समझ समझ के समझ को समझो,
समझ समझना भी एक समझ हे।
समझ समझ के जो ना समझे,
मेरी समझ मे वह नासमझ है ।
नासमझ! नासमझ ना समझ मुझे ।
मेरी समझ तो तेरी समझ की समझ से बाहर है ।
@RailMadad@RailMinIndia A big Thank You @RailMadad@RailMinIndia For making my day, I would have reached 6 AM in night but now you think where I will go in the night of 6 am, so you will reach morning by 12 pm/ 1 pm. You are just 6 hr early in taking 48 hrs
Kudos to you for making this a memorable trip
@RailMadad@RailMinIndia Bro, you’re crawling like a turtle 🐢 & still have the audacity to take a Superfast charge, Train 22358 has covered only 1045 km in 24 hrs.
At this speed, I’ll definitely take more than 48 hrs to reach Mumbai.
Is this what Railways consider “Superfast”?
@RailMadad@RailMinIndia Bro, you’re crawling like a turtle 🐢 & still have the audacity to take a Superfast charge, Train 22358 has covered only 1045 km in 24 hrs.
At this speed, I’ll definitely take more than 48 hrs to reach Mumbai.
Is this what Railways consider “Superfast”?
@RailMinIndia
PNR 6408174344 | Train 22358, Class 3E
3 people are travelling, including 62-year-old senior citizen. She has been allotted an Upper Berth.
Requesting @RailMadad to review the berth allocation and provide a Lower Berth for the senior citizen passenger
Please help
@RailMinIndia
PNR 6408174344 | Train 22358, Class 3E
3 people are travelling, including 62-year-old senior citizen. She has been allotted an Upper Berth.
Requesting @RailMadad to review the berth allocation and provide a Lower Berth for the senior citizen passenger
Please help
Greetings to everyone on the very special occasion of Nav Samvatsar. May everyone be blessed with infinite happiness, success and good health. I pray that this coming new year further strengthens the spirit of courage, self-confidence and service in everyone’s lives. May it also add renewed momentum to our collective efforts towards nation-building.
A player from Kerala, a spinner from Karnataka, a hitter from Bihar, a smasher from Punjab...stars from Mumbai…
Gujju, Punjabi, Tamil…
Sikh, Muslim, Hindu, Christian…
Different languages, different roots, yet united by one jersey.
What a team. What a victory.
Bharat Mata ki Jai!
यदि ईरान इसी तरह सऊदी अरब और यूएई पर बम गिराता है या उनके रास्ते रोकता है,
तो भारत को भी “युद्ध मे उतरने” पर विचार कर लेना चाहिए क्योंकि अब हमारे हित सीधे रूप से प्रभावित होते है।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर दिया है, अब इस रास्ते कोई जहाज सऊदी नहीं पहुँच सकता।
यूएई समेत शेष गल्फ तो पूरा ही ब्लॉक हो चुका है, सऊदी जाने का रास्ता पश्चिम से खुला है मगर वहाँ यमन मे ईरान ने हूती आतंकवादी बैठा रखे है।
भारत के पास 75 दिनों का तेल रिजर्व है इसलिये समस्या आयात करने की नहीं है, सबसे बड़ी समस्या है कि निर्यात कैसे करें?
सऊदी अरब को हम 12 अरब डॉलर का सामान बेचते है, UAE के साथ तो ये निर्यात 2.5 गुना है। ये रकम बड़ी है और इन देशो पर बमबारी नहीं रूकती तो हमारे हित सीधे रूप से प्रभावित होते है।
इसलिये यदि भारत को 10 अरब डॉलर से अधिक नुकसान होने लगे तो फिर ईरान पर आक्रमण करने मे कोई बुराई नहीं है। 700 अरब डॉलर से ज्यादा तो हमारा विदेशी मुद्रा भंडार है, 5-7 अरब डॉलर फूक देने से यदि व्यापारिक सहायता हो जाती है तो नुकसान नहीं है।
अपना कोई पुराना खटारा जहाज ओमान की खाड़ी मे भेजो, उसमे किसी अपराधी को पायलट बनाकर बैठा दो। ईरान तबाह करेगा और आप इसे एक्ट ऑफ़ वॉर घोषित कर सकते हो।
होर्मूज वाला इलाका खाली चाहिए, ईरान की नौसेना उतनी शक्तिशाली नहीं है। यदि भारतीय सेना उसे नष्ट कर दे और तेहरान मे ईरानी सेना के मुख्य अड्डों पर हमला करें तो हमारा हित पूरा हो सकता है।
ये बात सही है कि इसके बाद ईरान से हमारे संबंध पूरी तरह बिगड़ जाएंगे, लेकिन ईरान की वज़ह से अरबो डॉलर का निर्यात प्रभावित हो रहा है और ये नुकसान वाकई बहुत बड़ा है। जितने का हमें चाबहार पोर्ट नहीं पड़ा उससे 8-10 गुना तो ईरान बेमतलब मे हमारा नुकसान करवा रहा है।
भारत आक्रमण भले ना करें मगर यदि भारत मे ईरान के विरुद्ध एक माहौल भी तैयार हो जाए तो ईरान पर दबाव बन जाएगा। मोदी सरकार का वोटर बेस इस युद्ध मे ईरान के विरुद्ध है मगर समस्या ये है कि अरबो को भी वो मजहब के चश्मे से देख रहा है। भारत की जनता अमेरिका को विजयी देखना चाहती है लेकिन भारत की भूमिका पर किसी का कोई मन नहीं।
अमेरिका युद्ध तो जीत लेगा इसमें कोई संदेह नहीं है, अमेरिका सामरिक रूप से आज तक पराजित हुआ भी नहीं वो अंतिम राजनीतिक बिसात पर मार खाता है। अफगानिस्तान, इराक और लीबिया को बर्बाद करना उसका लक्ष्य था उसमे वो सफल हुआ मगर लोकतंत्र स्थापित ना कर सका वो पराजय थी।
ईरान मे भी पूर्ण विश्वास है कि अमेरिका जमीनी तबाही तो कर देगा, ईरान को फिर से सैन्य रूप से खड़ा होने मे दशकों का समय लगेगा। तब तक तो हमारा IMEC कोरिडोर भागने लगेगा, लेकिन अमेरिका कही ना कही टाइम पास भी करेगा। ये जो नए हथियारों का जखीरा बनाया है उसकी टेस्टिंग अमेरिका ईरान मे करेगा।
ईरान के लोगो के पास दो मौके है या तो खुद विद्रोह कर दे या अमेरिका के केमिकल और जैविक हथियारों का प्रकोप झेले। ईरान की महिला फुटबाल टीम ने उनका राष्ट्रगान नहीं गाया यह दर्शाता है कि जनता आजादी चाहती है। यदि ऐसा है तो भारत को भविष्य की चिंता भी नहीं करनी चाहिए।
हमारी चिंता इस समय सऊदी अरब, कुवैत और कतर की है। अमेरिका के सैन्य अड्डों पर नहीं बल्कि व्यापारिक स्थलों पर भी ईरान बम गिरा रहा है, ऐसे मे भारत बहुत अधिक समय तक खुद को युद्ध से दूर नहीं रख सकता। ईरान और पाकिस्तान का दक्षिणी समुद्र एक ही है, लगे हाथो एक युद्ध अभ्यास भी हो जायेगा।
ये बहुत गंभीर निर्णय होगा मगर इससे भारत की दशकों की विदेश नीति बदल जायेगी, अमेरिका वैसे भी ईरान को खंडहर बनाकर ही जायेगा। ऐसे मे थोड़ा शक्ति परिक्षण हो जाये और अरब देशो के साथ व्यापार निरंतर बना रहे, इस विकल्प पर भारत को विचार करना चाहिए।
इसके विपरीत सोचे तो भी एक विकल्प है कि जैसा चल रहा है चलने दे और अफ्रीका के कुछ शांत देशो मे व्यापार की गुंजाईश देखे। वैसे भी ऐसे दबावो मे हम बड़े फैसले अच्छे लेते है, ट्रम्प चाचा से अनुरोध है ईरान का जो करना है जल्दी करो और IMEC कोरिडोर का रास्ता खुलवा दो। हम 2025 का झगड़ा भूल आपको पहले वाला चाचा मान लेंगे 😀.
सभी देशवासियों को होली की अनंत शुभकामनाएं। रंग और उमंग से भरा यह त्योहार सबके लिए खुशियों की बहार लेकर आए। हर किसी के जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता के रंगों की बौछार हो, यही कामना है।
To,
The Prime Minister’s Office,
All Chief Ministers,
And All Responsible Authorities of India.
I am writing this open letter with deep pain and anger. Again and again, our country faces terrible incidents where innocent people lose their lives. Bridges collapse, roads are full of dangerous potholes, trains meet accidents, fires break out, and public places become unsafe. Every time, families are destroyed in seconds.
These are not just accidents. Many times, these tragedies happen because of government failure, poor maintenance, corruption, and negligence. When safety is ignored, people pay the price with their lives.
What hurts even more is what happens after. Authorities give speeches, promise inquiries, and then hand over a small compensation of 2 lakh or 5 lakh. This is not justice. This is an insult to the families who have lost their loved ones forever.
How can a human life be valued so cheaply?
The government has huge funds. Thousands of crores are spent on advertisements, and marketing. But when a citizen dies because of unsafe roads, weak bridges, or railway failures, the family is given only a few lakhs. This feels like humiliation, not support.
I request you strongly to understand that money can never replace a life. But proper compensation is necessary to show accountability and seriousness. If a death happens due to government responsibility, compensation should be at least 1 to 2 crores. Only then will the system feel the weight of its failure.
Along with this, we need real action. Officials and contractors responsible must be punished. Safety audits must be honest. Public money must be used for protection, not publicity.
Indian citizens are not numbers. They are not files to be closed with small cheques. The first duty of any government is to protect its people. When it fails, it must take full responsibility.
This letter is written with respect, but also with firmness. The people of India deserve safety, dignity, and justice.
Respectfully,
Nalini Unagar
जय श्री राम!
आज ही की शुभ तिथि पर दो वर्ष पूर्व 500 वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई और मोदी जी ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की।
प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगाँठ की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।
प्रभु श्रीराम के आदर्शों और जीवन मूल्यों की पुनर्स्थापना का प्रतीक यह मंदिर धर्म की रक्षा के लिए संघर्ष, सांस्कृतिक स्वाभिमान के लिए त्याग व विरासतों के संरक्षण के लिए बलिदान की अप्रतिम प्रेरणा बना रहेगा।
इस पवित्र अवसर पर श्री राम जन्मभूमि आंदोलन के सभी बलिदानियों को नमन करता हूँ।
🚨सभी यात्रियों,छात्रों और आम नागरिकों से ज़ोरदार अपील 🚨
आज पूरे दिन एक ही आवाज़ में ट्वीट करें, रीट्वीट करें, शेयर करें।
हैशटैग #TatkalTicketBooking को Trend No. 1 तक पहुँचाना है।
यह सिर्फ टिकट की लड़ाई नहीं,
यह आम आदमी के समय, पैसे और सम्मान की लड़ाई है।
अपने ट्वीट में ये मुद्दे ज़रूर लिखें 👇
▪️ OTP नहीं आता
▪️ Refund महीनों तक अटका
▪️ टिकट में चोरी और धांधली
▪️ Waiting में “Convenience Fee” के नाम पर लूट
▪️ ट्रेनें घंटों लेट
▪️ ट्रेनों की भारी कमी
▪️ Software से Tatkal booking
▪️ Counter पर खुलेआम Black Marketing
▪️ Telegram पर Ticket Selling के नाम पर Fraud
सबसे बड़ा खेल 👇 (इसे ज़रूर लिखें)
• ठीक 10:00 AM और 11:00 AM
• Transaction Error
• Auto Logout
• Unable to Process Request
• Transaction Dropped
हर दिन वही समय, वही एरर — ये तकनीकी खराबी नहीं, सिस्टम की सेटिंग है।
एजेंटों को टिकट मिल जाता है,
आम यात्री को सिर्फ Error Message।
आज अगर नहीं बोले, तो कल Tatkal सिर्फ दलालों का होगा।
टैग करें 👇
@KHURAPATT@UpscScreenshots@khurpenchh@Khurpench_@YTKDIndia
आरंभ हो चुका है। अब रुकना नहीं है। प्रचंड आप सब करेंगे।
🔥 #TatkalTicketBooking 🔥
🔥 खुरपेंच टीम की सीधी और बहुत जरूरी मांग 🔥
@IRCTCofficial और @RailMinIndia से — अब देश का यात्री एडजस्टमेंट नहीं, पूरा हिसाब मांगेगा।
अब “कोहरा,तकनीकी कारण,ऑपरेशनल इश्यू” नहीं, जवाबदेही चलेगी।
🚨 रेल देरी = सिस्टम की नाकामी-
👉🏻हर दिन लाखों यात्री
• ऑफिस, इंटरव्यू, परीक्षा, इलाज, फ्लाइट
• शादी, अंतिम संस्कार, इमरजेंसी
सब कुछ खोते हैं —
लेकिन रेलवे कहता है: “हम असुविधा के लिए खेद प्रकट करते हैं”
> खेद से पेट नहीं भरता
> खेद से नौकरी नहीं बचती
> खेद से मरीज नहीं बचता
♦️जनता की 7 गैर-समझौतावादी मांगें ♦️
1️⃣ 3 घंटे से ज़्यादा लेट = 100% ऑटो रिफंड
> कोई फॉर्म नहीं, कोई क्लेम नहीं, कोई मेल नहीं
> सिस्टम अपने आप पैसा लौटाए।
2️⃣ मुआवज़ा = अगली यात्रा का फ्री कन्फर्म टिकट
> देरी रेलवे की, नुकसान यात्री का — ये लूट बंद होनी चाहिए।
3️⃣ देरी की जानकारी कम से कम 4 घंटे पहले
• SMS
• App Notification
• WhatsApp / IVR
ताकि यात्री -
> फ्लाइट रीशेड्यूल कर सके,
> मीटिंग बचा सके
> वैकल्पिक साधन चुन सके
अचानक प्लेटफॉर्म पर “लेट है” बताना = धोखाधड़ी।
4️⃣ समय पर न पहुँचाने की हालत में वैकल्पिक व्यवस्था
• AC बस
• टैक्सी
• या दूसरी ट्रेन में प्राथमिकता
👉🏻 अगर एयरलाइंस दे सकती हैं, तो रेलवे क्यों नहीं?
5️⃣ हर महीने पब्लिक ‘Rail Delay Report’-
रूट-वाइज़, ट्रेन-वाइज़ डेटा सार्वजनिक हो —
• कितनी ट्रेन लेट
• कितनी बार
• औसत देरी
• जिम्मेदार ज़ोन/डिवीजन
ताकि
👉 PR नहीं, परफॉर्मेंस दिखे
👉 झूठे दावे पकड़े जाएँ।
6️⃣ कन्फर्म टिकट न मिलने से हुए नुकसान का क्लेम
• होटल बुकिंग
• कैब
• इवेंट / परीक्षा / इंटरव्यू
👉🏻 “वेटिंग थी” कहकर रेलवे हाथ नहीं झाड़ सकता।
जब पैसा लिया है, जिम्मेदारी भी लेनी होगी।
7️⃣ हर शिकायत का जवाब 24 घंटे में
• यूनिक ट्रैकिंग नंबर
• फिक्स टाइमलाइन
• जिम्मेदार अफसर का नाम
Auto-reply = जवाब नहीं | Template = समाधान नहीं
‼️कड़वा सच -
• Vande Bharat भी लेट
• Premium ट्रेन भी लेट
• यात्री हमेशा मजबूर
👉🏻रेलवे “विश्वस्तरीय” नहीं,
बिना जवाबदेही वाला विशाल सिस्टम बन चुका है।
🔥 अब साफ़ संदेश 🔥
> रेल सिर्फ पटरी पर नहीं, जवाबदेही पर चलेगी
> टिकट का पैसा लिया है तो समय और सम्मान भी देना होगा
> यात्री वोट बैंक नहीं, हिस्सेदार है
>> खुरपेंच टीम अब रुकेगी नहीं।⚠️
#RailwayAccountability
#IndianRailways
बिहार...महागठबंधन क्यों हारा??
कई कारण हैं.. मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं..
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NDA के जितने भी घटक हैं.. उनके नेताओं के लिए पॉलिटिक्स फुल टाइम जॉब है... पार्ट टाइम शगल नहीं.. भाजपा वाले एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चुनाव मे जाते हैं.. 24x7 चुनावी मोड मे रहते हैं..
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बीच चुनाव मे 59 दिन के लिए राहुल गाँधी गायब हो गया.. कहाँ गया... क्यों गया.. किस काम से गया.. उसके अलावा किसी को नहीं पता...पब्लिक देख नहीं रही क्या??
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मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित ना किये जाने पर 20 दिन तक तेजस्वी यादव मुँह फुला कर घर पर बैठ गया..
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NDA के सभी घटकों मे आपसी तालमेल कहीं बेहतर था.. सीटों की बाँट को लेकर अगर कोई तकरार थी भी तो वो बंद कमरे मे सुलटा दी गई..जबकि महागठबंधन की जूतमपैजार सड़क पर आ गई...नामांकन पूरा हो जाने तक क्लियर नहीं था कि कौन कितनी सीट्स पर लड़ रहा है... 11 सीट्स पर फ्रेंडली फाइट की नौबत आ गई जो कि सभी गँवाई..
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बिहार के बारे ने जीरो ज्ञान वाले संजय यादव और अल्लावारु को कमान सौपना..
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लगातार देश के बहुसंख्यक समाज की आस्थाओं पर चोट... बिहार में आप छठ मईया पर टिप्पणी कर जनता से समर्थन की उम्मीद करते हैं तो आप मूर्ख हैं.
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भारतीय राजनीति के इतिहास में मोदी और नितीश... केवल दो ही नेता ऐसे हुए हैं.. जो महिला सेंट्रिक पॉलिटिक्स करते हैं.. इनके अलावा एक भी नहीं हुआ आजतक... आधी आबादी को आप इग्नोर नहीं कर सकते...
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बार बार नितीश को अशक्त और बीमाऱ कहना... इसे जनता ने खुद को ललकारने के तौर पर लिया..
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तेजस्वी कोई वास्तविक मुद्दा उठाये तो राहुल उस पर हग दे...अबे तुम कितने फिट हो उससे पब्लिक को क्या मतलब... पागलों जैसी हरकतें.. कभी मछली पकड़ने जाता है... कभी पानी में छलांग मारता है... गाँव देहात में हँसते हैं लोग ऐसी हरकतों पर... मउगा कहते हैं...
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राजनैतिक समझ का अभाव... लालू लाख करप्ट था.. गुंडा था पर ज़मीन से उठकर आया था... जनता की नब्ज़ समझता था...उसके बच्चों को इस बाबत कुछ समझ नहीं.. राहुल गाँधी की तो खैर किसी भी विषय पर समझ नहीं...
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बार बार वही बातें दोहराना जिनको जनता अन्य राज्यों में पहले ही नकार चुकी है.. ED CBI.. चुनाव आयोग..वोट चोर.... अडानी अम्बानी.... बार बार उन्ही को दोहराओगे तो जनता खिन्न होती जाती है और ये खिन्नता बढ़ती ही जाती है... राहुल गाँधी को देख तो अब पब्लिक इतना इरिटेट हो चुकी है कि थपड़ियाने का मन करता है.. वो क्या बोलता है उसे खुद नहीं पता..भंगेड़ी की तरह कैसेट रिपीट होती रहती है उसकी... मतदाता सूची से नाम कटना और फर्जी मतदान का मुद्दा इतना रिपीट हो गया कि लोग पक चुके हैं अब. ऐसे आरोपों के लिए मजबूत प्रमाण होने चाहिए... ये आरोप लगाने के आधे घंटे में नंगे हो जाते हैं पर हर बार वही बेवकूफी... जनता के बीच विश्वसनीयता जीरो हो चुकी है...
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अपने कोर वोटर्स को मूर्ख समझना... मुस्लिमों के दृष्टिकोण से ये तर्क सही है कि जीतने के लिए हमारे वोट्स तो चाहिए लेकिन पद देने के नाम पर बस दरी बिछवानी है.. यही बात लालू परिवार और करीबी सर्कल से बाहर के यादवों पर भी लागू होती है..उन्हें भी ये आजतक मूर्ख ही बनाते रहे हैं... वो केवल तुम्हारे लिए लट्ठ बजाने के लिए है क्या?? यादव और मुस्लिम वोट्स का एक बड़ा हिस्सा इनके हाथ से निकल चुका है..
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लालू राज का बैगेज... जंगलराज को लोग आज भी नहीं भूले... लालू की शक्ल तक से नफरत करते हैं लोग..
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टीवी डिबेट्स में इनके प्रवक्ता.... मुँह खोलते ही पब्लिक का हाथ सीधे चप्पल पर जाता है... इतने इरिटेटिंग प्रवक्ता आजतक कभी किसी दल के पास नहीं रहे.. ना किसी विषय का ज्ञान.. ना तर्क.. ना तमीज..
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बेतुके वादे... मसलन दो करोड़ से ज़्यादा नौकरियां.. पिछले चुनाव में तेजस्वी ने दस लाख नौकरियों का वादा किया था..जब बाद में लोगों ने नौकरी मांगी तो कह दिया गया कि हमने कहा था कि अगर मुख्यमंत्री बने तो नौकरी देंगे... बाद ने नितीश ने पांच लाख नौकरियां दी... उसका श्रेय इस चुनाव में तेजस्वी ने लेने की कोशिश की लेकिन जनता बेवकूफ नहीं है...
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मेहनत की कमी... मोदी और नितीश ने इस उम्र में भी जितनी मेहनत की उसके दस प्रतिशत भी राहुल और तेजस्वी ने नहीं की....
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कई फैक्टर्स हैं... गिनाते ना बने... अगर ये अब भी ना सुधरे तो आगे इनके लिए सफलता और भी दुर्गम होती जायेगी....