बहन @Bhincharpooja की पोस्ट देखते ही जैसे पता चला फोर्टिस अस्पताल में बहन कानी देवी जो रक्त संक्रमण से लड़ रही है,तत्काल निकल कर सहायता पहुंचाई।
आशा करता हूँ जल्द ही बहन स्वस्थ हो ✨💯
#Donate_SaveLives#रक्तदान
@LSinghShekhawat वसुंधरा जी, दिया जी, राज्यवर्धन जी , राव राजेंद्र ,महिमा कुमारी, गजेंद्र सिंह खींवसर/शेखावत, राजेंद्र सिंह,भैरो सिंह
14-26 तक पावर गेम में रखा है आपके समाज को इस बात का धन्यवाद नहीं बनता
आबादी के हिसाब से सही सीटों पर टिकट दिया जाता है आपको
Entered netra toll (nagaur-jodhpur road) on 19:25 and leave at 19:31
When asked to relief the toll tax according to rules they denied and acted rudely
Due to their carelessness more than 10 ordinary vehicles suffered delay
@NHAI_Official@nitin_gadkari
@JeetuBesla राजस्थान के मूलतः गुंजल और जोशी को कांग्रेस राज्यसभा में भेजे तो हाड़ौती और मेवाड़ में कांग्रेस आने वाले समय में लोकसभा में मजबूत होगी और सीट भी निकल सकती है लगातार 2 बार बड़े मार्जिन से हारी हैं
इनका नाम अतुल सुभाष था।
34 साल। बेंगलुरु में प्राइवेट कंपनी में डिप्टी जनरल मैनेजर। एक बेटे के पिता व्योम।
उन्होंने सिस्टम से उम्मीद नहीं की कि कोई उनकी बात सुनेगा।
उन्होंने हर चीज़ खुद रिकॉर्ड की।
उन पर एक साथ 9 केस दर्ज हुए 498A, घरेलू हिंसा, मेंटेनेंस, कस्टडी।
हर सुनवाई के लिए उन्हें बेंगलुरु से जौनपुर तक 1700 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था।
4 साल में 40 बार वही सफर।
120 कोर्ट हियरिंग्स।
उन्होंने आरोप लगाया कि केस वापस लेने के लिए 3 करोड़ रुपये मांगे गए।
अपने ही बेटे से मिलने के लिए 30 लाख रुपये अलग से।
अपने वीडियो में उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक फैमिली कोर्ट जज ने अनुकूल आदेश के लिए 5 लाख रुपये मांगे।
9 दिसंबर 2024 को उन्होंने बेंगलुरु के फ्लैट में आत्महत्या कर ली।
पीछे छोड़ा — 24 पन्नों का नोट और 81 मिनट का वीडियो।
हर तारीख। हर केस नंबर। हर यात्रा। हर रकम।
सब कुछ रिकॉर्ड किया हुआ।
मरने से पहले उन्होंने अपने परिवार से सिर्फ एक बात कही:
“मेरी अस्थियाँ गंगा में तब तक विसर्जित मत करना, जब तक न्याय न मिले।”
उनकी मां सुप्रीम कोर्ट गईं, अपने पोते से मिलने की अनुमति मांगने।
उन्हें कहा गया — “आप बच्चे के लिए stranger हैं।”
फिर सुनवाई आई।
जज छुट्टी पर थे।
एक साल की तारीख मिल गई।
इसी बीच, ट्विशा शर्मा केस में सिर्फ 11 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया।
बार काउंसिल ने घंटों में कार्रवाई कर दी।
AIIMS की मेडिकल टीम चार्टर्ड प्लेन से भेजी गई।
11 दिन में पूरा सिस्टम दौड़ पड़ा।
अतुल सुभाष 81 मिनट का रिकॉर्डेड सबूत छोड़ गए थे।
उन्हें मिला एक साल का इंतज़ार।
उनकी अस्थियाँ आज भी गंगा का इंतज़ार कर रही हैं।
उनका बेटा व्योम अब 6 साल का है।
अतुल सुभाष को न्याय मिलना चाहिए।
अगर रिकॉर्डेड सबूत, दस्तावेज़ और एक इंसान की आखिरी पुकार भी सिस्टम को नहीं जगा सकती, तो फिर आम आदमी आखिर जाए कहाँ?
During the RCB vs KKR clash, a fan literally jumped the fence and sprinted onto the field just to meet Virat kohli 😭❣️
Virat reaction along with the umpire expression was pure gold😭
संघर्ष और सेवा की मिसाल भैराराम बैड़ा जी को जन्मदिन मुबारक
हर जरूरतमंद के लिए आगे आना आपकी पहचान है
समाज सेवा के क्षेत्र में आपका कार्य प्रेरक है
जीवन खुशियों से भरा रहे। |
#HBD_भैराराम_बैड़ा@JATbera1