Maulana from Kerala is directing Muslim men to lock women inside homes with no public life.
Where is muh feminist & women rights champion Rahul Gandhi?
This is what happens when feminist try to show their modern feminism in an Islamic country.
That's why Rahul Gandhi and his chamchas will never go to an Islamic country to show their feminism.
इनको बिहार की भाषाएँ बोलनी नहीं आती, फिर भी सप्रेम खाना खिलाकर विदा किया। काश बिहारवासी भी पहले इनसे पूछ पाते कि क्या तुमको हमारी भाषाएँ बोलनी आती हैं?
कंगना रनौत इसीलिए लोगों को बुरी लगती हैं क्योंकि वो बिना फिल्टर बोलती हैं।
कॉकरोच की चुम्मी तो नहीं लोगे ना? उसको तो चप्पल से ही मारोगे। हां, बटरफ्लाई हो तो उसको ले सकते हो।
कंगना संसद की सबसे शक्तिशाली नारी आवाज हैं, ये आपको आज भले समझ न आए लेकिन भविष्य में आप भी मानोगे।
मोदी और बीजेपी से नफरत पालने का इनाम किराड़ी की जनता को अपने ही बेडरूम में तैरते सीवर के पानी के रूप में मिल रहा है। दस साल से आम आदमी पार्टी की फर्जी राजनीति को ढो रहे लोगों को अब जाकर समझ आ रहा है कि अंधविरोध की कीमत क्या होती है। जब भी काम की बात करो तो इनका बेशर्म विधायक एलजी के नाम का ठीकरा फोड़कर भाग खड़ा होता है। जो कौम मुफ्त की राजनीति और मोदी द्वेष में वोट देती है उसकी बस्तियां ऐसे ही बदबूदार गटर में तब्दील होती हैं।
छात्रों की आवाज़ बनने का नाटक खत्म!
CJP के आशुतोष रांका ने कैमरे पर कुबूल कर लिया कि उनका असली मकसद निकाय चुनावों में कांग्रेस का एजेंडा चलाना है।
जो लोग इन्हें निष्पक्ष "छात्र नेता" मानते थे, उनको अब इनकी सच्चाई भी जान लेनी चाहिए।
ऐसे मतलबी लोगों से सावधान रहे।
✍🏻देहरादून की पेट्रोलियम यूनिवर्सिटी से सामने आया यह वीडियो बेहद चिंताजनक है।
वीडियो में एक छात्र बार-बार कह रहा है कि उसका एकादशी का व्रत है और यह व्रत उसकी मां ने रखवाया है। इसके बावजूद कुछ छात्र रैगिंग के नाम पर उसके साथ दुर्व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं।
कॉलेज शिक्षा और व्यक्तित्व निर्माण का स्थान होता है, डर, अपमान और हिंसा का नहीं। किसी छात्र की धार्मिक आस्था, भावनाओं या व्यक्तिगत सम्मान का मजाक उड़ाना और उसे प्रताड़ित करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
रैगिंग को "मजाक" या "परंपरा" कहकर सही नहीं ठहराया जा सकता। यह सीधे-सीधे उत्पीड़न है। मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी छात्र को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
20 साल जेल में काटने वाले विष्णु तिवारी की कहानी सिर्फ एक व्यक्ति की त्रासदी नहीं, व्यवस्था के लिए सवाल है।
2000 में उन पर बलात्कार और SC/ST Act के तहत मामला दर्ज हुआ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाद में FIR में 3 दिन की देरी, चोटों का अभाव और जबरन संबंध की पुष्टि करने वाले चिकित्सीय साक्ष्य न होने जैसे पहलुओं को देखते हुए उन्हें 2021 में बरी कर दिया। कोर्ट ने पक्षों के बीच भूमि विवाद का भी उल्लेख किया।
विष्णु जब जेल से बाहर निकले, तब तक माता-पिता और दो भाइयों की मृत्यु हो चुकी थी, घर-जमीन बिक चुकी थी और 20 साल का जीवन लौटाया नहीं जा सकता था।
कानून कमजोरों की रक्षा के लिए होना चाहिए लेकिन अगर उसका दुरुपयोग किसी निर्दोष की जिंदगी के 20 साल छीन ले, तो उस नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
कानून पर सवाल नहीं, उसके दुरुपयोग और न्याय में हुई देरी पर सवाल है।
#StopMisuseOfSCSTAct