टेक आजकल का नया एपिसोड आ गया है 🎬
🚗 Tesla की "उड़ने वाली" कार उड़ी या कूदी? उसकी हवाबाज़ी का सच
📱 ₹3 लाख का iPhone Duo गिरा, तो अंदर की स्क्रीन बनवाने में ₹1.5 लाख
🤖 ₹2,000 महीने वाला AI बनाम मुफ़्त वाला: दो असली काम, नतीजा चौंकाने वाला
🥛 6 मिनट में अपना ऐप, बिना कोडिंग, सिर्फ़ हिंदी में लिखकर बना दिया, आप भी बना सकते हैं।
देखिए, और परिवार के ग्रुप में भेजिए 👇
हाइप नहीं, हक़ीक़त। #TechAajkal
आज गाड़ी चलाते-चलाते दशहरे वाली reel बन गई थी। इसमें मैंने 2017 में लिखी अपनी कविता “दैनिक दशानन” सुनाई है। आप भी सुनिए और बताइए कि आप इससे relate कर पाते हैं या नहीं।
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जलकर, भस्म होकर
फिर से खड़ा हो जाता है
नाभि में तुम्हारे तीर का स्वागत करने के लिए
दशानन थक नहीं रहा
इसलिए तुम्हें भी
मर्यादाओं की प्रत्यंचा बार बार चढ़ानी होगी
बार बार भेदना होगा लक्ष्य
कि तुम भी थक नहीं सकते
अब हर रोज़ नये रावण हैं
नयी विजयादशमी है हर रोज़
— सिद्धार्थ • SidTree
Clocks are locks !
घड़ी की सुई को पकड़कर लटके हुए लोग
एक गोलाकार रास्ते पर चलते हुए जीवन जी रहे हैं
जो घड़ी की रफ़्तार है
वही इन लोगों की रफ़्तार है
जो घड़ी की सुइयों की दिशा है
वही इन लोगों की दिशा है
इस सफ़र में
घड़ी की सुइयों से
लम्हे कटते जाते हैं
छोटे होते जाते हैं
फिसलते जाते हैं
क्या वाकई वक़्त हम लोगों की मुठ्ठी में रहता है ?
या फिर घड़ी एक ताला बन जाती है ?
— सिद्धार्थ • SidTree
कैसी लगी? Comment में बताइएगा।
ChatGPT से लिखवाया… तो क्या पकड़े जाएँगे?
ईमेल, होमवर्क, ऑफ़िस रिपोर्ट, आजकल बहुत कुछ AI से लिखा जा रहा है। अब OpenAI ने एलान किया है कि यूरोप में ChatGPT के लिखे टेक्स्ट में एक अदृश्य निशान जोड़ा जाएगा।
पर क्या ये भारत में लागू है? क्या टीचर या बॉस एक बटन दबाकर पकड़ लेंगे? और निशान न मिले, तो क्या ये साबित होता है कि इंसान ने लिखा?
Tech आजकल के इस एपिसोड में पूरी हक़ीक़त। साथ में:
👓 चश्मा आपका… प्राइवेसी मेरी? नॉर्वे का प्रस्ताव
🎙️ आवाज़ का ट्रेडमार्क और कर्नाटक की पहल
⌨️ Google का घूमता कीबोर्ड
▶️ #TechAajkal
आप AI से सबसे ज़्यादा क्या लिखवाते हैं? कमेंट में बताइए।
@viditb yup, I tasted those samosas. unique black masala along with cuboidal potato chunks.
there was one Annapurna Bhandar opposite green park also, it shut down years ago.
नया फ़ोन लेने की सोच रहे हैं? तो पहले ये जान लीजिए।
📱 Apple के सबसे महँगे iPhone की स्क्रीन बना रहा है Samsung, और रिपोर्ट्स के मुताबिक़ हर स्क्रीन पर करीब ₹24,000 कमा रहा है।
💸 AI की वजह से मेमोरी चिप साढ़े चार गुना महँगा हो गया है, और इसका बिल आपके अगले फ़ोन पर आ रहा है।
🤖 AI जवाब नहीं जानता, फिर भी गप्प मार देता है। कितनी बार? आँकड़े देखिए।
🔍 और सबसे काम की बात: सेकंड-हैंड फ़ोन चोरी का तो नहीं, 10 सेकंड में कैसे जाँचें।
AI की वजह से फ़ोन क्यों हो रहे महँगे? टेक आजकल का नया एपिसोड 👇
#TechAajkal #AI
नोट पर मुस्कुराते गाँधी जी को देख रही है #सिद्धार्थकीदूरबीन
करेंसी नोट पर छपे हुए महात्मा गांधी क्या ख़ुद से जुड़े विरोधाभासों पर हँस रहे हैं ?
क्योंकि..
हम इंसान स्वदेशी हैं.. पर हमारी ज़िंदगी को चलाने वाले ब्रांड विदेशी हैं, फ़ोन, लैपटॉप, कार, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, सब में विदेशी ताक़तों का हाथ है।
सामान्य भाषणों में गांधी जी की अहिंसा ट्रेंड करती है जबकि हुक्मरानों की नीतियां किसी न किसी हिंसा को जन्म देती हैं। चुनावी भाषणों में शाब्दिक हिंसा होती है.. तब महात्मा को साइड में बैठा दिया जाता है, बिलकुल उस मूर्ति की तरह जो चौराहे पर धीरे धीरे गंदी होती रहती है और राष्ट्रपिता के अपमान का कारण बनती है
अपना घर साफ रखने वाले.. सारा कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं, मन पर भी यही फॉर्मूला लागू होता है.. मन मैला न रहे इसके लिए क्रोध और सारा कूड़ा किसी दूसरे पर (कमज़ोर पर) फेंक दिया जाता है
अभिमान को नायकों का गुण मान लिया गया है, जितना ज़्यादा घमंड.. उतना ही बड़ा आदमी माना जाएगा
सादगी को मूर्खता माना जाता है.. सार्वजनिक जीवन में कोई संपन्न हो और सादगी से रहे.. तो उसे नाटक घोषित कर देते हैं हम लोग
कोई सहनशील या लिहाज़दार व्यक्ति होगा तो ये मान लिया जाएगा कि उसके पास कोई विकल्प नहीं है.. वर्ना वो भी दुनिया की छाती पर मूंग दलता.. चारों तरफ़ नरक मचाता
सत्य के साथ सबसे बड़ा प्रयोग ये है कि अगर झूठ को आत्मविश्वास के साथ बार बार बोला जाए.. तो वो 50 फीसदी सच लगने लगता है.. बाकी जो कमी रह जाती है वो प्रचार और बाहुबल से पूरी की जाती है।
भ्रष्टाचार को शक्ति और मौक़े का साइड इफ़ेक्ट मान लिया गया है, ये अधिकतर लोगों को बुरा नहीं लगता। भ्रष्टाचारियों के बारे में सुनकर लोग कहते हैं – देखो इसकी क़िस्मत है, हमारी ऐसी क़िस्मत कहाँ !
नेताओं को दांडी यात्रा का नाम सुनकर थकान होने लगती है.. आज की राजनीतिक पदयात्रा पर कैमरे की नज़र न पड़े तो सब मिथ्या है… अपने 78 वर्ष के जीवनकाल में 35 वर्षों के दौरान महात्मा गांधी ने देशभर में क़रीब 79 हज़ार किलोमीटर की पैदल यात्राएँ की थीं। ये दूरी पृथ्वी के दो चक्कर लगाने के बराबर है। बिना कैमरे के इतना जनसंपर्क करना आज के किसी नेता के बस की बात नहीं है।
विरोधाभास ये भी है कि सारे संसार को अहिंसा का सूत्र देने वाले महात्मा के देश में हमें सबसे ज़्यादा पैसा डिफेंस/हथियारों पर खर्च करना पड़ता है।
और जो भजन गांधी जी को पसंद था.. आज की पीढ़ी उसका रीमिक्स भी नहीं सुनना चाहती.. बच्चे कहते हैं ये बड़ा धीमा है.. हालांकि कोई भी गांधी जैसी तेज़ गति से दस मिनट चलने में हाँफ जाएगा।
कुल मिलाकर इस दौर पर कटाक्ष ये है कि
गाँधी जी की मुस्कान से सुसज्जित नोट तो खूब चलते हैं
लेकिन उनके वो उसूल, वो आदर्श, इस दौर में कम चलते हैं
#Doorbeen
क्या AI "ना" सुनकर रुकता है?
इस हफ़्ते जवाब मिला: हमेशा नहीं रुकता।
OpenAI के एक AI एजेंट को ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट पर रोका गया, तो उसने दूसरा रास्ता निकाल लिया। अमेरिका में एक एजेंट ने इंटरनेट पर खुले पड़े पासवर्ड से लॉगिन कर लिया। और इसी बीच Bill Gates ने AI को लेकर बड़ी चेतावनी दी।
टेक आजकल के इस एपिसोड में:
• AI ने ताला कैसे तोड़ा, और Gates की बात में कितना दम है
• एक चर्चित उपन्यास: इंसान ने लिखा या मशीन ने?
• सिनेमा अब चश्मे में
• घर लेने से पहले नेटवर्क की रेटिंग कैसे देखें
सिद्धार्थ के साथ। हाइप नहीं, हक़ीक़त।
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#TechAajkal #SidTree
3 Point Kindness
जिसने अपनी सबसे बड़ी खोज मुफ़्त में दे दी
#Doorbeen#सिद्धार्थकीदूरबीन
अपने प्रयोगों से सबको प्यार होता है, मुझे भी है। क्योंकि उनमें जोखिम होता है, और भविष्य में ले जाने वाला रोमांच भी। टेक्नोलॉजी में मेरी दिलचस्पी हमेशा से रही है...
इसलिए एक साल पहले एक प्रयोग घर के नीचे पार्क हो गया था। मैंने इलेक्ट्रिक स्पोर्ट्स कार को रोज़ की गाड़ी बनाने की कोशिश की। आज वो कोशिश एक साल की हो गई 🙂 14,000 km बाद कह सकता हूँ, प्रयोग सफल रहा। न पेट्रोल धुएँ में उड़ा, न शोर मचा। फ़्यूचर को दौड़ाते हुए, मेडिटेशन जैसी ड्राइविंग में एक साल गुज़र गया।
रात को उसकी पीठ पर मेरे नाम का पहला अक्षर जलता है, S...
पर इस एक साल में जो बात सबसे ज़्यादा छू गई, वो रफ़्तार नहीं थी...
साल था 1959
एक कार कंपनी का इंजीनियर कुछ ऐसा बनाता है, जो आगे चलकर दस लाख से ज़्यादा जानें बचाएगा - थ्री-पॉइंट सीटबेल्ट। उसकी कंपनी चाहती तो इस एक पेटेंट के ज़रिए अरबों कमा सकती थी।
लेकिन उसने पेटेंट को बाँधा नहीं, बहने दिया। एकदम मुफ़्त! दुनिया की हर कार के लिए - प्रतिद्वंद्वियों के लिए भी...!
ज़रा रुककर सोचिए... आपकी ज़िंदगी की सबसे क़ीमती खोज, और आप उसे अपने दुश्मन को भी थमा दें, सिर्फ़ इसलिए कि किसी अजनबी की जान बच जाए।
वो कंपनी Volvo थी। और यह कोई भावुक पल नहीं था - एक सोच थी, एक आदत थी।
1970 से उसकी एक टीम असली सड़क हादसे पढ़ रही है - अब तक 43,000 से ज़्यादा दुर्घटनाओं को गहराई से जान चुकी है। 2019 में पचास साल की वो सारी रिसर्च एक बार फिर मुफ़्त बाँट दी... संदेश वही पुराना - हमारा ज्ञान तुम्हारा भी हो जाए, तो कोई बात नहीं, बस कोई और सड़क पर न मरे।
इसी खुलेपन ने वो पकड़ा जो बाक़ी इंडस्ट्री दशकों तक नहीं देख पाई। क्रैश टेस्ट पुरुष शरीर के हिसाब से होते थे, जबकि गर्दन के झटके यानी whiplash का जोखिम औरतों में ज़्यादा निकला। यहीं से ये विचार निकला कि सुरक्षा तब तक अधूरी है, जब तक वो सबके लिए बराबर न हो। इसके बाद धीरे धीरे गर्दन बचाने वाली सीटें दुनिया की तमाम गाड़ियों तक पहुँचीं।
क्रेन से नाक के बल गाड़ियाँ गिराना, पेड़ या खंभों से लड़ाना, जानवरों की डमी से टक्कर, रोज़ एक गाड़ी क्रैश करना... ये देखना कि गाड़ी का Crumple Zone मिटते-मिटते भी रह जा रहा है या नहीं? कहीं चोट गाड़ी में बैठे इंसानों तक तो नहीं पहुँच रही?
और 2020 में, जब बाक़ी सब रफ़्तार बेच रहे थे, Volvo ने अपनी हर नई गाड़ी की टॉप स्पीड 180 पर बाँध दी। रफ़्तार का लालच और दिखावा बनाम एक ज़िंदगी? इस सवाल के जवाब में उसने बिना झिझक ज़िंदगी चुनी।
तो ये सिर्फ़ कार तकनीक की कहानी नहीं है। ये एक उदार सोच है
आज AI की दौड़ में ज़्यादातर रिसर्च और मॉडल बंद दरवाज़ों के पीछे जा रहे हैं। ऐसे में यह कहानी और ज़रूरी लगती है। अपनी सबसे क़ीमती खोज को बाँट देना मनुष्यता से भरी तकनीक है।
मेरी पार्किंग में जो EC40 खड़ी है, वो इसी सोच की आधुनिक इलेक्ट्रिक पंक्ति है।
अच्छी चीज़ें चुपचाप बताती हैं कि तुम कौन हो।
Volvo ज़ोर से नहीं बोलती... अब तो करीब 100 साल हो गए।
सोचते सोचते कुछ पंक्तियाँ भी निकलीं, जो तस्वीर में हैं।
इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको उनमें घुले हुए वो फीचर्स दिखेंगे,
जो धीरे धीरे दुनिया भर की गाड़ियों तक पहुँचे। तस्वीरों में Poem Card भी है
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किसी गहरे अपने सपने पर, अधिकार छोड़कर बह जाना,
अपनी अलग लकीर खींचना, किसी का साया बन जाना,
हर चोट को खींचकर बाहों में, यूँ कसकर भरना, सह जाना,
मिटते-मिटते भी रह जाना...
वो जो साँस में नुकीला-सा चुभता है,
उसे कम करना... चुप रह जाना
— सिद्धार्थ / SidTree