्लिक नोटिस के मुताबिक, CUET (PG) 2026 की परीक्षाएं 14 मार्च से 27 मार्च 2026 के बीच समाप्त होनी थीं। जब अंतिम तिथि 27 मार्च तय थी, तो 30 मार्च को परीक्षा किस नियम के तहत आयोजित की गई?
3. वो 'विशेष छात्र' कौन थे?
NTA को यह देश के सामने स्पष्ट करना होगा कि 30 मार्च को गुप्त रूप से परीक्षा देने वाले वो छात्र कौन थे? 11 मार्च की मुख्य परीक्षा छूटने या दोबारा परीक्षा कराने के पीछे क्या कारण था? उन्हें यह वीआईपी (VIP) ट्रीटमेंट और बैकडोर अवसर किस आधार पर दिया गया?
4. सार्वजनिक सूचना और एडमिट कार्ड को गुप्त क्यों रखा गया?
नियम के अनुसार, परीक्षा से 10 दिन पहले सिटी इंटिमेशन स्लिप और फिर एडमिट कार्ड जारी होते हैं। 30 मार्च की परीक्षा के लिए NTA ने अपनी वेबसाइट पर कोई पब्लिक नोटिस क्यों नहीं डाला? इन चुनिंदा छात्रों के एडमिट कार्ड और सेंटर की जानकारी को पूरी तरह गुप्त क्यों रखा गया?
5. रिजल्ट स्कोर और नॉर्मलाइजेशन (Normalisation) का रहस्य:
जब एक ही विषय (Political Science) का पेपर दो अलग-अलग दिनों (11 मार्च और 30 मार्च) को हुआ, तो उनके अंकों का मिलान कैसे किया गया? क्या दोनों पारियों के प्रश्नपत्रों का कठिनाई स्तर समान था? बिना किसी सार्वजनिक पारदर्शिता के इनका फाइनल स्कोर कार्ड कैसे रिलीज कर दिया गया?
🛑 हमारी स्पष्ट मांगें (Our Demands):
1. NTA (@DG_NTA) इस दोनों आंसर-की के विरोधाभास और 30 मार्च की गुप्त परीक्षा पर तुरंत एक आधिकारिक स्पष्टीकरण (Official Clarification) जारी करे।
2. शिक्षा मंत्रालय (@EduMinOfIndia) इस पूरे मामले की जांच के आदेश दे कि किस अधिकारी की अनुमति से इस परीक्षा को सार्वजनिक डोमेन से छिपाकर रखा गया।
3. 30 मार्च को शामिल होने वाले छात्रों की संख्या और परीक्षा केंद्र का पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए ताकि परीक्षा की शुचिता (Integrity) बहाल हो सके।
पारदर्शिता हमारा अधिकार है और हम इसे लेकर रहेंगे!
ब्रो का नाम : बैकुंठनाथ बेहरा
ब्रो का पद: असिस्टेंट एक्ज़ीक्यूटिव ईंजीनियर, भुवनेश्वर ओढ़िशा
ब्रो ने जॉइन किया : 1999 में जेई 6000 रुपए महिने
ब्रो के यहाँ मिला : 2 करोड़ नगद, 5 मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, 13 प्लॉट
ब्रो थोड़ा लो फील कर रहा है क्यूँकि सब जब्त कर लिया गया।
वरना ब्रो बहुत चार्मिंग दिखता है।
ब्रो के साथ हमारी गहरी संवेदनाएँ हैं🤡
जंतर मंतर पर CJP वालों ने शांति पूर्ण ढंग से प्रदर्शन का आयोजन किया लेकिन कुछ संतरे इस प्रोटेस्ट को भंग करने पहुंचे हैं।
#CJL#cjp_पार्टी#Protest#cjp_पार्टी
पहली बार ऐसा दिखाई पड़ रहा है कि एक आदमी के चलते पूरी शिक्षा व्यवस्था खोखली होती दिख रही है।
Education system से लेकर Exam System तक, सब तमाम सवालों के घेरे में हैं। Special Protest सिर्फ एक आदमी के इस्तीफे को लेकर हो रहे हैं।
मगर ऐसा क्या है कि धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाया जा सकता, चाहे देश का भविष्य दांव पर हो ,युवाओं के भविष्य के चलते!
ये बात एकदम समझ से परे है। हर अति का अंत है और जल्दी ही सरकार को इन्हे हटाना होगा। कोई शिक्षित आदमी ही अब देश की शिक्षा की जिम्मेदारी लेगा।
अगला नंबर रेल मंत्री और वित्तमंत्री का आना है |
विकसित भारत क़ि दिशा देश का युवा तय करेगा |
अभी तक जंतर-मंतर से जितने भी वीडियो फुटेज सामने आए हैं, उनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने वालों की संख्या वैसी तो नहीं दिख रही, जैसी भारत में इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा फॉलोवर वाली पार्टी की होनी चाहिए।
मौके पर मीडिया वाले, पुलिसकर्मी और उत्सुकतावश ताक-झांक करने वाले लोगों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी है। वही थोड़ा माहौल बनाए हुए हैं।
आज धूप भी बहुत है। उम्मीद करते हैं कि कॉक्रोच पार्टी वाले अपनी अपील के हिसाब से sunscreen लगाकर आए होंगे।
खान सर ने चैलेंज किया था कि GDP समझा के दिखाओ। बेचारी फ्लो फ्लो में आ गई और GDP का ग्रोथ रेट लेकर baith गई अपनी प्रोपेगेंडा क्लॉस में।
इनको इतना बेसिक नोलेज नहीं है कि कम्पैरिजन किसका किया जाता है किसका नहीं। तो ये खबरें क्या घंटा बताती होगी ?
इसलिये tv media का भरोसा ख़त्म हुआ |
Media सिर्फ growth % दिखा कर बोल रही है - ‘भारत GDP का boss’
क्या ये आधा सच नहीं बेचा जा रहा?
Agar comparison करना ही है - तो per‑capita income, jobs और poverty ke numbers भी साथ दिखाओ – तब पता चले- boss कौन है?
और किसकी हालत अभी भी struggle कर रही है|
Developing देश का 7–8% growth और developed देश का 2% growth same cheez नहीं होती अंजना मैडम
साधारण सी गणित है जब base chhota हो to % बड़ा दिखेगा |
कुछ दलाल पत्रकार खान सर को अब एक माइनरिटी और नीचा दिखाने के लिए फैज़ल खान शब्द का इस्तेमाल जोरो शोरों से कर रहे हैं और अपनी गांव का दम लगाकर चिल्ला रहे हैं।
कुछ तो दलाल साले कह रहे हैं कि फैज़ल खान के ठिकानों पर छापेमारी! ये BKL खान सर को माफिया बता रहे हैं !
जो माफिया है उनकी तो गांव खुजाते रहते है और जो बेचारा ग़रीब बच्चों को पढ़ाता है , हॉस्पिटल जैसी सार्वजनिक सुविधा देता है , हजारों बच्चों का भविष्य बनाता है। उसको ये साले दो कौड़ी के दलाल आज नाम से बुला कर जेहादी साबित करना चाहते।
असली घोटाले बाजों के यहां छापा मारने की औकात नहीं है। औकात क्या गांव में गूदा ही नहीं है! राजेश मेहता 15.15 लाख करोड़ पेल दिया ! रोज सुबह से शाम तक 100 करोड़ का घोटाला होता हैं तब ये भड़वे पत्तलकर गांव में उंगली डाल के सो जाते हैं !
तब इनकी ईमानदार पत्रकारिता हेरा जाती हैं।
दिल्ली में जब आग लगे तब बिल्डर को जेल भेजो। जब बिल्डिंग बने तब दबा के घूस लो और बिल्डिंग बनने दो जब आग लग जाए तब देले के निपटा लो।
क्या हाल चल रहा हैं देश का ! इन दल्ले भड़वो के कारण ही देश की वास्तविकता नागरिकों तक नहीं पहुंच रही। इसी लिए तो गलत नेता चुना जा रहा हैं बार बार।
#KhanSir #Patna #SupportKhanSir
कुछ दलाल पत्रकार खान सर को अब एक माइनरिटी और नीचा दिखाने के लिए फैज़ल खान शब्द का इस्तेमाल जोरो शोरों से कर रहे हैं और अपनी गांव का दम लगाकर चिल्ला रहे हैं।
कुछ तो दलाल साले कह रहे हैं कि फैज़ल खान के ठिकानों पर छापेमारी! ये BKL खान सर को माफिया बता रहे हैं !
जो माफिया है उनकी तो गांव खुजाते रहते है और जो बेचारा ग़रीब बच्चों को पढ़ाता है , हॉस्पिटल जैसी सार्वजनिक सुविधा देता है , हजारों बच्चों का भविष्य बनाता है। उसको ये साले दो कौड़ी के दलाल आज नाम से बुला कर जेहादी साबित करना चाहते।
असली घोटाले बाजों के यहां छापा मारने की औकात नहीं है। औकात क्या गांव में गूदा ही नहीं है! राजेश मेहता 15.15 लाख करोड़ पेल दिया ! रोज सुबह से शाम तक 100 करोड़ का घोटाला होता हैं तब ये भड़वे पत्तलकर गांव में उंगली डाल के सो जाते हैं !
तब इनकी ईमानदार पत्रकारिता हेरा जाती हैं।
दिल्ली में जब आग लगे तब बिल्डर को जेल भेजो। जब बिल्डिंग बने तब दबा के घूस लो और बिल्डिंग बनने दो जब आग लग जाए तब देले के निपटा लो।
क्या हाल चल रहा हैं देश का ! इन दल्ले भड़वो के कारण ही देश की वास्तविकता नागरिकों तक नहीं पहुंच रही। इसी लिए तो गलत नेता चुना जा रहा हैं बार बार।
#KhanSir #Patna #SupportKhanSir