छात्रों के प्रदर्शन पर एनडीए की पार्टियां इस तरह चुप हैं जैसे देश में कुछ नहीं हो रहा है, जेडीयू और TDP जैसी पार्टियों को कम से कम अपना विचार तो व्यक्त करना चाहिए या गठबंधन ने उस पर भी पाबंदी लगा दी है।
पहले चुनाव आयोग नाम जोड़ने और वोट देने के लिए अभियान चलाता था, ब्रांड अम्बेसडर बनाता था और अब SIR के नाम पर वोटर लिस्ट से नाम काटने और वोट न देने के लिए अभियान चलाता है।
अगर हम स्कूल बनाते तो हाथरस में इतने लोग जमा नहीं होते, अगर हम अस्पताल और डॉ बनाते तो इतने लोग नहीं मरते, लेकिन हम मन्दिर - मस्जिद में लगे रहते हैं जहां से वोट की फसल उगती है।
नितीश कुमार की ऐसी क्या मजबूरी है कि राजद के अपनी ही सरकार के फैसलों का जायज़ा ले रहे हैं कि वह सही थे या ग़लत। लोग आगे के बारे में सोचते हैं और यह पीछे जा रहे हैं।
कल भी किसान वही थे आज भी वही हैं, कल भी उनकी मांग वही थी आज भी वही है, कल भी सरकार वही थी आज भी सरकार वही है, बदले हैं तो केवल जयंत चौधरी जो कल किसानों के साथ थे और आज सरकार के साथ।