दिल्ली में चल रही कांग्रेसी नौटंकी पर दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने करारा सवाल उठाया।
उनके अनुसार:
“यह पूरा हंगामा मतदाताओं की तरफ से नहीं हो रहा है। यह उन राजनीतिक दलों की तरफ से हो रहा है, जो चुनाव नहीं जीत पाए।”
😎 अगर किसी मतदाता को शिकायत है, तो उसके समाधान की व्यवस्था मौजूद है। मतदाता सूची से नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो चुनाव आयोग के समक्ष शिकायत की जा सकती है।
लेकिन SIR का ही विरोध करना और यह कहना कि SIR नहीं होना चाहिए, इसका मकसद सिर्फ चुनाव आयोग को अपना काम करने से रोकना है।
SIR चुनाव आयोग को संसद की ओर से सौंपा गया कानूनी दायित्व है। आयोग को समय-समय पर मतदाता सूची संशोधित करनी है, मृत व्यक्तियों के नाम हटाने हैं और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने हैं।
कानून का उद्देश्य यह भी सुनिश्चित करना है कि भारत का गैर-नागरिक मतदान का अधिकार प्राप्त न करे।
जब शिकायत के लिए व्यवस्था है और मतदाता सूची का संशोधन कानूनी दायित्व है, तो SIR से इतनी परेशानी क्यों?
आखिर मतदाता सूची की शुद्धता से समस्या है या फिर चुनाव आयोग को अपना काम करने देने से? 😎
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देश के लिए जान देने वालों से विनम्र निवेदन है कि देश के लिए जान उसी समय दो जब आक्रमण शुरू हो रहा है।आक्रमणकारीधीरे-धीरे कब्जा कर रहे हैं। जब वह कब्जा करने के नजदीक पहुंच जाएंगे तब आपकी जान देना भी बेकार जाएगा।और उनका कब्जा हो जाएगा। समझदार क इसारा काफी है।
Ajit Doval once said:
🗣️ “Hindustanis have been defeated by their very own people.
> Biggest pain and lesson from history is not that foreigners INVADED us
But that our OWN PEOPLE stood against us when we needed them most."
42 पूर्व जजों ने चुनाव आयोग के समर्थन में लिखा पत्र।
42 पूर्व जजों ने खुले पत्र में चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य सांविधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिशों पर गंभीर चिंता जताई।
उन्होंने बिना सबूत वोट चोरी जैसे आरोपों और संस्थाओं को चोर या समझौता कर चुकी बताने पर सवाल उठाए।
पूर्व जजों ने कहा कि आलोचना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन बदनामी नहीं।
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वर्ष 2022-2023 में श्री हनुमान जन्मभूमि से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया का शुभारंभ हुआ था। विधिक प्रक्रिया में पूर्ण विश्वास रखते हुए इस प्रकरण को निरंतर प्रतिबद्धता एवं धैर्य के साथ आगे बढ़ाया गया। आज, दीर्घकालीन न्यायिक प्रक्रिया के उपरांत, इस मामले में न्यायिक विजय प्राप्त हुई है।
मुद्दा SC/ST या जनरल कैटेगरी का नहीं है। मुद्दा यह है कि जब किसी कानून में अत्यधिक व्यापक शक्तियाँ प्रदान की जाती हैं, तो उनके दुरुपयोग की संभावना भी बनी रहती है। इसलिए हमारा केवल इतना कहना है कि ऐसे प्रावधानों के प्रयोग और उनके संभावित दुरुपयोग की निष्पक्ष जाँच एवं समीक्षा की जानी चाहिए।
Full Video Link = https://t.co/XkptcOkfM5…
सवर्ण आयोग के लिए वकील साहब और हिन्दू समाज एकजुट होकर आवाज उठाइये💪💪
हमे भी एक अपना आयोग चाहिए,जिंसके जरिये हम अपने ऊपर हो रहे अन्याय, अत्याचार के लिए मांग रख सके💪💪
क्या आप मेरी बातों से सहमत हैं, तो कमेंट में yes लिखे✍️🙏
#UGC_काला_कानून_वापस_लो
_*विपक्षी प्रोपेगेंडाबाजों पर चल गया बुलडोजर—*_
_*ECI के खिलाफ विपक्षी प्रोपेगेंडा की CEC ने ही निकाल दी हवा!*_
*सवाल-1 :* क्या SIR में 13 करोड़ वोट काटे?
*जवाब~*
• 13 करोड़ लोगों के वोट नहीं कटे।
• 2 करोड़ 80 लाख मतदाता मृत।
• 3 करोड़ वोटर गैरहाजिर मिले।
• 6.3 करोड़ वोटर ने जगह बदल ली।
• 1 करोड़ वोटर डूप्लीकेट मिले।
*सवाल-2 :* क्या Form-6 में बदलाव किया गया?
*जवाब~*
• Form-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया।
• Form-6 और घोषणा फार्म एक साथ जोड़ा गया।
• 2 बार OTP प्रोसेस से छूट मिली।
• CEC - दोनों कमीश्नर की सहमति से SIR का आदेश।
• SC ने SIR आदेश की वैद्यता को सही ठहराया था।
सिर्फ 3 मिनट में समझिए विपक्षी अफवाह की पूरी ABCD.
क्या संसद के LOP यह नहीं जानते हैं की किसी इलेक्शन कमिश्नर को हटाने की पावर भारतवर्ष की सरकार या सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं है।उनके हटाने का तरीका संविधान में दिया है। वह है पार्लियामेंट में इंपिचमेंट मोशन। वह न करके यह तमाशा क्यों कर रहे हैं।क्यों समय व देश का धन बर्बाद कर रहे हैं
क्या संसद के LOP यह नहीं जानते हैं की किसी इलेक्शन कमिश्नर को हटाने की पावर भारतवर्ष की सरकार या सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं है।उनके हटाने का तरीका संविधान में दिया है। वह है पार्लियामेंट में इंपिचमेंट मोशन। वह न करके यह तमाशा क्यों कर रहे हैं।क्यों समय व देश का धन बर्बाद कर रहे हैं
@PNRai1 All these activists are wicked foreign funded Anti Nationals. That's why the uproar on FCRA... Today it's the Cockroach Janata Party aided by Opposition parties.... It's a seditious venomous mafia...
पहले शिक्षा के नाम पर और अब SIR और चीफ इलेक्शन कमिश्नर के खिलाफ दिल्ली और अन्य जगहों पर जो तोड़फोड़ और हंगामा किया जा रहा है, उस पर होने वाले खर्च का वहां कौन कर रहा है? भीड़ जुटाने के लिए पैसे दिए जा रहे हैं, उन्हें दिन भर खाना खिलाने का पैसा कौन दे रहा है? क्या कोई नेता दे रहा है? क्या कोई पार्टी दे रही है?नहीं।
यह वही विदेशी ताकतें हैं जो कभी नहीं चाहते कि भारत में शांति हो, स्थिरता हो, और विकास हो।
मशहूर वकील हरीश साल्वे ने मेघा पाटेकर का उदाहरण दिया कि किस तरह से सौराष्ट्र के तीन करोड़ लोगों को प्यासा मारने के लिए मेघा पाटेकर को मोहरा बनाया गया था। सालों तक नर्मदा बचाओ आंदोलन के नाम पर हंगामा किया गया। आदिवासियों का कोई भला तो नहीं हुआ लेकिन मेरा पाटकर मुंबई के आलीशान बंगले में बजे से दिन गुजर रही है।
अच्छी बात यह रही कि उसे समय के सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों का साथ दिया। इन विदेशी भाड़े के टट्टुओं का नहीं।
एंटिसिपेटरी बेल में कोर्ट आरोपी का जाँच में सहयोग, पिछला आचरण, क्रिमिनल रिकॉर्ड और आरोप की गंभीरता देखती है। लेकिन अगर एंटिसिपेटरी बेल का अधिकार ही खत्म कर दिया जाए, तो झूठे मामलों में लोगों के अंदर आक्रोश बढ़ सकता है। इसलिए SC/ST Act के मामलों में कम से कम प्रारंभिक जाँच होनी चाहिए।
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A 2 minute extract from Arnab's Podcast with S.Gurumurthy on Lal Bahadur Shastri ji
What a great man he was ..but we were taught only about charkhe wala budd@