अध्यापक भर्ती लेवल 1 में फिर से 11 सवाल डिलीट 🤔🤔🤔🤔🤔🤔🤔
पिछली भर्ती में बोर्ड ने यही सब किया जिसके लिए दो साल लड़ाई लड़ी बोर्ड को गलती स्वीकार करनी पड़ी पुनः रिजल्ट आया लगभग 3000 युवाओं को बाद में नौकरी देनी पड़ी और ये आश्वासन दिया गया की भविष्य में ये सब नहीं होगा लेकिन पुनः ये सब पीड़ा देना हजारों अभ्यर्थियों के साथ जानबूझकर अन्याय करना है ।।
वर्षो की मेहनत और इस प्रकार से उस पर पानी फेरना बिल्कुल भी न्याय संगत नहीं है ।।
ऐसे एक्सपर्ट जिनसे 150 सवाल सही नहीं बनते ये संभव नहीं है कुछ और ही मामला है वरना इस युग में इस प्रकार की गलती बार बार करना समझ से बाहर है
सिस्टम और सरकार को इन सब से कोई मतलब नहीं लेकिन मेहनती पढ़ने वाले बच्चे के सपने को इसकी आड़ में तोड़ना बहुत पीड़ा दायक है ।।
41 सवाल डिलीट करने आप महान नहीं बन सकते 😢😢😢😢😢😢😢😢
@RajCMO@BhajanlalBjp
यदि आप यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल मेहनत ही सफलता का निर्धारण करती है, तो मुझे लगता है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है।
राजस्थान में विशेष रूप से कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में अक्सर 10 12 तक प्रश्न बाद में डिलीट कर दिए जाते हैं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह है कि यदि वे प्रश्न गलत थे, तो उन्हें प्रश्नपत्र में शामिल ही क्यों किया गया? और यदि शामिल किए गए, तो प्रारंभ में उन्हें सही मानकर परीक्षा का हिस्सा क्यों बनाया गया?
जब अभ्यर्थी आपत्तियाँ दर्ज कराते हैं, तब उन प्रश्नों को हटा दिया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जिन्होंने उन प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे। एक गलत प्रश्न-निर्माण की कीमत वे बच्चे चुकाते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से तैयारी की थी।
कई बार यही डिलीट हुए प्रश्न किसी अभ्यर्थी को चयन सूची से बाहर कर देते हैं। यह केवल अंक खोने की बात नहीं होती, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके वर्षों की मेहनत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। जो अभ्यर्थी इस पीड़ा से गुज़रा है, वही समझ सकता है कि अंतिम चयन से कुछ अंकों से बाहर हो जाना कितना दर्द देता है।
आख़िर आयोग की गलती ईमानदार बच्चा क्यों भुगते
डॉ धीर सिंह धाभाई
#rsmmb #thirdgradeteacher #result
यदि आप यह मानते हैं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल मेहनत ही सफलता का निर्धारण करती है, तो मुझे लगता है कि यह पूरी सच्चाई नहीं है।
राजस्थान में विशेष रूप से कर्मचारी चयन बोर्ड द्वारा आयोजित कई परीक्षाओं में अक्सर 10 12 तक प्रश्न बाद में डिलीट कर दिए जाते हैं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल यह है कि यदि वे प्रश्न गलत थे, तो उन्हें प्रश्नपत्र में शामिल ही क्यों किया गया? और यदि शामिल किए गए, तो प्रारंभ में उन्हें सही मानकर परीक्षा का हिस्सा क्यों बनाया गया?
जब अभ्यर्थी आपत्तियाँ दर्ज कराते हैं, तब उन प्रश्नों को हटा दिया जाता है। लेकिन इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यार्थियों को होता है जिन्होंने उन प्रश्नों के सही उत्तर दिए थे। एक गलत प्रश्न-निर्माण की कीमत वे बच्चे चुकाते हैं, जिन्होंने पूरी ईमानदारी और मेहनत से तैयारी की थी।
कई बार यही डिलीट हुए प्रश्न किसी अभ्यर्थी को चयन सूची से बाहर कर देते हैं। यह केवल अंक खोने की बात नहीं होती, बल्कि उसके आत्मविश्वास, उसके सपनों और उसके वर्षों की मेहनत पर भी गहरा प्रभाव डालती है। जो अभ्यर्थी इस पीड़ा से गुज़रा है, वही समझ सकता है कि अंतिम चयन से कुछ अंकों से बाहर हो जाना कितना दर्द देता है।
आख़िर आयोग की गलती ईमानदार बच्चा क्यों भुगते
डॉ धीर सिंह धाभाई
#rsmmb #thirdgradeteacher #result
तैयारी के समय जब जब मैं ओवरथिंकिंग करता या किसी कारणवश चिंतित होता तो मेरे लिए सबसे बड़े मोटीवेशन का सोर्स यही वीडियो होता था....!!
अनगिनत बार सुना है मैने यह वीडियो 🧘😊
#राधे_राधे#GoodMorning
चार वांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाण।
ता ऊपर सुल्तान है, मत चुके चौहान।।
आज बाड़मेर स्थित श्री मल्लीनाथ राजपूत महाविद्यालय छात्रावास में वीरता, शौर्य, स्वाभिमान एवं राष्ट्रभक्ति के प्रतीक सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी की 860वीं जयंती पर सर्व समाज द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में सहभागिता कर उनके अद्वितीय व्यक्तित्व एवं कृतित्व को नमन किया।
इस पावन अवसर पर पोकरण विधायक श्री @PratapPuriJi का सानिध्य प्राप्त हुआ। साथ ही गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शंकरसिंह वाघेला जी, रावत श्री त्रिभुवन सिंह जी, जयपुर ग्रामीण सांसद श्री @RaoRajendraBJP जी, विधायकगण, जनप्रतिनिधिगण एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी का साहस, पराक्रम, मातृभूमि के प्रति समर्पण एवं स्वाभिमान आज भी हम सभी को राष्ट्रसेवा और समाजहित के लिए प्रेरित करता है। उनके आदर्श सदैव आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
सम्राट पृथ्वीराज चौहान जी को कोटिशः नमन।
@BJP4Rajasthan@BJP4India@RajGovOfficial@RajCMO@BhajanlalBjp@madanrrathore@DIPRRajasthan
गिरल में KGF स्टाइल का महिमामंडन, पिस्टल रीलबाज़ी और मज़दूर की मौत पर उठते सवाल , आखिर शांति किस कीमत पर?
_ बाड़मेर एसपी, कलक्टर को पिस्टल रीलबाजी क्यों रास आई , क्या लाइसेंस निरस्तीकरण की प्रक्रिया नहीं होगी ? AI की आड़ में बंदूकवाद कैसे चलेगा ?
#दुर्गसिंह_राजपुरोहित
बाड़मेर के गिरल क्षेत्र में पिछले दिनों जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए, उन्होंने एक गंभीर बहस को जन्म दिया है। सवाल केवल एक पिस्टल, एक रील या एक शक्ति प्रदर्शन का नहीं है, बल्कि उस माहौल का है जहाँ भय को प्रभाव का पर्याय बना दिया जाता है।
हथियार का लाइसेंस कानून व्यवस्था के दायरे में आत्मरक्षा और वैध उपयोग के लिए दिया जाता है, न कि सार्वजनिक मंचों पर शक्ति प्रदर्शन, रौब झाड़ने या लोगों को मानसिक दबाव में लेने के लिए। जब कोई व्यक्ति या समूह खुलेआम हथियारों का प्रदर्शन करता है, तो संदेश केवल वीडियो तक सीमित नहीं रहता, वह समाज के कमजोर वर्गों तक भय के रूप में पहुँचता है।
गिरल में मजदूरों और जनप्रतिनिधियों को कथित रूप से डराने-धमकाने के आरोपों के बीच एक मजदूर की मृत्यु ने पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है। यह कहना जांच एजेंसियों का काम है कि मौत के कारण क्या थे, लेकिन यह सवाल उठाना पूरी तरह जायज़ है कि क्या भय, दबाव और तनाव का वातावरण इस त्रासदी से जुड़ा हुआ था?
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या बाड़मेर में कानून का राज चलेगा या प्रभाव, पूंजी और हथियारों का प्रदर्शन ही नई व्यवस्था बनेगा? यदि कोई व्यक्ति स्वयं को इतना शक्तिशाली समझने लगे कि प्रशासन, पुलिस और कानून उसके सामने गौण दिखाई दें, तो यह किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है।
आज आवश्यकता किसी पक्ष विशेष का बचाव करने की नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की है। यदि किसी भी स्तर पर भय पैदा करने, धमकाने या कानून के दुरुपयोग की भूमिका रही है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। और यदि नहीं रही, तो वह भी स्पष्ट रूप से सामने आना चाहिए।
लोकतंत्र में सम्मान संविधान से मिलता है, बंदूक से नहीं। प्रभाव सेवा से बनता है, भय से नहीं। और विकास का रास्ता मजदूरों के विश्वास से निकलता है, उनके मन में डर पैदा करके नहीं।
गिरल की घटना केवल एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं है, यह उस सोच की परीक्षा है जिसमें तय होना है कि राजस्थान कानून से चलेगा या कथित "KGF संस्कृति" से।
सवाल अभी भी वही है आखिर शांति किस कीमत पर खरीदी जाएगी, और उसकी कीमत क्या एक मजदूर की जान हो सकती है?
@PoliceRajasthan@RajCMO
थर्ड ग्रेड DPC होने के बाद ही नई अध्यापक भर्ती शुरू होगी ,सरकार लगातार मजबूती से पैरवी कर रही है और हर संभव प्रयास जारी है जिससे dpc हो सके और अच्छे पदों पर आने वाली अध्यापक भर्ती परीक्षा का आयोजन हो सके ।।।
इस साल रीट पात्रता का आयोजन किया जाएगा पात्रता तक dpc इश्यू सॉल्व हो जाएगा ।।
नोट- अभी तक 2000 पदों पर वित्तीय स्वीकृत मिल चुकी है ।।
आने वाली भर्ती अच्छे पदों पर होनी चाहिय ये माँग सब मिलकर बुलंद करते रहेंगे जिससे राहत मिल सके ।
@RajCMO@BhajanlalBjp@madandilawar
EWS आरक्षण सरलीकरण के परिणामस्वरूप राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा-2024 में 255+ अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हेतु चयन संभव हुआ, जिनमें से 125+ अभ्यर्थियों का अंतिम रूप से चयन हुआ।
आर्थिक पिछड़ा वर्ग के हित में लिए गए इस दूरदर्शी एवं जनहितकारी निर्णय के लिए पूर्व मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत जी का हार्दिक आभार।
@ashokgehlot51
ये असम के गुवाहाटी में IPL मैच नहीं धुल रहा है बल्कि राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की नाकामी और भ्रष्टाचार का पाप धुल रहा है।
राजस्थान जैसे राज्य की IPL टीम है, रणजी टीम है, लेकिन हालात इतने खराब है कि वहां के IPL मैच पिछले कई सालों से असम के गुवाहाटी में आयोजित कराने पड़ रहे हैं
कारण: राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन को नेताओं ने अपने निकम्मे पुत्रों को पद देने का अखाड़ा बना लिया है।