इस पोस्ट को सांप्रदायिक दृष्टिकोण से न देखें, बल्कि यह देखें कि हम क्या थे और आज हम क्या बनते जा रहे हैं और देश किस विचारधारा की ओर बढ़ रहा है।
यदि कोई दोषी है, तो पुलिस को निष्पक्ष रूप से अपना कार्य करना चाहिए, और समस्त देशवासियों को उनका पूर्ण सहयोग देना भी चाहिए। लेकिन सांप्रदायिक सोच का समर्थन किसी भी रूप में नहीं किया जा सकता।
राहुल गांधी ने भी देश के बदलते मिजाज को लेकर कहा था कि देश में एक खास किस्म की सोच थोपी जा रही है। उन्होंने सिखों सहित देश के अन्य लोगों का भी उल्लेख किया था। उस समय भाजपा और उसी सांप्रदायिक सोच वाले लोगों ने उनके बयान का विरोध किया। राहुल गांधी पर लगातार अमर्यादित टिप्पणियां की गईं, उन्हें आतंकवादी कहा गया, और जान से मारने की धमकियां तक दी गईं।
उधम सिंह नगर में सिख युवक के साथ हुई घटना ने प्रत्यक्ष रूप से उन लोगों को जवाब दिया है कि अंधभक्तों के साथ-साथ कहीं न कहीं प्रशासन की सोच भी उसी प्रकार की होती जा रही है, जिसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए। धन्यवाद है उधम सिंह नगर के एसएसपी मणिकांत मिश्रा को, जिन्होंने मौके की नजाकत को समझा और सिख युवक की पगड़ी और कड़े पर हाथ डालने वाले रुद्रपुर चौकी इंचार्ज पर कार्रवाई करते हुए उन्हें लाइन हाजिर किया और एक मिसाल कायम की।
आज देश को ऐसे ही पुलिस अधिकारियों की जरूरत है, जो थोपी जा रही सोच के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान में दिए गए अधिकारों के आधार पर निर्णय लेते हुए आरोपी पर कार्रवाई करते हैं।
#RavneetSinghBittu @uttarakhandcops@UdhamSNagarPol@BJP4India@pushkardhami
ये कैसा पाखंड है एक तरफ नागालैंड में गऊ मांस के उपभोग के लिए खुले पत्र निकाले जा रहे है ।
और दूसरी तरफ ये गाय की बछिया का स्वागत कर रहे है।
इस सरकार का असली चेहरा क्या है कौन बताएगा?
#NarendraModi#MamataBanerjee#NirmalaSitharaman
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पिछले दो दिनों से ‘वन्दे भारत’ का शीशा बदलने को रेल-जिहाद बताकर देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा रही थी.
कहाँ गए सारे ज़हरख़ुरान?
आओ बताओ ये क्या है!