To the public: "E20 fuel is safe and fully tested."
To the Supreme Court: "It’s just an experiment, we’ll know results next year."
The government completely lied about E20 readiness. They rushed this rollout to serve vested interests and corporate logistics, leaving millions of everyday vehicle owners to act as guinea pigs in a forced, destructive trial. Complete betrayal of public trust. #EthanolScam
https://t.co/yc1K1mB6xM
Okay, passport, whatever.
But what about voter id? Why is that not proof of citizenship? Only citizens can vote, no? Or was my school civics teacher hallucinating?
And don't tell me it's not proof because there are fakes around. By that logics no document can be proof of anything.
आपका नाम नेहा शौरी था।
वह पंजाब में ड्रग इंस्पेक्टर थीं।
साल 2009 में, जब उनकी तैनाती रोपड़ में थी, उन्होंने बलविंदर सिंह नाम के एक व्यक्ति की केमिस्ट दुकान पर छापा मारा।
जांच के दौरान उन्हें दर्जनों प्रकार की ऐसी गोलियां मिलीं जिनका अक्सर नशे के लिए दुरुपयोग किया जाता था। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, दुकानदार उनके लिए आवश्यक दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं कर सका।
नेहा शौरी ने उसका लाइसेंस रद्द कर दिया।
इसके बाद वह आगे बढ़ गईं और अपना काम करती रहीं।
साल 2016 तक वह मोहाली के पास खरड़ स्थित सरकारी ड्रग प्रयोगशाला में ज़ोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी बन चुकी थीं।
उनकी उम्र मात्र 36 वर्ष थी।
घर पर उनकी एक छोटी बेटी थी। उनके पिता 1971 के युद्ध में लड़ चुके एक सेवानिवृत्त सेना कप्तान थे।
लेकिन जिस व्यक्ति का लाइसेंस उन्होंने रद्द किया था, वह उस घटना को कभी नहीं भूला।
29 मार्च 2019 की सुबह, बलविंदर सिंह अपने लाइसेंसी रिवॉल्वर के साथ खरड़ स्थित उनके कार्यालय में दाखिल हुआ।
उसने कार्यालय के भीतर ही नेहा शौरी को गोली मार दी।
उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी मृत्यु हो गई।
इसके बाद हमलावर ने खुद को भी गोली मार ली और उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस के अनुसार, नेहा शौरी को उसके खिलाफ अदालत में गवाही देनी थी।
उस छापे को दस वर्ष बीत चुके थे।
कानून का पालन करवाने के दस साल बाद, वह व्यक्ति बदला लेने वापस आया।
बाद में उनके पिता ने कहा कि अपनी नौकरी के कारण नेहा वर्षों तक दबाव में रहीं, लेकिन उन्होंने कभी समझौता नहीं किया और कभी पीछे नहीं हटीं।
उन्हें इसलिए मार दिया गया क्योंकि उन्होंने वही किया था जो उनके कर्तव्य ने उनसे करने को कहा था।
यह कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं, बल्कि उन सभी ईमानदार लोगों की है जो अपना फ़र्ज़ निभाने की कीमत चुकाते हैं।
ऐसी सत्यापित कहानियों के लिए फ़ॉलो करें, जिन्हें हर भारतीय को जानना चाहिए।
🇯🇵😂 The most Japanese celebration ever
After Japan’s 2–2 draw against the Netherlands, fans rushed onto Tokyo’s famous Shibuya Crossing to celebrate.
For exactly 40 seconds.
Why? Because the pedestrian light was green.
As soon as it turned red, everyone stopped celebrating and obediently moved back to the sidewalks.
Even in the middle of a spontaneous football celebration, the Japanese still refused to break traffic rules.
Dhruv Jurel does not enter a cricket field the way modern stars do. He arrives like those dependable evening trains in small towns that never make headlines but somehow still carry half the country home.
Maybe that is why people keep missing what he is doing.
Cricket has always loved wicketkeepers who explode. Rishabh Pant changed expectations forever. Audiences now wait for drama from behind the stumps too. Jurel never tried becoming that version of a cricketer. He survived instead. Sometimes survival is less glamorous, but far harder.
When India were collapsing against England in Ranchi 2 years ago, he scored 90 runs that felt older than his age. Later came hundreds for India A, then a Test hundred of his own. Yet even after all that, he still carried the feeling of a substitute actor doing lead roles without his name appearing on the poster.
Rajasthan retained him for 14 crore. Not because he could outshine everyone, but because every unstable side needs one man who can quietly absorb panic.
This season they pushed him to No. 3 to fill Sanju Samson's place, a place he had never truly owned before.
And imagine the timing. He often walked in straight after Sooryavanshi, whose strike rate touched impossible territory. After a bullet train, even a superfast express feels slow to the eye.
But cricket is not played only at the speed crowds demand. It is also played in pauses. In rescue jobs. In choosing not to collapse.
Jurel understood that quicker than anyone in Rajasthan’s dressing room.
CricViz showed how controlled his batting really was. KL Rahul had the tournament’s best false shot percentage at 12.1. Jurel & Heinrich Klaasen followed together at 12.6. Sooryavanshi & Virat Kohli were both at 17.8.
Those numbers explained Rajasthan’s season better than the points table did.
Yashasvi Jaiswal drifted through the year without fully arriving. Riyan Parag carried captaincy but not enough runs. Shimron Hetmyer disappeared almost entirely. Donovan Ferreira could finish innings, but he could not build them.
So the difficult overs kept finding Jurel. He still managed to score 508 runs at 155 strike rate this season.
Even his wicketkeeping carried that old craftsman feel. The stumping of Cameron Green almost felt unfair to physics itself.
Some players become fireworks. Jurel feels more like lantern light. Less visible from far away perhaps, but dependable when darkness properly arrives.
बच्चे के हाथ में स्टेयरिंग देकर रोड पर घूम रहे हैं,
कल कोई हादसा हो गया तो बच्चे से 300 शब्द का निबंध लिखवाकर मामला खत्म कर देंगे।
Parents भी पूरे बेफिक्र हैं।
🤡
1. सर, CBSE ने कॉपी गलत चेक की है।
तुम पाकिस्तानी हो।
2. सर, कॉपी ब्लर है।
तुम डीप स्टेट एजेंट हो।
3. सर, कॉपी इंटरचेंज हो गई है।
तुम फॉरेन फंडेड हो।
4. सर, मेरे भविष्य का सवाल है।
तुम्हारा पोस्ट विपक्षी नेताओं ने क्यों शेयर किया?
5. सर, मार्किंग गलत हुई है।
तुमने सोरोस से पैसा लिए है।
6. सर, हैंडराइटिंग मैच नहीं हो रही।
तुम कॉकरोच पार्टी को फॉलो करते हो।
7. सर, क्या मैं सरकार से कोई असली सवाल पूछ सकता हूँ?
हाँ! Melody इतनी चॉकलेटी क्यों है?
@khurapatibalak3 Same experience. I was also told that if I don't get the gas refilled then they won't service. I said that's fine. I don't need. I called my local person for service and the ACs are working fine. No issues at all.
काश! हमारी पिछली रिपोर्ट्स ,जैसे
•FSSAI के खिलाफ,
•MPLADS में भ्रष्टाचार के खिलाफ,
•जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के खिलाफ ,
•फर्जी सर्टिफिकेट से UPSC निकालने वालों के खिलाफ
•कई IAS IPS और IRS को एक्पोज करने वाली रिपोर्ट्स पर
•ये ठीक करके दिखाओ कैंपेन के दौरान
•अस्पतालों पर एक्पोज पर
•शिक्षा व्यवस्था पर एक्पोज पर
•अधिकारियों के भ्रष्टाचार एक्पोज पर
मीडिया ने 20 प्रतिशत भी लिखा होता तो सिस्टम में बहुत बड़ा बदलाव आ जाता , खैर, हम लगे हैं लगे रहेंगे,
आगे और बहुत बड़े खुलासे करने है।
Taxpayers paid once to paint road dividers black and white.
Then taxpayers paid again to repaint the same dividers orange and white.
Just paint over paint and public money burned twice. 🙏
इतिहास गवाह है कि भारत में किसी नए राजनीतिक मूवमेंट के लिए ऐसा पागलपन बहुत कम देखने को मिला है।
सिर्फ 4 दिन के अंदर, खुद को “दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी” कहने वाली BJP को इंस्टाग्राम पर कॉकरोच जनता पार्टी ने क्रॉस कर दिया।
X पर भी कॉकरोच जनता पार्टी और Cockroach Party of India के कुल फॉलोअर्स 1 लाख से ज्यादा पहुंच चुके हैं।
लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है।
क्योंकि इस मूवमेंट को अगर कोई बर्बाद कर सकता है, तो बाहर वाला नहीं इसके अपने लोग ही कर सकते हैं।
इसलिए अब जरूरी है कि यह आंदोलन सिर्फ ट्रेंड, मीम और गुस्से तक सीमित न रहे।
अब इसे युवाओं के असली मुद्दों पर उतरना होगा ....
पेपर लीक
बेरोजगारी
महंगी शिक्षा
सरकारी स्कूलों की हालत
भर्ती प्रक्रिया में देरी
भ्रष्टाचार
VIP कल्चर
राजनीतिक परिवारवाद
अपराधियों को टिकट देने की परंपरा
अगर यह सच में जनता की पार्टी है, तो इसे जनरल इलेक्शन में उतरकर जनता के सामने अपना मॉडल रखना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि
टिकट बंटवारा पुराने सिस्टम जैसा होगा या सच में नया प्रयोग होगा?
क्या फिर वही बाहुबली, अपराधी, धनबल वाले और सिस्टम के दलाल टिकट पाएंगे?
या इस बार पढ़े-लिखे बेरोजगार, PhD धारक, ईमानदार युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, RTI एक्टिविस्ट, शिक्षक, किसान परिवारों के बच्चे और जमीन से जुड़े लोग चुनाव लड़ेंगे?
यही फैसला करेगा कि यह मूवमेंट इतिहास बनाएगा या सिर्फ एक इंटरनेट ट्रेंड बनकर रह जाएगा।
उनका नाम राजन था।
वह केरल के कालीकट स्थित रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज के अंतिम वर्ष के इंजीनियरिंग छात्र थे। उनके पिता टी. वी. ईचारा वारियर उसी शहर के गवर्नमेंट आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में हिंदी के प्रोफेसर थे।
1 मार्च 1976 की सुबह पुलिस कॉलेज परिसर में आई और राजन को उठाकर ले गई।
देश में इमरजेंसी लगी हुई थी। नागरिक अधिकार निलंबित थे। अदालतें लगभग मौन हो चुकी थीं।
अगले दिन कॉलेज प्रिंसिपल से उनके पिता को यह पता चला।
उन्होंने जिले के हर पुलिस स्टेशन के चक्कर लगाए। किसी ने यह तक नहीं माना कि उनका बेटा पुलिस की हिरासत में है।
उन्होंने सीधे केरल के गृहमंत्री के. करुणाकरण से मुलाकात की।
उन्होंने केरल सरकार के गृह सचिव को तीन बार याचिका भेजी। एक बार भी जवाब या प्राप्ति रसीद नहीं मिली।
उन्होंने भारत के राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री को पत्र लिखा। केरल के हर सांसद को उसकी प्रतियां भेजीं।
कुछ नहीं हुआ।
ईचारा वारियर को तब यह नहीं पता था कि उनके बेटे को कक्कायम के एक अवैध पुलिस यातना शिविर में ले जाया गया था।
वहां उसे यातनाएं दी गईं।
एक क्रूर तरीका इस्तेमाल हुआ जिसे “उरुट्टल” कहा जाता था — इसमें पीड़ित के शरीर पर भारी लकड़ी का लट्ठा घुमाया जाता था।
राजन उन यातनाओं को सह नहीं पाए।
उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने उनके शव को गायब कर दिया। आज तक उनका शरीर नहीं मिला।
1977 में जब इमरजेंसी खत्म हुई, तब ईचारा वारियर ने केरल हाई कोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की।
इमरजेंसी के बाद केरल में यह पहली ऐसी याचिका थी।
न उनके पास कानूनी प्रशिक्षण था, न राजनीतिक ताकत, न पैसा।
अपने बेटे को ढूंढते-ढूंढते वह सब कुछ खर्च कर चुके थे।
धीरे-धीरे अदालत में सच सामने आने लगा।
1978 में अदालत की प्रतिकूल टिप्पणी के बाद के. करुणाकरण को केरल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा।
राजन की मां इस सदमे से मानसिक रूप से टूट गईं। वर्ष 2000 में उनकी मृत्यु हो गई। उन्हें भी कभी यह नहीं पता चला कि उनके बेटे का शव कहां है।
ईचारा वारियर ने अपनी आत्मकथा “Memories of a Father” लिखी, जिसे 2004 में केरल साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
उसकी अंतिम पंक्तियों में उन्होंने लिखा:
“मैं दरवाजा बंद नहीं करता। बारिश को अंदर आने देता हूं, मुझे भिगोने देता हूं। शायद मेरा अदृश्य बेटा इतना तो जान सके कि उसके पिता ने कभी उसके लिए दरवाजा बंद नहीं किया।”
13 अप्रैल 2006 को ईचारा वारियर की मृत्यु हो गई।
वह अपने बेटे का शव कभी नहीं ढूंढ पाए।
मार्च 1976 की एक सुबह राजन को उसके कॉलेज परिसर से उठाया गया था।
उसके बाद वह कभी दिखाई नहीं दिया।
इस कहानी को आगे बढ़ाइए।
कुछ कहानियां गायब नहीं होनी चाहिए।
Narendra Modi’s funda is simple:
– If it’s about duty, Indians should do it
– if it’s about responsibility, Nehru did it
– if it’s about credit, Modi did it
@cromaretail I purchased window croma Ac along with this maintenance plan in April 2024. I was told that my AC will be covered after expiry of one year warranty plan for next 4 years till April 2029. Now my Ac is not working and I have been asked to pay for PCB and gas charges